मनोवैज्ञानिक विकार | Class 12 Psychology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

मनोवैज्ञानिक विकार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मनोवैज्ञानिक विकार from Class 12 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मनोवैज्ञानिक विकारों को समझने के लिए उनके ऐतिहासिक दृष्टिकोण को जानना आवश्यक है। प्राचीन काल में अपसामान्य व्यवहार को अलौकिक शक्तियों, जैसे भूत-प्रेत या शैतान का प्रभाव माना जाता था, जिसके लिए झाड़-फूँक और प्रार्थना का सहारा लिया जाता था। जैविक उपागम के अनुसार, शरीर और मस्तिष्क की असामान्यता से विकार उत्पन्न होते हैं। प्राचीन ग्रीक दार्शनिकों ने चार वृत्तियों (रक्त, काला पित्त, पीला पित्त, श्लेष्मा) के असंतुलन को विकार का कारण माना। मध्य युग में भूत विद्या और अंधविश्वासों ने पुनः महत्व प्राप्त किया। पुनर्जागरण काल में वैज्ञानिक दृष्टिकोण का विकास हुआ और मानसिक रोगों के प्रति सहानुभूति बढ़ी। आधुनिक काल में जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों के समन्वय से विकारों को समझने का प्रयास किया जाता है।
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🧪 Activity: अध्ययन करें कि विभिन्न कालों में मानसिक विकारों को कैसे समझा गया और उपचार के तरीके क्या थे।
🔗 Connection: यह अनुभाग मनोवैज्ञानिक विकारों के वर्गीकरण की ओर ले जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अवसाद और उन्माद से संबंधित लक्षणों की पहचान कीजिए।
अवसाद (डिप्रेशन) के लक्षणों में उदासी, निराशा, ऊर्जा की कमी, आत्मग्लानि, नींद और भूख में परिवर्तन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, और आत्महत्या के विचार शामिल हैं। उन्माद (मेनिया) के लक्षणों में अत्यधिक उत्साह, ऊर्जा, आत्मविश्वास, कम नींद की आवश्यकता, विचारों की तेज़ी, और आवेगपूर्ण व्यवहार शामिल होते हैं।
2. अतिक्रियाशील वाले बच्चों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
अतिक्रियाशील बच्चे अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, वे भावनात्मक रूप से तीव्र प्रतिक्रिया देते हैं, आसानी से चिढ़ जाते हैं, और सामाजिक परिस्थितियों में असहज महसूस कर सकते हैं। वे अक्सर चिंता, भय या आक्रामकता दिखाते हैं। उनकी प्रतिक्रिया सामान्य से अधिक होती है और वे तनावपूर्ण परिस्थितियों में असामान्य व्यवहार कर सकते हैं।
3. मद्य जैसे मादक द्रव्य के सेवन के क्या परिणाम होते हैं ?
मद्यपान के परिणामों में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक प्रभाव शामिल हैं। शारीरिक प्रभावों में लीवर रोग, हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र की क्षति, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। मानसिक प्रभावों में स्मृति ह्रास, निर्णय क्षमता में कमी, अवसाद और चिंता शामिल हैं। सामाजिक प्रभावों में पारिवारिक कलह, कार्यस्थल पर समस्या, और सामाजिक अलगाव शामिल हैं।
4. क्या विकृत शरीर प्रतिमा भोजन विकार को जन्म दे सकती है? इसके विभिन्न रूपों का वर्गीकरण कीजिए।
हाँ, विकृत शरीर प्रतिमा भोजन विकारों का एक प्रमुख कारण हो सकती है। व्यक्ति अपने शरीर को वास्तविकता से अलग और नकारात्मक रूप में देखता है, जिससे भोजन संबंधी अस्वस्थ व्यवहार उत्पन्न होते हैं। भोजन विकारों के प्रमुख रूप हैं: (i) अनार्क्सिया नर्वोसा (भोजन का अत्यधिक परहेज), (ii) बुलिमिया नर्वोसा (अत्यधिक भोजन करना और उसके बाद उल्टी करना), और (iii) बिंज ईटिंग डिसऑर्डर (अत्यधिक मात्रा में भोजन करना)।
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