मनोवैज्ञानिक विकार | Class 12 Psychology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

मनोवैज्ञानिक विकार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मनोवैज्ञानिक विकार from Class 12 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
अपसामान्यता तथा मनोवैज्ञानिक विकार के संप्रत्यय
अपसामान्यता का अर्थ है सामान्य से हटकर व्यवहार करना। मनोवैज्ञानिक विकारों को समझने के लिए यह जानना आवश्यक है कि कौन-सा व्यवहार सामान्य है और कौन-सा असामान्य। इसके लिए चार मापदंड महत्वपूर्ण हैं: विसामान्यता (सामाजिक मानकों से विचलन), कष्ट (व्यक्ति या दूसरों के लिए कष्टप्रद होना), अपक्रिया (दैनिक जीवन में कार्य करने में बाधा) और खतरा (व्यक्ति या समाज के लिए जोखिम)। सामाजिक मानकों के अनुसार व्यवहार का मूल्यांकन किया जाता है, जो संस्कृति, इतिहास और सामाजिक मूल्यों पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, आक्रामक व्यवहार कुछ समाजों में स्वीकार्य हो सकता है जबकि अन्य में अपसामान्य। इसके अलावा, दुरनुकूलक व्यवहार का मापदंड भी महत्वपूर्ण है, जिसमें देखा जाता है कि व्यवहार व्यक्ति के कल्याण और विकास में बाधक तो नहीं। मनोवैज्ञानिक विकारों को समझने के लिए जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोणों का समन्वय आवश्यक है।
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🧪 Activity: अपने मित्रों, माता-पिता के मित्र और पड़ोसी से मानसिक विकारों के बारे में उनकी समझ और अनुभव पूछें और कक्षा में साझा करें।
🔗 Connection: यह अनुभाग मनोवैज्ञानिक विकारों के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की ओर बढ़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अवसाद और उन्माद से संबंधित लक्षणों की पहचान कीजिए।
अवसाद (डिप्रेशन) के लक्षणों में उदासी, निराशा, ऊर्जा की कमी, आत्मग्लानि, नींद और भूख में परिवर्तन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, और आत्महत्या के विचार शामिल हैं। उन्माद (मेनिया) के लक्षणों में अत्यधिक उत्साह, ऊर्जा, आत्मविश्वास, कम नींद की आवश्यकता, विचारों की तेज़ी, और आवेगपूर्ण व्यवहार शामिल होते हैं।
2. अतिक्रियाशील वाले बच्चों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
अतिक्रियाशील बच्चे अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, वे भावनात्मक रूप से तीव्र प्रतिक्रिया देते हैं, आसानी से चिढ़ जाते हैं, और सामाजिक परिस्थितियों में असहज महसूस कर सकते हैं। वे अक्सर चिंता, भय या आक्रामकता दिखाते हैं। उनकी प्रतिक्रिया सामान्य से अधिक होती है और वे तनावपूर्ण परिस्थितियों में असामान्य व्यवहार कर सकते हैं।
3. मद्य जैसे मादक द्रव्य के सेवन के क्या परिणाम होते हैं ?
मद्यपान के परिणामों में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक प्रभाव शामिल हैं। शारीरिक प्रभावों में लीवर रोग, हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र की क्षति, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। मानसिक प्रभावों में स्मृति ह्रास, निर्णय क्षमता में कमी, अवसाद और चिंता शामिल हैं। सामाजिक प्रभावों में पारिवारिक कलह, कार्यस्थल पर समस्या, और सामाजिक अलगाव शामिल हैं।
4. क्या विकृत शरीर प्रतिमा भोजन विकार को जन्म दे सकती है? इसके विभिन्न रूपों का वर्गीकरण कीजिए।
हाँ, विकृत शरीर प्रतिमा भोजन विकारों का एक प्रमुख कारण हो सकती है। व्यक्ति अपने शरीर को वास्तविकता से अलग और नकारात्मक रूप में देखता है, जिससे भोजन संबंधी अस्वस्थ व्यवहार उत्पन्न होते हैं। भोजन विकारों के प्रमुख रूप हैं: (i) अनार्क्सिया नर्वोसा (भोजन का अत्यधिक परहेज), (ii) बुलिमिया नर्वोसा (अत्यधिक भोजन करना और उसके बाद उल्टी करना), और (iii) बिंज ईटिंग डिसऑर्डर (अत्यधिक मात्रा में भोजन करना)।
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