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मनोवैज्ञानिक विकार | Class 12 Psychology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

मनोवैज्ञानिक विकार | Class 12 Psychology Notes

मनोवैज्ञानिक विकार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of मनोवैज्ञानिक विकार from Class 12 Psychology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

प्रमुख मनोवैज्ञानिक विकार

इस अनुभाग में मनोवैज्ञानिक विकारों के प्रमुख प्रकारों का वर्णन किया गया है। दुष्टिचता विकार में सामान्यीकृत दुष्टिचता, आतंक विकार, दुर्भीति और वियोगज दुष्टिचता विकार शामिल हैं। मनोग्रस्ति-बाध्यता विकार में व्यक्ति अनियंत्रित विचारों और क्रियाओं से ग्रसित होता है। अभिघात और दबावकारक विकारों में PTSD और समायोजन विकार आते हैं। कायिक अभिलक्षण विकारों में बिना शारीरिक कारण के शारीरिक लक्षण होते हैं। विच्छेदी विकारों में चेतना और पहचान में परिवर्तन होता है। अवसादी विकार में नकारात्मक भाव और व्यवहार परिवर्तन होते हैं। द्विध्रुवीय विकार में अवसाद और उन्माद के दौर आते हैं। मनोविदलता वर्णक्रम विकार में सोच, भावना और व्यवहार में गंभीर बाधा होती है। तंत्रिकाजन्य विकार बाल्यावस्था में शुरू होते हैं, जैसे ADHD और स्वलीनता वर्णक्रम विकार। आचरण विकारों में विरुद्धक अवज्ञाकारी और आचरण विकार शामिल हैं। पोषण विकारों में क्षुधा-अभाव और क्षुधतिशयता प्रमुख हैं। मादक द्रव्य से संबंधित विकारों में शराब, हेरोइन और कोकीन का दुरुपयोग होता है।

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🧪 Activity: क्रियाकलाप 4.4: जीवन की घटनाओं के कारण उत्पन्न उदासी और निराशा को सूचीबद्ध करें और कक्षा में साझा करें।

🔗 Connection: यह अनुभाग मनोवैज्ञानिक विकारों के सामाजिक प्रभाव और उपचार की ओर ले जाता है।

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कायिक अभिलक्षण तथा संबंधित विकारविच्छेदी विकार
कायिक अभिलक्षण विकार – व्यक्ति किसी चिकित्सा दशा की अनुपस्थिति में शरीर-संबंधित अभिलक्षणों को अनुभव करता है (या यदि चिकित्सा दशा उपस्थित है तो यह उतना गंभीर नहीं लगता है जैसाकि अभिलक्षणों में दिखाई देता है।)विच्छेदी स्मृतिलोप – व्यक्ति अपनी महत्वपूर्ण, व्यक्तिगत सूचनाएँ, जो अक्सर दबावपूर्ण और अभिघातज सूचना से संबंधित हो सकती हैं, का पुनःस्मरण करने में असमर्थ होता है। विस्मरण की मात्रा सामान्य से परे होती है।
बीमारी दुर्बिचता विकार – व्यक्ति एक गंभीर चिकित्सा दशा के उत्पन्न होने की संभावना को लेकर चिंता का अनुभव करता है।व्यक्तित्व-लोप/स्वअनुभूति-लोप विकार – व्यक्ति स्वयं की अवधारणा और वास्तविकता के बोध में बदलाव का अनुभव करता है।
परिवर्तन – व्यक्ति संवेदी या पेशीय प्रकारों (जैसे – पक्षाघात, अंधापन इत्यादि) में क्षति या हानि प्रदर्शित करता है जिसका कोई शारीरिक कारण नहीं होता किंतु किसी दबाव या मनोवैज्ञानिक समस्याओं के प्रति व्यक्ति की अनुक्रिया के कारण हो सकता है।विच्छेदी पहचान (बहु-व्यक्तित्व) – व्यक्ति दो या अधिक, भिन्न और वैषम्यात्मक व्यक्तित्व को प्रदर्शित करता है जो सामान्यतः शारीरिक दुर्व्यवहार की घटनाओं से जुड़ा होता है।

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| आत्म-अवलंब

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सामाजिक कौशलमित्र होते हैं; समायोजन तुरंत सीख लेते हैंमित्र बनाने में समर्थ होते हैं लेकिन अनेक सामाजिक स्थितियों में परेशानी का अनुभवमित्र बनाने की क्षमता नहीं; कोई सामाजिक अंत:क्रिया नहीं
व्यावसायिक समायोजननौकरी कर सकते हैं; प्रतिस्पर्धात्मक से अर्ध-प्रतिस्पर्धात्मक; मुख्यत: में अकुशल कामपरिरक्षित कार्य पर्यावरण; निरंतर देखे जाने की आवश्यकताकोई रोजगार नहीं; निरंतर देखभाल की आवश्यकता
वयस्क जीवनसामान्य तौर पर विवाह करते हैं, बच्चे भी होते हैं; दबाव के दौरान सहायता की आवश्यकतासामान्य तौर पर न विवाह, न बच्चे; पराश्रितन विवाह, न बच्चे; सदा दूसरों पर आश्रित

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. अवसाद और उन्माद से संबंधित लक्षणों की पहचान कीजिए।

अवसाद (डिप्रेशन) के लक्षणों में उदासी, निराशा, ऊर्जा की कमी, आत्मग्लानि, नींद और भूख में परिवर्तन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, और आत्महत्या के विचार शामिल हैं। उन्माद (मेनिया) के लक्षणों में अत्यधिक उत्साह, ऊर्जा, आत्मविश्वास, कम नींद की आवश्यकता, विचारों की तेज़ी, और आवेगपूर्ण व्यवहार शामिल होते हैं।

2. अतिक्रियाशील वाले बच्चों की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

अतिक्रियाशील बच्चे अत्यधिक संवेदनशील होते हैं, वे भावनात्मक रूप से तीव्र प्रतिक्रिया देते हैं, आसानी से चिढ़ जाते हैं, और सामाजिक परिस्थितियों में असहज महसूस कर सकते हैं। वे अक्सर चिंता, भय या आक्रामकता दिखाते हैं। उनकी प्रतिक्रिया सामान्य से अधिक होती है और वे तनावपूर्ण परिस्थितियों में असामान्य व्यवहार कर सकते हैं।

3. मद्य जैसे मादक द्रव्य के सेवन के क्या परिणाम होते हैं ?

मद्यपान के परिणामों में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक प्रभाव शामिल हैं। शारीरिक प्रभावों में लीवर रोग, हृदय रोग, तंत्रिका तंत्र की क्षति, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। मानसिक प्रभावों में स्मृति ह्रास, निर्णय क्षमता में कमी, अवसाद और चिंता शामिल हैं। सामाजिक प्रभावों में पारिवारिक कलह, कार्यस्थल पर समस्या, और सामाजिक अलगाव शामिल हैं।

4. क्या विकृत शरीर प्रतिमा भोजन विकार को जन्म दे सकती है? इसके विभिन्न रूपों का वर्गीकरण कीजिए।

हाँ, विकृत शरीर प्रतिमा भोजन विकारों का एक प्रमुख कारण हो सकती है। व्यक्ति अपने शरीर को वास्तविकता से अलग और नकारात्मक रूप में देखता है, जिससे भोजन संबंधी अस्वस्थ व्यवहार उत्पन्न होते हैं। भोजन विकारों के प्रमुख रूप हैं: (i) अनार्क्सिया नर्वोसा (भोजन का अत्यधिक परहेज), (ii) बुलिमिया नर्वोसा (अत्यधिक भोजन करना और उसके बाद उल्टी करना), और (iii) बिंज ईटिंग डिसऑर्डर (अत्यधिक मात्रा में भोजन करना)।

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