Biologyकक्षा 11प्राणियों में संरचनात्मक संगठनहिंदी

प्राणियों में संरचनात्मक संगठन | Class 11 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

प्राणियों में संरचनात्मक संगठन | Class 11 Biology Notes

प्राणियों में संरचनात्मक संगठन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of प्राणियों में संरचनात्मक संगठन from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

7.2.2 आंतरिक आकारिकी

मेंढक के शरीर के आंतरिक अंगों का संगठन जटिल और सुविकसित है। इसका पाचन तंत्र मुखगुहिका, ग्रसनी, ग्रसिका, आमाशय, आंत्र, मलाशय और अवस्कर से बना होता है। मेंढक मांसाहारी है, इसलिए इसका आहार नाल छोटा होता है। भोजन मुख से ग्रसनी, फिर ग्रसिका होकर आमाशय में जाता है। आमाशय से काइम (अर्धपाचित भोजन) ग्रहणी में पहुंचता है, जहाँ पित्त और अग्नाशयी रस मिलते हैं। पाचन की अंतिम क्रिया आंत में होती है, जहाँ पोषक तत्व अवशोषित होते हैं। मेंढक की मुख्य पाचन ग्रंथियाँ यकृत और अग्नाशय हैं। यकृत पित्त रस स्रावित करता है जो पित्ताशय में संग्रहित रहता है। अग्नाशय पाचक एंजाइमों से युक्त रस स्रावित करता है।

मेंढक में श्वसन त्वचा, फेफड़े और जलाशय के माध्यम से होता है। त्वचा से श्वसन जल में ऑक्सीजन ग्रहण करती है, जबकि स्थलीय वातावरण में फेफड़े श्वसन करते हैं। फेफड़े वक्षीय गुहा में स्थित गुलाबी थैलीनुमा अंग होते हैं। वायु नासा छिद्रों से मुखगुहा होकर फेफड़ों में जाती है।

मेंढक का परिसंचरण तंत्र बंद प्रकार का होता है, जिसमें रक्त हृदय के तीन कक्षों (दो आलिंद और एक निलय) से होकर शरीर में परिसंचारित होता है। रक्त वाहिकाएं रक्त को शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती हैं। रक्त में लाल रक्त कणिकाओं में हीमोग्लोबिन होता है जो ऑक्सीजन का परिवहन करता है।

मेंढक में उत्सर्जी तंत्र में वृक्क, मूत्रवाहिनी, मूत्राशय और अवस्कर द्वार शामिल हैं। वृक्क रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को छानकर मूत्र बनाते हैं, जो मूत्रवाहिनी के माध्यम से मूत्राशय और अवस्कर द्वार से बाहर निकलता है।

तंत्रिका तंत्र में मेंढक का मस्तिष्क अग्र मस्तिष्क, मध्य मस्तिष्क और पश्च मस्तिष्क में विभाजित होता है। मस्तिष्क से 10 जोड़ी कपाल तंत्रिकाएं निकलती हैं। अंतःस्रावी ग्रंथियाँ जैसे पिट्यूटरी, थायराइड, पैराथायराइड, अधिवृक्क, अग्नाशयी द्वीपकाएं और जनन ग्रंथियाँ शरीर के समन्वय और नियंत्रण में सहायक होती हैं।

मेंढक में संवेदी अंगों में आँखें, कर्णपट, स्पर्श, स्वाद और गंध अंग प्रमुख हैं। कर्ण संतुलन और श्रवण का कार्य करता है।

📊 Diagram: चित्र 7.2 मेंढक की आंतरिक संरचना जो पूर्ण आहार तंत्र दर्शाती है।

🔗 Connection: अगले अनुभाग में मेंढक के जनन तंत्र और उसके कार्यों का अध्ययन किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एक शरीर गुहा, वाहिनी या एक ट्यूब के अस्तर में शामिल हैं:

क़) सरल उपकला कोशिकाएं।

1. मेंढक के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए।

मेंढक के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाना है। इसमें मुख, ग्रसनी, अन्नप्रणाली, जठर, छोटी आंत, बड़ी आंत, मलाशय और गुदा आदि अंगों को सही स्थान पर नामांकित करना होता है। यह चित्र मेंढक के भोजन के पाचन की प्रक्रिया को समझने में सहायक होता है।

2. निम्न के कार्य बताइए: (अ) मेंढक की मूत्रवाहिनी (ब) मैलपिगी नलिका (स) केंचुए की देहभित्ति

(अ) मेंढक की मूत्रवाहिनी: यह मूत्र को गुर्दे से मूत्राशय तक पहुँचाने का कार्य करती है। (ब) मैलपिगी नलिका: यह कीटों में अपशिष्ट पदार्थों को रक्त से निकालकर मलाशय में पहुँचाने का कार्य करती है। (स) केंचुए की देहभित्ति: यह केंचुए के शरीर को सुरक्षा प्रदान करती है तथा शरीर को स्थिरता देती है।

प्राणियों में कोशिकाओं का समूह जो एक विशेष कार्य करता है, उसे क्या कहते हैं?

ऊतक

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