NCERTCh 7निःशुल्क

Chapter 7

🎓 Class 11📖 Jeev Vigyan📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 19Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

7.1 अंग और अंगतंत्र

व्याख्या

7.1 अंग और अंगतंत्र

बहुकोशिकीय प्राणियों में कोशिकाएं एकत्रित होकर ऊतक बनाती हैं, जो फिर मिलकर अंगों का निर्माण करती हैं। अंग विभिन्न प्रकार के ऊतकों से बने होते हैं जो एक विशेष कार्य करते हैं। उदाहरण के लिए, हृदय में उपकला, संयोजी, पेशीय और तंत्रकीय ऊतक पाए जाते हैं। जब दो या दो से अधिक अंग मिलकर एक निश्चित कार्य संपन्न करते हैं, तो वे अंग तंत्र का निर्माण करते हैं, जैसे पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र आदि। इस प्रकार कोशिका, ऊतक, अंग और अंग तंत्र में श्रम विभाजन होता है, जिससे शरीर की सभी जैविक क्रियाएं दक्षतापूर्वक और समन्वित रूप से संचालित होती हैं। इस संगठन को विकासीय प्रवृत्ति कहा जाता है, जो जीवों के जटिल शरीर संरचना के विकास को दर्शाती है। इस अध्याय में मेंढक के शरीर संगठन और कार्यों का अध्ययन किया जाएगा, जो कशेरुकी प्राणियों का एक उदाहरण है। आकारिकी का अर्थ जीवों के बाह्य रूप और अंगों के अध्ययन से है, जबकि शारीरिकी आंतरिक अंगों की संरचना का अध्ययन है।

  • बहुकोशिकीय जीवों में कोशिकाएं ऊतक बनाती हैं।
  • ऊतक मिलकर अंग बनाते हैं, जो विशेष कार्य करते हैं।
  • अंग मिलकर अंग तंत्र बनाते हैं, जो शरीर की क्रियाओं को संचालित करते हैं।
  • अंग तंत्रों का समन्वय शरीर के समग्र कार्य के लिए आवश्यक है।
  • इस संगठन को विकासीय प्रवृत्ति कहा जाता है।
  • आकारिकी जीवों के बाह्य रूप का अध्ययन है, शारीरिकी आंतरिक अंगों का।
  • 📌 ऊतक: समान प्रकार की कोशिकाओं का समूह जो एक विशेष कार्य करता है।
  • 📌 अंग: विभिन्न ऊतकों से बना शरीर का भाग जो विशिष्ट कार्य करता है।
  • 📌 अंग तंत्र: अंगों का समूह जो मिलकर एक या अधिक कार्य करता है।

7.2 मेंढक

व्याख्या

7.2 मेंढक

मेंढक एक द्विपाद जीव है जो मीठे जल और स्थलीय दोनों वातावरण में रह सकता है। यह कशेरुकी संघ के एंफीबिया वर्ग का सदस्य है। भारत में इसकी सामान्य जाति राना टिग्रीना है। मेंढक असमतापी प्राणी है, जिसका शरीर तापमान वातावरण के अनुसार बदलता रहता है। मेंढक की त्वचा पर रंग परिवर्तन की क्षमता होती है, जिसे छद्मावरण (camouflage) कहते हैं, जो शत्रुओं से बचाव में मदद करती है। यह छद्मावरण अनुहरण (mimicry) की एक प्रक्रिया है। मेंढक शीत निष्क्रियता (hibernation) और ग्रीष्म निष्क्रियता (aestivation) के माध्यम से मौसम की कठोर परिस्थितियों से बचता है। मेंढक का शरीर सिर और धड़ में विभाजित होता है, पूंछ और गर्दन नहीं होती। सिर पर नासिका द्वार, बाहर निकली आँखें और कर्णपट होते हैं। मेंढक की त्वचा श्लेष्मा से ढकी होती है, जिससे यह चिकनी और आर्द्र रहती है। यह कभी पानी नहीं पीता, बल्कि त्वचा के माध्यम से पानी अवशोषित करता है। नर और मादा मेंढक में लैंगिक द्विरूपता होती है, जैसे नर में आवाज उत्पन्न करने वाले वाक् कोष और मैथुनांग होते हैं।

  • मेंढक मीठे जल और स्थलीय दोनों स्थानों पर रहता है।
  • यह असमतापी प्राणी है, शरीर का तापमान परिवर्तनीय होता है।
  • त्वचा पर रंग परिवर्तन की क्षमता होती है, जिसे छद्मावरण कहते हैं।
  • मेंढक शीत निष्क्रियता और ग्रीष्म निष्क्रियता करता है।
  • शरीर सिर और धड़ में विभाजित होता है, पूंछ और गर्दन नहीं होती।
  • नर और मादा मेंढक में लैंगिक द्विरूपता पाई जाती है।
  • 📌 असमतापी प्राणी: ऐसे प्राणी जिनका शरीर तापमान वातावरण के अनुसार बदलता रहता है।
  • 📌 छद्मावरण: रंग परिवर्तन की वह क्षमता जिससे प्राणी अपने पर्यावरण में छिप जाता है।
  • 📌 अनुहरण (Mimicry): किसी अन्य जीव या वस्तु की नकल कर शत्रुओं से बचाव की प्रक्रिया।

7.2.1 बाह्य आकारिकी

व्याख्या

7.2.1 बाह्य आकारिकी

मेंढक की त्वचा श्लेष्मा ग्रंथियों द्वारा स्रावित श्लेष्मा से ढकी होती है, जिससे त्वचा चिकनी और फिसलनी होती है। त्वचा सदैव आर्द्र रहती है, जो श्वसन में भी सहायक होती है। मेंढक की ऊपरी सतह धानी हरे रंग की होती है जिसमें अनियमित धब्बे होते हैं, जबकि नीच

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.एक शरीर गुहा, वाहिनी या एक ट्यूब के अस्तर में शामिल हैं:
A.क़) सरल उपकला कोशिकाएं।
B.ख) यौगिक उपकला कोशिकाएं।
C.ग) वसा कोशिकाओं।
D.घ) कोई नहीं।

उत्तर:

क़) सरल उपकला कोशिकाएं।

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Q2.1. मेंढक के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाइए।

उत्तर:

मेंढक के पाचन तंत्र का नामांकित चित्र बनाना है। इसमें मुख, ग्रसनी, अन्नप्रणाली, जठर, छोटी आंत, बड़ी आंत, मलाशय और गुदा आदि अंगों को सही स्थान पर नामांकित करना होता है। यह चित्र मेंढक के भोजन के पाचन की प्रक्रिया को समझने में सहायक होता है।

व्याख्या:

मेंढक के पाचन तंत्र के अंगों को पहचानकर उन्हें चित्र में सही स्थान पर नामांकित करें। मुख से भोजन प्रवेश करता है, जो ग्रसनी और अन्नप्रणाली से होकर जठर में पहुँचता है। जठर में भोजन पचता है और छोटी आंत तथा बड़ी आंत से होकर मलाशय में पहुँचता है।

MediumNCERT
Q3.2. निम्न के कार्य बताइए: (अ) मेंढक की मूत्रवाहिनी (ब) मैलपिगी नलिका (स) केंचुए की देहभित्ति

उत्तर:

(अ) मेंढक की मूत्रवाहिनी: यह मूत्र को गुर्दे से मूत्राशय तक पहुँचाने का कार्य करती है। (ब) मैलपिगी नलिका: यह कीटों में अपशिष्ट पदार्थों को रक्त से निकालकर मलाशय में पहुँचाने का कार्य करती है। (स) केंचुए की देहभित्ति: यह केंचुए के शरीर को सुरक्षा प्रदान करती है तथा शरीर को स्थिरता देती है।

व्याख्या:

प्रत्येक अंग के कार्य को समझकर लिखें। मूत्रवाहिनी मूत्र के परिवहन के लिए होती है। मैलपिगी नलिका अपशिष्टों के निष्कासन में सहायक होती है। केंचुए की देहभित्ति शरीर की संरचना और सुरक्षा के लिए आवश्यक है।

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Q4.प्राणियों में कोशिकाओं का समूह जो एक विशेष कार्य करता है, उसे क्या कहते हैं?
A.A) ऊतक
B.B) अंग
C.C) अंग तंत्र
D.D) कोशिका

उत्तर:

ऊतक

व्याख्या:

ऊतक समान प्रकार की कोशिकाओं का समूह होता है जो एक विशेष कार्य करता है। उदाहरण के लिए, संयोजी ऊतक, पेशीय ऊतक आदि।

Easy
Q5.हृदय में पाए जाने वाले चार प्रकार के ऊतकों में से कौन सा ऊतक ध्वनि संकेत ग्रहण करने में सहायक होता है?
A.A) तंत्रकीय ऊतक
B.B) संयोजी ऊतक
C.C) पेशीय ऊतक
D.D) उपकला ऊतक

उत्तर:

तंत्रकीय ऊतक

व्याख्या:

तंत्रकीय ऊतक शरीर में सूचना संचारित करते हैं और ध्वनि संकेत ग्रहण करने में सहायक होते हैं। हृदय में भी तंत्रकीय ऊतक होते हैं जो हृदय की क्रिया नियंत्रित करते हैं।

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Q6.मेंढक का शरीर किस प्रकार के ताप नियामक प्राणी के रूप में वर्गीकृत होता है?
A.A) समतापी (होमियोथर्म)
B.B) असमतापी (पॉइकिलोथर्म)
C.C) ऊष्मायनशील
D.D) स्थिर ताप वाला

उत्तर:

असमतापी (पॉइकिलोथर्म)

व्याख्या:

मेंढक का शरीर ताप वातावरण के अनुसार बदलता रहता है, इसलिए इसे असमतापी या अनियततापी प्राणी कहा जाता है।

Easy
Q7.मेंढक के रंग में परिवर्तन की क्षमता को क्या कहा जाता है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
A.A) अनुहरण (मिमिक्री), शत्रुओं से छिपना
B.B) पिगमेंटेशन, ताप नियंत्रित करना
C.C) पुतली संकुचन, प्रकाश से बचाव
D.D) श्लेष्म स्राव, त्वचा को नम रखना

उत्तर:

अनुहरण (मिमिक्री), शत्रुओं से छिपना

व्याख्या:

मेंढक में रंग परिवर्तन की क्षमता छद्मावरण कहलाती है, जो अनुहरण की प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य शत्रुओं से बचना है।

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Q8.मेंढक शीत निष्क्रियता और ग्रीष्म निष्क्रियता के दौरान किस प्रकार की गतिविधि करता है?
A.A) सक्रिय रूप से भोजन करता है
B.B) गहरे गड्ढों में जाकर निष्क्रिय रहता है
C.C) उड़ान भरता है
D.D) जल में तैरता रहता है

उत्तर:

गहरे गड्ढों में जाकर निष्क्रिय रहता है

व्याख्या:

मेंढक सर्दी और गर्मी के मौसम में गहरे गड्ढों में जाकर निष्क्रिय रहता है, जिसे शीत निष्क्रियता (हाइबरनेशन) और ग्रीष्म निष्क्रियता (एस्टिवेशन) कहा जाता है।

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