Biologyकक्षा 11पुष्पी पादपों का शारीरहिंदी

पुष्पी पादपों का शारीर | Class 11 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

पुष्पी पादपों का शारीर | Class 11 Biology Notes

पुष्पी पादपों का शारीर – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पुष्पी पादपों का शारीर from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

6.1.2 भरण ऊतक तंत्र

भरण ऊतक तंत्र पौधे के शरीर में बाह्यत्वचा और संवहनी बंडल के बीच पाए जाने वाले ऊतकों का समूह है। इसे प्राथमिक ऊतक भी कहा जाता है क्योंकि ये ऊतक पौधे के विकास के प्रारंभिक चरणों में बनते हैं। भरण ऊतक तंत्र मुख्य रूप से सरल ऊतकों से बना होता है, जिनमें पैरेंकाइमा, कॉलेंकाइमा और स्क्लेरेंकाइमा शामिल हैं।

पैरेंकाइमा कोशिकाएं पतली भित्ति वाली, जीवित और बहुधा गोलाकार होती हैं। ये कोशिकाएं पौधे के विभिन्न भागों में पाई जाती हैं और इनमें अंतराकोशिकीय स्थान होता है, जो गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होता है। पत्तियों में पैरेंकाइमा कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट होते हैं, जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं। इस प्रकार पत्तियों का मुख्य भरण ऊतक पर्णमध्योतक (मेजोफिल) कहलाता है, जिसमें खंभ पैरेंकाइमा और स्पंजी पैरेंकाइमा होते हैं।

कॉलेंकाइमा कोशिकाएं मोटी भित्ति वाली होती हैं, जो मुख्य रूप से यांत्रिक सहारा प्रदान करती हैं। ये कोशिकाएं जीवित होती हैं और अक्सर पत्तियों के किनारों तथा तने के बाहरी हिस्सों में पाई जाती हैं।

स्क्लेरेंकाइमा कोशिकाएं मृत होती हैं और उनकी भित्ति कठोर होती है। ये कोशिकाएं पौधे को यांत्रिक मजबूती प्रदान करती हैं। स्क्लेरेंकाइमा कोशिकाएं दो प्रकार की होती हैं: फाइबर और स्क्लेराइड। फाइबर लंबी, पतली और तंतुमय होती हैं, जबकि स्क्लेराइड छोटी और अनियमित आकार की होती हैं।

इस प्रकार भरण ऊतक तंत्र पौधे के सहारा, भंडारण, और प्रकाश संश्लेषण के कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

📊 Diagram: (अ), (ब), (स) विभिन्न प्रकार के संवहन बंडल

🧪 Activity: पत्तियों और तने के भरण ऊतकों की सूक्ष्मदर्शी से जांच करना और उनकी कोशिकाओं की पहचान करना।

🔗 Connection: यह भरण ऊतक तंत्र की समझ संवहनी ऊतक तंत्र के अध्ययन के लिए आवश्यक है, जो जल और पोषक तत्वों के परिवहन में सहायक होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पार्श्व जड़ों की उत्पत्ति कहाँ से होती है ?

ग) पेरीसाइकिल

एक ऊतक जिसमें लिग्निन नहीं होता है

ख) पैरेन्काइमा

1. निम्नलिखित में शारीर के आधार पर अंतर करो (अ) एकबीजपत्री मूल तथा द्विवीजपत्री मूल (ब) एकबीजपत्री तना तथा द्विवीजपत्री तना

उत्तर: (अ) एकबीजपत्री मूल और द्विवीजपत्री मूल में अंतर:

  • एकबीजपत्री मूल में केंद्रीय सिलेंडर में संवहन तंतु फैले हुए होते हैं, जबकि द्विवीजपत्री मूल में संवहन तंतु एक छल्ला बनाते हैं।
  • एकबीजपत्री मूल में केंद्रीय सिलेंडर में पिथ कम विकसित होती है, द्विवीजपत्री मूल में पिथ अच्छी तरह विकसित होती है।

(ब) एकबीजपत्री तना और द्विवीजपत्री तना में अंतर:

  • एकबीजपत्री तना में संवहन बंडल फैले हुए और असंगठित होते हैं, जबकि द्विवीजपत्री तना में संवहन बंडल छल्ले के रूप में व्यवस्थित होते हैं।
  • एकबीजपत्री
2. आप एक शैशव तने की अनुप्रस्थ काट का सूक्ष्मदर्शी से अवलोकन करें। आप कैसे पता करेंगे कि यह एकबीजपत्री तना अथवा द्विवीजपत्री तना है? इसके कारण बताओ।

उत्तर: शैशव तने की अनुप्रस्थ काट में यदि संवहन बंडल फैले हुए और संयुक्त हों, तथा संवहन बंडल की संख्या कम हो, तो वह एकबीजपत्री तना होगा। यदि संवहन बंडल छल्ले के रूप में व्यवस्थित और पृथक हों, तथा संवहन बंडल की संख्या अधिक हो, तो वह द्विवीजपत्री तना होगा। कारण: एकबीजपत्री तने में संवहन तंतु असंगठित होते हैं जबकि द्विवीजपत्री तने में संवहन तंतु व्यवस्थित होते हैं।

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