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Chapter 6

🎓 Class 11📖 Jeev Vigyan📖 12 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~18 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 19Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 12 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

6.1 ऊतक तंत्र

व्याख्या

6.1 ऊतक तंत्र

पुष्पी पादपों के शरीर में ऊतक तंत्र पौधे के विभिन्न कार्यों के लिए जिम्मेदार होते हैं। ऊतक तंत्र पौधे के ऊतकों का समूह होता है जो एक साथ मिलकर कार्य करते हैं। पौधों में ऊतक तंत्र मुख्य रूप से तीन प्रकार के होते हैं: बाह्यत्वचीय ऊतक तंत्र, भरण (मौलिक) ऊतक तंत्र, और संवहनी ऊतक तंत्र। बाह्यत्वचीय ऊतक तंत्र पौधे की सबसे बाहरी सतह को बनाता है, जो पौधे को बाहरी वातावरण से सुरक्षा प्रदान करता है। इसमें बाह्यत्वचीय कोशिकाएं, रंध्र (स्टोमेटा), और बाह्यत्वचीय उपांग जैसे मूलरोम (रूट हेयर) शामिल होते हैं। बाह्यत्वचा की कोशिकाएं सामान्यतः एकल परत वाली होती हैं, जिनकी बाहरी सतह पर क्यूटिकल नामक मोम की परत होती है जो जल हानि को रोकती है। रंध्र पत्तियों और तनों की सतह पर पाए जाते हैं और ये गैसों के आदान-प्रदान तथा वाष्पोत्सर्जन को नियंत्रित करते हैं। प्रत्येक रंध्र में दो द्वार कोशिकाएं होती हैं जो सेम के आकार की होती हैं और इनके बीच एक छिद्र होता है। ये द्वार कोशिकाएं क्लोरोप्लास्ट युक्त होती हैं और रंध्र के खुलने-बंद होने की क्रिया को नियंत्रित करती हैं। भरण ऊतक तंत्र में सरल ऊतक जैसे पैरेंकाइमा, कॉलेंकाइमा, और स्क्लेरेंकाइमा आते हैं। ये ऊतक पौधे के अंदर विभिन्न कार्यों जैसे भंडारण, सहारा प्रदान करना, और प्रकाश संश्लेषण में सहायक होते हैं। पैरेंकाइमा कोशिकाएं पतली भित्ति वाली होती हैं और इनमें क्लोरोप्लास्ट होते हैं, जो प्रकाश संश्लेषण में मदद करते हैं। कॉलेंकाइमा कोशिकाएं मोटी भित्ति वाली होती हैं और पौधे को यांत्रिक सहारा देती हैं। स्क्लेरेंकाइमा कोशिकाएं कठोर होती हैं और पौधे को मजबूती प्रदान करती हैं। संवहनी ऊतक तंत्र जटिल ऊतकों से बना होता है जिसमें जाइलम और फ्लोएम शामिल हैं। जाइलम जल और खनिज लवणों को जड़ से तने और पत्तियों तक पहुँचाता है, जबकि फ्लोएम खाद्य पदार्थों का परिवहन करता है। जाइलम और फ्लोएम मिलकर संवहन बंडल बनाते हैं। द्विबीजपत्री पौधों में संवहन बंडल खुले होते हैं, जिनमें कैंबियम होता है जो द्वितीयक वृद्धि करता है। एकबीजपत्री पौधों में संवहन बंडल बंद होते हैं, जिनमें कैंबियम नहीं होता। संवहन बंडल के विन्यास के आधार पर वे अरीय (जाइलम और फ्लोएम अलग-अलग) या संयुक्त (जाइलम और फ्लोएम एक साथ) हो सकते हैं।

  • पुष्पी पादपों में तीन प्रकार के ऊतक तंत्र होते हैं: बाह्यत्वचीय, भरण, और संवहनी।
  • बाह्यत्वचीय ऊतक पौधे की सुरक्षा और जल संरक्षण में सहायक होता है।
  • रंध्र गैसों के विनिमय और वाष्पोत्सर्जन को नियंत्रित करते हैं।
  • भरण ऊतक में पैरेंकाइमा, कॉलेंकाइमा, और स्क्लेरेंकाइमा शामिल हैं जो सहारा, भंडारण और प्रकाश संश्लेषण करते हैं।
  • संवहनी ऊतक में जाइलम और फ्लोएम होते हैं जो जल और खाद्य पदार्थों का परिवहन करते हैं।
  • द्विबीजपत्री पौधों में संवहन बंडल खुले होते हैं, जबकि एकबीजपत्री पौधों में बंद।
  • 📌 बाह्यत्वचीय ऊतक: पौधे की सबसे बाहरी परत जो सुरक्षा करती है।
  • 📌 रंध्र (स्टोमेटा): पत्तियों की सतह पर गैस विनिमय के लिए छिद्र।
  • 📌 पैरेंकाइमा: पतली भित्ति वाली कोशिकाएं जो भंडारण और प्रकाश संश्लेषण करती हैं।

6.1.1 बाह्य त्वचीय ऊतक तंत्र

व्याख्या

6.1.1 बाह्य त्वचीय ऊतक तंत्र

बाह्य त्वचीय ऊतक तंत्र पौधे के शरीर का सबसे बाहरी आवरण होता है, जो पौधे को बाहरी वातावरण से सुरक्षा प्रदान करता है। यह तंत्र मुख्य रूप से बाह्यत्वचीय कोशिकाओं, रंध्रों, और बाह्यत्वचीय उपांगों से बना होता है। बाह्यत्वचा की कोशिकाएं लंबी और एक-दूसरे के सन्निकट होती हैं, जिससे यह एक अखंड सतह बनाती हैं। ये कोशिकाएं प्रायः एकल सतह वाली होती हैं और इनमें बहुत कम साइटोप्लाज्म होता है। कोशिका के केंद्र में एक बड़ी रसधानी (वैक्यूओल) होती है। बाह्यत्वचा की बाहरी सतह पर क्यूटिकल नामक एक मोटी मोम की परत होती है, जो जल की हानि को रोकती है। क्यूटिकल पौधे को सूखे वातावरण में जल संरक्षण में मदद करती है। रंध्र (स्टोमेटा) पत्तियों और तनों की बाह्यत्वचा पर पाए जाने वाले छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जो वाष्पोत्सर्जन और गैसों के विनिमय को नियंत्रित करते हैं। प्रत्येक रंध्र में दो द्वार कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें द्वारकोशिका कहा जाता है। ये द्वार कोशिकाएं सेम के आकार की होती हैं और इनके बीच एक छिद्र होता है। घास जैसे पौधों में द्वार कोशिकाएं डंबलाकार होती हैं। द्वार कोशिकाओं की बाहरी भित्ति पतली और आंतरिक भित्ति मोटी होती है। द्वार कोशिकाओं में क्लोरोप्लास्ट होते हैं, जो रंध्र के खुलने और बंद होने की क्रिया को नियंत्रित करते हैं। रंध्र के आस-पास कुछ विशेष कोशिकाएं होती हैं जिन्हें सहायक कोशिकाएं कहते हैं। ये कोशिकाएं रंध्र के कार्य में सहायक होती हैं और उनकी आकृति तथा रचना में विशिष्टता होती है। बाह्यत्वचा की कोशिकाओं पर पाए जाने वाले छोटे-छोटे एककोशिकीय दीर्घकरणों को मूलरोम (रूट हेयर) कहा जाता है, जो जल और खनिज लवणों के अवशोषण में सहायक होते हैं। तने पर पाए जाने वाले बहुकोशिकीय रोमों को त्वचारोम (ट्राइकोम्स) कहा जाता है, जो वाष्पोत्सर्जन से जल की हानि को कम करते हैं और पौधे को यांत्रिक तथा रासायनिक क्षति से बचाते हैं।

  • बाह्यत्वचा पौधे की सबसे बाहरी परत होती है जो जल संरक्षण करती है।
  • क्यूटिकल नामक मोम की परत जल हानि को रोकती है।
  • रंध्र गैस विनिमय और वाष्पोत्सर्जन के लिए जिम्मेदार होते हैं।
  • द्वार कोशिकाएं रंध्र के खुलने और बंद होने को नियंत्रित करती हैं।
  • मूलरोम जल और खनिज अवशोषण में सहायक होते हैं।
  • त्वचारोम वाष्पोत्सर्जन को नियंत्रित करते हैं और पौधे की रक्षा करते हैं।
  • 📌 बाह्यत्वचा: पौधे की सबसे बाहरी कोशिका परत।
  • 📌 क्यूटिकल: मोम की परत जो जल हानि रोकती है।
  • 📌 रंध्र (स्टोमेटा): गैस विनिमय के लिए छिद्र।

6.1.2 भरण ऊतक तंत्र

व्याख्या

6.1.2 भरण ऊतक तंत्र

भरण ऊतक तंत्र पौधे के शरीर में बाह्यत्वचा और संवहनी बंडल के बीच पाए जाने वाले ऊतकों का समूह है। इसे प्राथमिक ऊतक भी कहा जाता है क्योंकि ये ऊतक पौधे के विकास के प्रारंभिक चरणों में बनते हैं। भरण ऊतक तंत्र मुख्य रूप से सरल ऊतकों से बना होता है, जिनमें

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.पार्श्व जड़ों की उत्पत्ति कहाँ से होती है ?
A.क) कॉर्टेक्स
B.ख) एंडोडर्मल कोशिकाएं
C.ग) पेरीसाइकिल
D.घ) कोर्क कैेबियम

उत्तर:

ग) पेरीसाइकिल

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Q2.एक ऊतक जिसमें लिग्निन नहीं होता है
A.क) स्क्लेरेनकाइमा
B.ख) पैरेन्काइमा
C.ग) कोलेनकाइमा
D.घ) क्लोरेन्काइमा

उत्तर:

ख) पैरेन्काइमा

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Q3.1. निम्नलिखित में शारीर के आधार पर अंतर करो (अ) एकबीजपत्री मूल तथा द्विवीजपत्री मूल (ब) एकबीजपत्री तना तथा द्विवीजपत्री तना

उत्तर:

उत्तर: (अ) एकबीजपत्री मूल और द्विवीजपत्री मूल में अंतर: - एकबीजपत्री मूल में केंद्रीय सिलेंडर में संवहन तंतु फैले हुए होते हैं, जबकि द्विवीजपत्री मूल में संवहन तंतु एक छल्ला बनाते हैं। - एकबीजपत्री मूल में केंद्रीय सिलेंडर में पिथ कम विकसित होती है, द्विवीजपत्री मूल में पिथ अच्छी तरह विकसित होती है। (ब) एकबीजपत्री तना और द्विवीजपत्री तना में अंतर: - एकबीजपत्री तना में संवहन बंडल फैले हुए और असंगठित होते हैं, जबकि द्विवीजपत्री तना में संवहन बंडल छल्ले के रूप में व्यवस्थित होते हैं। - एकबीजपत्री तना में संवहन बंडल संयुक्त होते हैं, द्विवीजपत्री तना में संवहन बंडल पृथक होते हैं।

व्याख्या:

एकबीजपत्री और द्विवीजपत्री पौधों के मूल और तने की संरचना में अंतर उनके संवहन तंतुओं के संगठन और पिथ की उपस्थिति से पहचाना जाता है।

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Q4.2. आप एक शैशव तने की अनुप्रस्थ काट का सूक्ष्मदर्शी से अवलोकन करें। आप कैसे पता करेंगे कि यह एकबीजपत्री तना अथवा द्विवीजपत्री तना है? इसके कारण बताओ।

उत्तर:

उत्तर: शैशव तने की अनुप्रस्थ काट में यदि संवहन बंडल फैले हुए और संयुक्त हों, तथा संवहन बंडल की संख्या कम हो, तो वह एकबीजपत्री तना होगा। यदि संवहन बंडल छल्ले के रूप में व्यवस्थित और पृथक हों, तथा संवहन बंडल की संख्या अधिक हो, तो वह द्विवीजपत्री तना होगा। कारण: एकबीजपत्री तने में संवहन तंतु असंगठित होते हैं जबकि द्विवीजपत्री तने में संवहन तंतु व्यवस्थित होते हैं।

व्याख्या:

संवहन बंडल की संरचना और संगठन से तने की श्रेणी का निर्धारण किया जाता है।

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Q5.3. सूक्ष्मदर्शी किसी पौधे के भाग की अनुप्रस्थ काट निम्नलिखित शारीर रचनाएँ दिखाती है। (अ) संवहन बंडल संयुक्त, फैले हुए तथा उसके चारों ओर स्केलेरेंकाइमी आच्छद हैं (ब) फ्लोएम पैरेंकाइमा नहीं है। आप कैसे पहचानोगे कि यह किसका है?

उत्तर:

उत्तर: यह एकबीजपत्री पौधे का भाग होगा। कारण: - एकबीजपत्री पौधों में संवहन बंडल संयुक्त और फैले हुए होते हैं। - स्केलेरेंकाइमी आच्छद संवहन बंडल के चारों ओर पाए जाते हैं। - फ्लोएम पैरेंकाइमा की अनुपस्थिति भी एकबीजपत्री पौधों की विशेषता है।

व्याख्या:

संवहन बंडल की संरचना और फ्लोएम पैरेंकाइमा की उपस्थिति से पौधे की श्रेणी का निर्धारण होता है।

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Q6.4. रंध्रीतंत्र क्या है? रंध्र की रचना का वर्णन करो और इसका चिह्नित चित्र बनाओ।

उत्तर:

उत्तर: रंध्रीतंत्र पादपों की पत्ती की ऊपरी सतह पर पाए जाने वाले छोटे छिद्र होते हैं, जो गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं। रंध्र की रचना: - रंध्र दो विशेष कोशिकाओं से बना होता है जिन्हें रंध्री कोशिकाएँ कहते हैं। - ये कोशिकाएँ मूर्तिमान होती हैं और इनके बीच एक छोटा छिद्र (रंध्र) होता है। - रंध्री कोशिकाएँ हरे रंग की क्लोरोप्लास्ट युक्त होती हैं। - रंध्री कोशिकाएँ तना और पत्ती की आंतरिक कोशिकाओं से जुड़ी होती हैं। (यहाँ रंध्रीतंत्र का चिह्नित चित्र बनाना चाहिए जिसमें रंध्री कोशिकाएँ और रंध्र स्पष्ट दिखे।)

व्याख्या:

रंध्रीतंत्र पत्ती में गैस विनिमय के लिए आवश्यक संरचना है, जो प्रकाश संश्लेषण और श्वसन क्रियाओं में सहायक होती है।

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Q7.5. पुष्पी पादपों में तीन मूलभूत ऊतक तंत्र बताओ। प्रत्येक तंत्र के ऊतक बताओ।

उत्तर:

उत्तर: पुष्पी पादपों में तीन मूलभूत ऊतक तंत्र होते हैं: 1. त्वक तंत्र (Dermal Tissue System): इसमें शामिल ऊतक - एपिडर्मिस (त्वक), पेरिडर्म। 2. मूल तंत्र (Ground Tissue System): इसमें शामिल ऊतक - पैरेंकाइमा, कोलेनकाइमा, स्क्लेरेनकाइमा। 3. संवहन तंत्र (Vascular Tissue System): इसमें शामिल ऊतक - ज़ाइलम (लकड़ी), फ्लोएम (छाल)।

व्याख्या:

पुष्पी पादपों के शरीर में ये तीन ऊतक तंत्र उनकी संरचना और कार्य के अनुसार विभाजित होते हैं।

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Q8.6. पादप शारीर का अध्ययन हमारे लिए कैसे उपयोगी है?

उत्तर:

उत्तर: पादप शारीर के अध्ययन से हमें पौधों की संरचना, विकास, और कार्यप्रणाली को समझने में मदद मिलती है। यह कृषि, बागवानी, औषधि विज्ञान, और पर्यावरण संरक्षण में उपयोगी होता है। इससे पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, पोषण, और वृद्धि के बारे में जानकारी मिलती है, जो बेहतर फसल उत्पादन और पौधों की देखभाल में सहायक है।

व्याख्या:

पादप शारीर का ज्ञान कृषि और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।

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