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प्राणि जगत | Class 11 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

प्राणि जगत | Class 11 Biology Notes

प्राणि जगत – this guide gives you a concise, exam-ready overview of प्राणि जगत from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

4.1 वर्गीकरण का आधार

प्राणि जगत में पाए जाने वाले जीवों की संरचना, आकार और जीवन प्रक्रियाओं में विविधता होती है। लगभग दस लाख से अधिक प्राणियों का वर्णन हो चुका है, इसलिए उनका सही वर्गीकरण अत्यंत आवश्यक है। वर्गीकरण का आधार जीवों की कोशिका व्यवस्था, शारीरिक सममिति, शरीर गुहा (प्रगुहा) की उपस्थिति, पाचन तंत्र, परिसंचरण तंत्र, और जनन तंत्र की संरचना होती है।

प्राणियों के संगठन के स्तर के आधार पर उन्हें कोशिकीय, ऊतक, अंग और अंग तंत्र स्तर के जीवों में बांटा जाता है। कोशिकीय स्तर के जीवों में कोशिकाएं स्वतंत्र होती हैं जैसे स्पंज। ऊतक स्तर के जीवों में कोशिकाएं समूह बनाकर ऊतक बनाती हैं जैसे सिलेन्ट्रेटा। अंग स्तर के जीवों में ऊतक मिलकर अंग बनाते हैं, और अंग तंत्र स्तर के जीवों में अंग मिलकर तंत्र बनाते हैं, जो विशिष्ट कार्य करते हैं जैसे ऐनेलिड, आर्थोपोड आदि।

सममिति के आधार पर जीवों को असममिति, अरीय सममिति और द्विपार्श्व सममिति में वर्गीकृत किया जाता है। असममिति वाले जीवों में शरीर को किसी भी अक्ष से बराबर भागों में विभाजित नहीं किया जा सकता। अरीय सममिति वाले जीवों में शरीर को किसी भी अक्ष से दो समान भागों में बांटा जा सकता है। द्विपार्श्व सममिति में शरीर को केवल एक अक्ष से दो समान भागों में बांटा जा सकता है।

भ्रूणीय स्तर के आधार पर जीवों को द्विकोरिक (दो भ्रूणीय स्तर - एक्टोडर्म और एंडोडर्म) और त्रिकोरिक (तीन भ्रूणीय स्तर - एक्टोडर्म, मेसोडर्म और एंडोडर्म) में बांटा जाता है।

प्रगुहा (सीलोम) की उपस्थिति भी वर्गीकरण में महत्वपूर्ण है। प्रगुहा वह शरीर गुहा है जो मेसोडर्म से घिरी होती है। प्रगुही जीवों में अंगों का विकास और कार्य अधिक जटिल होता है। कूटगुहिक जीवों में गुहा पूरी तरह मेसोडर्म से आच्छादित नहीं होती, जबकि अगुही जीवों में शरीर में कोई गुहा नहीं होती।

खंडीभवन (सेगमेंटेशन) भी वर्गीकरण का आधार है, जिसमें शरीर खंडों में विभाजित होता है। पृष्ठरज्जु (नोटोकोर्ड) की उपस्थिति से जीवों को रज्जुकी और अरज्जुकी में बांटा जाता है। रज्जुकी जीवों में पृष्ठरज्जु होती है जो मेरुदंड का प्रारंभिक रूप होती है।

📊 Diagram: चित्र 4.1 (अ) अरीय सममिति; चित्र 4.1 (ब) द्विपार्श्व सममिति; (अ) भ्रूणीय स्तर का प्रदर्शन (द्विकोरिक और त्रिकोरिक); (अ) प्रगुहीय (ब) कूटगुहिक; (स) अगुहीय का अनुप्रस्थ रेखाचित्र

🧪 Activity: प्राणियों के नमूनों का निरीक्षण कर उनके संगठन स्तर, सममिति, और प्रगुहा की उपस्थिति का अध्ययन करें।

🔗 Connection: यह वर्गीकरण के आधार समझाने के बाद अगला खंड प्राणियों के विभिन्न संघों का वर्गीकरण विस्तार से प्रस्तुत करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जिगोटिक अर्धसूत्रीविभाजन किस पोधे की विशेषता है ?

ख) फुनारिया

केंचुए में कितनी आंखें होती हैI

घ) कोई नेत्र नहीं

एंजियोस्पर्म ,प्लांट किंगडम की प्रमुख वनस्पति हैं क्योंकि

ख) विभिन्न आवासों में अनुकूलन

निम्न में से कौन कीट नहीं है

घ) मकड़ी

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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