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वनस्पति जगत | Class 11 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

वनस्पति जगत | Class 11 Biology Notes

वनस्पति जगत – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वनस्पति जगत from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

3.1.1 क्लोरोफाइसी

क्लोरोफाइसी वर्ग के शैवाल को सामान्यतः हरे शैवाल कहा जाता है। ये एक कोशिकीय, कॉलोनियम या तंतुमयी रूप में हो सकते हैं। इनके क्लोरोप्लास्ट में क्लोरोफिल a और b पाए जाते हैं, जो इन्हें हरे रंग का बनाते हैं। क्लोरोप्लास्ट की आकृति डिस्क, प्लेट, जालिकाकार, कप के आकार, सर्पिल या रिबन जैसी हो सकती है। इनमें पाइरीनॉइड नामक संरचनाएं होती हैं जो स्टार्च के भंडारण के लिए जिम्मेदार होती हैं।

क्लोरोफाइसी के शैवालों की कोशिका भित्ति कठोर होती है, जिसमें भीतरी सतह सेल्यूलोज की और बाहरी सतह पेक्टोज की बनी होती है। ये कायिक जनन विखंडन द्वारा करते हैं। अलैंगिक जनन में फ्लैजिलायुक्त जूस्योर (बीजाणु) बनते हैं जो चलायमान होते हैं। लैंगिक जनन में युग्मक समयुग्मकी, असमयुग्मकी या विषमयुग्मकी हो सकते हैं। सामान्य सदस्य क्लैमाइडोमोनास, वॉल्वॉक्स, यूलोथ्रिक्सिस, स्पाइरोगायरा और कारा हैं।

📊 Diagram: चित्र 3.1 (अ) हरित शैवाल (i) बॉलबाक्स (ii) लैमिनेरिया

🧪 Activity: क्लोरोफाइसी के शैवालों का संग्रह कर उनकी संरचना और जनन पद्धति का अध्ययन।

🔗 Connection: क्लोरोफाइसी के बाद भूरे शैवाल (फीयोफाइसी) का अध्ययन किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. शैवाल के वर्गीकरण का क्या आधार है?

शैवाल के वर्गीकरण का आधार उनके रंग, कोशिका की संरचना, जीवनचक्र, और प्रकाश संश्लेषण के पिगमेंट होते हैं। उदाहरण के लिए, शैवाल को मुख्यतः तीन वर्गों में बांटा जाता है: लाल शैवाल (Rhodophyta), हरे शैवाल (Chlorophyta), और भूरे शैवाल (Phaeophyta)। यह वर्गीकरण उनके रंगद्रव्य (pigments) और कोशिका की संरचना पर आधारित होता है।

2. लिवरवर्ट, मॉस, फर्न, जिम्नोस्पर्म तथा एंजियोस्पर्म के जीवन-चक्र में कहाँ और कब निम्नीकरण विभाजन होता है?

निम्नीकरण विभाजन (Meiosis) निम्नलिखित स्थानों और समय पर होता है:

  • लिवरवर्ट: स्पोरोफाइट के स्पोरोसाइट कोशिकाओं में स्पोर्स बनाने के लिए।
  • मॉस: स्पोरोफाइट के स्पोरोसाइट में स्पोर्स बनने के लिए।
  • फर्न: स्पोरोफाइट के स्पोरोसाइट में स्पोर्स बनने के लिए।
  • जिम्नोस्पर्म: मेयोसिस बीजाणु (pollen) और अंडाणु (ovule) के निर्माण में होता है।
  • एंजियोस्पर्म: मेयोसिस बीजाणु और अंडाणु के निर्माण में होता है।

इस प्रकार, निम्नीकरण विभाजन स्पोरोफाइट चरण में स्पोर्स बनाने के लिए होता है, जो आगे जाकर गेमेटोफाइट ब

3. पौधे के तीन वर्गों के नाम लिखो, जिनमें स्त्रीधानी होती है। इनमें से किसी एक के जीवन-चक्र का संक्षिप्त वर्णन करो।

स्त्रीधानी वाले तीन पौधों के वर्ग हैं: 1. मॉस 2. फर्न 3. जिम्नोस्पर्म

जीवन-चक्र (मॉस का संक्षिप्त वर्णन): मॉस में जीवनचक्र में दो चरण होते हैं - स्पोरोफाइट (डिप्लोइड) और गेमेटोफाइट (हाप्लोइड)।

  • स्पोरोफाइट में स्पोरोसाइट कोशिकाओं में मेयोसिस होता है और स्पोर्स बनते हैं।
  • ये स्पोर्स गेमेटोफाइट बनाते हैं जो हरे रंग के होते हैं।
  • गेमेटोफाइट पर स्त्रीधानी (आर्केगोनियम) और पुंधानी (एंथिडियम) होते हैं।
  • स्त्रीधानी में अंडाणु बनते हैं।
  • जल की सहायता से शुक्राणु अंडाणु तक पहुँचकर निषेचन करते हैं।

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4. निम्नलिखित की सूत्रगुणता बताओ: मॉस के प्रथम तंतुक कोशिका; द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केंद्रक, मॉस की पत्तियों की कोशिका; फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएं, मारकेशिया की जेमा कोशिका; एकबीजपत्री की मैरिस्टम कोशिका, लिवरवर्ट के अंडाशय तथा फर्न के युग्मनज।

सूत्रगुणता (Ploidy) निम्नलिखित है:

  • मॉस के प्रथम तंतुक कोशिका: हाप्लोइड (n)
  • द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केंद्रक: डिप्लोइड (2n)
  • मॉस की पत्तियों की कोशिका: हाप्लोइड (n)
  • फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएं: हाप्लोइड (n)
  • मारकेशिया की जेमा कोशिका: हाप्लोइड (n)
  • एकबीजपत्री की मैरिस्टम कोशिका: डिप्लोइड (2n)
  • लिवरवर्ट के अंडाशय: डिप्लोइड (2n)
  • फर्न के युग्मनज: डिप्लोइड (2n)

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