वनस्पति जगत | Class 11 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

वनस्पति जगत – this guide gives you a concise, exam-ready overview of वनस्पति जगत from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
3.1 शैवाल
शैवाल (Algae) क्लोरोफिलयुक्त, सरल, थैलसाभ, स्वपोषी और मुख्यतः जलीय जीव होते हैं। ये अलवणीय जल, लवणीय जल और खारे जल में पाए जाते हैं। शैवाल जल के अलावा नमयुक्त पत्थरों, मिट्टी और लकड़ी पर भी पाए जाते हैं। कुछ शैवाल कवक (लाइकेन में) और प्राणियों के शरीर में भी पाए जाते हैं। शैवाल के आकार और माप में अत्यधिक विविधता होती है, जैसे कॉलोनियम (वॉल्वॉक्स) से लेकर तंतुमयी (यूलोथ्रिक्स, स्पाइरोगायरा) तक। कुछ शैवाल जैसे केल्प बहुत विशालकाय होते हैं।
शैवाल तीन प्रमुख वर्गों में विभाजित हैं: क्लोरोफाइसी (हरे शैवाल), फीयोफाइसी (भूरे शैवाल) और रोडोफाइसी (लाल शैवाल)। ये वर्ग उनके वर्णक, कोशिका भित्ति, संचित भोजन और फ्लैजिला की संख्या व स्थिति के आधार पर वर्गीकृत होते हैं। शैवाल कायिक, अलैंगिक और लैंगिक जनन करते हैं। कायिक जनन विखंडन द्वारा होता है, अलैंगिक जनन में चलायमान फ्लैजिलायुक्त जूस्योर (बीजाणु) बनते हैं, जो अंकुरित होकर नए पौधे बनाते हैं। लैंगिक जनन में युग्मकों का संगम होता है, जो समयुग्मकी, असमयुग्मकी या विषमयुग्मकी हो सकता है।
शैवाल पृथ्वी पर प्रकाश संश्लेषण के दौरान कुल स्थिरीकृत कार्बनडाइऑक्साइड का लगभग आधा भाग स्थिर करते हैं। वे जलीय पर्यावरण में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाते हैं और खाद्य श्रृंखला का आधार होते हैं। कुछ शैवाल का आर्थिक महत्व भी है, जैसे जिलेडियम और ग्रेसिलेरिया से एंगार प्राप्त होता है, जिसका उपयोग आइसक्रीम और जैली में होता है। क्लोरैला और स्प्रूलाइना प्रोटीन से भरपूर शैवाल हैं, जिनका उपयोग अंतरिक्ष यात्रियों के भोजन के रूप में भी किया जाता है।
📊 Diagram: चित्र 3.1 शैवाल (अ) हरित शैवाल (i) बॉलबाक्स (ii) लैमिनेरिया; (ब) भूरे शैवाल (i) पौर्फाइरा (ii) यूलोथ्रिक्स (iii) फ्यूक्स; (स) लाल शैवाल (i) पॉलीसाइफोनिया (ii) डिक्टाइओटा
🧪 Activity: शैवाल के वर्गीकरण के आधार पर विभिन्न प्रकार के शैवालों का संग्रह और उनका अवलोकन।
🔗 Connection: शैवाल के बाद ब्रायोफाइट्स के जीवन चक्र और संरचना का अध्ययन किया जाएगा।
Table on page 4 (4×7)
| डिविजन | सामान्य नाम | प्रमुख वर्णक | संचित भोजन | कोशिका भित्ति | फ्लेजिला की संख्या तथा उनकी निवेशन की स्थिति | आवास |
|---|---|---|---|---|---|---|
| क्लोरोफाइसी | हरे शैवाल | क्लोरोफिल a, b | स्टार्च | सेल्यूलोज | 2-8, समान, शीर्ष | अलवणजल, लवणीय जल, खारा जल |
| फीयोफाइसी | भूरे शैवाल | क्लोरोफिल a, c, प्यूकोजैथिन | मैनीटोल लैमिनेरिन | सेल्यूलोज तथा एलिजिन | 2, असमान, पाश्वर्षीय | अलवणजल, (बहुत कम) खारा जल, लवणीयजल |
| रोडोफाइसी | लाल शैवाल | क्लोरोफिल a,d, फाइकोऐरीथिन | फ्लोरिडिऑन स्टार्च | सेल्यूलोज | अनुपस्थित | अलवण जल, (कुछ) खारा जल, लवण जल (अधिकांश) |
Table on page 14 (5×2)
| स्तंभ I (पादप) | स्तंभ II (वर्ग) |
|---|---|
| (अ) क्लैमाइडोमोनॉस | (i) मॉस |
| (ब) साइकस | (ii) टेरिडोफाइट |
| (स) सिलैंजिनेला | (iii) शैवाल |
| (द) स्क्रैगनम | (iv) जिम्नोस्पर्म |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. शैवाल के वर्गीकरण का क्या आधार है?
शैवाल के वर्गीकरण का आधार उनके रंग, कोशिका की संरचना, जीवनचक्र, और प्रकाश संश्लेषण के पिगमेंट होते हैं। उदाहरण के लिए, शैवाल को मुख्यतः तीन वर्गों में बांटा जाता है: लाल शैवाल (Rhodophyta), हरे शैवाल (Chlorophyta), और भूरे शैवाल (Phaeophyta)। यह वर्गीकरण उनके रंगद्रव्य (pigments) और कोशिका की संरचना पर आधारित होता है।
2. लिवरवर्ट, मॉस, फर्न, जिम्नोस्पर्म तथा एंजियोस्पर्म के जीवन-चक्र में कहाँ और कब निम्नीकरण विभाजन होता है?
निम्नीकरण विभाजन (Meiosis) निम्नलिखित स्थानों और समय पर होता है:
- लिवरवर्ट: स्पोरोफाइट के स्पोरोसाइट कोशिकाओं में स्पोर्स बनाने के लिए।
- मॉस: स्पोरोफाइट के स्पोरोसाइट में स्पोर्स बनने के लिए।
- फर्न: स्पोरोफाइट के स्पोरोसाइट में स्पोर्स बनने के लिए।
- जिम्नोस्पर्म: मेयोसिस बीजाणु (pollen) और अंडाणु (ovule) के निर्माण में होता है।
- एंजियोस्पर्म: मेयोसिस बीजाणु और अंडाणु के निर्माण में होता है।
इस प्रकार, निम्नीकरण विभाजन स्पोरोफाइट चरण में स्पोर्स बनाने के लिए होता है, जो आगे जाकर गेमेटोफाइट ब
3. पौधे के तीन वर्गों के नाम लिखो, जिनमें स्त्रीधानी होती है। इनमें से किसी एक के जीवन-चक्र का संक्षिप्त वर्णन करो।
स्त्रीधानी वाले तीन पौधों के वर्ग हैं: 1. मॉस 2. फर्न 3. जिम्नोस्पर्म
जीवन-चक्र (मॉस का संक्षिप्त वर्णन): मॉस में जीवनचक्र में दो चरण होते हैं - स्पोरोफाइट (डिप्लोइड) और गेमेटोफाइट (हाप्लोइड)।
- स्पोरोफाइट में स्पोरोसाइट कोशिकाओं में मेयोसिस होता है और स्पोर्स बनते हैं।
- ये स्पोर्स गेमेटोफाइट बनाते हैं जो हरे रंग के होते हैं।
- गेमेटोफाइट पर स्त्रीधानी (आर्केगोनियम) और पुंधानी (एंथिडियम) होते हैं।
- स्त्रीधानी में अंडाणु बनते हैं।
- जल की सहायता से शुक्राणु अंडाणु तक पहुँचकर निषेचन करते हैं।
-
4. निम्नलिखित की सूत्रगुणता बताओ: मॉस के प्रथम तंतुक कोशिका; द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केंद्रक, मॉस की पत्तियों की कोशिका; फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएं, मारकेशिया की जेमा कोशिका; एकबीजपत्री की मैरिस्टम कोशिका, लिवरवर्ट के अंडाशय तथा फर्न के युग्मनज।
सूत्रगुणता (Ploidy) निम्नलिखित है:
- मॉस के प्रथम तंतुक कोशिका: हाप्लोइड (n)
- द्विबीजपत्री के प्राथमिक भ्रूणपोष का केंद्रक: डिप्लोइड (2n)
- मॉस की पत्तियों की कोशिका: हाप्लोइड (n)
- फर्न के प्रोथैलस की कोशिकाएं: हाप्लोइड (n)
- मारकेशिया की जेमा कोशिका: हाप्लोइड (n)
- एकबीजपत्री की मैरिस्टम कोशिका: डिप्लोइड (2n)
- लिवरवर्ट के अंडाशय: डिप्लोइड (2n)
- फर्न के युग्मनज: डिप्लोइड (2n)
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