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सांख्यिकी | Class 11 Mathematics Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

सांख्यिकी | Class 11 Mathematics Notes

सांख्यिकी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सांख्यिकी from Class 11 Mathematics, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

13.4.2 वर्गीकृत आँकड़ों के लिए माध्य विचलन (Mean deviation for grouped data)

वर्गीकृत आँकड़ों के लिए माध्य विचलन की गणना दो प्रकार के बारंबारता बंटनों पर आधारित होती है: असतत बारंबारता बंटन और सतत बारंबारता बंटन।

(a) असतत बारंबारता बंटन में प्रेक्षणों के मान x_i और उनकी बारंबारता f_i दी जाती है। इस स्थिति में माध्य का सूत्र है:

माध्य (x̄) = (Σ x_i f_i) / (Σ f_i) = (Σ x_i f_i) / N

जहाँ N = Σ f_i है।

माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन ज्ञात करने के लिए प्रत्येक प्रेक्षण x_i का माध्य से विचलन |x_i – x̄| लिया जाता है और फिर इसका भारित औसत निकाला जाता है:

M.D.(x̄) = (Σ f_i |x_i – x̄|) / N

माध्यिका के सापेक्ष माध्य विचलन के लिए पहले माध्यिका ज्ञात की जाती है। माध्यिका वह मान है जिसके नीचे और ऊपर कुल बारंबारता का आधा भाग होता है। इसके बाद माध्यिका से विचलनों के निरपेक्ष मानों का भारित औसत निकाला जाता है:

M.D.(M) = (Σ f_i |x_i – M|) / N

(b) सतत बारंबारता बंटन में आँकड़ों को वर्गों में बांटा जाता है। प्रत्येक वर्ग का मध्य-बिंदु x_i माना जाता है। फिर असतत बंटन की तरह माध्य और माध्य विचलन की गणना की जाती है।

माध्य के सापेक्ष माध्य विचलन की गणना के लिए पद विचलन विधि का उपयोग किया जा सकता है, जिससे गणना सरल हो जाती है। इस विधि में एक कल्पित माध्य और सार्व गुणनखंड लेकर विचलनों को छोटा किया जाता है।

📊 Diagram: Figure 4: यदि सभी विचलनों में कोई सार्व गुणनखंड (common factor) है तो विचलनों को सरल करने के लिए इन्हें इस सार्व गुणनखंड से भाग देते हैं। इन नए विचलनों को पद विचलन कहते हैं। पद विचलन लेने की प्रक्रिया संख्या रे; Figure 5: विचलन और पद विचलन प्रेक्षणों के आकार को छोटा कर देते हैं, जिससे गुणन जैसी गणनाएँ सरल हो जाती हैं। मान लीजिए नया चर d_i = (x_i - a)/h हो जाता है, जहाँ ‘a’ कल्पित माध्य है व h सार्व गुणनखंड है

🧪 Activity: असतत और सतत बारंबारता बंटनों के लिए माध्य विचलन की गणना।

🔗 Connection: माध्य विचलन के बाद, अगला खंड मानक विचलन और प्रसरण की गणना पर केंद्रित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. आठ प्रेक्षणों का औसत तथा विचरण क्रमशः 9 तथा 9.25 हैं। यदि इनमें से छह प्रेक्षण 6, 7, 10, 12, 12 तथा 13 हैं, तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।

दी गई जानकारी: प्रेक्षणों की संख्या (n) = 8 औसत (x̄) = 9 विचरण (σ²) = 9.25 छः प्रेक्षण: 6, 7, 10, 12, 12, 13 मान लीजिए शेष दो प्रेक्षण x और y हैं।

1. औसत के अनुसार: (6 + 7 + 10 + 12 + 12 + 13 + x + y)/8 = 9 ⇒ (60 + x + y)/8 = 9 ⇒ 60 + x + y = 72 ⇒ x + y = 12

2. विचरण के अनुसार: विचरण σ² = [Σ(xᵢ - x̄)²]/n Σ(xᵢ²) = 6² + 7² + 10² + 12² + 12² + 13² + x² + y² = 36 + 49 + 100 + 144 + 144 + 169 + x² + y² = 642 + x² + y²

विचरण: σ² = [Σ(xᵢ²)/n] - (x̄)² 9.25 = [(642 + x² + y²)/8] - (9)² 9.25 = [(642 +

2. सात प्रेक्षणों का औसत तथा विचरण क्रमशः 8 तथा 16 हैं। यदि इनमें से पाँच प्रेक्षण 2, 4, 10, 12, 14 हैं, तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।

दी गई जानकारी: प्रेक्षणों की संख्या (n) = 7 औसत (x̄) = 8 विचरण (σ²) = 16 पाँच प्रेक्षण: 2, 4, 10, 12, 14 मान लीजिए शेष दो प्रेक्षण x और y हैं।

1. औसत के अनुसार: (2 + 4 + 10 + 12 + 14 + x + y)/7 = 8 ⇒ (42 + x + y)/7 = 8 ⇒ 42 + x + y = 56 ⇒ x + y = 14

2. विचरण के अनुसार: Σ(xᵢ²) = 2² + 4² + 10² + 12² + 14² + x² + y² = 4 + 16 + 100 + 144 + 196 + x² + y² = 460 + x² + y²

विचरण: σ² = [Σ(xᵢ²)/n] - (x̄)² 16 = [(460 + x² + y²)/7] - 64 ⇒ (460 + x² + y²)/7 = 80 ⇒ 460 + x² + y² = 560 ⇒ x² + y² = 100

अब x

3. चार प्रेक्षणों का औसत तथा मानक विचरण क्रमशः 8 तथा 4 हैं। यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 3 से गुणा कर दिया जाए, तो परिणामी प्रेक्षणों का औसत और मानक विचरण ज्ञात कीजिए।

दी गई जानकारी: औसत (x̄) = 8 मानक विचरण (σ) = 4 प्रेक्षणों की संख्या (n) = 4

यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 3 से गुणा किया जाए: नए प्रेक्षण: 3x₁, 3x₂, 3x₃, 3x₄

नया औसत = 3 × पुराना औसत = 3 × 8 = 24 नया मानक विचरण = 3 × पुराना मानक विचरण = 3 × 4 = 12

अतः परिणामी प्रेक्षणों का औसत 24 और मानक विचरण 12 है।

4. यदि n प्रेक्षण x₁, x₂, ..., xₙ का औसत x̄ तथा विचरण σ² हैं, तो सिद्ध कीजिए कि प्रेक्षणों ax₁, ax₂, ..., axₙ का औसत तथा विचरण क्रमशः ax̄ तथा a²σ² (a ≠ 0) हैं।

सिद्ध करने के लिए:

माना n प्रेक्षण x₁, x₂, ..., xₙ का औसत x̄ तथा विचरण σ² है।

नए प्रेक्षण: ax₁, ax₂, ..., axₙ

नया औसत: = (ax₁ + ax₂ + ... + axₙ)/n = a(x₁ + x₂ + ... + xₙ)/n = a x̄

नया विचरण: = [Σ(axᵢ - ax̄)²]/n = [Σa²(xᵢ - x̄)²]/n = a² [Σ(xᵢ - x̄)²]/n = a² σ²

अतः सिद्ध हुआ कि नए औसत ax̄ तथा नया विचरण a²σ² है।

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