सांख्यिकी | Class 11 Mathematics Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

सांख्यिकी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सांख्यिकी from Class 11 Mathematics, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
13.1 भूमिका (Introduction)
सांख्यिकी गणित की वह शाखा है जो विशेष उद्देश्य के लिए एकत्रित आँकड़ों के संग्रह, संगठन, प्रस्तुति और विश्लेषण से संबंधित है। इस अध्याय की शुरुआत में हम समझते हैं कि आँकड़ों का विश्लेषण एवं व्याख्या कर उनके आधार पर निर्णय लेना सांख्यिकी का मूल उद्देश्य है। पिछले अध्यायों में हमने आँकड़ों को तालिका और ग्राफ के रूप में प्रस्तुत करने की विधियाँ सीखी हैं, जिससे आँकड़ों के महत्वपूर्ण गुणों को समझना आसान होता है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय प्रवृत्ति की माप जैसे माध्य (Mean), माध्यिका (Median) और बहुलक (Mode) के माध्यम से आँकड़ों का प्रतिनिधि मान ज्ञात किया जाता है। ये माप हमें आँकड़ों के केंद्र के बारे में जानकारी देते हैं।
हालांकि, केवल केंद्रीय प्रवृत्ति की माप से आँकड़ों के पूरे व्यवहार को समझना संभव नहीं है। उदाहरण के लिए, दो बल्लेबाजों A और B के पिछले दस मैचों के रन समान माध्य और माध्यिका (53) होने के बावजूद उनके प्रदर्शन में भिन्नता होती है। बल्लेबाज A के रन 0 से 117 तक फैले हुए हैं जबकि बल्लेबाज B के रन 46 से 60 के बीच सीमित हैं। इसका अर्थ है कि B का प्रदर्शन अधिक स्थिर है जबकि A के रन अधिक बिखरे हुए हैं।
इसलिए, आँकड़ों के विश्लेषण के लिए परिवर्तनशीलता (Dispersion) या प्रकीर्णन (Scatter) का अध्ययन आवश्यक है। प्रकीर्णन की माप से पता चलता है कि आँकड़े केंद्रीय प्रवृत्ति के चारों ओर किस प्रकार फैले हुए हैं। इस अध्याय में हम प्रकीर्णन की विभिन्न मापों जैसे परिसर (Range), माध्य विचलन (Mean Deviation), मानक विचलन (Standard Deviation) आदि का अध्ययन करेंगे।
📊 Diagram: Figure 1: Karl Pearson; Figure 2: बल्लेबाज B के लिए; Figure 3: बल्लेबाज A के लिए
🧪 Activity: आँकड़ों के माध्य और माध्यिका की तुलना कर बिखराव का अवलोकन करना।
🔗 Connection: यह भूमिका प्रकीर्णन की मापों के अध्ययन की आवश्यकता को स्पष्ट करती है, जो अगले खंड में विस्तार से समझाया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. आठ प्रेक्षणों का औसत तथा विचरण क्रमशः 9 तथा 9.25 हैं। यदि इनमें से छह प्रेक्षण 6, 7, 10, 12, 12 तथा 13 हैं, तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।
दी गई जानकारी: प्रेक्षणों की संख्या (n) = 8 औसत (x̄) = 9 विचरण (σ²) = 9.25 छः प्रेक्षण: 6, 7, 10, 12, 12, 13 मान लीजिए शेष दो प्रेक्षण x और y हैं।
1. औसत के अनुसार: (6 + 7 + 10 + 12 + 12 + 13 + x + y)/8 = 9 ⇒ (60 + x + y)/8 = 9 ⇒ 60 + x + y = 72 ⇒ x + y = 12
2. विचरण के अनुसार: विचरण σ² = [Σ(xᵢ - x̄)²]/n Σ(xᵢ²) = 6² + 7² + 10² + 12² + 12² + 13² + x² + y² = 36 + 49 + 100 + 144 + 144 + 169 + x² + y² = 642 + x² + y²
विचरण: σ² = [Σ(xᵢ²)/n] - (x̄)² 9.25 = [(642 + x² + y²)/8] - (9)² 9.25 = [(642 +
2. सात प्रेक्षणों का औसत तथा विचरण क्रमशः 8 तथा 16 हैं। यदि इनमें से पाँच प्रेक्षण 2, 4, 10, 12, 14 हैं, तो शेष दो प्रेक्षण ज्ञात कीजिए।
दी गई जानकारी: प्रेक्षणों की संख्या (n) = 7 औसत (x̄) = 8 विचरण (σ²) = 16 पाँच प्रेक्षण: 2, 4, 10, 12, 14 मान लीजिए शेष दो प्रेक्षण x और y हैं।
1. औसत के अनुसार: (2 + 4 + 10 + 12 + 14 + x + y)/7 = 8 ⇒ (42 + x + y)/7 = 8 ⇒ 42 + x + y = 56 ⇒ x + y = 14
2. विचरण के अनुसार: Σ(xᵢ²) = 2² + 4² + 10² + 12² + 14² + x² + y² = 4 + 16 + 100 + 144 + 196 + x² + y² = 460 + x² + y²
विचरण: σ² = [Σ(xᵢ²)/n] - (x̄)² 16 = [(460 + x² + y²)/7] - 64 ⇒ (460 + x² + y²)/7 = 80 ⇒ 460 + x² + y² = 560 ⇒ x² + y² = 100
अब x
3. चार प्रेक्षणों का औसत तथा मानक विचरण क्रमशः 8 तथा 4 हैं। यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 3 से गुणा कर दिया जाए, तो परिणामी प्रेक्षणों का औसत और मानक विचरण ज्ञात कीजिए।
दी गई जानकारी: औसत (x̄) = 8 मानक विचरण (σ) = 4 प्रेक्षणों की संख्या (n) = 4
यदि प्रत्येक प्रेक्षण को 3 से गुणा किया जाए: नए प्रेक्षण: 3x₁, 3x₂, 3x₃, 3x₄
नया औसत = 3 × पुराना औसत = 3 × 8 = 24 नया मानक विचरण = 3 × पुराना मानक विचरण = 3 × 4 = 12
अतः परिणामी प्रेक्षणों का औसत 24 और मानक विचरण 12 है।
4. यदि n प्रेक्षण x₁, x₂, ..., xₙ का औसत x̄ तथा विचरण σ² हैं, तो सिद्ध कीजिए कि प्रेक्षणों ax₁, ax₂, ..., axₙ का औसत तथा विचरण क्रमशः ax̄ तथा a²σ² (a ≠ 0) हैं।
सिद्ध करने के लिए:
माना n प्रेक्षण x₁, x₂, ..., xₙ का औसत x̄ तथा विचरण σ² है।
नए प्रेक्षण: ax₁, ax₂, ..., axₙ
नया औसत: = (ax₁ + ax₂ + ... + axₙ)/n = a(x₁ + x₂ + ... + xₙ)/n = a x̄
नया विचरण: = [Σ(axᵢ - ax̄)²]/n = [Σa²(xᵢ - x̄)²]/n = a² [Σ(xᵢ - x̄)²]/n = a² σ²
अतः सिद्ध हुआ कि नए औसत ax̄ तथा नया विचरण a²σ² है।
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