ऊष्मागतिकी | Class 11 Chemistry Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

ऊष्मागतिकी – this guide gives you a concise, exam-ready overview of ऊष्मागतिकी from Class 11 Chemistry, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
5.1 ऊष्मागतिकी के तकनीकी शब्द
ऊष्मागतिकी में ऊर्जा के परिवर्तन को समझने के लिए कुछ तकनीकी शब्दों का ज्ञान आवश्यक है। सबसे पहले, ब्रह्मांड को दो भागों में विभाजित किया जाता है: निकाय और परिवेश। निकाय वह भाग है जिस पर प्रेक्षण किया जाता है, जबकि परिवेश उस निकाय के बाहर का शेष भाग होता है। निकाय और परिवेश मिलकर ब्रह्मांड बनाते हैं। निकाय को भौतिक सीमाओं जैसे बीकर या परखनली द्वारा परिभाषित किया जा सकता है, और इसे परिवेश से पृथक करने वाली सीमा को परिसीमा कहा जाता है। परिसीमा के माध्यम से हम ऊर्जा और द्रव्य के संचरण को नियंत्रित कर सकते हैं।
निकाय के तीन प्रकार होते हैं: खुला, बंद और विलगित। खुला निकाय वह होता है जिसमें ऊर्जा और द्रव्य दोनों का विनिमय परिवेश के साथ संभव होता है, जैसे खुले बीकर में अभिकारक। बंद निकाय में द्रव्य का विनिमय नहीं होता, पर ऊर्जा का हो सकता है, जैसे बंद बीकर। विलगित निकाय में ऊर्जा और द्रव्य दोनों का विनिमय नहीं होता, जैसे थर्मस फ्लास्क।
किसी निकाय की अवस्था उसके मापन योग्य स्थूल गुणों जैसे दाब (p), आयतन (V), ताप (T), और संघटन से व्यक्त की जाती है। ये गुण अवस्था-फलन कहलाते हैं क्योंकि इनका मान निकाय की अवस्था पर निर्भर करता है, न कि प्रक्रम के पथ पर। उदाहरण के लिए, तापमान में परिवर्तन पथ-स्वतंत्र होता है।
आंतरिक ऊर्जा (U) ऊष्मागतिकी में एक महत्वपूर्ण अवस्था-फलन है, जो निकाय की कुल ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करता है। यह ऊर्जा रासायनिक, यांत्रिक, वैद्युत आदि रूपों में हो सकती है। आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन तब होता है जब निकाय पर कार्य किया जाता है या निकाय ऊष्मा ग्रहण या उत्सर्जित करता है। रूद्धोष्म प्रक्रम में, जहाँ ऊष्मा का आदान-प्रदान नहीं होता, आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन कार्य के बराबर होता है। इसी कारण आंतरिक ऊर्जा एक अवस्था-फलन है।
ऊष्मा (q) वह ऊर्जा है जो तापांतर के कारण निकाय और परिवेश के बीच स्थानांतरित होती है। यदि निकाय ऊष्मा ग्रहण करता है तो q धनात्मक होता है, और यदि निकाय ऊष्मा उत्सर्जित करता है तो q ऋणात्मक होता है।
ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ΔU = q + w है, जहाँ ΔU आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन, q ऊष्मा, और w कार्य है। यह नियम ऊर्जा संरक्षण का नियम है, जो कहता है कि ऊर्जा न तो बनाई जा सकती है और न ही नष्ट, केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
इस प्रकार, ऊष्मागतिकी के तकनीकी शब्द हमें ऊर्जा के विभिन्न रूपों और उनके परिवर्तनों को समझने में सहायता करते हैं।
📊 Diagram: चित्र 5.1 : परिवेश एवं निकाय; (क) खुला निकाय; (ख) बंद निकाय; (ग) विलगित निकाय
🧪 Activity: छात्रों को बीकर में अभिक्रिया मिश्रण को निकाय मानकर परिवेश के साथ ऊर्जा और द्रव्य के विनिमय का अवलोकन करना।
🔗 Connection: यह अनुभाग ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम और ऊर्जा के विभिन्न रूपों के अध्ययन की नींव रखता है, जो अगले अनुभाग में विस्तार से समझाया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न . कपूर को वाष्पीकृत करने पर इसकी एन्ट्रॉपी –
(ख) बढती है
प्रश्न. सभी तत्वों की एन्थैल्पी उनकी सन्दर्भ- अवस्था में होती है-
ख) शून्य
प्रश्न . निम्नलिखित में से कौन-सा संबंध सही नहीं है?
(घ) ∆U=Q+R∆T
प्रश्न . आबंध एन्थल्पी किस पर निर्भर करती है-
(घ) उपरोक्त सभी
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