अधिकार | Class 11 Political Science Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

अधिकार – this guide gives you a concise, exam-ready overview of अधिकार from Class 11 Political Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
5.2 अधिकार कहाँ से आते हैं?
अधिकारों की उत्पत्ति और उनका आधार राजनीतिक सिद्धांतकारों द्वारा विभिन्न रूपों में समझाया गया है। 17वीं और 18वीं शताब्दी के विचारकों ने प्राकृतिक अधिकारों की अवधारणा प्रस्तुत की, जिसके अनुसार जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति के अधिकार हमें जन्म से प्राप्त होते हैं और इन्हें कोई भी मानव या राज्य छीन नहीं सकता। ये अधिकार मनुष्य के जन्मजात स्वाभाविक अधिकार माने जाते हैं। हालांकि, आधुनिक काल में प्राकृतिक अधिकारों की अवधारणा को चुनौती दी गई और मानवाधिकारों की अवधारणा उभरी, जो यह मानती है कि अधिकार मानवता के आधार पर समान रूप से सभी को प्राप्त हैं, चाहे वे किसी भी जाति, धर्म, लिंग या सामाजिक स्थिति के हों। इस विचार के अनुसार, सभी मनुष्य समान मूल्य और गरिमा के अधिकारी हैं और उन्हें स्वतंत्रता तथा समान अवसर मिलना चाहिए। जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट ने मानव गरिमा की अवधारणा को गहराई से समझाया, जिसमें उन्होंने कहा कि मनुष्य की गरिमा अनमोल है और उसे केवल उपयोग की वस्तु के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कांट के अनुसार, हमें दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करना चाहिए जैसा हम अपने लिए चाहते हैं। इस नैतिक आधार पर मानवाधिकारों का विकास हुआ, जो नस्ल, जाति, धर्म, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव का विरोध करते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस विचार को स्वीकार करते हुए मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा की, जो सभी मनुष्यों के समान अधिकारों को मान्यता देती है। समय के साथ, अधिकारों की सूची में पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ जल, स्वच्छ हवा, बच्चों के अधिकार जैसे नए अधिकार भी शामिल हुए हैं। ये सभी अधिकार मानव गरिमा की रक्षा और बेहतर जीवन के लिए आवश्यक माने जाते हैं।
🧪 Activity: पिछले कुछ महीनों के अखबारों को पढ़कर उन जन आंदोलनों और संगठनों की सूची बनाइए जिन्होंने नए अधिकारों की मांग की है।
🔗 Connection: अगले भाग में अधिकारों की कानूनी मान्यता और राज्य सत्ता के साथ उनके संबंध की व्याख्या होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. अधिकार क्या हैं और वे महत्वपूर्ण क्यों हैं? अधिकारों का दावा करने के लिए उपयुक्त आधार क्या हो सकते हैं?
अधिकार वे वैध और नैतिक अधिकार हैं जो व्यक्ति या समूह को कुछ कार्य करने, कुछ पाने या कुछ न पाने की स्वतंत्रता देते हैं। ये महत्वपूर्ण इसलिए हैं क्योंकि वे व्यक्ति की स्वतंत्रता, सम्मान और समानता की रक्षा करते हैं तथा समाज में न्याय और व्यवस्था बनाए रखते हैं। अधिकारों का दावा करने के लिए उपयुक्त आधार हो सकते हैं - प्राकृतिक अधिकार (जो जन्मजात होते हैं), कानूनी अधिकार (जो कानून द्वारा दिए जाते हैं), और सामाजिक-सांस्कृतिक अधिकार (जो समाज की मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित होते हैं)।
2. किन आधारों पर यह अधिकार अपनी प्रकृति में सार्वभौमिक माने जाते हैं?
अधिकारों को सार्वभौमिक माना जाता है क्योंकि वे सभी मनुष्यों के लिए समान रूप से लागू होते हैं। इसके आधार हैं - (i) मानवता का समान मूल: सभी मनुष्य समान हैं और उनके पास समान गरिमा है। (ii) प्राकृतिक अधिकार सिद्धांत: अधिकार जन्मजात और अविभाज्य होते हैं। (iii) अंतरराष्ट्रीय मान्यता: जैसे संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार घोषणापत्र में सभी के लिए समान अधिकारों की बात की गई है। (iv) न्याय और समानता की आवश्यकता: समाज में न्याय स्थापित करने के लिए अधिकारों का सार्वभौमिक होना आवश्यक है।
3. संक्षेप में उन नए अधिकारों की चर्चा कीजिए, जो हमारे देश में सामने रखे जा रहे हैं। उदाहरण के लिए आदिवासियों के अपने रहवास और जीने के तरीके को संरक्षित रखने तथा बच्चों के बैंधुआ मजदूरी के खिलाफ अधिकार जैसे नए अधिकारों को लिया जा सकता है।
भारत में नए अधिकारों में सामाजिक और आर्थिक न्याय को बढ़ावा देने वाले अधिकार शामिल हैं। उदाहरण के लिए, आदिवासियों के अधिकार जो उनके पारंपरिक रहवास, जंगलों और संसाधनों की सुरक्षा करते हैं, ताकि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान और जीवनशैली को बनाए रख सकें। इसके अलावा, बच्चों के बंधुआ मजदूरी के खिलाफ अधिकार, जो बाल श्रम को रोकने और बच्चों को शिक्षा तथा सुरक्षित बचपन देने के लिए बनाए गए हैं। ये नए अधिकार सामाजिक न्याय, समानता और संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
4. राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक अधिकारों में अंतर बताइये। हर प्रकार के अधिकार के उदाहरण भी दीजिए।
राजनीतिक अधिकार वे अधिकार हैं जो व्यक्ति को शासन में भाग लेने, मतदान करने, चुनाव लड़ने आदि की स्वतंत्रता देते हैं। उदाहरण: मतदान का अधिकार। आर्थिक अधिकार वे अधिकार हैं जो व्यक्ति को आर्थिक संसाधनों, रोजगार, उचित वेतन आदि से संबंधित होते हैं। उदाहरण: काम करने का अधिकार। सांस्कृतिक अधिकार वे अधिकार हैं जो व्यक्ति को अपनी भाषा, धर्म, संस्कृति और परंपराओं को बनाए रखने की स्वतंत्रता देते हैं। उदाहरण: अपनी भाषा में शिक्षा का अधिकार।
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