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समानता | Class 11 Political Science Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 5 मिनट का पठन

समानता | Class 11 Political Science Notes

समानता – this guide gives you a concise, exam-ready overview of समानता from Class 11 Political Science, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

भारत में आर्थिक असमानता को दर्शाने वाले कुछ आँकड़े

भारत में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच आर्थिक असमानता स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, ग्रामीण परिवारों के पास बिजली का कनेक्शन 55% है जबकि शहरी परिवारों में यह 93% है। सरकारी नल का कनेक्शन ग्रामीणों में 35% और शहरी में 71% है। स्नानघर, टेलीविजन, स्कूटर, कार जैसी सुविधाओं में भी ग्रामीण और शहरी परिवारों के बीच भारी अंतर है। ये आँकड़े यह दर्शाते हैं कि आर्थिक संसाधनों और सुविधाओं का वितरण असमान है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र के लोग शहरी क्षेत्र के मुकाबले पिछड़े हुए हैं। इसके अलावा, सामाजिक असमानताएँ जैसे कि परिवार में पक्षपात भी समानता के मार्ग में बाधा उत्पन्न करते हैं। इस तरह की असमानताएँ सामाजिक न्याय और विकास के लिए चुनौती हैं।

📊 Diagram: हमारे चारों और बहुत-सी असमानताएँ ऐसी हैं, जिन पर कोई आपत्ति नहीं करता। ऐसे में देश और दुनिया की असमानताओं पर बात करना बकवास है। जरा इस पर ही ध्यान दो कि कैसे मेरे माता-पिता मेरे भाई की तरफदारी करते हैं।

🧪 Activity: अपने परिवार की सुविधाओं की तुलना उपरोक्त आँकड़ों से करें और असमानताओं पर चर्चा करें।

🔗 Connection: यह खंड भारत में आर्थिक असमानताओं को समझने के बाद समानता की परिभाषा और उसके विभिन्न आयामों की ओर बढ़ता है।

Table on page 4 (6×4)

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बिजली का कनेक्शन5593
मकान में सरकारी नल का कनेक्शन3571
मकान में स्नानघर4587
टेलिविजन3377
स्कूटर/मोपेड/मोटर साइकिल1435
कार/जीप/वेन210

Table on page 10 (10×2)

जाति/समुदायप्रति हजार लोगों में स्नातकों की संख्या
अनुसूचित जाति47
मुस्लिम61
हिन्दू (अन्य पिछड़ी जातियाँ)86
अनुसूचित जनजाति109
ईसाई237
सिक्ख250
हिन्दू (उच्च जातियाँ)253
अन्य धार्मिक समुदाय315
अखित भारतीय औसत155

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कुछ लोगों का तर्क है कि असमानता प्राकृतिक है जबकि कुछ अन्य का कहना है कि वास्तव में समानता प्राकृतिक है और जो असमानता हम चारों ओर देखते हैं उसे समाज ने पैदा किया है। आप किस मत का समर्थन करते हैं? कारण दीजिए।

यह प्रश्न विचार-विमर्श पर आधारित है। मैं इस मत का समर्थन करता हूँ कि समानता प्राकृतिक है और जो असमानता हम देखते हैं वह समाज ने पैदा की है। कारण: प्राकृतिक रूप से मनुष्य समान हैं, लेकिन सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक संरचनाओं में असमानता उत्पन्न होती है। समाज में सत्ता, संसाधनों और अवसरों का असमान वितरण असमानता का कारण है। अतः असमानता प्राकृतिक नहीं बल्कि सामाजिक कारणों से उत्पन्न होती है।

2. एक मत है कि पूर्ण आर्थिक समानता न तो संभव है और न ही वांछनीय। एक समाज ज्यादा से ज्यादा बहुत अमीर और बहुत गरीब लोगों के बीच की खाई को कम करने का प्रयास कर सकता है। क्या आप इस तर्क से सहमत हैं? अपना तर्क दीजिए।

मैं इस तर्क से सहमत हूँ। पूर्ण आर्थिक समानता संभव नहीं है क्योंकि लोगों की योग्यता, मेहनत, और रुचि अलग-अलग होती है। साथ ही, पूर्ण समानता से प्रोत्साहन की कमी हो सकती है जिससे विकास रुक सकता है। परन्तु समाज को अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम करने के लिए प्रयास करना चाहिए ताकि सभी को जीवन यापन के लिए आवश्यक संसाधन मिल सकें और सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो।

3. नीचे दी गई अवधारणा और उसके उचित उदाहरणों में मेल बैठायें। - (क) सकारात्मक कार्यवाई - (ख) अवसर की समानता - (ग) समान अधिकार - (1) प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार है। - (2) बैंक वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज की ऊँची दर देते हैं। - (3) प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क शिक्षा मिलनी चाहिए।

मेल इस प्रकार होगा: (क) सकारात्मक कार्यवाई - (2) बैंक वरिष्ठ नागरिकों को ब्याज की ऊँची दर देते हैं। (ख) अवसर की समानता - (3) प्रत्येक बच्चे को निःशुल्क शिक्षा मिलनी चाहिए। (ग) समान अधिकार - (1) प्रत्येक वयस्क नागरिक को मत देने का अधिकार है।

व्याख्या:

  • सकारात्मक कार्यवाई का अर्थ है विशेष समूहों को अतिरिक्त सहायता देना ताकि वे पिछड़े न रहें।
  • अवसर की समानता का मतलब है सभी को समान अवसर मिलना।
  • समान अधिकार का तात्पर्य है सभी को समान कानूनी अधिकार प्राप्त होना।
4. किसानों की समस्या से संबंधित एक सरकारी रिपोर्ट के अनुसार छोटे और सीमांत किसानों को बाजार से अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिलता। रिपोर्ट में सलाह दी गई कि सरकार को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए। लेकिन यह प्रयास केवल लघु और सीमांत किसानों तक ही सीमित रहना चाहिए। क्या यह सलाह समानता के सिद्धांत से संभव है?

यह सलाह समानता के सिद्धांत से संभव है क्योंकि लघु और सीमांत किसान आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग हैं जिन्हें उचित मूल्य नहीं मिल पाता। सरकार का हस्तक्षेप उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और असमानता को कम करने के लिए आवश्यक है। इसलिए केवल इन्हीं किसानों तक प्रयास सीमित रखना समानता के सिद्धांत के अनुरूप है।

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