Biologyकक्षा 11श्वसन और गैसों का विनिमयहिंदी

श्वसन और गैसों का विनिमय | Class 11 Biology Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

श्वसन और गैसों का विनिमय | Class 11 Biology Notes

श्वसन और गैसों का विनिमय – this guide gives you a concise, exam-ready overview of श्वसन और गैसों का विनिमय from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

14.1 श्वसन के अंग

श्वसन एक अत्यंत महत्वपूर्ण जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा जीव अपने शरीर में ऊर्जा उत्पादन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं और शरीर में उत्पन्न कार्बन-डाइऑक्साइड को बाहर निकालते हैं। विभिन्न प्राणियों में श्वसन की क्रियाविधि उनके आवास और शरीर संगठन के अनुसार भिन्न होती है। अकशेरुकी जैसे स्पंज, सीलेंटेरेटा, चपटेकूमि आदि अपने पूरे शरीर की सतह से सरल विसरण द्वारा गैसों का आदान-प्रदान करते हैं। केंचुए अपनी आर्द्र त्वचा (आई क्यूटिकल) के माध्यम से श्वसन करते हैं। कीटों में श्वसन नलिकाओं का जाल होता है जो वायु को शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाता है। जलीय आर्थोपोडा और मौलस्का में श्वसन क्लोम (गिल) द्वारा होता है, जबकि स्थलचर प्राणियों में श्वसन फेफड़ों द्वारा होता है। कशेरुकों में मछलियाँ क्लोम से श्वसन करती हैं, जबकि उभयचर, सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी फेफड़ों से श्वसन करते हैं। उभयचर जैसे मेंढक अपनी आर्द्र त्वचा से भी श्वसन कर सकते हैं।

मानव में श्वसन तंत्र में नाक, ग्रसनी, कंठ, श्वासनली, ब्रोंकाई, ब्रोंकिओल्स और फेफड़े शामिल हैं। नाक के माध्यम से वायु प्रवेश करती है, जो नासा कक्ष से ग्रसनी में जाती है। ग्रसनी आहार और वायु दोनों के लिए मार्ग है। कंठ ध्वनि उत्पन्न करता है और कंठच्छद (epiglottis) भोजन के दौरान श्वासनली को ढकता है ताकि भोजन गलती से श्वासनली में न जाए। श्वासनली वक्ष गुहा के मध्य तक जाती है और दो प्राथमिक श्वसनीयों में विभाजित होती है, जो आगे द्वितीयक, तृतीयक श्वसनी तथा अंतस्थ श्वसनिकाओं में विभाजित होती हैं। अंतस्थ श्वसनिकाएं कृपिकाओं (अल्विओली) में खुलती हैं, जहाँ गैसों का विनिमय होता है। फेफड़े द्विस्तरीय फुप्फुसावरण से ढके होते हैं, जो घर्षण को कम करता है।

श्वसन तंत्र का चालन भाग (नाक से अंतस्थ श्वसनिकाओं तक) वायु को कृपिकाओं तक पहुँचाता है, उसे शुद्ध, आर्द्र और शरीर के तापमान तक लाता है। विनिमय भाग (कृपिकाएं) रक्त और वायु के बीच गैसों का आदान-प्रदान करता है। वक्ष गुहा में स्थित फेफड़े डायाफ्राम और पसलियों द्वारा नियंत्रित होते हैं, जो वक्ष गुहा के आयतन में परिवर्तन कर श्वसन क्रिया को संचालित करते हैं।

📊 Diagram: चित्र 14.1 मानव श्वसन तंत्र का आरेखीय दृश्य (साथ ही बाएं फेफड़ें का अनुप्रस्थ काट दिखाया गया है)

🔗 Connection: यह खंड मानव श्वसन तंत्र की संरचना की जानकारी देता है, जो अगली कड़ी में श्वसन की क्रियाविधि को समझने के लिए आधार प्रदान करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कीड़े के संबंध में गलत बयान चुनिये

१.पेट की मांसपेशियां श्वसन में भाग नहीं लेती हैं

__________ श्वसन सतह की एक विशेषता नहीं है

१ सूखा

मानव त्वचा श्वसन अंग के रूप में कार्य नहीं कर सकती क्योंकि

4.ऊपर के सभी

परिपक्व स्तनधारी एरिथ्रोसाइट्स में श्वसन __________ हैं

4..अवायवीय

इस अध्याय में महारत हासिल करें

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