पादप वृद्धि एवं परिवर्धन | Class 11 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

पादप वृद्धि एवं परिवर्धन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पादप वृद्धि एवं परिवर्धन from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
13.1 वृद्धि
वृद्धि किसी जीवित वस्तु की वह प्रक्रिया है जिसमें उसका आकार, आयतन या कोशिकाओं की संख्या में स्थायी और अनिवार्य बढ़ोतरी होती है। पादपों में वृद्धि एक अवयव, कोशिका या अंग के आधार में स्थायी बढ़ोतरी के रूप में होती है। यह प्रक्रिया उपापचयी क्रियाओं से जुड़ी होती है, जिसमें ऊर्जा का व्यय होता है। उदाहरण के लिए, पत्ती का फैलाव भी वृद्धि का एक रूप है, परन्तु जल में लकड़ी के टुकड़े का फैलाव वृद्धि नहीं माना जाता क्योंकि वह स्थायी नहीं होता।
पादपों की वृद्धि अनूठी होती है क्योंकि उनमें मेरिस्टेम (विभज्योतक) ऊतक होते हैं, जो जीवन भर नई कोशिकाओं का उत्पादन करते रहते हैं। ये ऊतक कोशिका विभाजन की क्षमता रखते हैं और पौधे की लंबाई तथा चौड़ाई में वृद्धि करते हैं। अग्रस्थ वृद्धि (प्राथमिक वृद्धि) मुख्यतः लंबाई में होती है, जबकि पार्श्व वृद्धि (द्वितीयक वृद्धि) चौड़ाई में होती है।
वृद्धि को मापने के लिए विभिन्न मात्रकों का उपयोग किया जाता है, जैसे ताजी भार, शुष्क भार, लंबाई, क्षेत्रफल, आयतन और कोशिकाओं की संख्या। उदाहरण के लिए, मक्के की मूल शिखाग्र विभज्योतक में प्रति घंटे हजारों नई कोशिकाएं बनती हैं, जबकि तरबूज में कोशिकाओं का आकार लाखों गुना बढ़ सकता है।
वृद्धि तीन चरणों में होती है: कोशिका विभाजन (विभज्योतकीय चरण), कोशिका दीर्घकरण (दीर्घकरण चरण) और परिपक्वता (परिपक्वता चरण)। विभज्योतक क्षेत्र में कोशिकाएं लगातार विभाजित होती हैं, दीर्घकरण क्षेत्र में कोशिकाएं आकार में बढ़ती हैं, और परिपक्वता क्षेत्र में कोशिकाएं अपने अंतिम आकार और कार्य को प्राप्त करती हैं।
वृद्धि दर को दो प्रकार से मापा जाता है: अंकगणितीय वृद्धि, जिसमें वृद्धि रेखीय होती है, और ज्यामितीय वृद्धि, जिसमें वृद्धि चरघातांकी होती है। ज्यामितीय वृद्धि में कोशिकाएं समसूत्री विभाजन करती हैं, जिससे वृद्धि तेजी से होती है। अधिकांश पौधों में वृद्धि एक सिग्मायड (एस) वक्र का अनुसरण करती है, जिसमें प्रारंभ में वृद्धि धीमी, मध्य में तीव्र और अंत में स्थिर हो जाती है।
वृद्धि के लिए आवश्यक कारकों में जल, ऑक्सीजन, पोषक तत्व, उपयुक्त तापमान, प्रकाश और गुरुत्वाकर्षण शामिल हैं। जल कोशिका विभाजन और दीर्घकरण के लिए आवश्यक है, ऑक्सीजन ऊर्जा उत्पादन में सहायक है, और पोषक तत्व कोशिका निर्माण के लिए आवश्यक हैं। तापमान और प्रकाश भी वृद्धि की गति और दिशा को प्रभावित करते हैं।
📊 Diagram: चित्र 13.1 सेम में अंकुरण एवं नवोद्भिदों का परिवर्धन
🧪 Activity: कोशिका विभाजन और दीर्घकरण के चरणों को समझने के लिए मूल शिखाग्र का अध्ययन करें।
🔗 Connection: यह वृद्धि की मूल अवधारणा को समझाता है, जो अगले खंड में विभेदन, निर्विभेदन और पुनर्विभेदन की प्रक्रियाओं से जुड़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपको कृत्रिम माध्यम में विभेदन की क्षमता के साथ एक ऊतक दिया जाता है। शूटिंग के साथ-साथ जड़ों का फूटना सुनिश्चित करने के लिए, हार्मोन के निम्नलिखित जोड़े में से आप कौन सा चुनेंगे ?
२ औक्सिन और साइटोकिनिन
1. वृद्धि, विभेदन, परिवर्धन, निर्विभेदन, पुनर्विभेदन, सीमित वृद्धि, मेरिस्टेम तथा वृद्धि दर की परिभाषा दें।
वृद्धि: किसी जीव में आकार, आयतन या द्रव्यमान में स्थायी वृद्धि को वृद्धि कहते हैं। विभेदन: कोशिकाओं का विभाजन कर नए कोशिकाओं का निर्माण करना विभेदन कहलाता है। परिवर्धन: कोशिकाओं का आकार बढ़ना परिवर्धन कहलाता है। निर्विभेदन: कोशिका विभाजन की प्रक्रिया का समाप्त होना निर्विभेदन कहलाता है। पुनर्विभेदन: विभेदन की प्रक्रिया का पुनः आरंभ होना पुनर्विभेदन कहलाता है। सीमित वृद्धि: ऐसी वृद्धि जो एक निश्चित सीमा तक ही होती है, जैसे पादपों के अंगों की वृद्धि। मेरिस्टेम: वे ऊतक जो कोशिका विभाजन करते हैं और
2. पुष्टित पौधों के जीवन में किसी एक प्राचालिक (Parameter) से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता है, क्यों?
किसी एक प्राचालिक से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता क्योंकि पौधों की वृद्धि बहुपरामीय होती है। पौधों में वृद्धि केवल ऊंचाई या वजन से नहीं, बल्कि कोशिका संख्या, आकार, आयतन, और द्रव्यमान के विभिन्न पहलुओं से होती है। इसलिए, एकल प्राचालिक से पूरी वृद्धि को समझना संभव नहीं है।
3. संक्षिप्त वर्णित करें— (अ) अंकगणितीय वृद्धि (ब) ज्यामितीय वृद्धि (स) सिग्माइड वृद्धि वक्र (द) संपूर्ण एवं सापेक्ष वृद्धि दर
(अ) अंकगणितीय वृद्धि: वृद्धि की वह प्रक्रिया जिसमें वृद्धि समान मात्रा में होती है, जैसे 1, 2, 3, 4 ... (ब) ज्यामितीय वृद्धि: वृद्धि की वह प्रक्रिया जिसमें वृद्धि अनुपात में होती है, जैसे 1, 2, 4, 8 ... (स) सिग्माइड वृद्धि वक्र: यह वृद्धि वक्र S-आकार का होता है जिसमें प्रारंभ में वृद्धि धीमी, मध्य में तीव्र और अंत में स्थिर हो जाती है। (द) संपूर्ण वृद्धि दर: किसी अवधि में कुल वृद्धि की दर। सापेक्ष वृद्धि दर: किसी समय में वृद्धि की दर को उस समय की कुल मात्रा से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
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