Chapter 13
Chapter 13 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 11 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
13.1 वृद्धि
व्याख्या13.1 वृद्धि
वृद्धि किसी जीवित वस्तु की वह प्रक्रिया है जिसमें उसका आकार, आयतन या कोशिकाओं की संख्या में स्थायी और अनिवार्य बढ़ोतरी होती है। पादपों में वृद्धि एक अवयव, कोशिका या अंग के आधार में स्थायी बढ़ोतरी के रूप में होती है। यह प्रक्रिया उपापचयी क्रियाओं से जुड़ी होती है, जिसमें ऊर्जा का व्यय होता है। उदाहरण के लिए, पत्ती का फैलाव भी वृद्धि का एक रूप है, परन्तु जल में लकड़ी के टुकड़े का फैलाव वृद्धि नहीं माना जाता क्योंकि वह स्थायी नहीं होता। पादपों की वृद्धि अनूठी होती है क्योंकि उनमें मेरिस्टेम (विभज्योतक) ऊतक होते हैं, जो जीवन भर नई कोशिकाओं का उत्पादन करते रहते हैं। ये ऊतक कोशिका विभाजन की क्षमता रखते हैं और पौधे की लंबाई तथा चौड़ाई में वृद्धि करते हैं। अग्रस्थ वृद्धि (प्राथमिक वृद्धि) मुख्यतः लंबाई में होती है, जबकि पार्श्व वृद्धि (द्वितीयक वृद्धि) चौड़ाई में होती है। वृद्धि को मापने के लिए विभिन्न मात्रकों का उपयोग किया जाता है, जैसे ताजी भार, शुष्क भार, लंबाई, क्षेत्रफल, आयतन और कोशिकाओं की संख्या। उदाहरण के लिए, मक्के की मूल शिखाग्र विभज्योतक में प्रति घंटे हजारों नई कोशिकाएं बनती हैं, जबकि तरबूज में कोशिकाओं का आकार लाखों गुना बढ़ सकता है। वृद्धि तीन चरणों में होती है: कोशिका विभाजन (विभज्योतकीय चरण), कोशिका दीर्घकरण (दीर्घकरण चरण) और परिपक्वता (परिपक्वता चरण)। विभज्योतक क्षेत्र में कोशिकाएं लगातार विभाजित होती हैं, दीर्घकरण क्षेत्र में कोशिकाएं आकार में बढ़ती हैं, और परिपक्वता क्षेत्र में कोशिकाएं अपने अंतिम आकार और कार्य को प्राप्त करती हैं। वृद्धि दर को दो प्रकार से मापा जाता है: अंकगणितीय वृद्धि, जिसमें वृद्धि रेखीय होती है, और ज्यामितीय वृद्धि, जिसमें वृद्धि चरघातांकी होती है। ज्यामितीय वृद्धि में कोशिकाएं समसूत्री विभाजन करती हैं, जिससे वृद्धि तेजी से होती है। अधिकांश पौधों में वृद्धि एक सिग्मायड (एस) वक्र का अनुसरण करती है, जिसमें प्रारंभ में वृद्धि धीमी, मध्य में तीव्र और अंत में स्थिर हो जाती है। वृद्धि के लिए आवश्यक कारकों में जल, ऑक्सीजन, पोषक तत्व, उपयुक्त तापमान, प्रकाश और गुरुत्वाकर्षण शामिल हैं। जल कोशिका विभाजन और दीर्घकरण के लिए आवश्यक है, ऑक्सीजन ऊर्जा उत्पादन में सहायक है, और पोषक तत्व कोशिका निर्माण के लिए आवश्यक हैं। तापमान और प्रकाश भी वृद्धि की गति और दिशा को प्रभावित करते हैं।
- वृद्धि स्थायी और अनिवार्य बढ़ोतरी है जो ऊर्जा के व्यय पर होती है।
- पादपों में मेरिस्टेम ऊतक जीवन भर नई कोशिकाएं बनाते हैं।
- वृद्धि के तीन चरण हैं: विभज्योतकीय, दीर्घकरण, और परिपक्वता।
- वृद्धि को मापने के लिए ताजी भार, शुष्क भार, लंबाई, क्षेत्रफल आदि का उपयोग होता है।
- वृद्धि दर अंकगणितीय (रेखीय) या ज्यामितीय (चरघातांकी) हो सकती है।
- जल, ऑक्सीजन, पोषक तत्व, तापमान, प्रकाश और गुरुत्वाकर्षण वृद्धि के लिए आवश्यक हैं।
- 📌 वृद्धि: किसी जीवित वस्तु की स्थायी और अनिवार्य बढ़ोतरी।
- 📌 मेरिस्टेम: विभज्योतक ऊतक जो नई कोशिकाएं बनाते हैं।
- 📌 अग्रस्थ वृद्धि: पौधे की लंबाई में वृद्धि।
13.1.1 पादप वृद्धि प्रायः अपरिमित है
व्याख्या13.1.1 पादप वृद्धि प्रायः अपरिमित है
पादपों की वृद्धि अपरिमित होती है क्योंकि उनके शरीर में मेरिस्टेम ऊतक होते हैं जो जीवन भर सक्रिय रहते हैं और नई कोशिकाएं बनाते रहते हैं। मेरिस्टेम ऊतक विभाजन की क्षमता रखते हैं और इन्हीं की वजह से पौधे की लंबाई और चौड़ाई बढ़ती रहती है। अग्रस्थ मेरिस्टेम (मूल शिखाग्र और प्ररोह शिखाग्र) पौधे की लंबाई में वृद्धि करते हैं, जबकि पाश्व मेरिस्टेम (संवहनी कैबियम और कार्क कैबियम) चौड़ाई में वृद्धि करते हैं। यदि मेरिस्टेम ऊतकों का विभाजन बंद हो जाए तो वृद्धि भी रुक जाती है। इसलिए मेरिस्टेम की सक्रियता ही पौधे की निरंतर वृद्धि का कारण है। पार्श्व वृद्धि मुख्यतः द्विबीज पादपों में होती है और यह संवहनी कैबियम और कार्क कैबियम के सक्रिय होने से संभव होती है। ये ऊतक तने और जड़ों की मोटाई बढ़ाते हैं। इस प्रकार, पादपों में वृद्धि की प्रक्रिया मेरिस्टेम ऊतकों की सक्रियता पर निर्भर करती है, जो जीवन भर नई कोशिकाएं बनाते रहते हैं और पौधे को लंबाई तथा चौड़ाई में बढ़ने में सक्षम बनाते हैं।
- पादपों की वृद्धि अपरिमित होती है क्योंकि मेरिस्टेम ऊतक सक्रिय रहते हैं।
- अग्रस्थ मेरिस्टेम लंबाई में वृद्धि करता है।
- पाश्व मेरिस्टेम चौड़ाई में वृद्धि करता है।
- यदि मेरिस्टेम ऊतकों का विभाजन बंद हो जाए तो वृद्धि रुक जाती है।
- संवहनी कैबियम और कार्क कैबियम द्वितीयक वृद्धि के लिए जिम्मेदार हैं।
- 📌 मेरिस्टेम: विभाजनशील ऊतक जो नई कोशिकाएं उत्पन्न करते हैं।
- 📌 अग्रस्थ वृद्धि: लंबाई में वृद्धि।
- 📌 पार्श्व वृद्धि: चौड़ाई में वृद्धि।
13.1.2 वृद्धि माप योग्य है
व्याख्या13.1.2 वृद्धि माप योग्य है
वृद्धि को मापना आवश्यक होता है ताकि हम किसी पौधे या उसके अंग की वृद्धि की गति और मात्रा का पता लगा सकें। कोशिका स्तर पर वृद्धि जीवद्रव्य की मात्रा में वृद्धि के रूप में होती है, लेकिन जीवद्रव्य को सीधे मापना कठिन होता है। इसलिए वृद्धि को मापने के लिए
अभ्यास प्रश्न — Chapter 13
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.आपको कृत्रिम माध्यम में विभेदन की क्षमता के साथ एक ऊतक दिया जाता है। शूटिंग के साथ-साथ जड़ों का फूटना सुनिश्चित करने के लिए, हार्मोन के निम्नलिखित जोड़े में से आप कौन सा चुनेंगे ?
उत्तर:
२ औक्सिन और साइटोकिनिन
Q2.1. वृद्धि, विभेदन, परिवर्धन, निर्विभेदन, पुनर्विभेदन, सीमित वृद्धि, मेरिस्टेम तथा वृद्धि दर की परिभाषा दें।
उत्तर:
वृद्धि: किसी जीव में आकार, आयतन या द्रव्यमान में स्थायी वृद्धि को वृद्धि कहते हैं। विभेदन: कोशिकाओं का विभाजन कर नए कोशिकाओं का निर्माण करना विभेदन कहलाता है। परिवर्धन: कोशिकाओं का आकार बढ़ना परिवर्धन कहलाता है। निर्विभेदन: कोशिका विभाजन की प्रक्रिया का समाप्त होना निर्विभेदन कहलाता है। पुनर्विभेदन: विभेदन की प्रक्रिया का पुनः आरंभ होना पुनर्विभेदन कहलाता है। सीमित वृद्धि: ऐसी वृद्धि जो एक निश्चित सीमा तक ही होती है, जैसे पादपों के अंगों की वृद्धि। मेरिस्टेम: वे ऊतक जो कोशिका विभाजन करते हैं और वृद्धि के लिए जिम्मेदार होते हैं। वृद्धि दर: किसी जीव या अंग की वृद्धि की गति को वृद्धि दर कहते हैं।
व्याख्या:
प्रत्येक शब्द की परिभाषा उसके वैज्ञानिक अर्थ के अनुसार दी गई है। वृद्धि में आकार या द्रव्यमान की स्थायी वृद्धि शामिल है। विभेदन कोशिका विभाजन की क्रिया है। परिवर्धन कोशिका के आकार में वृद्धि है। निर्विभेदन और पुनर्विभेदन विभेदन की समाप्ति और पुनः आरंभ को दर्शाते हैं। सीमित वृद्धि वह होती है जो किसी सीमा तक सीमित रहती है। मेरिस्टेम वे ऊतक हैं जो वृद्धि के लिए जिम्मेदार होते हैं। वृद्धि दर वृद्धि की गति को मापती है।
Q3.2. पुष्टित पौधों के जीवन में किसी एक प्राचालिक (Parameter) से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता है, क्यों?
उत्तर:
किसी एक प्राचालिक से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता क्योंकि पौधों की वृद्धि बहुपरामीय होती है। पौधों में वृद्धि केवल ऊंचाई या वजन से नहीं, बल्कि कोशिका संख्या, आकार, आयतन, और द्रव्यमान के विभिन्न पहलुओं से होती है। इसलिए, एकल प्राचालिक से पूरी वृद्धि को समझना संभव नहीं है।
व्याख्या:
पौधों की वृद्धि जटिल होती है और विभिन्न मापदंडों पर निर्भर करती है। उदाहरण के लिए, ऊंचाई बढ़ना, पत्तियों का आकार, जड़ का विकास आदि सभी वृद्धि के अलग-अलग पहलू हैं। इसलिए, किसी एक प्राचालिक से सम्पूर्ण वृद्धि को मापना अधूरा होगा।
Q4.3. संक्षिप्त वर्णित करें— (अ) अंकगणितीय वृद्धि (ब) ज्यामितीय वृद्धि (स) सिग्माइड वृद्धि वक्र (द) संपूर्ण एवं सापेक्ष वृद्धि दर
उत्तर:
(अ) अंकगणितीय वृद्धि: वृद्धि की वह प्रक्रिया जिसमें वृद्धि समान मात्रा में होती है, जैसे 1, 2, 3, 4 ... (ब) ज्यामितीय वृद्धि: वृद्धि की वह प्रक्रिया जिसमें वृद्धि अनुपात में होती है, जैसे 1, 2, 4, 8 ... (स) सिग्माइड वृद्धि वक्र: यह वृद्धि वक्र S-आकार का होता है जिसमें प्रारंभ में वृद्धि धीमी, मध्य में तीव्र और अंत में स्थिर हो जाती है। (द) संपूर्ण वृद्धि दर: किसी अवधि में कुल वृद्धि की दर। सापेक्ष वृद्धि दर: किसी समय में वृद्धि की दर को उस समय की कुल मात्रा से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
व्याख्या:
अंकगणितीय वृद्धि में वृद्धि समान मात्रा में होती है जबकि ज्यामितीय वृद्धि में वृद्धि अनुपात में होती है। सिग्माइड वक्र में वृद्धि की गति समय के साथ बदलती है। संपूर्ण वृद्धि दर कुल वृद्धि को दर्शाती है और सापेक्ष वृद्धि दर वृद्धि की तीव्रता को दर्शाती है।
Q5.4. प्राकृतिक पादप वृद्धि नियामकों के पाँच मुख्य समूहों के बारे में लिखें। इनके आविष्कार, कार्यिकी प्रभाव तथा कृषि/बागवानी में इनका प्रयोग के बारे में लिखें।
उत्तर:
प्राकृतिक पादप वृद्धि नियामक (Plant Growth Regulators) के पाँच मुख्य समूह हैं: 1. ऑक्सिन (Auxins): - आविष्कार: 1930 के दशक में - कार्य: कोशिका वृद्धि, जड़ विकास, टहनी की वृद्धि - प्रयोग: पौधों में जड़ विकास को बढ़ावा देना 2. साइटोकिनिन (Cytokinins): - आविष्कार: 1950 के दशक में - कार्य: कोशिका विभाजन, पत्तियों की उम्र बढ़ाना - प्रयोग: संवर्धन माध्यम में कोशिका विभाजन बढ़ाना 3. गिब्बरेलिन (Gibberellins): - आविष्कार: जापान में - कार्य: बीज अंकुरण, फल का विकास - प्रयोग: फल को जल्दी पकाना, बीज अंकुरण 4. एब्सिसिक एसिड (Abscisic Acid): - आविष्कार: 1960 के दशक में - कार्य: पत्तियों का झड़ना, तनाव प्रतिक्रिया - प्रयोग: तनाव हार्मोन के रूप में 5. इथिलीन (Ethylene): - आविष्कार: 1900 के प्रारंभ में - कार्य: फल पकाना, पत्तियों का झड़ना - प्रयोग: फल पकाने में प्रत्येक नियामक का कृषि और बागवानी में विशेष महत्व है जैसे फल पकाने, जड़ विकास, और तनाव प्रबंधन।
व्याख्या:
प्रत्येक पादप वृद्धि नियामक का आविष्कार, कार्य और उपयोग विस्तार से समझाया गया है। ये नियामक पौधों की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं और कृषि में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
Q6.5. एबसिसिक एसिड को तनाव हार्मोन कहते हैं, क्यों?
उत्तर:
एबसिसिक एसिड को तनाव हार्मोन इसलिए कहते हैं क्योंकि यह पौधों में जल तनाव, शुष्कता, ठंडक आदि तनाव स्थितियों में सक्रिय होता है और पौधे को इन परिस्थितियों से बचाने में मदद करता है। यह पत्तियों के रंध्रों को बंद कर पानी की हानि को कम करता है और विकास को धीमा कर ऊर्जा संरक्षण करता है।
व्याख्या:
एबसिसिक एसिड पौधों में तनाव की प्रतिक्रिया में उत्पन्न होता है और पौधे को अनुकूलन में सहायता करता है। यह हार्मोन पत्तियों के रंध्रों को बंद कर पानी की हानि को रोकता है और विकास को नियंत्रित करता है जिससे पौधा तनाव से बचता है।
Q7.6. उच्च पादपों में वृद्धि एवं विभेदन खुला होता है, टिप्पणी करें?
उत्तर:
उच्च पादपों में वृद्धि एवं विभेदन खुला होता है क्योंकि मेरिस्टेम कोशिकाएं निरंतर विभाजन करती रहती हैं और विभेदन की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। इससे पादपों की वृद्धि सतत होती रहती है। यह खुलापन पादपों को अनंत वृद्धि की क्षमता देता है।
व्याख्या:
पादपों में मेरिस्टेम ऊतक सक्रिय रहते हैं और कोशिका विभाजन जारी रहता है। इसलिए वृद्धि और विभेदन खुला होता है, जिससे पादप जीवन भर बढ़ते रहते हैं।
Q8.7. अगर आपको ऐसा करने को कहा जाए तो एक पादप वृद्धि नियामक का नाम दें— (क) किसी टहनी में जड़ पैदा करने हेतु (ख) फल को जल्दी पकाने हेतु (ग) पत्तियों की जरावस्था को रोकने हेतु (घ) कक्षस्थ कलिकाओं में वृद्धि कराने हेतु (च) एक रोजेट पौधे में ‘वोल्ट’ हेतु (छ) पत्तियों के रंध्र को तुरंत बंद करने हेतु
उत्तर:
(क) ऑक्सिन (Auxin) (ख) इथिलीन (Ethylene) (ग) साइटोकिनिन (Cytokinin) (घ) गिब्बरेलिन (Gibberellin) (च) गिब्बरेलिन (Gibberellin) (छ) एबसिसिक एसिड (Abscisic Acid)
व्याख्या:
प्रत्येक कार्य के लिए उपयुक्त पादप वृद्धि नियामक का चयन उनके जैविक प्रभावों के आधार पर किया गया है। ऑक्सिन जड़ विकास को बढ़ावा देता है, इथिलीन फल पकाने में सहायक है, साइटोकिनिन पत्तियों की उम्र बढ़ाता है, गिब्बरेलिन वृद्धि को प्रोत्साहित करता है और एबसिसिक एसिड रंध्र बंद करने में मदद करता है।
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Biology · Class 11
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