पादप वृद्धि एवं परिवर्धन | Class 11 Biology Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

पादप वृद्धि एवं परिवर्धन – this guide gives you a concise, exam-ready overview of पादप वृद्धि एवं परिवर्धन from Class 11 Biology, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
13.4.3 पादप वृद्धि नियामकों का कायिकीय शरीरक्रियात्मक प्रभाव
पादप वृद्धि नियामक (PGRs) पौधों के शरीर में विभिन्न प्रकार के प्रभाव उत्पन्न करते हैं, जो वृद्धि, विभेदन, विकास और परिवर्धन की प्रक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। मुख्य पाँच प्रकार के पादप वृद्धि नियामक हैं: ऑक्सिन, जिब्बेरेलिन, साइटोकाइनिन, एथीलिन और एबसीसिक एसिड।
1. ऑक्सिन: ऑक्सिन (जैसे इंडोल-3-एसिटिक एसिड, IAA) मुख्यतः तने और मूल के बढ़ते शिखर पर बनता है। यह कोशिका विभाजन, दीर्घकरण, पुष्पन, फलन, और कक्षस्थ कलिकाओं की वृद्धि को रोकने (शीर्षस्थ प्रभाविता) में भूमिका निभाता है। ऑक्सिन कटिंग में जड़ उत्पन्न करने में सहायक होता है और अनिषेकफलन को प्रेरित करता है। 2,4-डी जैसे कृत्रिम ऑक्सिन शाकनाशी के रूप में उपयोग होते हैं।
2. जिब्बेरेलिन: जिब्बेरेलिन (GA) पौधों की लंबाई बढ़ाने, फल के आकार को बढ़ाने, जरावस्था को रोकने और माल्टिंग प्रक्रिया को तेज करने में सहायक होता है। यह पौधों में पुष्पन और वोल्टिंग को भी बढ़ावा देता है।
3. साइटोकाइनिन: साइटोकाइनिन कोशिका विभाजन को बढ़ावा देता है और शिखाग्र प्रधानता को कम करता है। यह पत्तियों की जरावस्था को रोकता है और पोषक तत्वों के संचारण को बढ़ाता है।
4. एथीलिन: एथीलिन एक गैसीय हार्मोन है जो फल पकाने, विलगन, जरावस्था, और पत्तियों के रंध्रों को बंद करने में भूमिका निभाता है। यह श्वसन की गति बढ़ाता है और कृषि में फल पकाने के लिए व्यापक रूप से उपयोग होता है।
5. एबसीसिक एसिड (ABA): ABA वृद्धि को रोकता है, बीज अंकुरण को निरोध करता है, रंध्रों को बंद करता है और पौधों को तनाव सहने में मदद करता है। इसे तनाव हार्मोन भी कहा जाता है।
ये सभी हार्मोन पौधों के विकास में सहक्रियाशील या विरोधात्मक रूप से कार्य करते हैं और बाह्य कारकों जैसे प्रकाश, तापमान के साथ मिलकर पौधे की वृद्धि और विकास को नियंत्रित करते हैं।
📊 Diagram: चित्र 13.11 पादपों में शीर्षस्थ प्रभाविता (अ) अग्रस्थ कलिका की उपस्थिति कक्षस्थ कलिका में वृद्धि को रोकती है (ब) अग्रस्थ कलिका का लंबवत काट, कक्षस्थ कलिका से छत्रक हटाने के बाद शाखाओं के रूप में वृद्धि
🧪 Activity: पादप वृद्धि नियामकों के प्रभावों का प्रयोगशाला में अध्ययन करें जैसे ऑक्सिन द्वारा जड़ उत्पन्न करना।
🔗 Connection: यह पादप वृद्धि नियामकों के कार्यिकी प्रभाव को समझाता है और अध्याय के सारांश की ओर ले जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
आपको कृत्रिम माध्यम में विभेदन की क्षमता के साथ एक ऊतक दिया जाता है। शूटिंग के साथ-साथ जड़ों का फूटना सुनिश्चित करने के लिए, हार्मोन के निम्नलिखित जोड़े में से आप कौन सा चुनेंगे ?
२ औक्सिन और साइटोकिनिन
1. वृद्धि, विभेदन, परिवर्धन, निर्विभेदन, पुनर्विभेदन, सीमित वृद्धि, मेरिस्टेम तथा वृद्धि दर की परिभाषा दें।
वृद्धि: किसी जीव में आकार, आयतन या द्रव्यमान में स्थायी वृद्धि को वृद्धि कहते हैं। विभेदन: कोशिकाओं का विभाजन कर नए कोशिकाओं का निर्माण करना विभेदन कहलाता है। परिवर्धन: कोशिकाओं का आकार बढ़ना परिवर्धन कहलाता है। निर्विभेदन: कोशिका विभाजन की प्रक्रिया का समाप्त होना निर्विभेदन कहलाता है। पुनर्विभेदन: विभेदन की प्रक्रिया का पुनः आरंभ होना पुनर्विभेदन कहलाता है। सीमित वृद्धि: ऐसी वृद्धि जो एक निश्चित सीमा तक ही होती है, जैसे पादपों के अंगों की वृद्धि। मेरिस्टेम: वे ऊतक जो कोशिका विभाजन करते हैं और
2. पुष्टित पौधों के जीवन में किसी एक प्राचालिक (Parameter) से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता है, क्यों?
किसी एक प्राचालिक से वृद्धि को वर्णित नहीं किया जा सकता क्योंकि पौधों की वृद्धि बहुपरामीय होती है। पौधों में वृद्धि केवल ऊंचाई या वजन से नहीं, बल्कि कोशिका संख्या, आकार, आयतन, और द्रव्यमान के विभिन्न पहलुओं से होती है। इसलिए, एकल प्राचालिक से पूरी वृद्धि को समझना संभव नहीं है।
3. संक्षिप्त वर्णित करें— (अ) अंकगणितीय वृद्धि (ब) ज्यामितीय वृद्धि (स) सिग्माइड वृद्धि वक्र (द) संपूर्ण एवं सापेक्ष वृद्धि दर
(अ) अंकगणितीय वृद्धि: वृद्धि की वह प्रक्रिया जिसमें वृद्धि समान मात्रा में होती है, जैसे 1, 2, 3, 4 ... (ब) ज्यामितीय वृद्धि: वृद्धि की वह प्रक्रिया जिसमें वृद्धि अनुपात में होती है, जैसे 1, 2, 4, 8 ... (स) सिग्माइड वृद्धि वक्र: यह वृद्धि वक्र S-आकार का होता है जिसमें प्रारंभ में वृद्धि धीमी, मध्य में तीव्र और अंत में स्थिर हो जाती है। (द) संपूर्ण वृद्धि दर: किसी अवधि में कुल वृद्धि की दर। सापेक्ष वृद्धि दर: किसी समय में वृद्धि की दर को उस समय की कुल मात्रा से विभाजित करके प्राप्त किया जाता है।
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