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नागार्जुन – यह दंतुरित मुसकान और फसल | Class 10 Hindi Notes

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

नागार्जुन – यह दंतुरित मुसकान और फसल | Class 10 Hindi Notes

नागार्जुन – यह दंतुरित मुसकान और फसल – this guide gives you a concise, exam-ready overview of नागार्जुन – यह दंतुरित मुसकान और फसल from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.

नागार्जुन

नागार्जुन का जन्म बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में सन् 1911 में हुआ था। उनका वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र था। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने संस्कृत पाठशाला में प्राप्त की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे बनारस और कोलकाता गए। 1936 में नागार्जुन श्रीलंका गए, जहाँ उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। दो वर्ष के प्रवास के बाद 1938 में वे भारत लौट आए। नागार्जुन का स्वभाव घुमक्कड़ और अक्खड़ था, जिसके कारण वे संपूर्ण भारत की यात्रा करते रहे। उनका निधन सन् 1998 में हुआ।

नागार्जुन की प्रमुख काव्य कृतियों में 'युगधारा', 'सतरंगे पंखों वाली', 'हजार-हजार बाँहों वाली', 'तुमने कहा था', 'पुरानी जूतियों का कोरस', 'आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने', और 'मैं मिलटरी का बूढ़ा घोड़ा' शामिल हैं। वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि उपन्यासकार और गद्य लेखक भी थे। उनका संपूर्ण साहित्य 'नागार्जुन रचनावली' के सात खंडों में प्रकाशित है।

साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें हिंदी अकादमी, दिल्ली का शिखर सम्मान, उत्तर प्रदेश का भारत भारती पुरस्कार, बिहार का राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार तथा मैथिली भाषा में कविता के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

राजनीतिक सक्रियता के कारण नागार्जुन को कई बार जेल जाना पड़ा। वे हिंदी और मैथिली दोनों भाषाओं में समान रूप से लेखन करते थे, साथ ही बंगला और संस्कृत में भी कविताएँ लिखी। मातृभाषा मैथिली में वे 'यात्री' नाम से प्रसिद्ध हैं।

नागार्जुन का साहित्य लोकजीवन से गहरा जुड़ा हुआ है। वे भ्रष्टाचार, राजनीतिक स्वार्थ और समाज की पतनशील स्थिति के प्रति सजग थे। उनकी व्यंग्यात्मक शैली के कारण उन्हें आधुनिक कबीर भी कहा जाता है। छायावादोत्तर युग में वे ऐसे कवि थे जिनकी कविताएँ गाँव की चौपालों से लेकर साहित्यिक जगत तक समान रूप से लोकप्रिय रहीं। वे जनकवि थे, जिनकी कविताओं में सामाजिक और सामयिक बोध की गहराई थी। उन्होंने छंदबद्ध और मुक्त छंद दोनों में काव्य-रचना की।

📊 Diagram: Figure on page 1

🧪 Activity: एन.सी.ई.आर.टी. द्वारा नागार्जुन पर बनाई गई फ़िल्म देखना।

🔗 Connection: यह परिचय नागार्जुन की कविताओं 'यह दंतुरित मुसकान' और 'फसल' के विश्लेषण की ओर ले जाता है।

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