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Chapter 6

🎓 Class 10📖 Kshitij-2📖 6 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~9 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 12Chapter 7

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

नागार्जुन

व्याख्या

नागार्जुन

नागार्जुन का जन्म बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में सन् 1911 में हुआ था। उनका वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र था। प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने संस्कृत पाठशाला में प्राप्त की। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे बनारस और कोलकाता गए। 1936 में नागार्जुन श्रीलंका गए, जहाँ उन्होंने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली। दो वर्ष के प्रवास के बाद 1938 में वे भारत लौट आए। नागार्जुन का स्वभाव घुमक्कड़ और अक्खड़ था, जिसके कारण वे संपूर्ण भारत की यात्रा करते रहे। उनका निधन सन् 1998 में हुआ। नागार्जुन की प्रमुख काव्य कृतियों में 'युगधारा', 'सतरंगे पंखों वाली', 'हजार-हजार बाँहों वाली', 'तुमने कहा था', 'पुरानी जूतियों का कोरस', 'आखिर ऐसा क्या कह दिया मैंने', और 'मैं मिलटरी का बूढ़ा घोड़ा' शामिल हैं। वे केवल कवि ही नहीं, बल्कि उपन्यासकार और गद्य लेखक भी थे। उनका संपूर्ण साहित्य 'नागार्जुन रचनावली' के सात खंडों में प्रकाशित है। साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें हिंदी अकादमी, दिल्ली का शिखर सम्मान, उत्तर प्रदेश का भारत भारती पुरस्कार, बिहार का राजेंद्र प्रसाद पुरस्कार तथा मैथिली भाषा में कविता के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। राजनीतिक सक्रियता के कारण नागार्जुन को कई बार जेल जाना पड़ा। वे हिंदी और मैथिली दोनों भाषाओं में समान रूप से लेखन करते थे, साथ ही बंगला और संस्कृत में भी कविताएँ लिखी। मातृभाषा मैथिली में वे 'यात्री' नाम से प्रसिद्ध हैं। नागार्जुन का साहित्य लोकजीवन से गहरा जुड़ा हुआ है। वे भ्रष्टाचार, राजनीतिक स्वार्थ और समाज की पतनशील स्थिति के प्रति सजग थे। उनकी व्यंग्यात्मक शैली के कारण उन्हें आधुनिक कबीर भी कहा जाता है। छायावादोत्तर युग में वे ऐसे कवि थे जिनकी कविताएँ गाँव की चौपालों से लेकर साहित्यिक जगत तक समान रूप से लोकप्रिय रहीं। वे जनकवि थे, जिनकी कविताओं में सामाजिक और सामयिक बोध की गहराई थी। उन्होंने छंदबद्ध और मुक्त छंद दोनों में काव्य-रचना की।

  • नागार्जुन का जन्म 1911 में बिहार के दरभंगा जिले के सतलखा गाँव में हुआ।
  • उनका वास्तविक नाम वैद्यनाथ मिश्र था।
  • उन्होंने संस्कृत, हिंदी, मैथिली, बंगला और संस्कृत में लेखन किया।
  • राजनीतिक सक्रियता के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा।
  • उनकी प्रमुख काव्य कृतियाँ युगधारा, सतरंगे पंखों वाली आदि हैं।
  • साहित्यिक योगदान के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले।
  • 📌 नागार्जुन: प्रसिद्ध हिंदी, मैथिली कवि और लेखक।
  • 📌 बौद्ध धर्म दीक्षा: नागार्जुन ने श्रीलंका में बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।
  • 📌 व्यंग्य: साहित्य की वह विधा जिसमें कटुता और हास्य के माध्यम से सामाजिक कुरीतियों की आलोचना की जाती है।

यह दंतुरित मुसकान

व्याख्या

यह दंतुरित मुसकान

कविता 'यह दंतुरित मुसकान' में कवि ने एक छोटे बच्चे की मनोहारी मुस्कान को देखकर अपने मन में उठने वाले भावों को बिंबों के माध्यम से व्यक्त किया है। बच्चे की दंतुरित मुस्कान इतनी मोहक और जीवनदायिनी है कि वह मृतक में भी जान डाल सकती है। कवि के अनुसार इस मुस्कान में जीवन का संदेश निहित है, जो कठोर से कठोर हृदय को भी पिघला सकती है। कवि ने इस मुस्कान की सुंदरता को विभिन्न प्राकृतिक और भावनात्मक बिंबों के माध्यम से प्रस्तुत किया है जैसे कि तालाब में खिल रहे जलजात (कमल के फूल), झरने लग पड़े शोफालिका के फूल, और माँ की आत्मीयता जो मधुपर्क के समान है। बच्चे की नज़रों का बाँकपन और उसकी मुस्कान की दंतुरित छवि मिलकर एक अद्भुत सौंदर्य रचती है। कविता में बच्चे की मासूमियत, उसकी माँ के प्रति लगाव और पहली बार मिलने वाले व्यक्ति के मन में उत्पन्न भावों का सूक्ष्म चित्रण है। कवि स्वयं को एक चिर प्रवासी बताता है, जो इस अतिथि से जुड़ाव महसूस करता है। यह कविता जीवन के सौंदर्य और सरलता का संदेश देती है, जो बच्चे की मुस्कान में प्रतिबिंबित होता है। भाषा सरल और प्रवाहमय है, जिससे कविता का भाव सहजता से पाठक तक पहुँचता है। इस कविता में बाल मन की सहजता और सौंदर्य की महत्ता को प्रमुखता दी गई है।

  • बच्चे की दंतुरित मुस्कान जीवन का संदेश है।
  • यह मुस्कान मृतक में भी जान डाल सकती है।
  • कवि ने प्राकृतिक बिंबों जैसे जलजात, झरने, फूलों के माध्यम से भाव व्यक्त किए।
  • माँ की आत्मीयता को मधुपर्क के रूप में दर्शाया गया है।
  • मुस्कान में नज़रों का बाँकपन भी उसकी मोहकता बढ़ाता है।
  • कवि ने बच्चे की मासूमियत और पहली मुलाकात के भावों को सूक्ष्मता से चित्रित किया।
  • 📌 दंतुरित मुसकान: बच्चों के नए-नए दाँतों वाली मुस्कान।
  • 📌 जलजात: कमल का फूल, जो तालाब में खिलता है।
  • 📌 मधुपर्क: दही, घी, शहद, जल और दूध का योग, जो माँ के प्यार का प्रतीक है।

फसल

व्याख्या

फसल

नागार्जुन की कविता 'फसल' में फसल के उत्पादन और उसके पीछे छिपे तत्वों को सरल और प्रभावशाली भाषा में प्रस्तुत किया गया है। कवि बताते हैं कि फसल केवल एक व्यक्ति या दो व्यक्तियों की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह हजार-हजार खेतों की मिट्टी, अनेक नदियों

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.' नदी के द्वीप ' किसकी रचना है ?
A.प्रेमचंद
B.अज्ञेय
C.जैनेंद्र
D.यशपाल

उत्तर:

अज्ञेय

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Q2.किससे प्रभावित होकर लेखिका ने स्वतंत्रता-आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया ?
A.डॉ अंबालाल जी से
B.अपनी बहन सुशीला से
C.अपने पिताजी से
D.शीला अग्रवाल जी से

उत्तर:

शीला अग्रवाल जी से

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Q3.माँ ने आकर बताया कि पिताजी बहुत खुश हैं | किस वाक्य का उदाहरण है ?
A.मिश्र वाक्य
B.सरल वाक्य
C.आज्ञार्थक वाक्य
D.संयुक्त वाक्य

उत्तर:

मिश्र वाक्य

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Q4.लेखिका के पिता रसोईघर को क्या कहते थे ?
A.पाकशाला
B.रसूख़दार
C.भोजनस्थल
D.भटियारखाना

उत्तर:

भटियारखाना

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Q5.मन्नू भंडारी के परिवार में लड़कियों के विवाह के लिए अनिवार्य योग्यता क्या थी ?
A.18 वर्ष और बी०ए
B.17 वर्ष और इंटर
C.16 वर्ष और मैट्रिक
D.23 वर्ष और एम०ए

उत्तर:

16 वर्ष और मैट्रिक

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Q6.' आग बबूला होना ' मुहावरे का अर्थ है ---
A.बहुत गुस्सा आना
B.हंगामा करना
C.कठिनाई आना
D.आग लग जाना

उत्तर:

बहुत गुस्सा आना

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Q7.शीला अग्रवाल किस विषय से जुड़ी थी ?
A.गणित
B.विज्ञान
C.अर्थशास्त्र
D.हिंदी

उत्तर:

हिंदी

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Q8.लेखिका (मन्नू भंडारी) शीला अग्रवाल के संपर्क में कब आई ?
A.1945
B.1946
C.1944
D.1947

उत्तर:

1945

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