सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह और अट नहीं रही | Class 10 Hindi Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह और अट नहीं रही – this guide gives you a concise, exam-ready overview of सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला' – उत्साह और अट नहीं रही from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का परिचय
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ था। वे मूलतः उत्तर प्रदेश के गढ़ाकोला (जिला उन्नाव) के निवासी थे। निराला की औपचारिक शिक्षा नौवीं कक्षा तक महिषादल में ही हुई, लेकिन उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। वे संगीत और दर्शनशास्त्र के भी गहरे अध्येता थे। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने निराला पर गहरा प्रभाव डाला।
निराला का पारिवारिक जीवन दुखों और संघर्षों से भरा रहा। उनके कई आत्मीयजन असामयिक रूप से निधन हो गए, जिससे वे अंदर से टूट गए। साहित्यिक क्षेत्र में भी निराला ने कठिन संघर्ष किया। उनका देहांत सन् 1961 में हुआ।
निराला की प्रमुख काव्य रचनाओं में ‘अनामिका’, ‘परिमल’, ‘गीतिका’, ‘कुकुरमुत्ता’ और ‘नए पत्ते’ शामिल हैं। इसके अलावा वे उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनावली आठ खंडों में प्रकाशित है, जिसमें उनका संपूर्ण साहित्य संग्रहित है।
निराला की कविताओं में दार्शनिकता, विद्रोह, क्रांति, प्रेम की तरलता और प्रकृति का विराट चित्र देखने को मिलता है। वे छायावादी कवियों में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग करने वाले कवि थे। उनकी कविताओं में शोषित, उपेक्षित और पीड़ित जनों के प्रति गहरी सहानुभूति है, वहीं शोषक वर्ग और सत्ता के प्रति प्रचंड प्रतिकार की भावना भी प्रकट होती है।
📊 Diagram: Figure 1: सूर्यकांत
🔗 Connection: यह परिचय हमें निराला की जीवन-परिस्थितियों और काव्य-धारा को समझने में मदद करता है, जो अगले भाग में उनकी कविताओं 'उत्साह' और 'अट नहीं रही है' के विश्लेषण से जुड़ता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
उत्साह’ कविता किस शैली में रची गई है?
संबोधन शैली
‘अट नहीं रही है’ कविता में किस ऋतु का वर्णन है?
वसंत ऋतु
” कहीं साँस लेते हो “ मैं कौन से अलंकार का प्रयोग हुआ है?
मानवीकरण अलंकार
कवि बादल से बरसने के स्थान पर गरजने के लिए क्यों कहता है?
परिवर्तन लाने के लिए
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