Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का परिचय
व्याख्यासूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का परिचय
सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ था। वे मूलतः उत्तर प्रदेश के गढ़ाकोला (जिला उन्नाव) के निवासी थे। निराला की औपचारिक शिक्षा नौवीं कक्षा तक महिषादल में ही हुई, लेकिन उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से संस्कृत, बांग्ला और अंग्रेजी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। वे संगीत और दर्शनशास्त्र के भी गहरे अध्येता थे। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने निराला पर गहरा प्रभाव डाला। निराला का पारिवारिक जीवन दुखों और संघर्षों से भरा रहा। उनके कई आत्मीयजन असामयिक रूप से निधन हो गए, जिससे वे अंदर से टूट गए। साहित्यिक क्षेत्र में भी निराला ने कठिन संघर्ष किया। उनका देहांत सन् 1961 में हुआ। निराला की प्रमुख काव्य रचनाओं में ‘अनामिका’, ‘परिमल’, ‘गीतिका’, ‘कुकुरमुत्ता’ और ‘नए पत्ते’ शामिल हैं। इसके अलावा वे उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध लेखन में भी प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनावली आठ खंडों में प्रकाशित है, जिसमें उनका संपूर्ण साहित्य संग्रहित है। निराला की कविताओं में दार्शनिकता, विद्रोह, क्रांति, प्रेम की तरलता और प्रकृति का विराट चित्र देखने को मिलता है। वे छायावादी कवियों में सबसे पहले मुक्त छंद का प्रयोग करने वाले कवि थे। उनकी कविताओं में शोषित, उपेक्षित और पीड़ित जनों के प्रति गहरी सहानुभूति है, वहीं शोषक वर्ग और सत्ता के प्रति प्रचंड प्रतिकार की भावना भी प्रकट होती है।
- सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ का जन्म 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ।
- वे गढ़ाकोला, जिला उन्नाव, उत्तर प्रदेश के निवासी थे।
- नौवीं तक औपचारिक शिक्षा प्राप्त की, बाद में स्वाध्याय से संस्कृत, बांग्ला, अंग्रेजी सीखी।
- रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद की विचारधारा से प्रभावित।
- उनका पारिवारिक जीवन दुख और संघर्षों से भरा था।
- निराला ने मुक्त छंद का प्रयोग छायावाद में सबसे पहले किया।
- 📌 मुक्त छंद: ऐसा छंद जिसमें पारंपरिक छंदबद्धता का बंधन नहीं होता।
- 📌 स्वाध्याय: स्वयं अध्ययन करना।
- 📌 दार्शनिकता: जीवन और ब्रह्मांड के गूढ़ अर्थों पर विचार करना।
कविता ‘उत्साह’ का परिचय और विश्लेषण
व्याख्याकविता ‘उत्साह’ का परिचय और विश्लेषण
‘उत्साह’ सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की एक प्रेरणादायक कविता है, जिसमें बादल को संबोधित किया गया है। बादल निराला के प्रिय विषयों में से एक है। इस कविता में बादल दो अर्थों में प्रस्तुत है: एक ओर यह पीड़ित और प्यासे जन की आकांक्षा को पूरा करने वाला है, जो जीवन में नयी ऊर्जा और आशा का संचार करता है; दूसरी ओर यह नए अंकुरों के लिए विध्वंस और क्रांति का प्रतीक है। कवि जीवन को व्यापक और समग्र दृष्टि से देखता है। कविता में ललित कल्पना के साथ-साथ क्रांति-चेतना भी विद्यमान है। निराला साहित्य की सामाजिक क्रांति में भूमिका को ‘नवजीवन’ और ‘नूतन कविता’ के संदर्भ में देखते हैं। कवि बादल से फुहार या रिमझिम बरसने की अपेक्षा ‘गरजने’ के लिए कहता है क्योंकि गरजना शक्ति, ऊर्जा और क्रांति का प्रतीक है। यह गरजना जीवन में बदलाव और नवजीवन की चेतना जगाता है। कविता का शीर्षक ‘उत्साह’ इसलिए रखा गया है क्योंकि यह जीवन में जोश, उमंग और क्रांति की भावना को अभिव्यक्त करता है। कविता में बादल अनेक अर्थों में संकेत करता है – जीवन की तृष्णा, सामाजिक क्रांति, नयी कल्पना और प्रकृति की शक्ति। कविता में ध्वन्यात्मक प्रभाव (नाद-सौंदर्य) के लिए शब्दों का चयन बहुत प्रभावशाली है, जैसे ‘गरजो’, ‘धाराधर’, ‘विद्युत-छबि’, ‘उन्मन’, ‘तप्त धरा’ आदि। ये शब्द कविता की ऊर्जा और भाव को और अधिक प्रबल बनाते हैं।
- कविता में बादल को पीड़ित जन की आकांक्षा और क्रांति का प्रतीक बनाया गया है।
- कवि बादल से ‘गरजने’ के लिए कहता है, जो शक्ति और ऊर्जा का संकेत है।
- ‘उत्साह’ शीर्षक जीवन में जोश और क्रांति की भावना दर्शाता है।
- कविता में नाद-सौंदर्य के लिए प्रभावशाली शब्दों का प्रयोग हुआ है।
- निराला साहित्य को सामाजिक क्रांति के माध्यम के रूप में देखते हैं।
- 📌 नाद-सौंदर्य: शब्दों के ध्वनि प्रभाव से कविता में उत्पन्न होने वाला सौंदर्य।
- 📌 क्रांति-चेतना: सामाजिक या मानसिक बदलाव की जागरूकता।
- 📌 ललित कल्पना: कोमल और सुंदर कल्पनाएँ।
कविता ‘अट नहीं रही है’ का परिचय और विश्लेषण
व्याख्याकविता ‘अट नहीं रही है’ का परिचय और विश्लेषण
‘अट नहीं रही है’ कविता फागुन ऋतु की मादकता और उसकी सर्वव्यापक सुंदरता को प्रकट करती है। इस कविता में कवि फागुन के सौंदर्य को अनेक रूपों में देखता है। जब मन प्रसन्न होता है, तब हर तरफ फागुन का ही सौंदर्य और उल्लास दिखाई पड़ता है। कवि की आँख फागुन की
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.होली के आस- पास प्रकृति में क्या परिवर्तन होते हैं?
उत्तर:
बसंत की बहार छा जाती है।
Q2.‘अट नहीं रही है‘ किस रस की कविता है?
उत्तर:
शृंगार रस
Q3.” कहीं साँस लेते हो “ मैं कौन से अलंकार का प्रयोग हुआ है?
उत्तर:
मानवीकरण अलंकार
Q4.‘अट नहीं रही है’ कविता में किस ऋतु का वर्णन है?
उत्तर:
वसंत ऋतु
Q5.उत्साह’ कविता किस शैली में रची गई है?
उत्तर:
संबोधन शैली
Q6.“बाल कल्पना के-से पाले” में कौन से अलंकार का प्रयोग हुआ है?
उत्तर:
उपमा अलंकार
Q7.कवि को आकाश में फैले बादल कैसे लग रहे हैं?
उत्तर:
काले घुँघराले बालों के समान
Q8.उत्साह’ कविता में किसे संबोधित किया गया है?
उत्तर:
बादल को