माता का आँचल | Class 10 Hindi Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 3 मिनट का पठन

माता का आँचल – this guide gives you a concise, exam-ready overview of माता का आँचल from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
माता का अँचल
यह पाठ बालकवि सूरदास की कविता 'माता का आँचल' के स्थान पर आधारित नहीं है, बल्कि शिवपूजन सहाय द्वारा लिखा गया एक संस्मरणात्मक उपन्यास अंश है, जिसमें बालक भोलानाथ के बचपन के अनुभवों का चित्रण है। इस अंश में लेखक ने अपने बचपन की यादों को बहुत ही सजीव और भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया है। पाठ की शुरुआत में बताया गया है कि भोलानाथ का पिता सुबह जल्दी उठकर पूजा करते थे, और भोलानाथ भी उनके साथ पूजा में शामिल होते थे। माता से उनका संबंध केवल दूध पीने तक सीमित था, इसलिए वे पिता के साथ बाहर की बैठक में सोते थे। पिता जी उन्हें प्यार से 'भोलानाथ' कहते थे, जबकि उनका असली नाम 'तारकेश्वरनाथ' था।
पाठ में पिता और पुत्र के बीच के प्रेमपूर्ण संबंधों का वर्णन है, जैसे कि पिता जी रामायण का पाठ करते समय भोलानाथ उनके पास बैठता और दोनों के बीच हँसी-मज़ाक होता। पूजा के बाद पिता जी राम नाम की लिखाई करते और गंगा नदी में आटे की गोलियाँ फेंकते, जिनके ऊपर राम नाम लिखा होता था। इस दौरान भोलानाथ उनके कंधे पर बैठा रहता था।
इसके बाद पाठ में भोलानाथ और पिता जी के बीच के खेल-कूद के प्रसंग आते हैं, जैसे कुश्ती लड़ना, मूँछें उखाड़ना, चुम्मा लेना-देना आदि। यह सब पारिवारिक प्रेम और स्नेह की अभिव्यक्ति है। खाने के समय भी पिता जी अपने हाथ से भोलानाथ को खिलाते थे, जबकि माता जी थोड़ा और खिलाने के लिए हठ करती थीं।
भोलानाथ के बचपन के खेलों का विस्तृत चित्रण है, जिसमें वे मिट्टी से दुकान लगाते, घरौंदा बनाते, बरात का जुलूस निकालते, खेती का नाटक करते थे। ये सभी खेल उनके ग्रामीण परिवेश और संस्कृति को दर्शाते हैं। खेलों में उनके साथी भी शामिल होते थे और वे मिलकर तरह-तरह के नाटक करते थे।
पाठ में एक बार भोलानाथ को मझौं (माँ) द्वारा सिर पर कड़वा तेल डालने का प्रसंग है, जिससे वे रोने लगते हैं और पिता जी उनसे नाराज़ हो जाते हैं। फिर मझौं उनकी देखभाल करती हैं, घावों पर हल्दी लगाती हैं और अपने आँचल में छिपा लेती हैं। इस समय भोलानाथ को माँ के आँचल में शांति और सुरक्षा मिलती है, जो पाठ के शीर्षक 'माता का अँचल' की सार्थकता को दर्शाता है।
इस प्रकार यह पाठ बालक के बचपन, उसके परिवार के सदस्यों के साथ प्रेमपूर्ण संबंधों, ग्रामीण जीवन की झलक और मातृत्व की ममता को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत करता है।
📊 Diagram: जहाँ लड़कों का संग, तहाँ बाजे मृदंग
🧪 Activity: पाठ के अंत में प्रश्न दिए गए हैं जिनमें बच्चों से अपने अनुभव साझा करने और पाठ से जुड़े भावनात्मक संबंधों पर विचार करने को कहा गया है।
🔗 Connection: यह अनुभाग पाठ के आगे के भागों में बच्चे के खेल, सामाजिक जीवन और मातृत्व के और भी गहरे पहलुओं की ओर ले जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
लेखक के पिता उन्हे भोलानाथ इसलिए कहते थे कि -
माथे पर भभूत लगाकर वे भोले-भाले दिखते थे ।
भोलानाथ के पिता उन्हे पूजा में इसलिएबैठाते थे कि -
वह चाहते थे कि भोलानाथ पर ईश्वर की कृपा बनी रहे ।
लेखक के पिता मछलियों को आटे की गोलियां क्यों खिलाते थे?
ऐसा करने से पुण्य प्राप्त होता था ।
बच्चों द्वारा चूहे के बिल में पानी डालने से क्या निकला ?
साँप
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