दोहे | Class 10 Hindi Notes
द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 17 जुलाई 2026 · 2 मिनट का पठन

दोहे – this guide gives you a concise, exam-ready overview of दोहे from Class 10 Hindi, written by ConceptScroll editors and reviewed against the latest NCERT textbook.
शब्दार्थ और टिप्पणियाँ
इस खंड में कविता में प्रयुक्त कठिन शब्दों के अर्थ और उनके संक्षिप्त व्याख्यान प्रस्तुत किए गए हैं। जैसे 'मत्य' का अर्थ है मरणशील, 'पशु-प्रवृत्ति' का अर्थ है पशु जैसा स्वभाव, 'उदार' का अर्थ दानशील या सहदय होता है। अन्य शब्द जैसे 'कृतार्थ', 'कीर्ति', 'कृजती', 'क्षुधार्त', 'रतिदेव', 'करस्थ', 'दधीचि', 'परार्थ', 'अस्थिजाल', 'उशीनर', 'क्षितीश', 'स्वमांस', 'कर्ण', 'महाविभूति', 'वशीकृता', 'विरुद्धवाद बुद्ध का दया-प्रवाह में बहा', 'मदांध', 'वित्त', 'परस्परावलंब', 'अमत्य-अंक', 'अपंक', 'स्वयंभू' आदि के अर्थ विस्तार से दिए गए हैं। यह खंड छात्रों को कविता को बेहतर समझने में सहायता करता है।
📊 Diagram: कविता में प्रयुक्त शब्दों की तालिका।
🔗 Connection: यह खंड अगले भाग 'मनुष्यता' के अंतरिक्य और अन्य शब्दों की व्याख्या से जुड़ता है।
Table on page 6 (26×2)
| मत्य | - मरणशील |
|---|---|
| पशु-प्रवृत्ति | - पशु जैसा स्वभाव |
| उदार | - दानशील / सहदय |
| कृतार्थ | - आभारी / धन्य |
| कीर्ति | - यश |
| कृजती | - मधुर ध्वनि करती |
| क्षुधार्त | - भूख से व्याकुल |
| रंतिदेव | - एक परम दानी राजा |
| करस्थ | - हाथ में पकड़ा हुआ / लिया हुआ |
| दधीचि | - एक प्रसिद्ध ऋषि जिनकी हड़ियों से इंद्र का वज्र बना था |
| परार्थ | - जो दूसरों के लिए हो |
| अस्थिजाल | - हड़ियों का समूह |
| उशीनर | - गंधार देश का राजा |
| क्षितीश | - राजा |
| स्वमांस | - अपने शरीर का मांस |
| कर्ण | - दान देने के लिए प्रसिद्ध कुंती पुत्र |
| महाविभूति | - बड़ी भारी पूँजी |
| वशीकृता | - वश में की हुई |
| विरुद्धवाद बुद्ध का | |
| दया-प्रवाह में बहा | - बुद्ध ने करुणावश उस समय की पारंपरिक मान्यताओं का विरोध किया था |
| मदांध | - जो गर्व से अंधा हो |
| वित्त | - धन-संपत्ति |
| परस्परावलंब | - एक-दूसरे का सहारा |
| अमत्य-अंक | - देवता की गोद |
| अपंक | - कलंक-रहित |
| स्वयंभू | - परमात्मा / स्वयं उत्पन्न होने वाला |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
बसंत रूपी बालक का पालना किसे कहा गया है?
वृक्षों की डालियों को
'बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय । सौंह करे भौंहनि हँसे, देनि कहे नटि जाय ।।' उपरोक्त दोहे में कौन-सा रस है ?
शृंगार रस
‘जग – मंदिर – दीपक ‘ में कौन सा अलंकार है?
रूपक
बिहारी कवि द्वारा रचित 'बिहारी सतसई' में कुल कितने दोहे हैं ?
713
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