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अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी: पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ की पूरी जानकारी

द्वारा ConceptScroll Team · प्रकाशित 2 जुलाई 2026 · 4 मिनट का पठन

अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी: पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ की पूरी जानकारी

अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी: पदार्थ, युक्तियाँ तथा सरल परिपथ कक्षा 12 के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। इसमें हम अर्धचालक पदार्थों की संरचना, उनके प्रकार, और सरल इलेक्ट्रॉनिक परिपथों के कार्य को समझेंगे।

अर्धचालक पदार्थ क्या होते हैं?

अर्धचालक वे पदार्थ होते हैं जिनकी चालकता कंडक्टर और इन्सुलेटर के बीच होती है। कक्षा 12 के NCERT भौतिकी में मुख्य रूप से सिलिकॉन (Si) और जर्मेनियम (Ge) जैसे नैज अर्धचालकों का अध्ययन किया जाता है। ये पदार्थ शुद्ध होते हैं और इनमें कोई अशुद्धि नहीं मिलाई जाती।

  • क्रिस्टल संरचना: Si और Ge के परमाणु हीरे जैसी क्रिस्टल संरचना बनाते हैं। प्रत्येक परमाणु चार अन्य परमाणुओं के साथ सहसंयोजी बंध बनाता है।
  • इलेक्ट्रॉन बंध: प्रत्येक परमाणु के चार संयोजकता इलेक्ट्रॉन होते हैं जो बंध बनाते हैं।

निम्न ताप पर ये बंध पूर्ण होते हैं, लेकिन ताप बढ़ने पर कुछ इलेक्ट्रॉन ऊष्मीय ऊर्जा से मुक्त होकर चालन बैंड में चले जाते हैं, जिससे विद्युत धारा प्रवाहित होती है।

नैज अर्धचालक की चालकता और आवेश वाहक

नैज अर्धचालक में इलेक्ट्रॉन और होल दोनों आवेश वाहक होते हैं। जब तापमान बढ़ता है, तो संयोजकता बैंड से कुछ इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में चले जाते हैं। इससे:

  • मुक्त इलेक्ट्रॉन (n_e): चालन बैंड में स्वतंत्र इलेक्ट्रॉन की संख्या।
  • होल (n_h): संयोजकता बैंड में रिक्त स्थान, जो धनात्मक आवेश के समान व्यवहार करता है।

नैज अर्धचालकों में $n_e = n_h = n_i$ होता है, जहाँ $n_i$ को नैज वाहक सांद्रता कहते हैं।

चालकता (σ) तापमान पर निर्भर होती है और बढ़ती है क्योंकि अधिक इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में पहुँचते हैं।

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अर्धचालक युक्तियाँ: डायोड और ट्रांजिस्टर

अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी में डायोड और ट्रांजिस्टर प्रमुख युक्तियाँ हैं। ये युक्तियाँ अर्धचालक पदार्थों से बनती हैं जिनमें अशुद्धियाँ मिलाकर चालकता बढ़ाई जाती है।

  • डायोड: एक दिशा में विद्युत प्रवाह की अनुमति देता है। इसका उपयोग रेक्टिफायर और सिग्नल क्लिपिंग में होता है।
  • ट्रांजिस्टर: सिग्नल को बढ़ाने या स्विचिंग के लिए उपयोगी। यह तीन लेयर वाले अर्धचालक से बना होता है (n-p-n या p-n-p)।

इन युक्तियों का सरल परिपथ में उपयोग करके विद्युत संकेतों को नियंत्रित किया जाता है।

सरल अर्धचालक परिपथ और उनका कार्य

सरल अर्धचालक परिपथ में डायोड, ट्रांजिस्टर और अन्य युक्तियाँ शामिल होती हैं। ये परिपथ विद्युत सिग्नल को नियंत्रित, संशोधित या प्रवाहित करते हैं।

उदाहरण:

  • रेक्टिफायर परिपथ: AC को DC में बदलने के लिए डायोड का उपयोग।
  • स्विचिंग परिपथ: ट्रांजिस्टर का उपयोग ऑन/ऑफ स्विच की तरह।

परिपथों में अर्धचालक युक्तियों की दिशा और कनेक्शन महत्वपूर्ण होते हैं। सही कनेक्शन से परिपथ सही ढंग से कार्य करता है।

n-प्रकार और p-प्रकार अर्धचालक में अंतर

अर्धचालकों को मुख्यतः दो प्रकारों में बांटा जाता है:

विशेषताn-प्रकार अर्धचालकp-प्रकार अर्धचालक
अशुद्धि तत्वपाँचवाँ समूह (जैसे आर्सेनिक)तीसरा समूह (जैसे बोरॉन)
प्रमुख आवेश वाहकइलेक्ट्रॉन (ऋणात्मक)होल (धनात्मक)
चालकताइलेक्ट्रॉन की वजह से अधिकहोल की वजह से अधिक

n-प्रकार में अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं, जबकि p-प्रकार में अतिरिक्त होल होते हैं। ये दोनों मिलकर p-n जंक्शन बनाते हैं जो डायोड का आधार है।

अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी में तापमान का प्रभाव

अर्धचालकों की चालकता तापमान पर निर्भर करती है। तापमान बढ़ने पर:

  • संयोजकता बैंड से अधिक इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में जाते हैं।
  • मुक्त इलेक्ट्रॉन और होलों की संख्या बढ़ती है।
  • चालकता (σ) बढ़ती है, क्योंकि आवेश वाहक अधिक होते हैं।

यह गुण अर्धचालकों को ताप सेंसर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों में उपयोगी बनाता है।

समीकरण:

$$ \sigma = q (n_e \mu_e + n_h \mu_h) $$

जहाँ $q$ आवेश, $n_e$ और $n_h$ इलेक्ट्रॉन और होल सांद्रता, तथा $\mu_e$, $\mu_h$ उनकी गतिशीलता हैं।

कार्य उदाहरण: डायोड का करंट कैलकुलेशन

एक जेनर डायोड का ब्रेकडाउन वोल्टेज 9.1 V है और अधिकतम बिजली अपव्यय 364 mW है। अधिकतम करंट ज्ञात करें।

दिया गया:

  • $V = 9.1$ V
  • $P = 364$ mW = 0.364 W

सूत्र:

$$ I = \frac{P}{V} $$

गणना:

$$ I = \frac{0.364}{9.1} = 0.04 A = 40 mA $$

इस प्रकार, अधिकतम करंट 40 mA होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नैज अर्धचालक क्या होते हैं?

नैज अर्धचालक वे शुद्ध अर्धचालक होते हैं जिनमें कोई अशुद्धि नहीं मिलाई जाती, जैसे सिलिकॉन और जर्मेनियम।

n-प्रकार और p-प्रकार अर्धचालक में क्या अंतर है?

n-प्रकार में इलेक्ट्रॉन प्रमुख आवेश वाहक होते हैं, जबकि p-प्रकार में होल प्रमुख आवेश वाहक होते हैं।

डायोड का मुख्य कार्य क्या है?

डायोड एक दिशा में विद्युत प्रवाह की अनुमति देता है और दूसरी दिशा में रोकता है।

अर्धचालक की चालकता तापमान पर कैसे निर्भर करती है?

तापमान बढ़ने पर अर्धचालक में इलेक्ट्रॉन और होलों की संख्या बढ़ती है, जिससे चालकता बढ़ती है।

सरल अर्धचालक परिपथों में कौन-कौन सी युक्तियाँ होती हैं?

सरल परिपथों में डायोड, ट्रांजिस्टर और रेसिस्टर्स जैसी युक्तियाँ शामिल होती हैं।

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