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Chapter 6

🎓 Class 12📖 Bhautiki-II📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 5अध्याय 6 / 6

Chapter 6अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

14.1 भूमिका

व्याख्या

14.1 भूमिका

इस अनुभाग में अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी की भूमिका और विकास का वर्णन किया गया है। प्रारंभ में इलेक्ट्रॉनिक युक्तियाँ निर्वात नलिकाओं (वाल्व) पर आधारित थीं, जैसे निर्वात डायोड, ट्रायोड, टेट्रोड, पेंटोड आदि। इन युक्तियों में इलेक्ट्रॉनों का प्रवाह नियंत्रित करने के लिए निर्वात आवश्यक होता था क्योंकि इलेक्ट्रॉन वायु के अणुओं से टकराकर ऊर्जा खो देते हैं। निर्वात नलिकाएँ आकार में बड़ी, अधिक शक्ति का उपभोग करती थीं, उच्च वोल्टता पर कार्य करती थीं और इनकी विश्वसनीयता कम थी। सन् 1930 में ठोस-अवस्था अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी का विकास हुआ, जिसमें आवेश वाहकों की संख्या और प्रवाह की दिशा को नियंत्रित किया जा सकता था। अर्धचालक युक्तियाँ आकार में छोटी, कम शक्ति का उपभोग करती हैं, कम वोल्टता पर कार्य करती हैं, और अधिक विश्वसनीय होती हैं। अर्धचालक युक्तियों में आवेश वाहक ठोस के भीतर ही उत्पन्न और प्रवाहित होते हैं, जबकि निर्वात नलिकाओं में इलेक्ट्रॉन तप्त कैथोड से प्राप्त होते थे। प्राकृतिक रूप से गैलेना (PbS) के क्रिस्टल का उपयोग रेडियो तरंगों के संसूचक के रूप में किया गया था। इस अध्याय में अर्धचालक भौतिकी की मूल अवधारणाओं, p-n संधि, संधि डायोड, द्विध्रुवीय संधि ट्रांजिस्टर आदि की चर्चा की जाएगी।

  • निर्वात नलिकाएँ प्रारंभिक इलेक्ट्रॉनिक युक्तियाँ थीं जिनमें इलेक्ट्रॉन निर्वात में प्रवाहित होते थे।
  • निर्वात नलिकाएँ बड़ी, अधिक शक्ति उपभोग करने वाली और कम विश्वसनीय होती थीं।
  • ठोस-अवस्था अर्धचालक इलेक्ट्रॉनिकी ने कम वोल्टता, छोटे आकार और अधिक विश्वसनीयता प्रदान की।
  • अर्धचालक युक्तियों में आवेश वाहक ठोस के भीतर उत्पन्न और प्रवाहित होते हैं।
  • गैलेना क्रिस्टल का उपयोग रेडियो तरंगों के संसूचक के रूप में किया गया था।
  • इस अध्याय में अर्धचालक युक्तियों के मूल सिद्धांतों और अनुप्रयोगों की चर्चा होगी।
  • 📌 निर्वात नलिका (Vacuum tube): इलेक्ट्रॉनिक युक्ति जिसमें इलेक्ट्रॉन निर्वात में प्रवाहित होते हैं।
  • 📌 अर्धचालक (Semiconductor): ऐसा पदार्थ जिसमें चालकता धातुओं और विद्युतरोधियों के बीच होती है।
  • 📌 आवेश वाहक (Charge carriers): इलेक्ट्रॉन या होल जो विद्युत धारा प्रवाहित करते हैं।

14.2 धातुओं, चालकों तथा अर्धचालकों का वर्गीकरण

व्याख्या

14.2 धातुओं, चालकों तथा अर्धचालकों का वर्गीकरण

इस अनुभाग में पदार्थों को उनकी विद्युत चालकता (σ) और प्रतिरोधकता (ρ) के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। धातुओं की प्रतिरोधकता बहुत कम होती है (लगभग 10⁻² से 10⁻⁸ Ωm), जबकि विद्युतरोधियों की प्रतिरोधकता बहुत अधिक होती है (लगभग 10¹¹ से 10¹⁹ Ωm)। अर्धचालकों की प्रतिरोधकता इन दोनों के बीच होती है (लगभग 10⁻⁵ से 10⁶ Ωm)। इसी प्रकार चालकता भी इनके विपरीत क्रम में होती है। अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं: तात्विक अर्धचालक जैसे सिलिकॉन (Si) और जर्मेनियम (Ge), और यौगिक अर्धचालक जैसे CdS, GaAs आदि। यौगिक अर्धचालकों में कार्बनिक और अकार्बनिक दोनों प्रकार शामिल हैं। ऊर्जा बैंड संरचना के आधार पर, ठोस में इलेक्ट्रॉनों की ऊर्जा स्तर सतत बैंडों में व्यवस्थित होती है। संयोजकता बैंड (Valence band) और चालन बैंड (Conduction band) के बीच ऊर्जा अंतराल (E_g) पदार्थ की प्रकृति निर्धारित करता है। धातुओं में यह अंतराल शून्य या अतिव्याप्त होता है, विद्युतरोधियों में यह बहुत बड़ा होता है, और अर्धचालकों में यह मध्यम होता है। इस प्रकार, ऊर्जा बैंड संरचना पदार्थ के विद्युत गुणों को समझने में मदद करती है।

  • धातुओं की प्रतिरोधकता बहुत कम और चालकता बहुत अधिक होती है।
  • विद्युतरोधियों की प्रतिरोधकता बहुत अधिक और चालकता बहुत कम होती है।
  • अर्धचालकों की प्रतिरोधकता और चालकता धातुओं और विद्युतरोधियों के बीच होती है।
  • अर्धचालक तात्विक (Si, Ge) और यौगिक (CdS, GaAs) होते हैं।
  • ऊर्जा बैंड संरचना में संयोजकता बैंड और चालन बैंड के बीच ऊर्जा अंतराल E_g पदार्थ की प्रकृति निर्धारित करता है।
  • धातुओं में E_g ≈ 0, विद्युतरोधियों में E_g > 3 eV, अर्धचालकों में 0 < E_g < 3 eV होता है।
  • 📌 चालकता (Conductivity, σ): पदार्थ की विद्युत धारा प्रवाहित करने की क्षमता।
  • 📌 प्रतिरोधकता (Resistivity, ρ): पदार्थ का विद्युत धारा प्रवाह का प्रतिरोध।
  • 📌 ऊर्जा बैंड अंतराल (Energy band gap, E_g): संयोजकता बैंड और चालन बैंड के बीच ऊर्जा का अंतर।

14.3 नैज अर्धचालक

व्याख्या

14.3 नैज अर्धचालक

नैज अर्धचालक वे शुद्ध अर्धचालक होते हैं जिनमें कोई अशुद्धि नहीं मिलाई जाती। उदाहरण के लिए सिलिकॉन (Si) और जर्मेनियम (Ge) की क्रिस्टल संरचना हीरे जैसी होती है, जिसमें प्रत्येक परमाणु चार अन्य निकटतम परमाणुओं के साथ सहसंयोजी बंध बनाता है। प्रत्येक Si य

अभ्यास प्रश्नChapter 6

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.पूर्ण शून्य पर, Si एक के रूप में कार्य करता है
A.धातु
B.अर्धचालक
C.इन्सुलेटर
D.इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

इन्सुलेटर

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Q2.जब एक विद्युत क्षेत्र को एक अर्धविराम में लागू किया जाता है
A.सुचालक बैंड में कम ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर तक छेद चलते हैं।
B.इलेक्ट्रॉन चालन बैंड में उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर तक चलते हैं।
C.वैलेंस बैंड में छेद उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर तक चलते हैं।
D.वैलेंस बैंड में छेद निम्न ऊर्जा स्तर से उच्च ऊर्जा स्तर तक चलते हैं।

उत्तर:

वैलेंस बैंड में छेद उच्च ऊर्जा स्तर से निम्न ऊर्जा स्तर तक चलते हैं।

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Q3.एक n-प्रकार अर्धचालक है
A.नकारात्मक रूप से चार्ज किया गया।
B.सकारात्मक रूप से चार्ज किया गया।
C.उदासीन
D.इनमें से कोई नहीं

उत्तर:

उदासीन

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Q4.कंडक्टरों, अर्धचालकों और इन्सुलेटरों में निषिद्ध ऊर्जा बैंड अंतराल क्रमशः EG 1 ,EG 2 और EG 3 हैं। उनके बीच संबंध है
A.EG 1 = EG 2 = EG 3
B.EG 1 < EG 2 < EG 3
C.EG 1 > EG 2 > EG 3
D.EG 1 < EG 2 > EG 3

उत्तर:

EG 1 < EG 2 < EG 3

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Q5.एक अर्धचालक की विद्युत चालकता
A.इसके तापमान में वृद्धि के साथ घटता जाता है।
B.इसके तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है।
C.इसके तापमान में वृद्धि के साथ नहीं बदलता है।
D.पहले बढ़ता है और फिर उसके तापमान में वृद्धि के साथ घटता है

उत्तर:

इसके तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है।

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Q6.एक जेनर डायोड के विनियमन कार्रवाई के दौरान क्या होता है?
A.जेनर भर में वर्तमान और वोल्टेज निश्चित रहता है।
B.श्रृंखला प्रतिरोध (रुपये) के माध्यम से करंट नहीं बदलता है।
C.जेनर प्रतिरोध निरंतर है।
D.जेनर द्वारा प्रस्तुत प्रतिरोध बदल जाता है।

उत्तर:

जेनर द्वारा प्रस्तुत प्रतिरोध बदल जाता है।

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Q7.एक अर्धचालक की चालकता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ जाती है, क्योंकि
A.आज़ाद वर्तमान वाहक की संख्या घनत्व बढ़ जाती है।
B.विश्राम का समय बढ़ता है।
C.वाहकों की संख्या घनत्व और विश्राम समय दोनों में वृद्धि होती है।
D.वाहकों की संख्या घनत्व बढ़ जाती है, विश्राम का समय कम हो जाता है लेकिन विश्राम के समय में कमी का प्रभाव संख्या घनत्व में वृद्धि से बहुत कम होता है।

उत्तर:

वाहकों की संख्या घनत्व बढ़ जाती है, विश्राम का समय कम हो जाता है लेकिन विश्राम के समय में कमी का प्रभाव संख्या घनत्व में वृद्धि से बहुत कम होता है।

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Q8.यदि सोडियम प्रकाश की एक फोटॉन की ऊर्जा (A = 589 nm) सेमीकंडक्टर के बैंड गैप के बराबर होती है, तो होल इलेक्ट्रानिक जोड़ी बनाने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा ______
A.1.1 eV
B.2.1 eV
C.3.2 eV
D.1.5 eV

उत्तर:

2.1 eV

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