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Chapter 2

🎓 Class 12📖 Manav Paristhitik avam Parivar Vigyan Bhag 1📖 9 notes🧠 15 Q&A⏱️ ~14 min

Chapter 2Study Notes

NCERT-aligned · 9 notes · 3 shown free

प्रस्तावना

Explanation

प्रस्तावना

पोषण, खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी मानव जीवन के अभिन्न अंग हैं। भोजन केवल जैविक आवश्यकता नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक पहचान का भी हिस्सा है। भोजन हमारे शरीर को विकसित करता है, कार्य करने योग्य बनाता है और संक्रमणों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है। पोषण का अर्थ है भोजन के माध्यम से शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों की प्राप्ति, उनका पाचन, अवशोषण और उपयोग। यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। शरीर के प्रत्येक कोशिका, ऊतक और अंगों का निर्माण और पुनर्निर्माण भोजन से प्राप्त पोषक तत्वों पर निर्भर करता है। हालांकि, सही पोषण का ज्ञान सभी को नहीं होता, जिससे कुपोषण या अतिपोषण की समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। भारत में कुपोषण के साथ-साथ मोटापा, मधुमेह, हृदय रोग जैसी बीमारियाँ भी बढ़ रही हैं। इसलिए पोषण से संबंधित ज्ञान और प्रशिक्षण अत्यंत आवश्यक है। खाद्य पदार्थों का संरक्षण, संसाधन और प्रसंस्करण भी खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत खाद्य उत्पादन में अग्रणी है, लेकिन उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा नष्ट हो जाता है, इसलिए खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी का विकास आवश्यक है। साथ ही, भोजन की सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (2006) लागू किया गया है। इस अध्याय में नैदानिक पोषण और आहारिकी के महत्व, कार्यक्षेत्र और जीविका के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

  • भोजन जैविक आवश्यकता के साथ-साथ सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक पहचान का हिस्सा है।
  • पोषण शरीर के विकास, कार्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए आवश्यक है।
  • भारत में कुपोषण के साथ-साथ अतिपोषण और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ बढ़ रही हैं।
  • खाद्य संरक्षण, संसाधन और प्रसंस्करण खाद्य सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं।
  • खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (2006) से भोजन की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • नैदानिक पोषण और आहारिकी में प्रशिक्षित विशेषज्ञों की आवश्यकता बढ़ रही है।
  • 📌 पोषण: भोजन के माध्यम से शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों की प्राप्ति, पाचन, अवशोषण और उपयोग।
  • 📌 खाद्य सुरक्षा: उपभोक्ताओं को सुरक्षित, पोषक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना।
  • 📌 कुपोषण: पोषक तत्वों की कमी के कारण शरीर की सामान्य वृद्धि और कार्य में बाधा।

नैदानिक पोषण और आहारिकी

Concept

नैदानिक पोषण और आहारिकी

नैदानिक पोषण वह क्षेत्र है जो बीमारी के समय पोषण की भूमिका से संबंधित है। यह चिकित्सीय पोषण उपचार के नाम से भी जाना जाता है। पोषण केवल स्वस्थ रहने के लिए नहीं, बल्कि बीमारी के दौरान रोगी की देखभाल, उपचार और पुनर्वास के लिए भी आवश्यक है। बीमारी के कारण शरीर की पाचन, अवशोषण और पोषक तत्वों के उपयोग की क्षमता प्रभावित होती है। इसलिए रोगी की पोषण आवश्यकताओं का मूल्यांकन, निदान और उपयुक्त पोषण हस्तक्षेप आवश्यक होता है। नैदानिक पोषण विशेषज्ञ या आहार विशेषज्ञ रोगी की शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि को ध्यान में रखकर आहार योजना बनाते हैं। बीमारियों के प्रकार के अनुसार आहार में संशोधन किया जाता है, जैसे प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना या घटाना, तरल या नरम आहार देना, कुछ खाद्य पदार्थों पर रोक लगाना आदि। यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है क्योंकि मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा जैसी गैर-संक्रामक बीमारियाँ बढ़ रही हैं। साथ ही, वृद्ध जनसंख्या की संख्या बढ़ने से पोषण देखभाल की मांग भी बढ़ी है। नैदानिक पोषण विशेषज्ञों को पोषण मूल्यांकन, आहार योजना, रोगी परामर्श, खाद्य सुरक्षा, खाद्य विज्ञान, जैव रसायन, मनोविज्ञान, और सामाजिक विज्ञान का ज्ञान होना आवश्यक है।

  • नैदानिक पोषण बीमारी के समय पोषण देखभाल से संबंधित है।
  • रोगी की पोषण आवश्यकताओं का मूल्यांकन और निदान आवश्यक होता है।
  • आहार में ऊर्जा, पोषक तत्वों और भोजन की बनावट में संशोधन किया जाता है।
  • मधुमेह, हृदय रोग, मोटापा जैसी बीमारियों में पोषण की भूमिका महत्वपूर्ण है।
  • नैदानिक पोषण विशेषज्ञ को बहुविषयक ज्ञान और कौशल की आवश्यकता होती है।
  • वृद्ध जनसंख्या में पोषण देखभाल की मांग बढ़ रही है।
  • 📌 नैदानिक पोषण: बीमारी के दौरान पोषण देखभाल और उपचार।
  • 📌 आहारिकी: पोषण से संबंधित आहार योजना और प्रबंधन।
  • 📌 चिकित्सीय पोषण उपचार: रोगी की विशेष पोषण आवश्यकताओं के अनुसार आहार देना।

मूलभूत संकल्पनाएँ

Concept

मूलभूत संकल्पनाएँ

आहार विशेषज्ञ या नैदानिक पोषण चिकित्सक की भूमिका रोगी को उचित पोषण सलाह देना और जीवन चक्र के विभिन्न चरणों में स्वस्थ पोषण बनाए रखने में सहायता करना है। यह क्षेत्र विभिन्न रोगों जैसे दस्त, उल्टी, अरक्तता, बुखार, क्षयरोग, अल्सर, मिरगी, कैंसर, मोटापा,

Practice QuestionsChapter 2

15 practice questions with detailed answers

Q1.नैदानिक पोषण और आहारिकी का क्या अर्थ है और इसका हमारे स्वास्थ्य में क्या महत्व है?

Answer:

नैदानिक पोषण और आहारिकी वह क्षेत्र है जो बीमारी के समय पोषण की आवश्यकताओं और आहार प्रबंधन से संबंधित होता है। इसका महत्व इसलिए है क्योंकि यह संक्रमण से रक्षा करता है, रोगों के उपचार में सहायता करता है और स्वास्थ्य की गुणवत्ता बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, मधुमेह रोगियों के लिए विशेष आहार योजना बनाना।

Explanation:

नैदानिक पोषण और आहारिकी बीमारी के समय पोषण की भूमिका को समझता है और रोगी की पोषण आवश्यकताओं के अनुसार आहार योजना बनाता है। यह रोगी की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और उपचार प्रक्रिया को सफल बनाता है।

Easy
Q2.निम्नलिखित में से कौन सा आहार संशोधित आहार का उदाहरण है जो रोगी की चिकित्सीय आवश्यकताओं के अनुसार बनाया जाता है?
A.A) नियमित आहार जिसमें सभी प्रकार के भोजन शामिल हों
B.B) तरल आहार जो जठरांत्र रोगियों के लिए दिया जाता है
C.C) बाहर का तला हुआ भोजन
D.D) बिना किसी प्रतिबंध के सामान्य भोजन

Answer:

तरल आहार जो जठरांत्र रोगियों के लिए दिया जाता है

Explanation:

संशोधित आहार वे होते हैं जो रोगी की चिकित्सीय आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए समायोजित किए जाते हैं। तरल आहार जठरांत्र विकारों वाले रोगियों के लिए उपयुक्त होता है क्योंकि इसे पचाना आसान होता है। नियमित आहार और बिना प्रतिबंध के भोजन संशोधित आहार नहीं होते।

Easy
Q3.निम्नलिखित में से किस प्रकार का आहार पूर्ण तरल आहार कहलाता है?
A.A) खिचड़ी और दलिया
B.B) नारियल पानी, फलों के रस, सूप
C.C) तला हुआ भोजन
D.D) कड़ाही में भुनी हुई सब्जियाँ

Answer:

नारियल पानी, फलों के रस, सूप

Explanation:

पूर्ण तरल आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं जो द्रव अवस्था में होते हैं और पचाने में आसान होते हैं जैसे नारियल पानी, फलों के रस और सूप। खिचड़ी और दलिया नरम आहार हैं, तला हुआ भोजन और भुनी सब्जियाँ पूर्ण तरल आहार नहीं हैं।

Easy
Q4.नरम आहार और तैयार मृदु आहार में क्या अंतर है? उदाहरण सहित समझाइए।

Answer:

नरम आहार वह होता है जिसमें भोजन नरम होता है और चबाना-पचाना आसान होता है, जैसे खिचड़ी और दलिया। तैयार मृदु आहार विशेष रूप से वृद्धजनों के लिए होता है जिसमें भोजन नरम, कुचला हुआ और शोरबा युक्त होता है, जिससे चबाने में आसानी हो। उदाहरण के लिए वृद्धजनों के लिए नरम सब्जी का शोरबा।

Explanation:

नरम आहार हल्के पकाए गए खाद्य पदार्थ होते हैं जो पचाने में आसान होते हैं। तैयार मृदु आहार वृद्धजनों के लिए विशेष रूप से नरम और कुचला हुआ भोजन होता है। दोनों का उद्देश्य पाचन को सरल बनाना है लेकिन मृदु आहार अधिक नरम और आसानी से निगलने योग्य होता है।

Medium
Q5.नली द्वारा भोजन ग्रहण करने और अंतःशिरा पोषण में क्या अंतर है? किन परिस्थितियों में प्रत्येक का उपयोग किया जाता है?

Answer:

नली द्वारा भोजन ग्रहण में पोषण जठरांत्र नली के माध्यम से दिया जाता है जबकि अंतःशिरा पोषण में पोषण सीधे रक्त में दिया जाता है। नली द्वारा भोजन तब दिया जाता है जब जठरांत्र कार्य कर रहा हो लेकिन रोगी निगल न सके। अंतःशिरा पोषण तब दिया जाता है जब जठरांत्र कार्य नहीं कर रहा हो या निगलना संभव न हो।

Explanation:

नली द्वारा भोजन ग्रहण पाचन तंत्र के माध्यम से पोषण देता है और यह अधिक प्राकृतिक तरीका है। अंतःशिरा पोषण तब आवश्यक होता है जब पाचन तंत्र कार्य नहीं कर रहा होता। दोनों विधियाँ रोगी की स्थिति के अनुसार चुनी जाती हैं।

Medium
Q6.भारत में खाद्य पदार्थों के संरक्षण और संसाधन की आवश्यकता क्यों बढ़ी है? इसके सामाजिक और आर्थिक कारण बताइए।

Answer:

(a) परिचय: भारत में उत्पादन के बावजूद खाद्य पदार्थों का 1/5 से 1/3 भाग नष्ट हो जाता है, जिससे संरक्षण आवश्यक हो जाता है। (b) उत्पादन की लागत कम और विदेशी निवेश अधिक है, इसलिए संसाधन महत्वपूर्ण है। (c) सामाजिक-सांस्कृतिक परिवर्तनों से तैयार और संसाधित खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ी है। (d) बीमारियों की बढ़ती संख्या के कारण विशेष खाद्य पदार्थों का विकास आवश्यक है। (e) निष्कर्ष: खाद्य संरक्षण और संसाधन से खाद्य सुरक्षा, आर्थिक बचत और स्वास्थ्य सुधार संभव है।

Explanation:

भारत में खाद्य उत्पादन के बावजूद बहुत सारा भोजन नष्ट हो जाता है। सामाजिक बदलावों और आर्थिक कारणों से संसाधित खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ी है। बीमारियों के अनुरूप खाद्य पदार्थों का विकास भी आवश्यक हो गया है। इसलिए खाद्य संरक्षण और संसाधन से आर्थिक और स्वास्थ्य लाभ होता है।

Hard
Q7.नैदानिक पोषण विशेषज्ञ की भूमिका और कार्य क्या होते हैं? विस्तार से समझाइए।

Answer:

(a) परिचय: नैदानिक पोषण विशेषज्ञ रोगी की पोषण आवश्यकताओं का मूल्यांकन करते हैं। (b) पोषण देखभाल योजना बनाना और लागू करना। (c) रोगी की बीमारी के अनुसार आहार संशोधन करना। (d) स्वास्थ्य देखभाल टीम के साथ समन्वय करना। (e) रोगों की रोकथाम और उपचार में पोषण की भूमिका निभाना। (f) निष्कर्ष: नैदानिक पोषण विशेषज्ञ रोगी के स्वास्थ्य सुधार में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।

Explanation:

नैदानिक पोषण विशेषज्ञ रोगी की पोषण स्थिति का मूल्यांकन कर उचित आहार योजना बनाते हैं, उसे लागू करते हैं और स्वास्थ्य देखभाल टीम के साथ मिलकर काम करते हैं। वे रोगों की रोकथाम और उपचार में पोषण की भूमिका निभाते हैं।

Hard
Q8.निम्नलिखित कथनों में से कौन सही है? अधिकारिता (Assertion): नैदानिक पोषण विशेषज्ञ केवल आहार योजना बनाते हैं और रोगी के उपचार में अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका नहीं होती। कारण (Reason): आहार योजना बनाना ही नैदानिक पोषण विशेषज्ञ का मुख्य कार्य है। A) दोनों A और R सही हैं और R, A का सही स्पष्टीकरण है। B) दोनों A और R सही हैं लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है। C) A सही है लेकिन R गलत है। D) A गलत है लेकिन R सही है।
A.A) दोनों A और R सही हैं और R, A का सही स्पष्टीकरण है।
B.B) दोनों A और R सही हैं लेकिन R, A का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
C.C) A सही है लेकिन R गलत है।
D.D) A गलत है लेकिन R सही है।

Answer:

D) A गलत है लेकिन R सही है।

Explanation:

अधिकारिता गलत है क्योंकि नैदानिक पोषण विशेषज्ञ आहार योजना के साथ-साथ अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के साथ मिलकर रोगी की देखभाल करते हैं। कारण सही है कि आहार योजना उनका मुख्य कार्य है। इसलिए विकल्प D सही है।

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