Nutrition and Health
Nutrition and Health — Study Notes
NCERT-aligned · 10 notes · 3 shown free
अधिगम उद्देश्य
Explanationअधिगम उद्देश्य
इस अध्याय का उद्देश्य शिक्षार्थियों को जन पोषण और जन स्वास्थ्य के महत्व तथा उनके कार्यक्षेत्र की गहन समझ प्रदान करना है। अध्याय के अंतर्गत विद्यार्थी जन पोषण के महत्व को समझेंगे और जन स्वास्थ्य से जुड़ी पोषण संबंधी समस्याओं जैसे अल्पपोषण और अतिपोषण के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे। इसके अतिरिक्त, वे भारत में पोषण संबंधी समस्याओं से निपटने के लिए सरकार द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों और नीतियों से भी परिचित होंगे। इस प्रकार, यह अध्याय न केवल पोषण की समस्याओं को समझने में मदद करता है, बल्कि उनके समाधान के लिए व्यावहारिक उपायों और सरकारी प्रयासों की भी जानकारी देता है। **Table on page 11 (6×4)** | हस्तक्षेप | जिसके लिए उचित है | लाभ | चुनौतियाँ/हानियाँ | | --- | --- | --- | --- | | चिकित्सीय अथवा पोषण–आधारित | | | | | पोषण पूरक | डॉक्टरी उपचार रोकथाम विशिष्ट लक्ष्य समूहों के लिए कार्यक्रम | समयबद्ध दीर्घोपयोगिता | दूसरे उपायों से अधिक महँगे कार्यक्षेत्र का सीमित लक्ष्य | | भोजन–आधारित अथवा आहार - आधारित नीतियाँ | | | | | पुष्टीकरण (भोजन को पोषकों द्वारा पुष्ट करना) | रोकथाम (सार्वभौमिक / सभी लिए) | बहुत अधिक मूल्य- प्रभाव दीर्घोपयोगी व्यापक क्षेत्र | खाद्य उद्योग की भागीदारी की आवश्यकता होती है। पोषण और पोषकों के महत्व के बारे में लोगों को जागरूक नहीं करता। लंबी अवधि वाले दीर्घकालिक आहारी/व्यावहारिक परिवर्तनों की ओर अग्रसित नहीं करता। आहारी/व्यावहारिक परिवर्तनों की ओर अग्रसित नहीं करता। | | आहार विविधता | रोकथाम (सार्वभौमिक / सभी के लिए) | बहुत अधिक मूल्य प्रभावी दीर्घोपयोगी व्यापक क्षेत्र बहुत से सूक्ष्म पोषक एक साथ उपलब्ध कराना भोजन सुरक्षा में सुधार | भोजन लेने के व्यवहार में परिवर्तन की आवश्यकता होती है। आर्थिक विकास की संभावना की आवश्यकता होती है। कृषि नीतियों में परिवर्तन की आवश्यकता |
- जन पोषण के महत्व और कार्यक्षेत्र की समझ विकसित करना।
- जन स्वास्थ्य और पोषण समस्याओं का ज्ञान प्राप्त करना।
- सरकारी पोषण कार्यक्रमों की जानकारी लेना।
- 📌 जन पोषण: समाज के सभी लोगों के पोषण स्तर को बेहतर बनाने की प्रक्रिया।
- 📌 जन स्वास्थ्य: समाज के सभी लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा और संवर्धन।
प्रस्तावना
Explanationप्रस्तावना
इस खंड में जन पोषण और जन स्वास्थ्य की मूलभूत संकल्पनाओं का परिचय दिया गया है। कक्षा 11 में पोषण और स्वास्थ्य के आधारभूत सिद्धांतों को पढ़ने के बाद, अब इस अध्याय में 'जन' शब्द के महत्व को समझना आवश्यक है। जन स्वास्थ्य का अर्थ है समाज के सभी लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा और संवर्धन के लिए सामूहिक प्रयास। विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा स्वास्थ्य को केवल रोगमुक्त अवस्था नहीं, बल्कि पूर्ण शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण की स्थिति के रूप में परिभाषित किया गया है। जन स्वास्थ्य पोषण का उद्देश्य अल्पपोषण और अतिपोषण दोनों को रोकना तथा लोगों के लिए अनुकूलतम पोषण स्तर बनाए रखना है। यह क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और सांस्कृतिक कारकों को ध्यान में रखते हुए पोषण संबंधी समस्याओं का समाधान करता है।
- जन स्वास्थ्य का अर्थ है समाज के सभी लोगों के स्वास्थ्य की रक्षा।
- स्वास्थ्य की परिभाषा में शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण शामिल है।
- जन पोषण का लक्ष्य अल्पपोषण और अतिपोषण दोनों की रोकथाम है।
- यह क्षेत्र बहुविषयक है और सामाजिक-आर्थिक कारकों को भी ध्यान में रखता है।
- 📌 जन स्वास्थ्य: समाज के सभी लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सामूहिक प्रयास।
- 📌 अल्पपोषण: शरीर को आवश्यक पोषक तत्वों की कमी।
- 📌 अतिपोषण: शरीर में पोषक तत्वों की आवश्यकता से अधिक मात्रा।
महत्व
Explanationमहत्व
भारत में पोषण संबंधी समस्याएँ गंभीर हैं और विशेष रूप से पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है। लगभग 50 प्रतिशत बच्चों की मृत्यु कुपोषण के कारण होती है। भारत में जन्म के समय लगभग 1/5 बच्चे कम जन्म-भार वाले होते हैं, ज
Practice Questions — Nutrition and Health
Includes NCERT exercise questions with answers
Q1.1. निम्नलिखित शब्दों को समझाइए — बौनापन, जन्म के समय कम भार वाला शिशु, आई. डी. डी., क्षयकारी, कुपोषण का दोहरा भार, मरास्मस, क्वाशिओरकोर, समुदाय।
Answer:
उत्तर: 1. बौनापन: शारीरिक विकास में कमी या सामान्य से कम विकास को बौनापन कहते हैं। 2. जन्म के समय कम भार वाला शिशु: ऐसा शिशु जिसका जन्म के समय वजन 2.5 किलोग्राम से कम होता है। 3. आई. डी. डी. (आयोडीन की कमी विकार): आयोडीन की कमी के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएँ, जैसे गंडमाला। 4. क्षयकारी: वह रोग जो शरीर की ऊर्जा और पोषण को कम कर देता है, जैसे तपेदिक। 5. कुपोषण का दोहरा भार: एक ही समय में पोषण की कमी और अधिकता दोनों की समस्या होना। 6. मरास्मस: प्रोटीन और कैलोरी की गंभीर कमी से होने वाला कुपोषण। 7. क्वाशिओरकोर: प्रोटीन की कमी से होने वाला कुपोषण। 8. समुदाय: एक निश्चित क्षेत्र या समूह के लोग जो सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से जुड़े होते हैं।
Explanation:
प्रत्येक शब्द का अर्थ और उससे संबंधित स्वास्थ्य या सामाजिक स्थिति को विस्तार से समझाया गया है।
Q2.2. जन पोषण समस्याओं से जूझने के लिए उपयोग में लाई जा सकने वाली विभिन्न कार्य नीतियों की विवेचना कीजिए।
Answer:
उत्तर: जन पोषण समस्याओं से निपटने के लिए विभिन्न कार्य नीतियाँ अपनाई जाती हैं, जिनमें शामिल हैं: 1. पोषण शिक्षा: लोगों को सही आहार और पोषण के बारे में जागरूक करना। 2. पूरक आहार कार्यक्रम: विशेष रूप से बच्चों, गर्भवती महिलाओं और वृद्धों के लिए पोषण पूरक प्रदान करना। 3. स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार: टीकाकरण, रोग नियंत्रण और स्वास्थ्य जांच। 4. स्वच्छता और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना। 5. सामाजिक सुरक्षा योजनाएँ: गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों के लिए सहायता। 6. बाल विकास कार्यक्रम: जैसे आई.सी.डी.एस. केंद्रों के माध्यम से पोषण और स्वास्थ्य सेवाएँ। 7. सरकारी और गैर-सरकारी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक पोषण अभियान। इन नीतियों का उद्देश्य पोषण की कमी को दूर करना, रोगों को रोकना और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना है।
Explanation:
जन पोषण समस्याओं के समाधान हेतु विभिन्न नीतियों का वर्णन और उनका उद्देश्य स्पष्ट किया गया है।
Q3.3. जन स्वास्थ्य पोषण क्या है?
Answer:
उत्तर: जन स्वास्थ्य पोषण वह क्षेत्र है जो पूरे समुदाय या जनसंख्या के पोषण स्तर को सुधारने और पोषण संबंधी समस्याओं को रोकने के लिए कार्य करता है। इसमें पोषण की निगरानी, मूल्यांकन, शिक्षा, और पोषण कार्यक्रमों का विकास शामिल है। इसका उद्देश्य स्वस्थ जीवन और रोगों से बचाव सुनिश्चित करना है।
Explanation:
जन स्वास्थ्य पोषण की परिभाषा और उद्देश्य को संक्षेप में बताया गया है।
Q4.4. भारत किन सामान्य पोषण समस्याओं का सामना कर रहा है?
Answer:
उत्तर: भारत में सामान्य पोषण समस्याएँ निम्नलिखित हैं: 1. कुपोषण (अल्प पोषण) विशेषकर बच्चों में। 2. आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया। 3. आयोडीन की कमी से होने वाले विकार (आई.डी.डी.)। 4. विटामिन A की कमी। 5. प्रोटीन और कैलोरी की कमी। 6. मोटापा और उससे जुड़ी बीमारियाँ। 7. बाल विकास में देरी। ये समस्याएँ सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय कारणों से उत्पन्न होती हैं।
Explanation:
भारत में प्रमुख पोषण समस्याओं का संक्षिप्त विवरण दिया गया है।
Q5.5. आई. डी. ए और आई. डी. डी. के परिणाम क्या होते हैं?
Answer:
उत्तर: 1. आई. डी. ए. (आयरन की कमी से होने वाली एनीमिया) के परिणाम: - थकान और कमजोरी - ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई - प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होना - गर्भवती महिलाओं में शिशु मृत्यु दर बढ़ना 2. आई. डी. डी. (आयोडीन की कमी विकार) के परिणाम: - गंडमाला (थायरॉइड ग्रंथि का बढ़ना) - मानसिक विकास में कमी - बौद्धिक अक्षमता - गर्भपात और शिशु मृत्यु दर में वृद्धि इन दोनों की कमी से स्वास्थ्य और विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
Explanation:
आई. डी. ए और आई. डी. डी. के कारण होने वाले स्वास्थ्य प्रभावों का वर्णन किया गया है।
Q6.6. सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण का दायरा क्या है? इस क्षेत्र में कैरियर के कुछ विकल्पों को सूचीबद्ध करें।
Answer:
उत्तर: सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण का दायरा: - जनसंख्या के पोषण स्तर का मूल्यांकन और निगरानी - पोषण संबंधी नीतियों और कार्यक्रमों का विकास - पोषण शिक्षा और जागरूकता अभियान - पोषण संबंधी रोगों की रोकथाम - खाद्य सुरक्षा और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना कैरियर विकल्प: - सामुदायिक पोषण विशेषज्ञ - पोषण सलाहकार - सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारी - पोषण कार्यक्रम प्रबंधक - शोधकर्ता - शिक्षण और प्रशिक्षण विशेषज्ञ - सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों में कार्य यह क्षेत्र स्वास्थ्य संवर्धन और रोग नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
Explanation:
सार्वजनिक स्वास्थ्य पोषण के कार्यक्षेत्र और कैरियर विकल्पों का विस्तार से वर्णन किया गया है।
Q7.जन स्वास्थ्य पोषण का क्या अर्थ है और इसका उद्देश्य क्या होता है?
Answer:
जन स्वास्थ्य पोषण वह क्षेत्र है जो समाज के सभी लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए पोषण संबंधी समस्याओं का समाधान करता है। इसका उद्देश्य अल्पपोषण और अतिपोषण को रोकना तथा लोगों के लिए अनुकूलतम पोषण स्तर बनाए रखना है।
Explanation:
जन स्वास्थ्य पोषण का अर्थ है समाज के संगठित प्रयासों द्वारा सभी लोगों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना। इसका लक्ष्य पोषण संबंधी रोगों जैसे अल्पपोषण और अतिपोषण को रोकना और लोगों को उचित पोषण उपलब्ध कराना है। यह क्षेत्र सरकारी नीतियों और कार्यक्रमों के माध्यम से कार्य करता है।
Q8.भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु में कुपोषण का क्या योगदान है?
Answer:
लगभग 50 प्रतिशत
Explanation:
भारत में पाँच वर्ष से कम आयु के लगभग आधे बच्चों की मृत्यु का मुख्य कारण कुपोषण होता है, जो पोषण की गंभीर समस्या को दर्शाता है।
All 7 Chapters in Manav Paristhitik avam Parivar Vigyan Bhag 1
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