Chapter 9
Chapter 9 — अध्ययन नोट्स
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9.1 रासायनिक संघटन का विश्लेषण कैसे करें?
व्याख्या9.1 रासायनिक संघटन का विश्लेषण कैसे करें?
जीवों के शरीर में पाए जाने वाले रासायनिक तत्वों और यौगिकों का विश्लेषण करने के लिए वैज्ञानिक विभिन्न विधियों का प्रयोग करते हैं। जीव ऊतकों जैसे पादप और प्राणी ऊतकों का परीक्षण करने पर हमें कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, सल्फर, कैल्सियम, मैग्नीशियम आदि तत्व मिलते हैं। ये तत्व भू-पर्पटी में भी पाए जाते हैं, लेकिन जीवों में कार्बन और हाइड्रोजन की मात्रा अधिक होती है। जीव ऊतकों का रासायनिक विश्लेषण करने के लिए ऊतक को ट्राइक्लोरोएसिटिक अम्ल के साथ पीसकर अम्ल में घुलनशील (निस्संद) और अम्ल में अविलेय (धारित) अंशों में विभाजित किया जाता है। अम्ल में घुलनशील अंश में हजारों कार्बनिक यौगिक पाए जाते हैं जिन्हें जैव अणु कहा जाता है। अम्ल अविलेय अंश में प्रोटीन, न्यूक्लीक अम्ल, पॉलीसैकेराइड और लिपिड्स पाए जाते हैं। जीव ऊतकों को शुष्क कर जल वाष्पित कर शुष्क भार प्राप्त किया जाता है, फिर जलाए जाने पर बचा हुआ भस्म अकार्बनिक तत्वों का स्रोत होता है। इस प्रकार जीवों में पाए जाने वाले तत्वों का प्रतिशत और प्रकार भू-पर्पटी से भिन्न होते हैं। जीवों में पाए जाने वाले अकार्बनिक आयनों में सोडियम (Na⁺), पोटैसियम (K⁺), कैल्सियम (Ca²⁺), मैग्नीशियम (Mg²⁺) प्रमुख हैं। अमीनो अम्ल α-कार्बन पर अमीनो समूह (-NH₂), कार्बॉक्सिल समूह (-COOH), हाइड्रोजन और R समूह से जुड़े होते हैं। R समूह की प्रकृति के आधार पर अमीनो अम्लों के भिन्न प्रकार होते हैं। **Table on page 2 (10×3)** | --- | --- | --- | | हाइड्रोजन (H) | 0.14 | 0.5 | | कार्बन (C) | 0.03 | 18.5 | | ऑक्सीजन (O) | 46.6 | 65.0 | | नाइट्रोजन (N) | बहुत थोड़ा | 3.3 | | सल्फर (S) | 0.03 | 0.3 | | सोडियम (Na) | 2.8 | 0.2 | | कैल्सियम (Ca) | 3.6 | 1.5 | | मैग्नीशियम (Mg) | 2.1 | 0.1 | | सिलिकॉन (Si) | 27.7 | नगण्य | | * सी.एन. राव द्वारा लिखित ‘अंडरस्टैंडिंग केमेस्ट्री’ से उद्धृतित, विश्वविद्यालय प्रकाशन, हैदराबाद | | | **Table on page 2 (7×2)** | घटक | सूत्र | | --- | --- | | सोडियम | Na⁺ | | पोटैसियम | K⁺ | | कैल्सियम | Ca²⁺ | | मैग्नीशियम | Mg²⁺ | | जल | H₂O | | यौगिक | NaCl, CaCO₃, PO₄³⁻, SO₄²⁻ |
- जीवों में कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन आदि तत्व पाए जाते हैं।
- जीव ऊतकों का रासायनिक विश्लेषण ट्राइक्लोरोएसिटिक अम्ल के साथ किया जाता है।
- अम्ल में घुलनशील अंश में जैव अणु होते हैं, अम्ल अविलेय अंश में प्रोटीन, न्यूक्लीक अम्ल, पॉलीसैकेराइड और लिपिड्स होते हैं।
- शुष्क भार और भस्म द्वारा जीवों में जल और अकार्बनिक तत्वों की मात्रा ज्ञात की जाती है।
- कोशिका में सोडियम, पोटैसियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम जैसे आयन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- अमीनो अम्ल α-कार्बन पर अमीनो, कार्बॉक्सिल, हाइड्रोजन और R समूह से जुड़े होते हैं।
- 📌 जैव अणु: जीवों में पाए जाने वाले कार्बनिक यौगिक।
- 📌 निस्संद: अम्ल में घुलनशील भाग।
- 📌 धारित: अम्ल में अविलेय भाग।
9.2 प्राथमिक एवं द्वितीयक उपापचयज
व्याख्या9.2 प्राथमिक एवं द्वितीयक उपापचयज
जीवों में पाए जाने वाले हजारों कार्बनिक यौगिकों को उपापचयज कहा जाता है। ये यौगिक दो प्रकार के होते हैं: प्राथमिक उपापचयज और द्वितीयक उपापचयज। प्राथमिक उपापचयज वे यौगिक हैं जो सभी जीवों में सामान्यतया पाए जाते हैं और जिनकी भूमिका जीवन की सामान्य क्रियाओं में स्पष्ट होती है, जैसे अमीनो अम्ल, शर्करा, वसा आदि। द्वितीयक उपापचयज वे यौगिक हैं जो कुछ विशेष जीवों में पाए जाते हैं और जिनकी भूमिका पूरी तरह ज्ञात नहीं होती, जैसे एल्केलायड, फ्लेवेनोयड्स, रबर, आवश्यक तेल, प्रतिजैविक, रंगीन वर्णक आदि। द्वितीयक उपापचयज का पारिस्थितिक महत्व और मानव जीवन में उपयोगिता अधिक होती है। उदाहरण के लिए, रबर, मसाले, औषधि, इत्र आदि द्वितीयक उपापचयज हैं। इन यौगिकों की उपस्थिति जीवों की विविधता और उनके पर्यावरण के साथ संबंध को दर्शाती है। **Table on page 5 (8×2)** | वर्णक | कैरोटीनाएड्स, एंथोसाइनिन्स, आदि | | --- | --- | | एल्केलायड | मार्फीन, कोडीन, आदि | | टेरपेनाइड्स | मोनोटरपीस, डाइटरपीस आदि | | आवश्यक तेल | नींबूघास तेल, आदि | | टॉक्सीन | एब्रिन, रिसीन | | लेक्टिन्स | कोनकेनेवेलीन ए | | ड्रग्स | वीनब्लेस्टीन, करकुमीन आदि | | बहुलक पदार्थ | रबर, गोंद |
- प्राथमिक उपापचयज सभी जीवों में पाए जाते हैं और जीवन के सामान्य कार्यों में सहायक होते हैं।
- द्वितीयक उपापचयज कुछ विशेष जीवों में पाए जाते हैं और उनकी भूमिका पूरी तरह ज्ञात नहीं है।
- द्वितीयक उपापचयज में एल्केलायड, फ्लेवेनोयड्स, रबर, आवश्यक तेल, प्रतिजैविक आदि शामिल हैं।
- द्वितीयक उपापचयज का पारिस्थितिक और औद्योगिक महत्व होता है।
- प्राथमिक उपापचयज में अमीनो अम्ल, शर्करा, वसा आदि आते हैं।
- 📌 प्राथमिक उपापचयज: जीवन की सामान्य क्रियाओं में आवश्यक जैविक यौगिक।
- 📌 द्वितीयक उपापचयज: विशेष जीवों में पाए जाने वाले जैविक यौगिक जिनका कार्य पूरी तरह ज्ञात नहीं।
9.3 वृहत् जैव अणु
व्याख्या9.3 वृहत् जैव अणु
जीवों में पाए जाने वाले जैव अणु दो प्रकार के होते हैं: सूक्ष्म अणु जिनका अणुभार 1000 डाल्टन से कम होता है, और वृहत् अणु जिनका अणुभार हजारों से लाखों डाल्टन तक होता है। अम्ल घुलनशील अंश में पाए जाने वाले यौगिक सूक्ष्म अणु होते हैं, जबकि अम्ल अविलेय अं
अभ्यास प्रश्न — Chapter 9
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1._________ एक तकनीक है जहाँ पौधे हवा में निलंबित अपनी जड़ों के साथ उगाए जाते हैं।
उत्तर:
४.एरोफोनिकस
Q2.___________ एक महत्वपूर्ण खनिज पोषक तत्व है
उत्तर:
2. नाइट्रोजन
Q3.सबसे सरल अमीनो एसिड का नाम बताइए
उत्तर:
४) ग्लाइसिन
Q4.कौन सा बायोमोल्यूल/ जैवअणु,एक सेल में अधिक व्यापक रूप से वितरित किया जाता है?
उत्तर:
२ आर.एन.ए.
Q5.निम्न मे से रेदुसिंग शुगर(चीनी) कौन सी है?
उत्तर:
(ए) गैलेक्टोज
Q6.1. वृहत् अणु क्या है? उदाहरण दीजिए?
उत्तर:
वृहत् अणु (Macromolecule) वे अणु होते हैं जिनका अणुभार बहुत बड़ा होता है और जो जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उदाहरण के लिए, प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड (DNA, RNA), पॉलिसैकराइड (जैसे सेल्यूलोज, स्टार्च) आदि।
व्याख्या:
वृहत् अणु छोटे अणुओं के संयोजन से बनते हैं और ये जीवों के संरचनात्मक और कार्यात्मक घटक होते हैं। इनके उदाहरण प्रोटीन, न्यूक्लिक एसिड, और पॉलिसैकराइड हैं।
Q7.2. प्रोटीन की तृतीयक संरचना से क्या तात्पर्य है?
उत्तर:
प्रोटीन की तृतीयक संरचना से तात्पर्य प्रोटीन के एकल पॉलिपेप्टाइड चेन की तीन-आयामी आकृति से है, जिसमें α-हेलिक्स और β-शीट जैसी द्वितीयक संरचनाएँ फोल्ड होकर एक विशिष्ट त्रि-आयामी रूप बनाती हैं। यह संरचना प्रोटीन के कार्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है।
व्याख्या:
प्रोटीन की तृतीयक संरचना में विभिन्न प्रकार के रासायनिक बंध जैसे हाइड्रोजन बंध, आयनिक बंध, वान डर वाल्स बल और डिसल्फाइड पुल्स शामिल होते हैं, जो प्रोटीन की स्थिरता और कार्यक्षमता सुनिश्चित करते हैं।
Q8.3. 10 ऐसे रुचिकर सूक्ष्म जैव अणुओं का पता लगाइए जो कम अणुभार वाले होते हैं व इनकी संरचना बनाइए? ऐसे उद्योगों का पता लगाइए जो इन यौगिकों का निर्माण विलगन द्वारा करते हैं? इनको खरीदने वाले कौन है? मालूम कीजिए?
उत्तर:
कम अणुभार वाले रुचिकर सूक्ष्म जैव अणुओं में अमीनो अम्ल, न्यूक्लियोटाइड, ग्लूकोज, फ्रुक्टोज, ग्लाइसरीन, फैटी एसिड, विटामिन, हॉर्मोन, एंजाइम, और एंटीबायोटिक्स शामिल हैं। संरचना उदाहरण: अमीनो अम्ल की संरचना में एक अमीन समूह (-NH2), एक कार्बोक्सिल समूह (-COOH), एक हाइड्रोजन परमाणु और एक विशिष्ट R समूह होता है जो अमीनो अम्ल की पहचान करता है। विलगन (Biotechnology) उद्योग जैसे दवा उद्योग, खाद्य उद्योग, और कृषि उद्योग इन यौगिकों का उत्पादन करते हैं। खरीदने वाले: फार्मास्यूटिकल कंपनियां, खाद्य निर्माता, कृषि क्षेत्र, और अनुसंधान संस्थान।
व्याख्या:
सूक्ष्म जैव अणुओं का अध्ययन और उत्पादन जैव प्रौद्योगिकी के अंतर्गत आता है। इन यौगिकों की संरचना और कार्य को समझकर उद्योगों में उनका उत्पादन किया जाता है।
Jeev Vigyan के सभी 19 अध्याय
Biology · Class 11
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