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Chapter 9

🎓 Class 9📖 Ganga📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 8अध्याय 9 / 12Chapter 10

Chapter 9अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

तुलसीदास

व्याख्या

तुलसीदास

गोस्वामी तुलसीदास का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था और उनका जीवनकाल 16वीं-17वीं शताब्दी (सन् 1532-1623) माना जाता है। वे हिंदी साहित्य के महान कवि और संत थे। तुलसीदास की प्रमुख रचना 'रामचरितमानस' है, जो भगवान राम के जीवन और आदर्शों का महाकाव्यात्मक वर्णन है। यह रचना अवधी भाषा में लिखी गई है और इसमें राम को मानवीय मर्यादाओं और आदर्शों का प्रतीक बताया गया है। तुलसीदास ने राम के माध्यम से नीति, स्नेह, शील, विनय, त्याग जैसे गुणों को प्रतिष्ठित किया। उनकी अन्य रचनाओं में कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली, विनयपत्रिका, हनुमान बाहुक प्रमुख हैं। तुलसीदास संस्कृत के भी श्रेष्ठ ज्ञाता थे और अवधी तथा ब्रज दोनों भाषाओं पर उनका समान अधिकार था। उन्होंने रामचरितमानस अवधी में और विनयपत्रिका तथा कवितावली ब्रज भाषा में रची। उनका देहावसान काशी में हुआ। इस अध्याय में तुलसीदास की रचनाओं और उनके काव्य में व्यक्त भावों का गहन परिचय दिया गया है।

  • तुलसीदास का जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था।
  • उनका जीवनकाल 16वीं-17वीं शताब्दी (1532-1623) माना जाता है।
  • रामचरितमानस उनकी प्रमुख रचना है, जो अवधी भाषा में है।
  • रामचरितमानस में राम को आदर्श और मानवीय मर्यादाओं का प्रतीक बताया गया है।
  • तुलसीदास संस्कृत के भी ज्ञाता थे और ब्रज तथा अवधी भाषाओं में रचनाएँ कीं।
  • उनकी अन्य प्रमुख रचनाएँ हैं: कवितावली, गीतावली, दोहावली, कृष्णगीतावली, विनयपत्रिका, हनुमान बाहुक।
  • 📌 रामचरितमानस: तुलसीदास की अवधी भाषा में रचित महाकाव्य।
  • 📌 अवधी भाषा: हिंदी की एक प्राचीन बोलचाल की भाषा।
  • 📌 ब्रज भाषा: हिंदी की एक अन्य प्राचीन बोली, जिसमें तुलसीदास ने भी रचनाएँ कीं।

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

व्याख्या

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

इस अनुभाग में रामचरितमानस के बालकांड से राम, लक्ष्मण और मुनि परशुराम के बीच संवाद का वर्णन है। कथा की शुरुआत में परशुराम शिव-धनुष के टूटने की सूचना पाकर क्रोधित होकर सभा में आते हैं। सभा में उपस्थित राजाओं का भय स्पष्ट होता है, वे परशुराम के तेजस्वी और क्रोधी रूप से भयभीत हो जाते हैं। राजा जनक भी सभा में उपस्थित हैं, जो सीता स्वयंवर के विषय में बताते हैं। विश्वामित्र मुनि राम-लक्ष्मण का परिचय कराते हैं और राम-लक्ष्मण परशुराम को सम्मानपूर्वक अभिवादन करते हैं। परशुराम का क्रोध और उनका कठोर व्यवहार सभा के वातावरण को तनावपूर्ण बना देता है। लक्ष्मण व्यंग्यात्मक उत्तर देकर परशुराम को चुनौती देते हैं, जबकि राम धीर और विनम्र बने रहते हैं। अंततः राम की विनम्रता और विश्वामित्र के समझाने पर परशुराम का क्रोध शांत होता है। इस संवाद में विभिन्न पात्रों की मनःस्थिति, भाव और चरित्र की गहराई से प्रस्तुति की गई है।

  • परशुराम शिव-धनुष टूटने पर क्रोधित होकर सभा में आते हैं।
  • सभा में उपस्थित राजाओं में भय व्याप्त होता है।
  • राजा जनक सीता स्वयंवर के विषय में बताते हैं।
  • विश्वामित्र राम-लक्ष्मण का परिचय कराते हैं।
  • लक्ष्मण व्यंग्यात्मक उत्तर देते हैं, राम विनम्र और धीर रहते हैं।
  • परशुराम का क्रोध अंततः शांत हो जाता है।
  • 📌 परशुराम: भगवान विष्णु के छठे अवतार, जो फरसा (परशु) धारण करते हैं।
  • 📌 विश्वामित्र: एक महान ऋषि, जिन्होंने राम-लक्ष्मण को शिक्षा दी।
  • 📌 सीता स्वयंवर: राजा जनक की पुत्री सीता के विवाह के लिए आयोजित सभा।

अभ्यास

व्याख्या

अभ्यास

इस अनुभाग में राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद पर आधारित प्रश्न दिए गए हैं, जिनका उद्देश्य छात्र की समझ और विश्लेषण क्षमता को बढ़ाना है। प्रश्नों में सही विकल्प चुनने के साथ-साथ तर्क देने को भी कहा गया है, जिससे छात्र संवाद की गहराई में जा सकें। इसके अलावा,

अभ्यास प्रश्नChapter 9

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. “पितु समेत कहि कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा।” यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है? (क) आदर और सम्मान (ख) भक्ति और श्रद्धा (ग) भय और शिष्टाचार (घ) प्रेम और सहिष्णुता
A.क) आदर और सम्मान
B.ख) भक्ति और श्रद्धा
C.ग) भय और शिष्टाचार
D.घ) प्रेम और सहिष्णुता

उत्तर:

यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों के भय और शिष्टाचार की मनःस्थिति को दर्शाती है क्योंकि वे परशुराम के प्रति सम्मान और भय से दंड प्रनामा कर रहे हैं। अतः सही उत्तर है (ग) भय और शिष्टाचार।

व्याख्या:

पंक्ति में 'लगे करन सब दंड प्रनामा' से स्पष्ट होता है कि लोग परशुराम के क्रोध से भयभीत हैं और शिष्टाचार के साथ सम्मान प्रकट कर रहे हैं। इसलिए यह मनःस्थिति भय और शिष्टाचार की है।

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Q2.2. “जनक बहोरि आइ सिरु नावा। सीय बोलाइ प्रनामु करावा” पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है? (क) संवेदनशीलता (ख) शिष्टता (ग) सहनशीलता (घ) उदासीनता
A.क) संवेदनशीलता
B.ख) शिष्टता
C.ग) सहनशीलता
D.घ) उदासीनता

उत्तर:

यह पंक्ति राजा जनक की शिष्टता को दर्शाती है क्योंकि वे परशुराम के सामने सिर झुका कर सीता के लिए प्रनाम करवा रहे हैं। अतः सही उत्तर है (ख) शिष्टता।

व्याख्या:

राजा जनक का व्यवहार सम्मानजनक और शिष्ट है, जो परशुराम के प्रति आदर प्रकट करता है। 'सीय बोलाइ प्रनामु करावा' से यह स्पष्ट होता है कि वे शिष्टाचार का पालन कर रहे हैं।

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Q3.3. “अति रिस बोले बचन कठोरा।” जनक के प्रति परशुराम के कठोर बचन बोलने का मूल कारण था— (क) उचित आदर-सत्कार न मिलना (ख) जनक द्वारा समाचार छिपाना (ग) शिव-धनुष का खंडित होना (घ) अन्य राजाओं की सभा में उपस्थिति
A.क) उचित आदर-सत्कार न मिलना
B.ख) जनक द्वारा समाचार छिपाना
C.ग) शिव-धनुष का खंडित होना
D.घ) अन्य राजाओं की सभा में उपस्थिति

उत्तर:

परशुराम के कठोर बचन बोलने का मुख्य कारण शिव-धनुष का खंडित होना था, जिससे वे क्रोधित थे। अतः सही उत्तर है (ग) शिव-धनुष का खंडित होना।

व्याख्या:

परशुराम का क्रोध शिव-धनुष टूटने से उत्पन्न हुआ था, और उन्होंने जनक के प्रति कठोर शब्द कहे क्योंकि वे इसे गंभीरता से लेते थे।

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Q4.4. राम का कथन “होइहि केउ एक दास तुम्हारा” उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है? (क) कूटनीति और चतुराई (ख) विनम्रता और मर्यादा (ग) त्याग और समर्पण (घ) दृढ़ता और आत्मविश्वास
A.क) कूटनीति और चतुराई
B.ख) विनम्रता और मर्यादा
C.ग) त्याग और समर्पण
D.घ) दृढ़ता और आत्मविश्वास

उत्तर:

राम का यह कथन उनकी विनम्रता और मर्यादा को दर्शाता है क्योंकि वे परशुराम के प्रति सम्मान और समर्पण व्यक्त कर रहे हैं। अतः सही उत्तर है (ख) विनम्रता और मर्यादा।

व्याख्या:

राम की यह पंक्ति उनके विनम्र और मर्यादित स्वभाव को दर्शाती है, जो वे परशुराम के प्रति दासत्व स्वीकार कर रहे हैं।

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Q5.5. “सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने। बोले परसुधरहि अपमाने।।” लक्ष्मण के मुसकराने और उपहास भरे वचनों का क्या कारण था? (क) वे सभा में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहते थे। (ख) उन्हें राम के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना था। (ग) वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे। (घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।
A.क) वे सभा में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहते थे।
B.ख) उन्हें राम के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना था।
C.ग) वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे।
D.घ) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे।

उत्तर:

लक्ष्मण मुस्कुराए क्योंकि वे परशुराम के क्रोध को अपमान समझते थे और उनका उपहास इसलिए था कि वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे। अतः सही उत्तर है (ग) वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे।

व्याख्या:

लक्ष्मण का मुस्कुराना और व्यंग्य परशुराम की शक्ति को कम आंकने या समझ न पाने का परिणाम था। वे परशुराम के क्रोध को गंभीरता से नहीं ले रहे थे।

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Q6.1. “अरथ निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कविता में यह किसके संदर्भ में कहा गया है और क्यों?

उत्तर:

यह पंक्ति समय के तीव्र प्रवाह को दर्शाती है, जहाँ एक निमिष (क्षण) और कलप (अति दीर्घ काल) समान प्रतीत होते हैं। कविता में यह उस समय के संदर्भ में कहा गया है जब परशुराम के क्रोध और सभा की स्थिति में समय तेजी से बीत रहा था, परंतु उपस्थित लोगों के लिए वह समय भारी और तनावपूर्ण था।

व्याख्या:

यह पंक्ति भावनात्मक और मानसिक स्थिति को दर्शाती है जहाँ समय की गति अनुभव के अनुसार बदल जाती है। परशुराम के क्रोध के कारण सभा में उपस्थित लोगों के लिए समय धीमा और भारी प्रतीत हो रहा था।

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Q7.2. “सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न त मारे जैहहिं सब राजा।।” पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर क्या प्रभाव पड़ा होगा? तर्क सहित उत्तर दीजिए।

उत्तर:

यह पंक्ति परशुराम की तीव्र चेतावनी को दर्शाती है कि यदि कोई उनकी बात न माने तो सभी राजा मारे जाएंगे। इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर भय और तनाव का प्रभाव पड़ा होगा। वे परशुराम के क्रोध से भयभीत होकर सावधानी बरतने लगे होंगे।

व्याख्या:

परशुराम की चेतावनी से सभा में भय व्याप्त हो गया होगा क्योंकि वे जानते थे कि परशुराम अत्यंत शक्तिशाली और क्रोधित हैं। इस कारण वे अपनी सुरक्षा के लिए चुप्पी साधे होंगे।

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Q8.3. तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति दो अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का ‘विनय’ का मार्ग उचित है या लक्ष्मण के ‘तर्क’ का? अपने उत्तर का उचित कारण और तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:

राम का विनय का मार्ग अधिक उचित है क्योंकि विनम्रता और मर्यादा से क्रोध को शांत करना अधिक प्रभावी होता है। लक्ष्मण का तर्क कभी-कभी विवाद को बढ़ा सकता है। राम की शालीनता और संयम से परशुराम का क्रोध कम हुआ, जो दर्शाता है कि विनय का मार्ग श्रेष्ठ है।

व्याख्या:

राम ने परशुराम के प्रति सम्मान और विनम्रता दिखाकर उनकी भावनाओं को समझा और शांत किया। लक्ष्मण के व्यंग्यात्मक तर्क से स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती थी। इसलिए विनय का मार्ग अधिक उपयुक्त है।

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