Chapter 8
Chapter 8 — अध्ययन नोट्स
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वाद्य वर्गीकरण का परिचय
व्याख्यावाद्य वर्गीकरण का परिचय
भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। संगीत के विभिन्न स्वरूपों को समझने तथा उनके विशिष्ट गुणों को पहचानने के लिए वाद्यों का वर्गीकरण आवश्यक होता है। प्रत्येक वाद्य का अपना स्वरूप, ध्वनि उत्पन्न करने की विधि और सांस्कृतिक महत्व होता है। भारतीय संगीत में वाद्यों को मुख्यतः चार वर्गों में बांटा गया है: तत् वाद्य (तार वाले वाद्य), सुषिर वाद्य (हवा वाले वाद्य), अवनद्ध वाद्य (चमड़े वाले वाद्य) और घन वाद्य (ठोस वस्तु वाले वाद्य)। यह वर्गीकरण न केवल वाद्यों की तकनीकी विशेषताओं पर आधारित है, बल्कि उनके ध्वनि उत्पन्न करने के माध्यम और सामाजिक-सांस्कृतिक उपयोग पर भी निर्भर करता है। वाद्य वर्गीकरण से संगीत की विविधता और उसकी अभिव्यक्ति के विभिन्न आयामों को समझना आसान हो जाता है। इसके अतिरिक्त, यह वर्गीकरण संगीत के अध्ययन, शिक्षण और प्रदर्शन में भी सहायक होता है। भारतीय संगीत में वाद्यों का प्रयोग न केवल संगीत की रचना और प्रस्तुति के लिए, बल्कि धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आयोजनों में भी होता है, जो इनके महत्व को और बढ़ाता है। इस प्रकार, वाद्य वर्गीकरण भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा और उसकी गहनता को दर्शाता है। **Table on page 19 (4×4)** | तत | सुषिर | अवनद्ध | घन | | --- | --- | --- | --- | | | | | | | | | | | | | | | | **Table on page 24 (9×2)** | अ | आ | | --- | --- | | (क) खंजरी | 1. भरत मुनि | | (ख) अवनद्ध | 2. जी. राज नारायण | | (ग) खोल | 3. चमड़ा | | (घ) नाट्यशास्त्र | 4. केरल | | (ङ) इलेक्ट्रॉनिक तानपुरा | 5. स्थायी स्वर | | (च) तविल | 6. हारमोनियम | | (छ) सुषिर | 7. पश्चिम बंगाल | | (ज) ड्रोन | 8. घन वाद्य |
- भारतीय संगीत में वाद्य वर्गीकरण की चार मुख्य श्रेणियाँ हैं।
- प्रत्येक वाद्य की ध्वनि उत्पन्न करने की विधि अलग होती है।
- वाद्य वर्गीकरण से संगीत की विविधता और अभिव्यक्ति को समझना आसान होता है।
- सांस्कृतिक और सामाजिक आयोजनों में वाद्यों का विशेष महत्व है।
- वाद्य वर्गीकरण संगीत के अध्ययन और शिक्षण में सहायक होता है।
- 📌 वाद्य वर्गीकरण: संगीत वाद्यों को उनकी ध्वनि उत्पन्न करने की विधि के आधार पर वर्गीकृत करना।
- 📌 तत् वाद्य: तार वाले वाद्य जिनमें तारों के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
- 📌 सुषिर वाद्य: हवा के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न करने वाले वाद्य।
तत् वाद्य (तार वाले वाद्य)
व्याख्यातत् वाद्य (तार वाले वाद्य)
तत् वाद्य वे वाद्य होते हैं जिनमें ध्वनि उत्पन्न करने का मुख्य माध्यम तारों का कंपन होता है। इन तारों को खींचकर, पिढ़कर या झंकृत करके ध्वनि उत्पन्न की जाती है। भारतीय संगीत में तत् वाद्यों का विशेष स्थान है क्योंकि ये वाद्य स्वर की गहराई, लय और भावों को व्यक्त करने में सक्षम होते हैं। तत् वाद्यों के उदाहरणों में वीणा, सितार, सरोद, तानपुरा, वॉयलिन आदि प्रमुख हैं। प्राचीन काल से ही वीणा को भारतीय संगीत का प्रमुख तत् वाद्य माना गया है। तारों की संख्या, उनकी लंबाई, मोटाई और तनाव ध्वनि की गुणवत्ता और स्वर की तीव्रता को प्रभावित करते हैं। तत् वाद्यों में तारों को बजाने के लिए विभिन्न तकनीकों का उपयोग किया जाता है जैसे कि पिढ़ना, खींचना, झंकृत करना आदि। ये वाद्य मुख्यतः शास्त्रीय संगीत में उपयोग किए जाते हैं और इनके माध्यम से रागों की विविधता और भावनात्मक अभिव्यक्ति संभव होती है। तत् वाद्यों की संरचना और निर्माण में लकड़ी, धातु और अन्य प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग होता है। इनके तार सामान्यतः रेशम, धातु या सिंथेटिक सामग्री के होते हैं। तत् वाद्य संगीत के स्वरूप को समृद्ध बनाते हैं और इनके माध्यम से संगीत की गहराई और विस्तार को महसूस किया जा सकता है।
- तत् वाद्यों में ध्वनि उत्पन्न करने का माध्यम तारों का कंपन होता है।
- वीणा, सितार, सरोद, तानपुरा प्रमुख तत् वाद्य हैं।
- तारों की संख्या, लंबाई और तनाव ध्वनि की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।
- तत् वाद्यों में तारों को पिढ़कर, खींचकर या झंकृत करके बजाया जाता है।
- ये वाद्य मुख्यतः शास्त्रीय संगीत में उपयोग होते हैं।
- 📌 तत् वाद्य: तार वाले वाद्य जिनमें तारों के कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है।
- 📌 वीणा: प्राचीन भारतीय तार वाला वाद्य।
- 📌 सितार: प्रमुख शास्त्रीय संगीत वाद्य जिसमें कई तार होते हैं।
सुषिर वाद्य (हवा वाले वाद्य)
व्याख्यासुषिर वाद्य (हवा वाले वाद्य)
सुषिर वाद्य वे वाद्य होते हैं जिनमें ध्वनि उत्पन्न करने का माध्यम हवा का प्रवाह होता है। इन वाद्यों में वायु को फूँककर या दबाकर ध्वनि उत्पन्न की जाती है। भारतीय संगीत में सुषिर वाद्यों का भी महत्वपूर्ण स्थान है क्योंकि ये वाद्य संगीत में विभिन्न भावो
अभ्यास प्रश्न — Chapter 8
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. रूद्र वीणा से प्रेरणा लेकर कौन-सा वाद्य यंत्र बना? (क) सुरबहार (ख) सरोद (ग) तानपुरा (घ) वॉयलिन
उत्तर:
रूद्र वीणा से प्रेरणा लेकर सरोद वाद्य यंत्र बना। इसलिए सही उत्तर है (ख) सरोद।
व्याख्या:
रूद्र वीणा एक प्राचीन वीणा है, जिससे आधुनिक सरोद का विकास हुआ है। सरोद में रूद्र वीणा के स्वर और बनावट की झलक मिलती है।
Q2.2. सितार में मुख्य तारों की संख्या कितनी होती है? (क) नौ (ख) पाँच (ग) सात (घ) चार
उत्तर:
सितार में मुख्य तारों की संख्या पाँच होती है। इसलिए सही उत्तर है (ख) पाँच।
व्याख्या:
सितार में पाँच मुख्य तार होते हैं जो मुख्य स्वर उत्पन्न करते हैं, इसके अतिरिक्त सहायक तार भी होते हैं।
Q3.3. गज के घर्षण द्वारा बजाए जाने वाले वाद्य किस श्रेणी में आते हैं? (क) सुषिर वाद्य (ख) अवनद्ध वाद्य (ग) तत् वाद्य (घ) घन वाद्य
उत्तर:
गज के घर्षण द्वारा बजाए जाने वाले वाद्य सुषिर वाद्य श्रेणी में आते हैं। इसलिए सही उत्तर है (क) सुषिर वाद्य।
व्याख्या:
सुषिर वाद्य वे होते हैं जिनमें हवा के प्रवाह से ध्वनि उत्पन्न होती है, जैसे बांसुरी। गज के घर्षण से ध्वनि उत्पन्न होती है, अतः वे सुषिर वाद्य हैं।
Q4.4. मृदा किसे कहते हैं? (क) चमड़ा (ख) लकड़ी (ग) धातु (घ) मिट्टी
उत्तर:
मृदा का अर्थ मिट्टी होता है। इसलिए सही उत्तर है (घ) मिट्टी।
व्याख्या:
मृदा शब्द का अर्थ मिट्टी होता है, जो मिट्टी से बने वाद्य यंत्रों के लिए प्रयुक्त होता है।
Q5.5. निम्न में से किस वाद्य को बो या गज की सहायता से बजाया जाता है? (क) तानपुरा (ख) सितार (ग) इसराज (घ) सरोद
उत्तर:
इसराज वाद्य को बो या गज की सहायता से बजाया जाता है। इसलिए सही उत्तर है (ग) इसराज।
व्याख्या:
इसराज एक तार वाला वाद्य है जिसे बो या गज के माध्यम से बजाया जाता है।
Q6.6. जवा द्वारा बजाया जाने वाला वाद्य-यंत्र कौन-सा है? (क) तानपुरा (ख) सरोद (ग) सितार (घ) सारंगी
उत्तर:
जवा द्वारा बजाया जाने वाला वाद्य सारंगी है। इसलिए सही उत्तर है (घ) सारंगी।
व्याख्या:
सारंगी एक तार वाला वाद्य है जिसे जवा (धारदार लकड़ी की छोटी छड़ी) से बजाया जाता है।
Q7.7. निम्न में से किस वाद्य में परदे नहीं होते हैं? (क) इसराज (ख) सरोद (ग) दिलरूबा (घ) सितार
उत्तर:
सरोद में परदे नहीं होते हैं। इसलिए सही उत्तर है (ख) सरोद।
व्याख्या:
सरोद एक तार वाला वाद्य है जिसमें परदे नहीं होते, जबकि सितार, इसराज और दिलरूबा में परदे होते हैं।
Q8.8. चमड़े अथवा खाल से मढ़े हुए खोखले वाद्य-यंत्र किस श्रेणी के अंतर्गत आते हैं? (क) अवनद्ध वाद्य (ख) तत् वाद्य (ग) घन वाद्य (घ) सुषिर वाद्य
उत्तर:
चमड़े अथवा खाल से मढ़े हुए खोखले वाद्य-यंत्र अवनद्ध वाद्य श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। इसलिए सही उत्तर है (क) अवनद्ध वाद्य।
व्याख्या:
अवनद्ध वाद्य वे होते हैं जिनमें चमड़े या खाल से बने खोखले भाग होते हैं, जैसे ढोलक, तबला।
Hindustani Sangeet Gayan Evam Vadan के सभी 10 अध्याय
Sangeet · Class 11