Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
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अव्ययः किमर्थं?
परिभाषाअव्ययः किमर्थं?
संस्कृत व्याकरण में 'अव्यय' शब्द का अर्थ है वे ऐसे शब्द जो सर्वदा एक जैसे ही रहते हैं, अर्थात् जिनमें विभक्ति, वचन, लिङ्ग, या पुरुष के आधार पर कोई परिवर्तन नहीं होता। ये शब्द स्थिर होते हैं और न तो किसी प्रकार से रूपांतरित होते हैं और न ही इनके अंत में कोई प्रत्यय जुड़ता है। इसलिए इन्हें अव्यय कहा जाता है। संस्कृत में शब्दों का वर्गीकरण मुख्यतः संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया, विशेषण, और अव्यय के रूप में होता है। अव्यय शब्दों की विशेषता यह है कि ये कभी भी विभक्ति, वचन या लिङ्ग के अनुसार परिवर्तित नहीं होते। उदाहरण के लिए, 'अचिरम्' शब्द हमेशा 'अचिरम्' ही रहता है, चाहे वह वाक्य में कहीं भी आए। इस प्रकार अव्यय शब्द वाक्य में स्थिर भाव और अर्थ प्रदान करते हैं। संस्कृत के शास्त्रीय ग्रंथों में अव्यय शब्दों को विशेष महत्व दिया गया है क्योंकि ये वाक्य के भाव और अर्थ को स्पष्ट करने में सहायक होते हैं। **Table on page 1 (15×2)** | अव्यय | अर्थ | | --- | --- | | अचिरम् | शीघ्र ही | | यावत् | जब तक | | तावत् | तब तक | | सहसा | अचानक | | श्व: | आने वाला कल | | ह्व: | बीता हुआ कल | | शनै: शनै: | धीरे-धीरे | | सम्प्रति/साम्प्रतम्/अधुना/इदानीम् | इस समय | | अत्र | यहाँ | | अत्यन्तम् | बहुत | | अथ | आरम्भ या इसके बाद | | अलम् | निषेधार्थक (योगे तृतीया वि.) | | | पर्याप्त, समर्थ (योगे चतुर्थी विभक्ति) | | अद्य | आज |
- अव्यय वे शब्द हैं जो कभी रूपांतरित नहीं होते।
- इनमें विभक्ति, वचन, लिङ्ग, पुरुष के आधार पर परिवर्तन नहीं होता।
- अव्यय शब्द स्थिर होते हैं और वाक्य में भाव स्पष्ट करते हैं।
- संस्कृत व्याकरण में अव्यय शब्दों का विशेष स्थान है।
- अव्यय शब्द क्रिया, संज्ञा, विशेषण के साथ मिलकर वाक्य को पूर्ण बनाते हैं।
- 📌 अव्यय: ऐसे शब्द जो कभी रूपांतरित नहीं होते।
- 📌 विभक्ति: संस्कृत में संज्ञा या सर्वनाम के अंत में लगने वाला प्रत्यय।
- 📌 वचन: एकवचन, द्विवचन, बहुवचन के रूप।
अव्ययाः प्रकाराः
व्याख्याअव्ययाः प्रकाराः
अव्यय शब्दों को संस्कृत व्याकरण में विभिन्न प्रकारों में विभाजित किया गया है। ये प्रकार उनके अर्थ और प्रयोग के आधार पर निर्धारित होते हैं। मुख्यतः अव्यय शब्द समयवाचक, स्थानवाचक, मात्रावाचक, कारणवाचक, और अन्य विशेष अर्थ सूचक होते हैं। उदाहरण के लिए, समयवाचक अव्यय जैसे 'अचिरम्' (शीघ्र ही), 'श्व:' (आने वाला कल), 'हन:' (बीता हुआ कल) समय को सूचित करते हैं। स्थानवाचक अव्यय जैसे 'अत्र' (यहाँ), 'तत्र' (वहाँ) स्थान को सूचित करते हैं। मात्रावाचक अव्यय जैसे 'अत्यन्तम्' (बहुत), 'अल्पम्' (कम) मात्रा या परिमाण को सूचित करते हैं। कारणवाचक अव्यय जैसे 'यतः' (क्योंकि), 'तस्मात्' (इसलिए) कारण या उद्देश्य को सूचित करते हैं। इसके अतिरिक्त, अव्यय शब्दों के कुछ विशेष प्रकार भी होते हैं जो वाक्य में विशेष भाव या संबंध प्रकट करते हैं। इस प्रकार अव्यय शब्दों के प्रकार और उनके अर्थ वाक्य की स्पष्टता और अर्थवत्ता में सहायक होते हैं। **Table on page 1 (15×2)** | अव्यय | अर्थ | | --- | --- | | अचिरम् | शीघ्र ही | | यावत् | जब तक | | तावत् | तब तक | | सहसा | अचानक | | श्व: | आने वाला कल | | ह्व: | बीता हुआ कल | | शनै: शनै: | धीरे-धीरे | | सम्प्रति/साम्प्रतम्/अधुना/इदानीम् | इस समय | | अत्र | यहाँ | | अत्यन्तम् | बहुत | | अथ | आरम्भ या इसके बाद | | अलम् | निषेधार्थक (योगे तृतीया वि.) | | | पर्याप्त, समर्थ (योगे चतुर्थी विभक्ति) | | अद्य | आज |
- अव्यय शब्दों के मुख्य प्रकार हैं: समयवाचक, स्थानवाचक, मात्रावाचक, कारणवाचक।
- समयवाचक अव्यय समय को सूचित करते हैं।
- स्थानवाचक अव्यय स्थान को सूचित करते हैं।
- मात्रावाचक अव्यय मात्रा या परिमाण को सूचित करते हैं।
- कारणवाचक अव्यय कारण या उद्देश्य को सूचित करते हैं।
- 📌 समयवाचक अव्यय: समय सूचित करने वाले अव्यय।
- 📌 स्थानवाचक अव्यय: स्थान सूचित करने वाले अव्यय।
- 📌 मात्रावाचक अव्यय: मात्रा सूचित करने वाले अव्यय।
अव्यय शब्दों का प्रयोग
व्याख्याअव्यय शब्दों का प्रयोग
अव्यय शब्दों का प्रयोग संस्कृत वाक्यों में विशेष अर्थ और भाव प्रकट करने के लिए किया जाता है। ये शब्द क्रिया, विशेषण, संज्ञा के साथ मिलकर वाक्य को पूर्णता प्रदान करते हैं। अव्यय शब्दों का स्थान वाक्य में अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि इससे वाक्य का
अभ्यास प्रश्न — Chapter 7
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.प्र. 1. समुचितै: अव्ययै: (मंजूषात: गृहीत्वा) रिक्तस्थानानि पूर्यत— i) स: ... वनं गतवान्। ii) स: ... गच्छति ? iii) गज: ... चलति। iv) स: ... स्वपिति। v) सिंह: ... गर्जति। vi) स: ... विजेच्यते। vii) परिश्रमं कुरु, ... अनुत्तीर्ण: भविष्यसि। viii) गृहात् ... मा गच्छ। ix) स: ... माम् उद्भेजयति। x) कोलाहलं ... कुरु। मञ्जूषा मा, बहिः, मुहुर्मुहुः, अन्यथा, एकदा, शनै:, शनै:, चिरम्, नूनम्, उच्चै:, कुत्र
उत्तर:
i) स: एकदा वनं गतवान्। ii) स: कुत्र गच्छति ? iii) गज: शनै: चलति। iv) स: चिरम् स्वपिति। v) सिंह: गर्जति। (यहाँ अव्यय नहीं दिया, इसलिए यथावत्) vi) स: नूनम् विजेच्यते। vii) परिश्रमं कुरु, अन्यथा अनुत्तीर्ण: भविष्यसि। viii) गृहात् बहिः मा गच्छ। ix) स: मुहुर्मुहुः माम् उद्भेजयति। x) कोलाहलं मुहुर्मुहुः कुरु। प्रत्येक रिक्तस्थान में मञ्जूषा से उपयुक्त अव्यय भरें।
व्याख्या:
प्रत्येक वाक्य में रिक्तस्थान पर मञ्जूषा से अर्थानुसार उपयुक्त अव्यय भरना है। - 'एकदा' समय सूचक अव्यय है, अतः वनं गतवान् के साथ। - 'कुत्र' प्रश्नवाचक अव्यय है, अतः प्रश्नवाचक वाक्य में। - 'शनै:' गति सूचक अव्यय है, अतः गज: के साथ। - 'चिरम्' काल सूचक अव्यय है, अतः स्वपिति के साथ। - 'नूनम्' निश्चितता सूचक अव्यय है, अतः विजेच्यते के साथ। - 'अन्यथा' परिणाम सूचक अव्यय है, अतः परिश्रमं कुरु के बाद। - 'बहिः' स्थान सूचक अव्यय है, अतः गृहात् के बाद। - 'मुहुर्मुहुः' बारम्बारता सूचक अव्यय है, अतः उद्भेजयति और कोलाहलं के साथ। - 'कुत्र' प्रश्नवाचक अव्यय है, अतः प्रश्न में। इस प्रकार सभी रिक्तस्थान भरें।
Q2.प्र. 2. अधोलिखितेषु वाक्येषु अव्ययपदं चित्वा लिखत— i) यांवत् परीक्षाकाल: नायाति तावत् परिश्रमं कुरु। ... ii) अस्माभिः सर्वदा सत्यं वक्तव्यम्। ... iii) काल: वृथा न यापनीय:। ... iv) अहं सम्प्रति गृहं गन्तुम् इच्छामि। ... v) त्वं कुत: समायात: ? ... vi) अहं श्व: ग्रामं गमिष्यामि। ... vii) तौ परस्परम् आलपत:। ... viii) अष्टप्रभृति अहं धूमपानं न करिष्यामि। ... ix) धनं विना जीवनं वृथा भवति। ... x) अथ रामायणकथा आरभ्यते। ...
उत्तर:
i) यांवत्, तावत् ii) सर्वदा iii) वृथा iv) सम्प्रति v) कुत: vi) श्व: vii) परस्परम् viii) अष्टप्रभृति ix) विना x) अथ प्रत्येक वाक्य में अव्ययपद को चिन्हित करें और लिखें।
व्याख्या:
प्रत्येक वाक्य में अव्ययपद (अव्यय शब्द) को पहचानना है: - यांवत्, तावत् - सीमा सूचक अव्यय - सर्वदा - बारम्बारता सूचक अव्यय - वृथा - नकारात्मक अव्यय - सम्प्रति - वर्तमान काल सूचक अव्यय - कुत: - प्रश्नवाचक अव्यय - श्व: - भविष्यत काल सूचक अव्यय - परस्परम् - संबंध सूचक अव्यय - अष्टप्रभृति - कारण सूचक अव्यय - विना - बिना सूचक अव्यय - अथ - आरंभ सूचक अव्यय इस प्रकार प्रत्येक वाक्य से अव्ययपद अलग करें।
Q3.प्र. 3. कोष्ठकेभ्य: शुद्धम् अव्ययपदं चित्वा रिक्तस्थानं पूर्यत्— i) अहम् ... भ्रमणाय गमिष्यामि। (श्व:/ह्य:) ii) त्वम् कस्य ... गच्छसि ? (परित:/पुरत:) iii) विद्यालयम् ... उद्यानम् अस्ति। (परित:/ एव) iv) स: यदा आगमिष्यति ... अहं गमिष्यामि। (तदैव/तथैव) v) परिश्रमं कुरु...अनुत्तीर्ण: भविष्यसि। (सर्वदा/ अन्यथा) vi) त्वं ... कुत्र गच्छसि ? (जातु / साम्प्रतम्) vii) यूयम् ... ध्यानेन पठत । (बादम् / नूनम्) viii) श्याम: ... पठति श्यामा न । (एव/ विना) ix) छात्रा: पुस्तकम् ... न शोभन्ते । (यदि / विना) x) यथा वप्स्यसि ... फलं प्राप्स्यसि। (तदा / तथा)
उत्तर:
i) अहम् श्व: भ्रमणाय गमिष्यामि। ii) त्वम् कस्य परित गच्छसि ? iii) विद्यालयम् एव उद्यानम् अस्ति। iv) स: यदा आगमिष्यति तदैव अहं गमिष्यामि। v) परिश्रमं कुरु अन्यथा अनुत्तीर्ण: भविष्यसि। vi) त्वं जातु कुत्र गच्छसि ? vii) यूयम् नूनम् ध्यानेन पठत । viii) श्याम: एव पठति श्यामा न । ix) छात्रा: पुस्तकम् विना न शोभन्ते । x) यथा वप्स्यसि तदा फलं प्राप्स्यसि। प्रत्येक रिक्तस्थान में कोष्ठक में दिए गए विकल्पों में से उचित अव्यय भरें।
व्याख्या:
प्रत्येक वाक्य में रिक्तस्थान पर दिए गए विकल्पों में से अर्थानुसार उपयुक्त अव्यय भरना है: - श्व: - भविष्यत काल सूचक अव्यय - परित: - स्थान सूचक अव्यय - एव - निश्चितता सूचक अव्यय - तदैव - समय सूचक अव्यय - अन्यथा - परिणाम सूचक अव्यय - जातु - नकारात्मक अव्यय - नूनम् - निश्चितता सूचक अव्यय - विना - बिना सूचक अव्यय - यदि - शर्त सूचक अव्यय - तदा - समय सूचक अव्यय इस प्रकार सभी रिक्तस्थान भरें।
Q4.संस्कृत में 'अव्यय' शब्द का क्या अर्थ है? अव्यय शब्दों की मुख्य विशेषता क्या है?
उत्तर:
अव्यय वे शब्द होते हैं जो सर्वदा एक जैसे ही रहते हैं, अर्थात् जिनमें विभक्ति, वचन, लिङ्ग या पुरुष के आधार पर कोई परिवर्तन नहीं होता। ये शब्द रूपांतरित नहीं होते और स्थिर रहते हैं। उदाहरण के लिए, 'अचिरम्' हमेशा 'अचिरम्' ही रहता है।
व्याख्या:
अव्यय शब्द संस्कृत व्याकरण में ऐसे शब्द हैं जो किसी भी प्रकार से रूपांतरित नहीं होते। इनका रूप सर्वदा समान रहता है। ये शब्द वाक्य में स्थिर भाव और अर्थ प्रदान करते हैं। उदाहरण स्वरूप, 'अचिरम्' शब्द हमेशा एक जैसा रहता है।
Q5.नीचे दिए गए अव्यय शब्दों और उनके अर्थों की तालिका का वर्णन करें: अचिरम् (शीघ्र ही), यावत् (जब तक), तावत् (तब तक), सहसा (अचानक), श्व: (आने वाला कल)। यह तालिका संस्कृत में अव्यय शब्दों के किस प्रकार को दर्शाती है?
उत्तर:
यह तालिका समयवाचक अव्यय शब्दों को दर्शाती है। ये शब्द समय के विभिन्न पहलुओं को सूचित करते हैं जैसे शीघ्रता, अवधि, अचानक घटना, आने वाला या बीता हुआ समय। उदाहरण के लिए, 'अचिरम्' शीघ्रता दर्शाता है।
व्याख्या:
अव्यय शब्दों को उनके अर्थ और प्रयोग के आधार पर विभाजित किया जाता है। समयवाचक अव्यय शब्द समय को सूचित करते हैं। तालिका में दिए शब्द जैसे 'अचिरम्', 'यावत्', 'तावत्', 'सहसा', 'श्व:' सभी समय से संबंधित हैं।
Q6.संस्कृत में अव्यय शब्दों का वाक्य में स्थान क्यों महत्वपूर्ण होता है? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर:
अव्यय शब्दों का स्थान वाक्य में अर्थ को स्पष्ट करता है। सामान्यतः ये क्रिया के पहले या बाद में आते हैं। उदाहरण के लिए, 'अचिरम् आगच्छ' में 'अचिरम्' शीघ्रता का भाव देता है और क्रिया 'आगच्छ' के पहले आता है। यदि अव्यय का स्थान गलत रखा जाए तो वाक्य का अर्थ भ्रमित हो सकता है।
व्याख्या:
अव्यय शब्द वाक्य की स्पष्टता और प्रभावशीलता के लिए आवश्यक हैं। इनके सही स्थान से वाक्य का भाव और अर्थ स्पष्ट होता है। उदाहरण स्वरूप, 'सहसा निर्णयः न करणीयः' में 'सहसा' क्रिया के पहले है जो अचानक होने वाले क्रिया का भाव देता है।
Q7.निम्नलिखित में से कौन सा शब्द अव्यय है और इसका अर्थ क्या है? A) गच्छति B) अचिरम् C) बालकः D) रामः
उत्तर:
अचिरम्
व्याख्या:
'अचिरम्' एक अव्यय शब्द है जिसका अर्थ 'शीघ्र ही' होता है। 'गच्छति' क्रिया है, 'बालकः' और 'रामः' संज्ञा शब्द हैं। इसलिए सही उत्तर 'अचिरम्' है।
Q8.नीचे दिए गए वाक्य में अव्यय शब्द कौन सा है? 'सहसा निर्णयः न करणीयः।' A) निर्णयः B) न C) सहसा D) करणीयः
उत्तर:
सहसा
व्याख्या:
'सहसा' एक अव्यय शब्द है जिसका अर्थ 'अचानक' होता है। यह क्रिया के भाव को स्पष्ट करता है। अन्य शब्द संज्ञा या क्रिया के रूप में हैं।