Chapter 7
Chapter 7 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 7 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
रहीम का परिचय
व्याख्यारहीम का परिचय
इस अनुभाग में हिंदी के महान कवि रहीम का परिचय दिया गया है। रहीम का जन्म सन् 1556 में लाहौर (जो अब पाकिस्तान में है) में हुआ था। उनका पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था। रहीम अरबी, फ़ारसी, संस्कृत और हिंदी भाषाओं के अच्छे ज्ञाता थे। उनकी नीतिपरक उक्तियों में संस्कृत कवियों की छाप स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। रहीम मध्ययुगीन दरबारी संस्कृति के प्रमुख कवि थे और अकबर के नवरत्नों में से एक थे। रहीम का काव्य मुख्यतः शृंगार, नीति और भक्ति पर आधारित था। उनकी दोहे सरल, सहज और बोधगम्य हैं, जो आम जनता के लिए भी आसानी से याद किए जा सकते हैं। रहीम को अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं पर समान अधिकार था और उन्होंने अपने काव्य में प्रभावशाली भाषा का प्रयोग किया। उनकी प्रमुख कृतियों में रहीम सतसई, शृंगार सतसई, मदनाष्टक, रास पंचाध्यायी, रहीम रत्नावली, बरवै, भाषिक भेदवर्णन शामिल हैं, जो सभी 'रहीम ग्रंथावली' में संकलित हैं। इस परिचय से पाठक को रहीम के जीवन, काव्य और उनकी सांस्कृतिक भूमिका की गहरी समझ मिलती है।
- रहीम का जन्म 1556 में लाहौर में हुआ था।
- पूरा नाम अब्दुर्रहीम खानखाना था।
- वे अरबी, फ़ारसी, संस्कृत और हिंदी भाषाओं के ज्ञाता थे।
- अकबर के दरबार के नवरत्नों में से एक थे।
- उनका काव्य शृंगार, नीति और भक्ति पर आधारित है।
- उनकी प्रमुख कृतियाँ रहीम सतसई, शृंगार सतसई आदि हैं।
- 📌 नीतिपरक दोहा: जीवन के नैतिक सिद्धांतों को सरल और प्रभावी रूप में प्रस्तुत करने वाला दोहा।
- 📌 शृंगार: प्रेम और सौंदर्य का काव्य।
- 📌 भक्ति: ईश्वर या किसी उच्च शक्ति के प्रति श्रद्धा और समर्पण।
रहीम के दोहे
व्याख्यारहीम के दोहे
इस अनुभाग में रहीम के प्रसिद्ध नीतिपरक दोहे प्रस्तुत किए गए हैं। ये दोहे सरल भाषा में जीवन के व्यवहारिक और नैतिक सिद्धांतों को समझाते हैं। रहीम के दोहों में प्रेम, मन की व्यथा, साधना, जीवन के मूल्यों और प्रकृति के साथ संबंध जैसे विषयों को बखूबी चित्रित किया गया है। उदाहरण के लिए, 'रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय।' दोहे में प्रेम के धागे को टूटने से बचाने की सीख दी गई है। इसी प्रकार, 'रहिमन निज मन की बिथा, मन ही राखो गोय। सुनि अठिलैहैं लोग सब, बाँटि न लैहैं कोय।' में मन की व्यथा को दूसरों से छिपाने की सलाह दी गई है क्योंकि लोग उसकी व्यथा को समझ नहीं पाते। रहीम के दोहे जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों को बड़े गहरे अर्थों में प्रस्तुत करते हैं, जो आज भी प्रासंगिक हैं। ये दोहे न केवल नैतिक शिक्षा देते हैं बल्कि सामाजिक व्यवहार में भी मार्गदर्शन करते हैं।
- रहीम के दोहे सरल भाषा में जीवन के नैतिक सिद्धांत बताते हैं।
- प्रेम, मन की व्यथा, साधना, और जीवन के मूल्यों पर आधारित हैं।
- दोहे समाज में सद्भाव और नैतिकता को बढ़ावा देते हैं।
- प्रेम के धागे को टूटने से बचाने की सीख देते हैं।
- मन की व्यथा को दूसरों से छिपाने की सलाह देते हैं।
- 📌 दोहे: दो पंक्तियों वाली कविता जो गहरी शिक्षा देती है।
- 📌 नीतिपरक: नीति या जीवन के नियमों से संबंधित।
- 📌 बिथा: मन की व्यथा या दुख।
प्रश्न-अभ्यास
व्याख्याप्रश्न-अभ्यास
इस अनुभाग में रहीम के दोहों से संबंधित प्रश्न दिए गए हैं, जिनका उत्तर देकर विद्यार्थी दोहों के अर्थ और भाव को समझ सकते हैं। प्रश्नों में प्रेम के धागे के टूटने का कारण, मन की व्यथा को छिपाने की आवश्यकता, सागर और पंक जल के बीच तुलना, साधना के प्रभाव,
अभ्यास प्रश्न — Chapter 7
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.पठित पाठ में लेखक के अनुसार ल्हासा की सबसे खतरनाक जगह कौन- सी है?
उत्तर:
(ग) डाँड़े
Q2.तिब्बत की यात्रा में लेखक के साथी के रूप में कौन था?
उत्तर:
(ग) सुमति
Q3.लेखक के अनुसार ल्हासा में खेती की देखभाल का उत्तरदायित्व कौन सँभालता था?
उत्तर:
(ग) भिक्षु
Q4.लेखक के अनुसार ल्हासा में डाँडे के देवता का मंदिर कहाँ था ?
उत्तर:
(क)सबसे ऊँचे स्थान पर
Q5.कंजुर' का संबंध किस धर्म से है?
उत्तर:
(ख) बौद्ध धर्म
Q6.लेखक ने ल्हासा की यात्रा किस वर्ष की थी ?
उत्तर:
(घ) 1930
Q7.प्रस्तुत पाठ के लेखक राहुल सांकृत्यायन का वास्तविक नाम क्या है ?
उत्तर:
(क) केदार पाडेय
Q8.लहासा की ओर'साहित्य की कौन -सी विधा है ?
उत्तर:
(ग) यात्रावृत्तांत
व्याख्या:
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