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Chapter 7

🎓 Class 12📖 Manovigyan📖 15 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~23 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 7

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 15 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

हमारे दैनिक जीवन में हम अनेक सामाजिक अंतःक्रियाओं में संलग्न रहते हैं। जैसे प्रातःकाल विद्यालय जाने से पहले परिवार के सदस्यों से बातचीत करना, विद्यालय में शिक्षकों तथा सहपाठियों के साथ विषयों पर चर्चा करना, तथा विद्यालय के बाद दोस्तों के साथ समय बिताना। ये सभी स्थितियाँ हमें समूह का हिस्सा बनाती हैं, जो न केवल आवश्यक सहायता एवं सुविधा प्रदान करती हैं बल्कि व्यक्ति के संवृद्धि एवं विकास में भी सहायक होती हैं। यदि हम किसी ऐसे स्थान पर होते जहाँ परिवार, विद्यालय और मित्रों का साथ न हो, तो हम अनुभव करते हैं कि जीवन में कुछ महत्वपूर्ण चीज़ों की कमी है। इसलिए समूह में सम्मिलित होना आवश्यक है जो हमें सकारात्मक रूप से प्रभावित करे और अच्छे नागरिक बनने में सहायता करे। समूह केवल दूसरों से प्रभावित होने का माध्यम ही नहीं है, बल्कि व्यक्ति भी दूसरों और समाज को परिवर्तित करने में सक्षम होता है। इस अध्याय में हम समूह की प्रकृति, प्रकार, निर्माण, और समूह के प्रभावों को विस्तार से समझेंगे।

  • हमारे दैनिक जीवन में सामाजिक अंतःक्रियाएँ महत्वपूर्ण हैं।
  • समूह व्यक्ति को सहायता, सुरक्षा, और विकास प्रदान करता है।
  • समूह की सदस्यता व्यक्ति के व्यवहार और सामाजिक विकास को प्रभावित करती है।
  • व्यक्ति न केवल प्रभावित होता है बल्कि समाज को भी प्रभावित करता है।
  • 📌 सामाजिक अंतःक्रिया: व्यक्तियों के बीच संवाद और क्रिया-प्रतिक्रिया।
  • 📌 समूह: दो या दो से अधिक व्यक्ति जो अंतःक्रिया करते हैं और परस्पर निर्भर होते हैं।

समूह की प्रकृति एवं इसका निर्माण

व्याख्या

समूह की प्रकृति एवं इसका निर्माण

समूह वे दो या दो से अधिक व्यक्ति होते हैं जो एक संगठित व्यवस्था में अंतःक्रिया करते हैं और परस्पर-निर्भर होते हैं। समूह के सदस्यों के बीच समान अभिप्रेरणाएँ, निर्धारित भूमिकाएँ, हैसियत या स्थिति और एक दूसरे से प्रत्याशाएँ होती हैं। उदाहरण के लिए परिवार, कक्षा, और खेल समूह। ये समूह व्यक्तियों के अन्य प्रकार के समुच्चयों से भिन्न होते हैं, जैसे कि भीड़ या दर्शकगण, जहाँ परस्पर निर्भरता और संरचना नहीं होती। समूह की प्रमुख विशेषताएँ हैं: - दो या दो से अधिक व्यक्तियों का सामाजिक इकाई होना। - समान अभिप्रेरणा और लक्ष्य। - परस्पर निर्भरता, जहाँ एक सदस्य के कार्य का प्रभाव अन्य पर पड़ता है। - आवश्यकताओं की संतुष्टि के लिए परस्पर प्रभाव। - प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष अंतःक्रिया। - निर्धारित भूमिकाएँ और प्रतिमान, जो व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। समूहों और दलों में अंतर होता है, जहाँ दल में पूरक कौशल होते हैं और सदस्य अपने कार्यों के लिए उत्तरदायी होते हैं। समूह में नेता होता है जो कार्य की जिम्मेदारी संभालता है, जबकि दल में सभी सदस्य स्वयं जिम्मेदारी लेते हैं।

  • समूह दो या अधिक व्यक्तियों का संगठित सामाजिक इकाई होता है।
  • सदस्यों के बीच समान लक्ष्य और परस्पर निर्भरता होती है।
  • समूह में भूमिकाएँ और मानक निर्धारित होते हैं जो व्यवहार को नियंत्रित करते हैं।
  • भीड़ और दर्शकगण समूह से भिन्न होते हैं क्योंकि उनमें संरचना और परस्पर निर्भरता नहीं होती।
  • दल समूह का विशेष प्रकार होता है जिसमें पूरक कौशल और उत्तरदायित्व होता है।
  • 📌 परस्पर-निर्भरता: एक सदस्य के कार्य का दूसरे सदस्यों पर प्रभाव।
  • 📌 भूमिका: समूह में सदस्य से अपेक्षित व्यवहार।
  • 📌 प्रतिमान या मानक: समूह के व्यवहार के नियम।

व्यक्ति क्यों समूह में सम्मिलित होते हैं?

व्याख्या

व्यक्ति क्यों समूह में सम्मिलित होते हैं?

व्यक्ति अनेक कारणों से समूहों का हिस्सा बनते हैं क्योंकि विभिन्न समूह उनकी अलग-अलग आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। समूहों की सदस्यता से व्यक्ति को सुरक्षा, प्रतिष्ठा, आत्म-सम्मान, सामाजिक एवं मनोवैज्ञानिक आवश्यकताओं की पूर्ति, लक्ष्य प्राप्ति, और ज्ञान

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. औपचारिक एवं अनौपचारिक समूह तथा अंत: एवं बाह्य समूहों की तुलना कीजिए एवं अंतर बताइए।

उत्तर:

औपचारिक समूह वे होते हैं जिनका गठन किसी संगठन या संस्था द्वारा निर्धारित नियमों और उद्देश्यों के आधार पर किया जाता है, जैसे विद्यालय का स्टाफ, कार्यालय की टीम आदि। अनौपचारिक समूह स्वाभाविक रूप से बनते हैं, जैसे मित्र समूह, खेल समूह आदि। अंत:समूह वे होते हैं जिनके सदस्य एक-दूसरे के साथ निकट संबंध रखते हैं और समूह की पहचान करते हैं, जबकि बाह्य समूह वे होते हैं जिनके सदस्य समूह के बाहर के लोगों के रूप में देखे जाते हैं। औपचारिक समूहों में नियम और भूमिकाएँ स्पष्ट होती हैं, जबकि अनौपचारिक समूहों में ये अनौपचारिक और लचीले होते हैं।

व्याख्या:

औपचारिक और अनौपचारिक समूहों के बीच मुख्य अंतर उनके गठन के तरीके, नियमों और उद्देश्यों में होता है। अंत:समूह और बाह्य समूह सामाजिक पहचान और संबंधों के आधार पर भिन्न होते हैं।

MediumNCERT
Q2.2. क्या आप किसी समूह के सदस्य हैं? वह क्या है जिसने आपको इस समूह में सम्मिलित होने के लिए अभिप्रेरित किया? इसकी विवेचना कीजिए।

उत्तर:

हाँ, मैं किसी समूह का सदस्य हूँ। मुझे इस समूह में सम्मिलित होने के लिए सुरक्षा, आत्म-सम्मान, सामाजिक पहचान, ज्ञान एवं सूचना प्राप्ति, तथा लक्ष्य प्राप्ति की आवश्यकता ने अभिप्रेरित किया। समूह में सम्मिलित होने से मुझे सामाजिक समर्थन मिलता है और मैं अपने उद्देश्यों को बेहतर तरीके से प्राप्त कर पाता हूँ।

व्याख्या:

व्यक्ति समूहों में सम्मिलित होता है क्योंकि समूह उसे विभिन्न प्रकार की आवश्यकताएँ पूरी करने में सहायता करते हैं, जैसे सुरक्षा, सामाजिक स्वीकृति, और लक्ष्य प्राप्ति।

EasyNCERT
Q3.3. समूह निर्माण को समझने में टकमैन का अवस्था मॉडल किस प्रकार से सहायक है?

उत्तर:

टकमैन का समूह विकास मॉडल पाँच अवस्थाओं में समूह निर्माण की प्रक्रिया को समझाता है: प्रारंभिक अवस्था (Forming), द्वंद्व अवस्था (Storming), सामान्यीकरण अवस्था (Norming), प्रदर्शन अवस्था (Performing), और समाप्ति अवस्था (Adjourning)। यह मॉडल समूह के विकास के चरणों को स्पष्ट करता है और बताता है कि कैसे समूह सदस्य एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठाते हैं, संघर्षों को सुलझाते हैं, नियम बनाते हैं और अंततः प्रभावी ढंग से कार्य करते हैं। इस मॉडल से समूह निर्माण की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से समझा जा सकता है।

व्याख्या:

टकमैन का मॉडल समूह के विकास के चरणों को क्रमबद्ध करता है जिससे समूह के व्यवहार और कार्यप्रणाली को समझना आसान होता है।

MediumNCERT
Q4.4. समूह हमारे व्यवहार को किस प्रकार से प्रभावित करते हैं?

उत्तर:

समूह हमारे व्यवहार को कई प्रकार से प्रभावित करते हैं जैसे सामाजिक सुकरीकरण (social facilitation) में समूह की उपस्थिति से व्यक्ति का प्रदर्शन बेहतर होता है। सामाजिक स्वैराचार (social loafing) में व्यक्ति समूह में कम प्रयास करता है। समूह के मानक और अपेक्षाएँ व्यक्ति के व्यवहार को दिशा देते हैं। समूहचिंतन (groupthink) के कारण व्यक्ति आलोचनात्मक सोच छोड़ सकता है। समूह की भूमिकाएँ, हैसियत और परस्पर-निर्भरता भी व्यवहार को प्रभावित करती हैं।

व्याख्या:

समूह व्यक्ति के व्यवहार को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह से प्रभावित कर सकते हैं, जो सामाजिक मनोविज्ञान के सिद्धांतों द्वारा समझा जाता है।

MediumNCERT
Q5.5. समूहों में सामाजिक स्वैराचार को कैसे कम किया जा सकता है? अपने विद्यालय में सामाजिक स्वैराचार की किन्हीं दो घटनाओं पर विचार कीजिए। आपने इसे कैसे दूर किया?

उत्तर:

सामाजिक स्वैराचार को कम करने के लिए समूह में प्रत्येक सदस्य की जिम्मेदारी स्पष्ट करनी चाहिए, व्यक्तिगत योगदान को मान्यता देनी चाहिए, समूह के लक्ष्य स्पष्ट होने चाहिए और सदस्य आपस में अधिक संवाद करें। विद्यालय में सामाजिक स्वैराचार की दो घटनाएँ हो सकती हैं जैसे समूह परियोजना में कुछ छात्रों का कम योगदान देना और खेल टीम में कुछ खिलाड़ियों का कम प्रयास करना। इन्हें दूर करने के लिए शिक्षक ने व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की, प्रगति की निगरानी की और प्रोत्साहन दिया जिससे सभी ने बेहतर योगदान दिया।

व्याख्या:

सामाजिक स्वैराचार को कम करने के लिए समूह की संरचना, जिम्मेदारी और प्रोत्साहन महत्वपूर्ण होते हैं। विद्यालय के उदाहरण से यह सिद्ध होता है कि उचित प्रबंधन से इसे रोका जा सकता है।

MediumNCERT
Q6.परियोजना विचार 1. भारत द्वारा हाल में खेली गई किसी टेस्ट मैच शृंखला (क्रिकेट की) को लीजिए। उस अवधि के समाचारपत्रों को एकत्र कीजिए। मैचों की समीक्षा एवं भारतीय तथा प्रतिद्वंद्वी विवरणकार (कॉमेटेटर) की टिप्पणियों का मूल्यांकन कीजिए। क्या आप टिप्पणियों में कोई अंतर देखते हैं?

उत्तर:

यह परियोजना विद्यार्थियों को समाचारपत्रों के माध्यम से विभिन्न विवरणकारों की टिप्पणियों का विश्लेषण करने के लिए प्रेरित करती है। विद्यार्थी भारतीय और प्रतिद्वंद्वी टीम के विवरणकारों की टिप्पणियों में भेद-भाव, पक्षपात या निष्पक्षता की तुलना कर सकते हैं। इससे सामाजिक दृष्टिकोण, समूह प्रभाव और पूर्वाग्रहों को समझने में मदद मिलती है।

व्याख्या:

परियोजना के माध्यम से विद्यार्थी समूह प्रभाव और सामाजिक मनोविज्ञान के सिद्धांतों को व्यवहार में देख सकते हैं और विश्लेषण कर सकते हैं।

MediumNCERT
Q7.समूह की परिभाषा क्या है? समूह को व्यक्तियों के अन्य प्रकार के समुच्चयों से किस आधार पर भिन्न किया जाता है?

उत्तर:

समूह दो या दो से अधिक व्यक्तियों की एक संगठित व्यवस्था है जो अंतःक्रिया करते हैं और परस्पर-निर्भर होते हैं। समूहों में समान अभिप्रेरणाएँ, भूमिकाएँ, हैसियत और प्रत्याशाएँ होती हैं। समूह को व्यक्तियों के अन्य प्रकार के समुच्चयों से इस आधार पर भिन्न किया जाता है कि वहाँ परस्पर-निर्भरता, भूमिका, स्थिति और प्रत्याशाएँ होती हैं, जबकि अन्य समुच्चयों जैसे भीड़ में ये नहीं होतीं।

व्याख्या:

समूह की परिभाषा में अंतःक्रिया, परस्पर निर्भरता, समान अभिप्रेरणा, भूमिकाएँ और मानक शामिल होते हैं। अन्य प्रकार के समुच्चयों जैसे भीड़ या दर्शकगण में ये विशेषताएँ नहीं होतीं, इसलिए समूह उनसे अलग होते हैं।

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Q8.निम्नलिखित में से कौन-सी विशेषता समूह की पहचान में सहायक नहीं है?
A.A) सदस्यों के बीच समान अभिप्रेरणाएँ और लक्ष्य होना
B.B) सदस्यों का परस्पर निर्भर होना
C.C) सदस्यों का एक ही स्थान पर संयोगवश उपस्थित होना
D.D) समूह के सदस्यों के बीच निर्धारित भूमिकाएँ और मानक होना

उत्तर:

सदस्यों का एक ही स्थान पर संयोगवश उपस्थित होना

व्याख्या:

समान अभिप्रेरणा, परस्पर निर्भरता, भूमिकाएँ और मानक समूह की पहचान की मुख्य विशेषताएँ हैं। केवल एक ही स्थान पर संयोगवश उपस्थित होना भीड़ की विशेषता है, समूह की नहीं।

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