Chapter 7 — Study Notes
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कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
Explanationकन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हिंदी साहित्य के एक प्रमुख निबंधकार थे जिनका जन्म 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था, जहाँ उन्होंने 'नया जीवन' और 'विकास' जैसे पत्रों का संपादन किया। प्रभाकर ने स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी की, जिसके कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उनकी रचनाएँ राजनीतिक और सामाजिक जीवन से गहरे जुड़े हुए हैं। उनकी साहित्यिक प्रतिभा के लिए उन्हें 'पद्म श्री' सम्मान से नवाजा गया। उनके संस्मरणात्मक निबंध-संग्रह जैसे 'दीप जले शंख बजे', 'जिंदगी मुसकरायी', 'बाजे पायलिया के घुंघरू', 'जिंदगी लहलहाई', 'क्षण बोले कण मुसकाए', 'कारवाँ आगे बढ़े', 'माटी हो गई सोना', 'महके आँगन चहके द्वार' और 'आकाश के तारे धरती के फूल' मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन के उत्कृष्ट उदाहरण हैं। प्रभाकर का निधन 1995 में हुआ।
- कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ।
- वे पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे और कई पत्रों का संपादन किया।
- स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भागीदारी के कारण जेल यात्रा भी की।
- उनके निबंध राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर आधारित हैं।
- उन्हें पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- उनके संस्मरणात्मक निबंध मानवतावादी दृष्टिकोण के परिचायक हैं।
- 📌 पत्रकारिता: समाचार और विचारों के प्रसार का कार्य।
- 📌 संस्मरणात्मक निबंध: लेखक के जीवन के अनुभवों पर आधारित निबंध।
- 📌 पद्म श्री: भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला एक सम्मान।
मैं और मेरा देश
Explanationमैं और मेरा देश
‘मैं और मेरा देश’ प्रभाकर का एक महत्वपूर्ण निबंध है जो व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को गहराई से स्थापित करता है। निबंध में लेखक बताता है कि व्यक्ति की पूर्णता केवल उसकी निजता में नहीं, बल्कि उसके परिवार, पड़ोस, नगर और राष्ट्र से जुड़ी पहचान में है। व्यक्ति द्वारा किया गया हर कार्य न केवल उसकी अपनी पहचान है, बल्कि उसके परिवार, क्षेत्र और राष्ट्र की भी पहचान बनता है। लेखक ने बताया है कि भले ही व्यक्ति अपने घर, पड़ोस और नगर में पूर्णता का अनुभव करता हो, लेकिन जब उसे यह एहसास होता है कि देश की गुलामी के कारण उसकी स्वतंत्रता और सम्मान सीमित हैं, तो यह एक मानसिक भूकंप की तरह होता है। यह भूकंप स्वर्गीय लाला लाजपत राय के अनुभव से प्रेरित है, जिन्होंने विदेश भ्रमण के बाद अपने देश की गुलामी की लज्जा को महसूस किया। निबंध में नागरिक के अधिकार, कर्तव्य, देश की उन्नति और कुशल नेतृत्वकर्ता की आवश्यकता पर भी विचार किया गया है। लेखक यह स्पष्ट करता है कि हर नागरिक देश के लिए कुछ न कुछ कर सकता है, चाहे वह वैज्ञानिक हो, धनिक हो या सामान्य नागरिक। जीवन को युद्ध की संज्ञा देते हुए, लेखक बताता है कि केवल लड़ना ही काम नहीं होता, बल्कि रसद, समर्थन और जयकार करने वालों का भी उतना ही महत्व है।
- व्यक्ति की पूर्णता उसकी निजता के साथ-साथ परिवार, पड़ोस, नगर और राष्ट्र से जुड़ी होती है।
- देश की गुलामी का अनुभव व्यक्ति के मन में मानसिक भूकंप उत्पन्न करता है।
- लाला लाजपत राय के विदेश भ्रमण का अनुभव इस मानसिक भूकंप का कारण था।
- हर नागरिक देश के सम्मान और उन्नति में योगदान दे सकता है।
- जीवन को युद्ध के रूप में देखा गया है जिसमें लड़ाई के साथ-साथ रसद और समर्थन भी आवश्यक हैं।
- देश के लिए नागरिकों का कर्तव्य और अधिकार दोनों महत्वपूर्ण हैं।
- 📌 मानसिक भूकंप: मन में उठने वाला गहरा प्रभाव या जागरूकता।
- 📌 नागरिक अधिकार: देश के नागरिकों को प्राप्त कानूनी अधिकार।
- 📌 कर्तव्य: वह जिम्मेदारी जो प्रत्येक नागरिक को निभानी चाहिए।
देशभक्ति और नागरिक कर्तव्य के उदाहरण
Explanationदेशभक्ति और नागरिक कर्तव्य के उदाहरण
इस खंड में लेखक ने देशभक्ति और नागरिक कर्तव्यों को समझाने के लिए दो घटनाओं का उल्लेख किया है। पहली घटना में स्वामी रामतीर्थ जापान में फल न मिलने पर एक युवक से फल प्राप्त करते हैं, जो बिना मूल्य लिए उन्हें फल देता है और कहता है कि वे अपने देश में जाकर
Practice Questions — Chapter 7
Includes NCERT exercise questions with answers
Q1.1. “एक दिन आनंद की इस दीवार में दारार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है? (क) पूर्णता के भाव की तुष्टि (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार (घ) सुख-सुविधाओं का अभाव
Answer:
इस पंक्ति में 'दारार' शब्द पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति की ओर संकेत करता है। इसलिए सही उत्तर है (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति।
Explanation:
'दारार' शब्द का अर्थ होता है दरार या टूटना, जो यहाँ आनंद की दीवार में टूटन को दर्शाता है, अर्थात पारस्परिक संबंधों में दरार आना।
Q2.2. निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है? (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का (ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का (ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
Answer:
लेखक को ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो बात को विस्तार देने वाले होते हैं, इसलिए सही उत्तर है (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का।
Explanation:
निबंध में लेखक ने कहा है कि विस्तार से सोचने और समझाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है क्योंकि वे गहराई से विचार करने का अवसर देते हैं।
Q3.3. “अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में— (क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। (ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी। (घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
Answer:
पराधीनता के दिनों को दीन इसलिए कहा गया क्योंकि लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। अतः सही उत्तर है (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
Explanation:
पराधीनता के समय भारत में लोगों का आत्मसम्मान दबाया जाता था, जिससे वे दीन अर्थात कमजोर और दुखी थे।
Q4.4. निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि— (क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें। (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो। (घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
Answer:
मनुष्य गौरव का अनुभव नहीं कर सकता यदि उसका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। अतः सही उत्तर है (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
Explanation:
देश की स्वतंत्रता और स्वाभिमान के बिना व्यक्ति को गौरव का अनुभव नहीं हो सकता। पराधीनता में व्यक्ति का गौरव दब जाता है।
Q5.5. “पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है? (क) देश और नागरिक (ख) देश और संविधान (ग) देश और विदेश (घ) व्यवसाय और आजीविका
Answer:
यहाँ 'गाँठ' शब्द देश और नागरिक को साथ बाँधने का प्रतीक है। अतः सही उत्तर है (क) देश और नागरिक।
Explanation:
'गाँठ' का अर्थ होता है बंधन या संबंध, जो देश और उसके नागरिकों के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है।
Q6.6. प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है? (क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था (ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध (घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
Answer:
मुख्य भाव व्यक्ति और देश के अंतर्संबंध का है। अतः सही उत्तर है (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।
Explanation:
निबंध में यह बताया गया है कि व्यक्ति और देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक के बिना दूसरा अधूरा है।
Q7.मेरी समझ मेरे विचार 1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए? 2. जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए। 3. “बात यह है कि मैं और मेरा देश दो अलग चीज तो हैं ही नहीं।” स्वयं को देश से अलग न मानने के पीछे क्या तर्क हो सकते हैं, उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
Answer:
1. स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर इसलिए मुग्ध हो गए क्योंकि युवक ने न केवल फल स्वीकार किए बल्कि उनके मूल्य के रूप में कुछ ऐसा माँगा जो गहरा और सार्थक था, जिससे स्वामी जी को उसकी सोच और देशभक्ति का पता चला। 2. जापान के युवक ने फलों के मूल्य के रूप में स्वामी रामतीर्थ से देश की सेवा करने का आग्रह किया। इससे उसकी देशभक्ति, जिम्मेदारी और समर्पण की छवि उभरती है। 3. स्वयं को देश से अलग न मानने के तर्क हैं कि व्यक्ति और देश का संबंध गहरा है; व्यक्ति की पहचान, सम्मान, और विकास देश से जुड़ा है। उदाहरण के रूप में, जब देश प्रगति करता है तो व्यक्ति को भी गौरव मिलता है, और जब देश संकट में होता है तो व्यक्ति भी प्रभावित होता है।
Explanation:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर निबंध के भाव और घटनाओं के आधार पर दिया गया है, जो पाठ्यपुस्तक में वर्णित है।
Q8.मेरे अनुभव मेरे विचार 1. “देश की हीनता और गौरव का ही फल उसे नहीं मिलता, उसकी हीनता और गौरव का फल भी उसके देश को मिलता है”, अपने आस-पास के विभिन्न उदाहरणों के द्वारा इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए। 2. “मुझे बहुतों की अपने लिए जरूरत पड़ती थी। मैं भी बहुतों की जरूरत का उनके लिए जवाब था।” (क) प्रातः काल से लेकर रात्रि तक आप अपने किन-किन कार्यों में किस-किसका क्या सहयोग लेते हैं और आप दूसरों को किस तरह का सहयोग देते हैं? अपने अनुभव लिखिए। (ख) उपर्युक्त वाक्य में रेखांकित शब्द ‘बहुतों’ में कौन-कौन सम्मिलित होंगे, अनुमान के आधार पर लिखिए। (ग) रचनाकार को स्वयं के लिए दूसरे लोगों से किस प्रकार के सहयोग की आवश्यकता पड़ती होगी और वह दूसरों को किस प्रकार का सहयोग देता होगा, अनुमान के आधार पर लिखिए। 3. “सुना नहीं आपने कि जीवन एक युद्ध है और युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता।” (क) उपर्युक्त वाक्य के रेखांकित अंश “युद्ध में लड़ना ही तो काम नहीं होता” के आधार पर लिखिए कि देश की प्रगति, विकास एवं सुरक्षा के प्रति हम सभी के क्या-क्या दायित्व हैं? अपने उत्तर को विस्तार देने के लिए अपने घर या पास-पड़ोस के बड़ों और अध्यापक से चर्चा करके लिखिए। (ख) अपने पास-पड़ोस में विचरने वाले पशु-पक्षियों की जीवनचर्या का अवलोकन कीजिए और अपने अवलोकन के आधार पर लिखिए कि आप उनके संघर्षों को किस रूप में देखते हैं? (संकेत– आप अपनी पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी ‘दो बैलों की कथा’ के मुख्य पात्रों के अनुभवों को भी आधार बना सकते हैं।) (ग) इस निबंध में जीवन को युद्ध क्यों कहा गया है? आप अपने घर के बड़ों से इस विषय पर चर्चा करके उनके और अपने विचार लिखिए। (घ) देश की भौगोलिक सीमाओं की रक्षा सैनिक करते हैं। इसी तरह हमारे आस-पास हमारे जीवन को बेहतर बनाने के लिए अनेक लोग कार्यरत हैं। ये कौन-कौन लोग हैं और उनके लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? 4. “अपने पड़ोस में खेलकर, पड़ोसियों की ममता-दुलार पा, बड़ा हुआ था।” (क) उपर्युक्त पंक्ति के आधार पर लिखिए कि पास-पड़ोस के लोगों में किस तरह के पारस्परिक संबंध रहे होंगे? (ख) वर्तमान समय में ऐसे संबंधों में किस तरह के परिवर्तन आए हैं और इनके क्या कारण हो सकते हैं? लिखिए। 5. “क्या सुरुचि और सौंदर्य को आपके किसी काम से ठेस लगती है?” अपने घर/विद्यालय के आस-पास, सार्वजनिक संसाधनों और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों की स्वच्छता एवं सौंदर्य को बनाए रखने के लिए आप और आपके सहपाठी, संबंधी क्या-क्या करते हैं? 6. “मैं कोई ऐसा काम न करूँ जिससे मेरे देश की स्वतंत्रता को, दूसरे शब्दों में, उसके सम्मान को धक्का पहुँचे।” देश के सम्मान को धक्का न पहुँचे, इसके लिए क्या करें और क्या नहीं करें? अपने-अपने समूह में इसकी चर्चा कीजिए और चर्चा से उभरे बिंदुओं को प्रातःकालीन सभा में पढ़कर सुनाइए।
Answer:
1. देश की हीनता और गौरव का फल व्यक्ति और देश दोनों को मिलता है, जैसे जब कोई नागरिक देश की छवि खराब करता है तो देश का सम्मान घटता है, और जब देश गौरवान्वित होता है तो नागरिकों को भी गर्व होता है। 2.(क) दिनभर हम परिवार, विद्यालय, मित्रों, पड़ोसियों आदि से सहयोग लेते हैं और उन्हें भी सहयोग देते हैं, जैसे पढ़ाई में मदद, घर के काम, खेल आदि। (ख) 'बहुतों' में परिवार, मित्र, शिक्षक, पड़ोसी, समाज के लोग शामिल होते हैं। (ग) रचनाकार को सलाह, मार्गदर्शन, प्रेरणा, सहयोग की आवश्यकता होती होगी और वह दूसरों को भी यही देता होगा। 3.(क) देश की प्रगति के लिए हमें ईमानदारी, मेहनत, नियमों का पालन, एकता बनाए रखना आवश्यक है। (ख) पशु-पक्षी भी जीवन के लिए संघर्ष करते हैं, जैसे भोजन की खोज, सुरक्षा आदि। (ग) जीवन को युद्ध इसलिए कहा गया क्योंकि इसमें निरंतर संघर्ष और प्रयास करना पड़ता है। (घ) हमारे आस-पास शिक्षक, डॉक्टर, सफाई कर्मचारी, पुलिस आदि कार्यरत हैं, जिनके लिए हम सम्मान और सहयोग कर सकते हैं। 4.(क) पड़ोसियों के बीच प्रेम, सहयोग, ममता-दुलार के संबंध रहे होंगे। (ख) आजकल तकनीकी और व्यस्तता के कारण संबंध कमजोर हुए हैं। 5. हम स्वच्छता अभियान में भाग लेते हैं, कूड़ा न फैलाते, पौधे लगाते हैं, और ऐतिहासिक स्थलों की सुरक्षा करते हैं। 6. देश के सम्मान के लिए हमें देशद्रोह से बचना, नियमों का पालन करना, देश की छवि खराब न करना चाहिए।
Explanation:
प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ्यपुस्तक के भाव और सामाजिक अनुभवों के आधार पर दिया गया है।