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Chapter 7

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Chapter 6अध्याय 7 / 12Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

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कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’

अवधारणा

कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’

इस अनुभाग में हिंदी के प्रसिद्ध निबंधकार कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का परिचय दिया गया है। उनका जन्म सन् 1906 में उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ था। उनका मुख्य कार्यक्षेत्र पत्रकारिता था, जहाँ उन्होंने 'नया जीवन' और 'विकास' पत्रों का संपादन किया। स्वतंत्रता संग्राम और सामाजिक कार्यों में सक्रिय भागीदारी के कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा। उन्होंने राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर अनेक निबंध लिखे। उनकी साहित्यिक रचनाएँ मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन की गहरी समझ प्रस्तुत करती हैं। उनके प्रमुख निबंध-संग्रहों में 'दीप जले शंख बजे', 'जिंदगी मुसकरायी', 'बाजे पायलिया के घुंघरू', 'जिंदगी लहलहाई', 'क्षण बोले कण मुसकाए', 'कारवाँ आगे बढ़े', 'माटी हो गई सोना', 'महके आँगन चहके द्वार' और 'आकाश के तारे धरती के फूल' शामिल हैं। इन्हें उनके साहित्यिक योगदान के लिए पद्म श्री से सम्मानित किया गया। उनका निधन सन् 1995 में हुआ।

  • कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ का जन्म 1906 में सहारनपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ।
  • वे पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय थे और कई पत्रों का संपादन किया।
  • स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी के कारण जेल गए।
  • उनके निबंध मानवतावादी दृष्टिकोण और जीवन-दर्शन को दर्शाते हैं।
  • उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
  • सन् 1995 में उनका निधन हुआ।
  • 📌 निबंधकार: किसी विषय पर विचारों को साहित्यिक रूप में प्रस्तुत करने वाला लेखक।
  • 📌 पत्रकारिता: समाचार और विचारों का संकलन और प्रकाशन।
  • 📌 मानवतावादी दृष्टिकोण: मानवता के प्रति सहानुभूति और संवेदनशीलता।

मैं और मेरा देश

व्याख्या

मैं और मेरा देश

यह अनुभाग निबंध 'मैं और मेरा देश' का मुख्य भाग है, जिसमें व्यक्ति और राष्ट्र के अविभाज्य संबंध को गहराई से समझाया गया है। लेखक बताता है कि व्यक्ति की पूर्णता उसकी निजता में ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, पड़ोस, नगर और अंततः राष्ट्र से जुड़ी होती है। व्यक्ति अपने घर, पड़ोस और नगर से जुड़कर एक पूर्ण मनुष्य बनता है। परन्तु जब उसे एहसास होता है कि उसके देश की स्वतंत्रता और सम्मान नहीं है, तो उसकी मनुष्यता अपूर्ण हो जाती है। यह अपूर्णता एक मानसिक भूकंप के समान होती है, जो व्यक्ति को झकझोर देता है। लेखक ने इस भूकंप का कारण पंजाब केसरी लाला लाजपत राय के अनुभवों से जोड़ा है, जिन्होंने विदेशों की यात्रा के बाद भारत की गुलामी की लज्जा को महसूस किया। निबंध में यह भी बताया गया है कि प्रत्येक नागरिक का देश के प्रति कर्तव्य और अधिकार होता है। चाहे वह वैज्ञानिक हो, धनिक हो या सामान्य नागरिक, हर कोई देश के सम्मान और उन्नति में योगदान दे सकता है। जीवन को युद्ध के रूप में देखा गया है, जिसमें लड़ना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि सहयोग, समर्थन और सही सोच भी आवश्यक है। निबंध में दो घटनाओं के माध्यम से यह दिखाया गया है कि एक नागरिक के कार्य से देश का गौरव बढ़ सकता है या कलंक भी लग सकता है। स्वामी रामतीर्थ और जापानी युवक की घटना से यह स्पष्ट होता है कि देश के प्रति सम्मान और प्रेम की भावना कितनी महत्वपूर्ण है। लेखक देश के शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध पर बल देता है और कहता है कि देश की उन्नति के लिए नागरिकों को अपने आचरण और विचारों में सुधार करना चाहिए। चुनाव को देश की उच्चता और हीनता की कसौटी बताया गया है, जहाँ सही व्यक्ति को वोट देना नागरिक का कर्तव्य है।

  • व्यक्ति की पूर्णता उसके परिवार, पड़ोस, नगर और राष्ट्र से जुड़ी होती है।
  • देश की गुलामी की स्थिति व्यक्ति की मनुष्यता को अपूर्ण बनाती है।
  • लाला लाजपत राय के अनुभव ने लेखक को मानसिक भूकंप दिया।
  • हर नागरिक का देश के प्रति कर्तव्य और अधिकार होता है।
  • जीवन को युद्ध माना गया है जिसमें सहयोग और सही सोच जरूरी है।
  • देश की उन्नति के लिए शक्ति-बोध और सौंदर्य-बोध आवश्यक हैं।
  • चुनाव देश की उच्चता और हीनता की कसौटी है।
  • 📌 मानसिक भूकंप: मन में अचानक उठने वाला गहरा प्रभाव या जागरूकता।
  • 📌 शक्ति-बोध: देश की सामूहिक ताकत और आत्मविश्वास की भावना।
  • 📌 सौंदर्य-बोध: देश की संस्कृति, स्वच्छता और सम्मान की भावना।

नागरिक और देश का संबंध

व्याख्या

नागरिक और देश का संबंध

इस भाग में लेखक ने नागरिक और देश के बीच के घनिष्ठ संबंध को स्पष्ट किया है। लेखक कहता है कि एक नागरिक अपने देश का प्रतिनिधि होता है और उसके कार्यों से देश की छवि बनती या बिगड़ती है। इसलिए नागरिक का कर्तव्य है कि वह अपने देश के सम्मान की रक्षा करे और द

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.“एक दिन आनंद की इस दीवार में दारार पड़ गई”, इस पंक्ति में रेखांकित शब्द ‘दरार’ किस ओर संकेत करता है? (क) पूर्णता के भाव की तुष्टि (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति (ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार (घ) सुख-सुविधाओं का अभाव
A.क) पूर्णता के भाव की तुष्टि
B.ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति
C.ग) पूर्णता के भाव पर प्रहार
D.घ) सुख-सुविधाओं का अभाव

उत्तर:

इस पंक्ति में ‘दारार’ शब्द पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति की ओर संकेत करता है। इसलिए सही उत्तर है (ख) पारस्परिक संबंध टूटने की स्थिति।

व्याख्या:

‘दारार’ का अर्थ होता है दरार या टूटना, जो यहाँ संबंधों के टूटने की स्थिति को दर्शाता है। इसलिए यह पूर्णता के भाव की तुष्टि, प्रहार या सुविधाओं के अभाव से संबंधित नहीं है।

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Q2.निबंध में कहा गया है कि “ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में एक अपूर्व आनंद आता है।” लेखक को किस तरह के प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद की अनुभूति होती है? (क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का (ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का (ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का
A.क) बात को विस्तार देने वाले प्रश्नों का
B.ख) बात का निष्कर्ष प्रस्तुत करने वाले प्रश्नों का
C.ग) बिना किसी संदर्भ के पूछे गए प्रश्नों का
D.घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का

उत्तर:

लेखक को ऐसे प्रश्नों का उत्तर देने में आनंद आता है जो किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्न होते हैं। अतः सही उत्तर है (घ) किसी की समझ का आकलन करने वाले प्रश्नों का।

व्याख्या:

निबंध में लेखक ने स्पष्ट किया है कि उसे ऐसे प्रश्नों का उत्तर देना पसंद है जो सोचने और समझने को प्रेरित करते हैं, न कि केवल तथ्यात्मक या संदर्भहीन प्रश्न।

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Q3.“अपने महान राष्ट्र की पराधीनता के दीन दिनों में जिन लोगों ने अपने रक्त से गौरव के दीपक जलाए”, इस वाक्य में पराधीनता के दिनों को दीन कहा गया है क्योंकि पराधीन भारत में— (क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था। (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। (ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी। (घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।
A.क) भोजन, आवास और वस्त्र जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव था।
B.ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।
C.ग) महत्वपूर्ण निर्णय लेने की स्वतंत्रता थी।
D.घ) धार्मिक रीति-रिवाजों को मनाने पर रोक लगाई जाती थी।

उत्तर:

पराधीनता के दिनों को दीन इसलिए कहा गया क्योंकि उस समय लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था। अतः सही उत्तर है (ख) लोगों के आत्मसम्मान और गौरव की भावना का दमन होता था।

व्याख्या:

पराधीन भारत में लोगों को स्वतंत्रता नहीं थी, उनके गौरव और सम्मान को दबाया जाता था, इसलिए ‘दीन’ शब्द का प्रयोग किया गया है।

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Q4.निबंध के अनुसार मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि— (क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें। (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। (ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो। (घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।
A.क) उन्हें विदेश भ्रमण के अवसर न मिलें।
B.ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।
C.ग) उनके नगर की शासन प्रणाली कमजोर हो।
D.घ) अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हनन होता हो।

उत्तर:

मनुष्य साधन-संपन्न होते हुए भी गौरव का अनुभव नहीं कर सकते यदि उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो। अतः सही उत्तर है (ख) उनका देश किसी दूसरे देश के अधीन हो।

व्याख्या:

स्वतंत्रता और स्वाभिमान के बिना भले ही साधन हों, व्यक्ति गौरव का अनुभव नहीं कर सकता। पराधीनता में व्यक्ति का गौरव कम हो जाता है।

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Q5.“पर उन दो घटनाओं में वह गाँठ इतनी साफ है”, इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘गाँठ’ किन दो बातों को साथ बाँधती है? (क) देश और नागरिक (ख) देश और संविधान (ग) देश और विदेश (घ) व्यवसाय और आजीविका
A.क) देश और नागरिक
B.ख) देश और संविधान
C.ग) देश और विदेश
D.घ) व्यवसाय और आजीविका

उत्तर:

यहाँ ‘गाँठ’ शब्द देश और नागरिक के बीच के संबंध को दर्शाता है। अतः सही उत्तर है (क) देश और नागरिक।

व्याख्या:

‘गाँठ’ का अर्थ होता है बंधन या संबंध, जो देश और उसके नागरिकों के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है।

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Q6.प्रस्तुत निबंध में मुख्यतः कौन-सा भाव व्यक्त हुआ है? (क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था (ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध (घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा
A.क) लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था
B.ख) पारिवारिक संबंधों का महत्व
C.ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध
D.घ) देश का महत्व और व्यक्ति की उपेक्षा

उत्तर:

निबंध में मुख्य भाव व्यक्ति और देश के अंतर्संबंध का है। अतः सही उत्तर है (ग) व्यक्ति और देश का अंतर्संबंध।

व्याख्या:

निबंध में यह बताया गया है कि व्यक्ति और देश एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं और एक के बिना दूसरा अधूरा है।

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Q7.स्वामी रामतीर्थ फल देने वाले युवक का उत्तर सुनकर मुग्ध क्यों हो गए?

उत्तर:

स्वामी रामतीर्थ उस युवक के उत्तर से इसलिए मुग्ध हो गए क्योंकि युवक ने फल के मूल्य के रूप में स्वाभिमान, देशभक्ति और अपने कर्तव्य के प्रति समर्पण की भावना व्यक्त की। यह उत्तर सामान्य आर्थिक मूल्य से ऊपर था और उसमें गहरी सोच और देश के प्रति प्रेम झलकता था।

व्याख्या:

युवक ने फल के बदले में केवल पैसे नहीं मांगे, बल्कि अपने देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी जताई, जो स्वामी रामतीर्थ को प्रभावित करता है।

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Q8.जापान के युवक ने स्वामी रामतीर्थ को दिए गए फलों के मूल्य के रूप में क्या माँगा? आपके मन में उस युवक के व्यक्तित्व की कौन-सी छवि उभरती है, यह भी लिखिए।

उत्तर:

जापान के युवक ने फलों के मूल्य के रूप में स्वाभिमान, कर्तव्यपरायणता और देश के प्रति समर्पण मांगा। इससे उसकी छवि एक जिम्मेदार, देशभक्त और विचारशील युवक की बनती है जो केवल व्यक्तिगत लाभ नहीं सोचता बल्कि समाज और देश के हित को प्राथमिकता देता है।

व्याख्या:

युवक का उत्तर दर्शाता है कि वह केवल भौतिक वस्तुओं के लिए नहीं, बल्कि उच्च आदर्शों और नैतिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्ध है।

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