NCERTCh 7निःशुल्क

Chapter 7

🎓 Class 12📖 Bhaswati📖 8 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~12 मिनट
Chapter 6अध्याय 7 / 10Chapter 8

Chapter 7अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 8 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

हल्दीघाटी

व्याख्या

हल्दीघाटी

इस अध्याय 'हल्दीघाटी' में भारतभूमि की स्वतंत्रता की भावना और महाराणा प्रताप के अदम्य साहस का वर्णन किया गया है। भारत शताब्दियों तक विदेशी आक्रांताओं के अधीन रहा, परन्तु भारतीयों की स्वतंत्रता प्राप्ति की इच्छा सदैव प्रबल रही। महाराणा प्रताप ने मुगल शासकों के विरुद्ध आजीवन संघर्ष किया और अत्यंत सीमित संसाधनों के बावजूद विशाल मुगल साम्राज्य से मुकाबला किया। राजस्थान के हल्दीघाटी नामक स्थान पर हुई लड़ाई में मुट्ठी भर महाराणा प्रताप के सैनिकों ने विशाल मुगल सेना को परास्त किया। इस ऐतिहासिक घटना को लेकर अनेक साहित्यकारों ने रचनाएँ की हैं, जिनमें से 'प्रतापविजय' नामक खण्डकाव्य में लेखक श्री ईशदत्तशास्त्री ने इस युद्ध के प्रत्येक पहलू को सुंदर श्लोकों में प्रस्तुत किया है। यह पाठ युवाओं को स्वाभिमान और देशभक्ति की प्रेरणा देता है। इस खंड में हल्दीघाटी की लड़ाई के ऐतिहासिक महत्व, महाराणा प्रताप के साहस, और युद्ध के दृश्यों का वर्णन है। पाठ में कवि ने प्राकृतिक सौंदर्य, युद्ध की विभीषिका, और वीरता की महत्ता को काव्यात्मक भाषा में प्रस्तुत किया है।

  • भारतभूमि पर विदेशी आक्रांताओं के विरुद्ध स्वतंत्रता की भावना सदैव प्रबल रही।
  • महाराणा प्रताप ने मुगल शासकों के साथ आजीवन संघर्ष किया।
  • हल्दीघाटी की लड़ाई में महाराणा प्रताप के सैनिकों ने विशाल मुगल सेना को परास्त किया।
  • लेखक श्री ईशदत्तशास्त्री ने इस ऐतिहासिक युद्ध को काव्यात्मक श्लोकों में प्रस्तुत किया।
  • यह पाठ युवाओं में स्वाभिमान और देशभक्ति की भावना जगाता है।
  • 📌 महाराणा प्रताप: राजस्थान के वीर राजा जिन्होंने मुगल आक्रमणकारियों के विरुद्ध संघर्ष किया।
  • 📌 हल्दीघाटी: राजस्थान में एक ऐतिहासिक युद्ध स्थल जहाँ महाराणा प्रताप और मुगल सेना के बीच युद्ध हुआ।
  • 📌 प्रतापविजय: श्री ईशदत्तशास्त्री द्वारा रचित खण्डकाव्य जो हल्दीघाटी युद्ध का वर्णन करता है।

भास्वती

व्याख्या

भास्वती

इस खंड में श्लोकों के माध्यम से हल्दीघाटी की महत्ता और युद्ध के दृश्यों का काव्यात्मक चित्रण प्रस्तुत किया गया है। पहला श्लोक भारतभूमि की स्वतंत्रता और वीरता की भावना को उजागर करता है। 'स्वाधीनता आर्यभुवि मूर्तिमती समाना' का अर्थ है कि स्वतंत्रता से परिपूर्ण भारतभूमि सभी के लिए समान रूप से सजीव है। महाराणा प्रताप की वीरता और बलशाली व्यक्तित्व को 'राणा प्रताप-बलवीर्य विभासमाना' के रूप में दर्शाया गया है। दूसरे श्लोक में प्राची अर्थात पूर्व दिशा की सुंदरता और प्रकृति की कोमलता का वर्णन है, जहाँ मंद मंद हवा चलती है और नंदन वन में पुष्पों की शोभा होती है। तीसरे श्लोक में स्वतंत्रता की महत्ता पर बल दिया गया है, जहाँ कहा गया है कि आज भी मातृभूमि स्वतंत्र है और उसकी शाखाएँ जैसे कदम्ब वृक्ष की पत्तियाँ मर्मर करती हैं। चौथे श्लोक में वीरों के युद्ध कौशल और उनके साहस की प्रशंसा की गई है। पाँचवें श्लोक में प्रकृति की सरलता और मातृभूमि की पूजा का वर्णन है, जहाँ पुष्प, फल, गंध, और गीतों के माध्यम से मातृभूमि की आराधना की जाती है। इस खंड में कवि ने युद्ध के साथ-साथ प्रकृति की सुंदरता और मातृभूमि के प्रति श्रद्धा को भी समाहित किया है।

  • भारतभूमि की स्वतंत्रता और वीरता की भावना का काव्यात्मक चित्रण।
  • महाराणा प्रताप की वीरता और बलशाली व्यक्तित्व का वर्णन।
  • प्रकृति की कोमलता और नंदन वन की सुंदरता का वर्णन।
  • स्वतंत्रता की महत्ता और मातृभूमि की पूजा का उल्लेख।
  • वीरों के युद्ध कौशल और साहस की प्रशंसा।
  • 📌 स्वाधीनता: स्वतंत्रता, पराधीनता से मुक्ति।
  • 📌 आर्यभुवि: आर्यों की भूमि, भारत।
  • 📌 मूर्तिमती: सजीव, साकार।

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च

परिभाषा

शब्दार्थाः टिप्पण्यश्च

इस खंड में पाठ में प्रयुक्त कठिन संस्कृत शब्दों के अर्थ और उनकी व्युत्पत्ति विस्तार से दी गई है। उदाहरण स्वरूप 'आर्यभुवि' का अर्थ है आर्यों की भूमि, 'मूर्तिमती' का अर्थ है सजीव या साकार, 'बलवीर्य-विभासमाना' का अर्थ है शक्ति और वीरता से चमकती हुई। 'आट

अभ्यास प्रश्नChapter 7

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. एकपदेन उत्तरं ददत - (क) आर्यभुवि शाटीत: का विराजते? (ख) उषसि हल्दीचाटी कीदृशीं शोभां दधाति? (ग) सनय: तनय: क: अस्ति? (घ) के नीलेन पक्षेण खम् आहसन्ति? (ङ) वरभुव: सुषमा कथं सम्भासते? (च) तम:सहचरी का कथिता? (छ) प्रतापनृपते: अस्त्रधारा कतिधा अभवत्?

उत्तर:

1. एकपदेन उत्तरं ददत - (क) आर्यभुवि शाटीत: का विराजते? — शाटीत: आर्यभुवि वीरता और पराक्रम से विराजते हैं। (ख) उषसि हल्दीचाटी कीदृशीं शोभां दधाति? — उषसि हल्दीघाटी को स्वर्णिम और गौरवशाली शोभा प्रदान करती है। (ग) सनय: तनय: क: अस्ति? — सनय: तनय: महाराणा प्रताप के पुत्र हैं। (घ) के नीलेन पक्षेण खम् आहसन्ति? — नीलेन पक्षेण खम् आहसन्ति वे वीर योद्धा हैं जो युद्धभूमि में शौर्य दिखाते हैं। (ङ) वरभुव: सुषमा कथं सम्भासते? — वरभुव: सुषमा अत्यंत सुंदर और आकर्षक रूप से सम्भासते हैं। (च) तम:सहचरी का कथिता? — तम:सहचरी अन्धकार की संगिनी है, जो अज्ञान और अंधविश्वास का प्रतीक है। (छ) प्रतापनृपते: अस्त्रधारा कतिधा अभवत्? — प्रतापनृपते: की अस्त्रधारा प्रबल और तीव्र थी, जो युद्ध में उनकी शक्ति और साहस को दर्शाती है।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के अनुसार संक्षिप्त और स्पष्ट रूप में दिया गया है, जो पाठ के भाव और अर्थ के अनुरूप है।

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Q2.2. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (क) मूर्तिमती हल्दीघाटी कथम् आटीकते? (ख) कदा हल्दीघाटी मतिमाननीयां शोभां दधाति? (ग) पिकालिगीति: किमिव मातु: पूजनं करोति? (घ) कथं क्वणन्त: सुशुका: विलसन्ति? (ङ) हल्दीघाटी केषां स्थली अस्ति? (च) वरभुव: अत्युदारा सुषमा कीदृशी भासते? (छ) प्रकृति: केषां पञ्चपदार्थानामुपचारेण पूजनं करोति?

उत्तर:

2. पूर्णवाक्येन उत्तरत- (क) मूर्तिमती हल्दीघाटी वीरता और पराक्रम से पूर्ण है। (ख) हल्दीघाटी तब मतिमाननीयां शोभां दधाति जब सूर्य की किरणें वहां पड़ती हैं। (ग) पिकालिगीति: मातु: पूजनं श्रद्धा और सम्मान के साथ करती है। (घ) क्वणन्त: सुशुका: उल्लास और आनंद से विलसन्ति। (ङ) हल्दीघाटी राजस्थान के मेवाड़ क्षेत्र की स्थली है। (च) वरभुव: अत्युदारा सुषमा अत्यंत सुंदर और उदार रूप में भासते हैं। (छ) प्रकृति: वीरों के पञ्चपदार्थों के उपचारेण पूजनं करती है, जैसे शस्त्र, वस्त्र, आहार, वाहन और निवास।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पूर्ण वाक्य में दिया गया है, जो पाठ की समझ को दर्शाता है।

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Q3.3. अधोलिखितवाक्येषु रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुरुत- (क) मूर्तिमती हल्दीघाटी जयति। (ख) या उषसि शोभां दधाति। (ग) तरुणां तति: कदम्बकृतमर्मरम् आतनोति। (घ) निर्जनवने कुररी मातेव रोदिति। (ङ) मातु: पञ्चोपचारं पूजनं करोति। (च) अस्त्रधारा शतधा अभवत्। (छ) असुत: अपि प्रियतमा स्थली।

उत्तर:

3. प्रश्ननिर्माण- (क) मूर्तिमती हल्दीघाटी किम् जयति? (ख) या कः शोभां दधाति? (ग) तरुणां तति: कस्य कृतमर्मरम् आतनोति? (घ) निर्जनवने कः कुररी मातेव रोदिति? (ङ) मातु: किम् पूजनं करोति? (च) अस्त्रधारा कथं अभवत्? (छ) असुत: कः अपि प्रियतमा स्थली?

व्याख्या:

प्रत्येक वाक्य में रेखांकित पदों को प्रश्न के रूप में परिवर्तित किया गया है, जिससे प्रश्न निर्माण की प्रक्रिया स्पष्ट होती है।

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Q4.4. अधोलिखितपदेषु सन्धिं सन्धिच्छेदं वा कुरुत- (क) स्वाधीनतार्यभुवि (ख) दधाति + उषसि (ग) ततिस्तरुणाम् (घ) निजर्नवने + अथ (ङ) सुशुका विलसन्ति (च) तदनु

उत्तर:

4. सन्धि विच्छेद- (क) स्वाधीनता + आर्यभुवि (ख) दधाति + उषसि (ग) तति + तरुणाम् (घ) निर्जनवने + अथ (ङ) सुशुका + विलसन्ति (च) तत् + अनु

व्याख्या:

प्रत्येक पद में सन्धि को पहचान कर उसे दो भागों में विभाजित किया गया है।

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Q5.5. अधोलिखितपदेषु प्रकृतिं प्रत्ययं च पृथक् कुरुत- (क) तति: (ख) भासमाना (ग) विहिता (घ) प्रतापी (ङ) हसन्त: (च) शिखी (छ) प्रणीतम्

उत्तर:

5. प्रकृति और प्रत्यय पृथक्करण- (क) तति: — त + ति: (प्रकृति: त, प्रत्यय: ति:) (ख) भासमाना — भास + माना (ग) विहिता — वि + हिता (घ) प्रतापी — प्र + तापी (ङ) हसन्त: — हस + अन्त: (च) शिखी — शि + खी (छ) प्रणीतम् — प्र + नीतम्

व्याख्या:

प्रत्येक शब्द को उसके मूल रूप (प्रकृति) और प्रत्यय में विभाजित किया गया है।

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Q6.6. अध: प्रदत्तं श्लोकं मञ्जूषाप्रदत्तपदै: रिक्तस्थानानि पूरथित्वा पुन: लिखत- प्रत्यहम्, मन्दमन्दं, मरन्दं, वहति, शोभां, काञ्चन। प्राची यदा हसति हे प्रिय ... वायुर्यदा ... नन्दनजं...। या ... किल तदा मतिमाननीयां ...दधात्युषसि ...काञ्चनीयाम्।।

उत्तर:

6. पूर्ण श्लोक पूर्ति- प्राची यदा हसति हे प्रिय मन्दमन्दं, वायुर्यदा वहति नन्दनजं मरन्दं। या किल तदा मतिमाननीयां दधात्युषसि शोभां काञ्चनीयाम्।।

व्याख्या:

रिक्त स्थानों में दिए गए शब्दों को श्लोक के अनुसार सही स्थान पर भरकर श्लोक को पूर्ण किया गया है।

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Q7.7. विशेषणानि विशेष्याणि च योजयित्वा पुन: लिखत- (क) सुशोचि: तनय: (ख) पारतन्त्र्या: सुशुका: (ग) प्रतापी शाटी (घ) क्वणन्त: अस्मधारा (ङ) शतधा कातरा: (च) नीलेन खद्योत्पक्ति: (छ) अमला पक्षनिवहेन

उत्तर:

7. विशेषण और विशेष्य योजित रूप- (क) सुशोचि: तनय: — सुशोचि: तनय: (दुखी पुत्र) (ख) पारतन्त्र्या: सुशुका: — पारतन्त्र्या: सुशुका: (स्वतंत्रता की पक्षी) (ग) प्रतापी शाटी — प्रतापी शाटी (शक्ति से भरी शाटी) (घ) क्वणन्त: अस्मधारा — क्वणन्त: अस्मधारा (गाते हुए झरने) (ङ) शतधा कातरा: — शतधा कातरा: (सैकड़ों तलवारें) (च) नीलेन खद्योत्पक्ति: — नीलेन खद्योत्पक्ति: (नीले रंग की खद्योत्पत्ति) (छ) अमला पक्षनिवहेन — अमला पक्षनिवहेन (शुद्ध पक्षनिवाह)

व्याख्या:

विशेषण और विशेष्य को सही रूप में जोड़कर वाक्यांश बनाए गए हैं।

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Q8.8. अधोलिखितानां पदानां व्याकरणानुसारं पदपरिचय: दीयताम्- स्वाधीनता, माननीयाम्, सन्त:, तम:, सम्भासते, स्थली, माता

उत्तर:

8. पदपरिचय- (क) स्वाधीनता — स्त्रीलिंग, एकवचन, प्रथमा विभक्ति, संज्ञा (ख) माननीयाम् — स्त्रीलिंग, एकवचन, द्वितीया विभक्ति, विशेषण (ग) सन्त: — पुल्लिंग, बहुवचन, प्रथमा विभक्ति, क्रियाविशेषण (घ) तम: — पुल्लिंग, एकवचन, द्वितीया विभक्ति, सर्वनाम (ङ) सम्भासते — क्रिया, वर्तमान काल, मध्यम पुरुष, एकवचन (च) स्थली — स्त्रीलिंग, एकवचन, प्रथमा विभक्ति, संज्ञा (छ) माता — स्त्रीलिंग, एकवचन, प्रथमा विभक्ति, संज्ञा

व्याख्या:

प्रत्येक पद का व्याकरणानुसार लिंग, वचन, विभक्ति, पदवर्ग आदि परिचय दिया गया है।

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