Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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ध्वनि
परिभाषाध्वनि
ध्वनि संगीत की मूलभूत इकाई है। यह एक प्रकार का कंपन या आंदोलन है जो किसी ठोस, द्रव या वायु रूपी माध्यम से होकर संचरित होता है। जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो वह अपने आस-पास के वायु कणों को भी कंपनित करती है, जिससे ध्वनि उत्पन्न होती है। ध्वनि के अनेक प्रकार होते हैं, जैसे तेज़ मेघ गर्जन की आवाज़, नर्म घास पर पदचाप की ध्वनि, पक्षियों के कलरव, पशुओं की आवाज़, नदी की कलकल, पत्तियों की सरसराहट, वर्षा की बूँदों की रिमझिम आदि। ध्वनि के संचरण के लिए माध्यम आवश्यक होता है। मनुष्य के कान लगभग 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज तक की आवृत्ति की ध्वनि सुन सकते हैं। ध्वनि के दो मुख्य प्रकार होते हैं— मधुर और कटु (कोलाहल)। मधुर ध्वनि संगीत में प्रयुक्त होती है। ध्वनि उत्पन्न करने वाले उपकरणों में तंत्री वाद्य, तबला, बाँसुरी, झाँझ और मानव कंठ शामिल हैं।
- ध्वनि कंपन या आंदोलन है जो माध्यम से होकर संचरित होती है।
- मनुष्य 20 हर्ट्ज से 20,000 हर्ट्ज तक की ध्वनि सुन सकता है।
- ध्वनि के दो प्रकार होते हैं: मधुर और कटु।
- ध्वनि उत्पन्न करने के लिए कंपन आवश्यक है।
- ध्वनि के उदाहरण: मेघ गर्जन, पक्षियों का कलरव, वर्षा की बूँदें।
- 📌 ध्वनि: कंपन या आंदोलन जो सुनाई देता है।
- 📌 माध्यम: वह पदार्थ जिससे ध्वनि संचरित होती है।
- 📌 आवृत्ति: ध्वनि की कंपन की संख्या प्रति सेकंड।
नाद
अवधारणानाद
नाद संगीत का आधार है। नाद वह नियमित और स्थिर ध्वनि है जिसमें कंपन की संख्या निश्चित होती है। नाद दो प्रकार के होते हैं— आहत नाद और अनाहत नाद। आहत नाद वह ध्वनि है जो आघात या घर्षण के कारण उत्पन्न होती है और संगीत में इसका प्रयोग होता है। अनाहत नाद वह ध्वनि है जो बिना किसी आघात के उत्पन्न होती है, जिसे सुना नहीं जा सकता, केवल अनुभव किया जा सकता है। यह प्रकृति में पहले से विद्यमान है। नाद की तीन मुख्य विशेषताएँ होती हैं— तारता (नीचा-ऊँचापन), तीव्रता (छोटा-बड़ापन), और जाति (गुण)। तारता से तात्पर्य ध्वनि की ऊँचाई से है, जैसे 'सा' से 'नि' तक स्वर ऊँचे होते जाते हैं। तीव्रता से तात्पर्य ध्वनि की जोर या धीमी होने से है। जाति से तात्पर्य ध्वनि के स्वरूप से है जिससे हम किसी वाद्य या व्यक्ति की आवाज़ पहचान सकते हैं।
- नाद संगीत की मूलभूत ध्वनि है।
- आहत नाद: आघात से उत्पन्न ध्वनि।
- अनाहत नाद: बिना आघात के उत्पन्न ध्वनि, जिसे सुना नहीं जा सकता।
- नाद की तीन विशेषताएँ: तारता, तीव्रता, जाति।
- नाद से श्रुति, स्वर और राग की उत्पत्ति होती है।
- 📌 नाद: नियमित और स्थिर ध्वनि।
- 📌 आहत नाद: आघात से उत्पन्न ध्वनि।
- 📌 अनाहत नाद: बिना आघात के उत्पन्न ध्वनि।
श्रुति
परिभाषाश्रुति
श्रुति वह संगीत में प्रयुक्त ध्वनि है जिसे कान स्पष्ट रूप से सुन सकते हैं और जो एक-दूसरे से भिन्न तथा स्पष्ट होती है। श्रुति का अर्थ है 'जिसे सुना जा सके'। संगीत में श्रुति की महत्ता इसलिए है क्योंकि यह स्वर और राग की नींव होती है। श्रुति के बिना संग
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. िाद वकसे कहते ह?ैं
उत्तर:
िाद वह ध्वनि है जो संगीत का आधार होती है। यह एक स्थिर और स्पष्ट स्वर होता है जो संगीत रचना में प्रयोग किया जाता है।
व्याख्या:
संगीत में िाद का अर्थ है वह ध्वनि जो स्थिर और स्पष्ट होती है और जिसके आधार पर संगीत की रचना की जाती है।
Q2.2. श्वुत को पाररिावरत कीविए।
उत्तर:
श्वुत वह ध्वनि है जो संगीत में िाद के विरुद्ध होती है। यह एक खाली या मौन ध्वनि होती है जो ताल के समय को दर्शाती है।
व्याख्या:
श्वुत का अर्थ है वह ध्वनि जो ताल में िाद के विरुद्ध होती है और जो ताल के समय को दर्शाती है।
Q3.3. लय को पाररिावरत कीविए तथा लय के प्रकार बताइए।
उत्तर:
लय वह संगीत की वह व्यवस्था है जिसमें ध्वनि और मौन का निश्चित समयानुसार आवर्तन होता है। लय के मुख्य प्रकार हैं: (1) स्थिर लय, (2) द्रुत लय, (3) मंद लय।
व्याख्या:
लय संगीत में समय के अनुसार ध्वनि और मौन का आवर्तन होता है। इसके प्रकार गति के अनुसार होते हैं जैसे स्थिर, द्रुत और मंद।
Q4.4. िातखडं े ताल-वलवप के अिसु ार सम को पाररिावरत करते हुए उसका वच� बताइए।
उत्तर:
ताल-वलवप के अनुसार सम वह स्थिति है जहाँ ताल की पहली और अंतिम मात्रा मिलती है। इसे ताल का सम कहा जाता है।
व्याख्या:
ताल में सम वह बिंदु होता है जहाँ ताल की पहली मात्रा और अंतिम मात्रा मिलती है, जो ताल की शुरुआत और अंत को दर्शाता है।
Q5.5. रेला वकसे कहते ह?ैं
उत्तर:
रेला ताल की वह विशेषता है जिसमें ताल के अंत में एक विशेष प्रकार का त्वरित और जोरदार बोल होता है।
व्याख्या:
रेला ताल में ताल के अंत में एक त्वरित और जोरदार बोल होता है जो ताल को समाप्त करता है।
Q6.6. कायदा को पाररिावरत कीविए।
उत्तर:
कायदा तबला वादन की वह विधि है जिसमें एक निश्चित ताल और लय में विभिन्न प्रकार के बोलों का संयोजन किया जाता है। यह अभ्यास के लिए होता है।
व्याख्या:
कायदा तबला वादन का अभ्यास है जिसमें ताल और लय के अनुसार बोलों का संयोजन किया जाता है।
Q7.7. वतहाई को उदाहरण सवहत समिाइए।
उत्तर:
वतहाई तबला वादन की वह शैली है जिसमें दो टुकड़ों का संयोजन होता है। उदाहरण के लिए- धाधाधा दींदींदीं िािािा वतटिवतटिवतटि कतेटिेकतेटिे।
व्याख्या:
वतहाई में दो टुकड़ों का संयोजन होता है जो ताल के अंत में जोरदार प्रभाव डालता है।
Q8.8. ताल म ेंताली ि खाली के महत्ि को समिाइए।
उत्तर:
ताल में ताली और खाली ताल की लय और समय को दर्शाते हैं। ताली पर हाथ थपथपाया जाता है और खाली पर हाथ नहीं लगाया जाता। यह ताल की संरचना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
व्याख्या:
ताल की लय को समझने के लिए ताली और खाली का प्रयोग होता है, जो ताल के विभिन्न भागों को दर्शाते हैं।
Tabla evam Pakhawaj के सभी 8 अध्याय
Sangeet · Class 11