Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
NCERT-संरेखित · 6 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए
6.1 भूमिका
अवधारणा6.1 भूमिका
इस खंड में हम त्रिभुजों के समरूपता की अवधारणा से परिचित होते हैं। कक्षा IX में आपने त्रिभुजों की सर्वांगसमता (congruence) के बारे में पढ़ा था, जहाँ दो त्रिभुज तब सर्वांगसम होते हैं जब उनके आकार और आमाप दोनों समान हों। परंतु इस अध्याय में हम उन आकृतियों का अध्ययन करेंगे जिनका आकार समान होता है, लेकिन आमाप समान होना आवश्यक नहीं होता। ऐसी आकृतियों को समरूप आकृतियाँ (similar figures) कहा जाता है। विशेष रूप से, हम समरूप त्रिभुजों की चर्चा करेंगे और इस जानकारी का उपयोग पाइथागोरस प्रमेय की एक सरल उपपत्ति के लिए करेंगे। समरूपता का सिद्धांत ज्यामिति में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आकृतियों के आकार संबंधी गुणों को समझने में मदद करता है।
- त्रिभुज ज्यामिति का महत्वपूर्ण आधारभूत आकृति है।
- कक्षा IX में त्रिभुजों की सर्वांगसमता का अध्ययन किया गया।
- इस अध्याय में समरूप आकृतियों का अध्ययन होगा जिनका आकार समान होता है।
- समरूप आकृतियों में आकार समान होता है, पर आमाप समान होना आवश्यक नहीं।
- समरूप त्रिभुजों की विशेषताएँ और उनके अनुप्रयोगों पर चर्चा होगी।
- 📌 त्रिभुज: तीन भुजाओं और तीन कोणों से बना बहुभुज।
- 📌 सर्वांगसमता: दो त्रिभुजों का समान आकार और समान आमाप होना।
- 📌 समरूप आकृतियाँ: आकृतियाँ जिनका आकार समान हो, पर आमाप समान होना आवश्यक न हो।
6.2 समरूप आकृतियाँ
अवधारणा6.2 समरूप आकृतियाँ
इस खंड में समरूप आकृतियों की परिभाषा और उनके गुणों का विस्तृत अध्ययन किया गया है। समरूप आकृतियाँ वे होती हैं जिनका आकार समान होता है, परंतु उनका आमाप समान नहीं होता। उदाहरण के लिए, विभिन्न त्रिज्या वाले वृत्त सर्वांगसम नहीं होते, परंतु सभी वृत्त समरूप होते हैं क्योंकि उनका आकार समान होता है। इसी प्रकार, विभिन्न भुजाओं वाले वर्ग और समबाहु त्रिभुज भी समरूप होते हैं। समरूपता के लिए दो बहुभुजों के संगत कोण बराबर होने चाहिए और संगत भुजाएँ समानुपाती (एक ही अनुपात में) होनी चाहिए। इस खंड में एक क्रियाकलाप के माध्यम से समरूपता को समझाया गया है, जिसमें एक बहुभुज की छाया का अध्ययन किया गया है। समरूपता का सिद्धांत वास्तुकला, मानचित्रण, और मापन में व्यापक रूप से उपयोग होता है।
- सभी वृत्त समरूप होते हैं, भले ही उनकी त्रिज्या भिन्न हो।
- सभी वर्ग और समबाहु त्रिभुज भी समरूप होते हैं।
- दो बहुभुज समरूप होते हैं यदि उनके संगत कोण बराबर हों।
- संगत भुजाएँ समानुपाती (एक ही अनुपात में) होनी चाहिए।
- समरूपता का स्केल गुणक (scale factor) संगत भुजाओं के अनुपात को दर्शाता है।
- समरूपता का उपयोग अप्रत्यक्ष मापन और आकृतियों के आकार निर्धारण में होता है।
- 📌 समरूप आकृतियाँ: आकार समान पर आमाप भिन्न आकृतियाँ।
- 📌 स्केल गुणक: संगत भुजाओं के अनुपात को दर्शाने वाला गुणक।
- 📌 समानुपाती भुजाएँ: भुजाएँ जो एक ही अनुपात में हों।
6.3 त्रिभुजों की समरूपता
अवधारणा6.3 त्रिभुजों की समरूपता
त्रिभुजों की समरूपता का अध्ययन इस खंड में विस्तार से किया गया है। दो त्रिभुज समरूप होते हैं यदि उनके संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ समानुपाती हों। समानकोणिक त्रिभुजों में संगत भुजाओं का अनुपात समान रहता है, जिसे थेल्स प्रमेय के नाम से जाना जाता है
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.एक त्रिभुज की भुजाओं की लंबाई 16,23,31 है। यदि समरूप त्रिभुज का परिमाप (perimeter) 280 है, तो उस त्रिभुज की सबसे बड़ी भुजा की लंबाई ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
124
व्याख्या:
[{"id": "a075b6c3-d591-48fb-84f7-929a77f5d06c", "type": "html", "value": " यदि ∆ ABC और ∆ DEF दो समरूप (similar) त्रिभुज हैं। ∆ ABC में, परिमाप = 16 + 23 + 31 = 70 सबसे बड़ी भुजा = 31 ∆ DEF में, परिमाप = 280 मान लीजिए, सबसे बड़ी भुजा x है। तो, यदि, ∆ ABC ~ ∆ DEF, तो, ∆ABC का परिमाप / ∆DEF का परिमाप = 31 / x 70/280 = 31 / x x = 31 x 280/70 = 124 तो सही विकल्प, विकल्प 3 है। "}]
Q2.1. कोष्ठकों में दिए शब्दों में से सही शब्दों का प्रयोग करते हुए, रिक्त स्थानों को भरिए: (i) सभी वृत्त ——— होते हैं। (सर्वांगसम, समरूप) (ii) सभी वर्ग ——— होते हैं। (समरूप, सर्वांगसम) (iii) सभी ——— त्रिभुज समरूप होते हैं। (समद्विबाहु, समबाहु) (iv) भुजाओं की समान संख्या वाले दो बहुभुज समरूप होते हैं, यदि (i) उनके संगत कोण ——— हों तथा (ii) उनकी संगत भुजाएँ———हों। (बराबर, समानुपाती)
उत्तर:
उत्तर: (i) सभी वृत्त सर्वांगसम होते हैं। (ii) सभी वर्ग समरूप होते हैं। (iii) सभी समबाहु त्रिभुज समरूप होते हैं। (iv) भुजाओं की समान संख्या वाले दो बहुभुज समरूप होते हैं, यदि (i) उनके संगत कोण बराबर हों तथा (ii) उनकी संगत भुजाएँ समानुपाती हों।
व्याख्या:
सभी वृत्तों के केंद्र से त्रिज्या समान होती है, इसलिए वे सर्वांगसम होते हैं। सभी वर्ग के सभी कोण 90° होते हैं और उनके भुजाएँ समानुपाती होती हैं, इसलिए वे समरूप होते हैं। सभी समबाहु त्रिभुज के तीनों कोण बराबर होते हैं, अतः वे समरूप होते हैं। बहुभुजों की समरूपता के लिए संगत कोण बराबर और संगत भुजाएँ समानुपाती होना आवश्यक है।
Q3.2. निम्नलिखित युग्मों के दो भिन्न-भिन्न उदाहरण दीजिए: (i) समरूप आकृतियाँ (ii) ऐसी आकृतियाँ जो समरूप नहीं हैं।
उत्तर:
उत्तर: (i) समरूप आकृतियाँ: - दो त्रिभुज जिनके सभी संगत कोण बराबर हों और भुजाएँ समानुपाती हों। - दो वर्ग जिनका आकार और कोण समान हो। (ii) ऐसी आकृतियाँ जो समरूप नहीं हैं: - एक वर्ग और एक आयत, क्योंकि उनके भुजाओं के अनुपात समान नहीं होते। - दो त्रिभुज जिनके कोण समान न हों।
व्याख्या:
समरूप आकृतियाँ वे होती हैं जिनके आकार समान होते हैं, अर्थात् उनके संगत कोण बराबर और भुजाएँ समानुपाती होती हैं। जो आकृतियाँ इन शर्तों को पूरा नहीं करतीं, वे समरूप नहीं होतीं।
Q4.3. बताइए कि निम्नलिखित चतुर्भुज समरूप हैं या नहीं:   आकृति 6.8
उत्तर:
उत्तर: इस प्रश्न में दिए गए दो चतुर्भुजों की समरूपता जांचने के लिए हमें उनके संगत कोणों और भुजाओं के अनुपात की तुलना करनी होगी। यदि संगत कोण बराबर हों और संगत भुजाएँ समानुपाती हों, तो चतुर्भुज समरूप होंगे। (यहाँ चित्रों के आधार पर विश्लेषण करना होगा, जो प्रश्न में दिए गए हैं।) यदि ये शर्तें पूरी होती हैं, तो हाँ, वे समरूप हैं; अन्यथा नहीं।
व्याख्या:
चतुर्भुजों की समरूपता के लिए संगत कोणों का बराबर होना और संगत भुजाओं का समानुपाती होना आवश्यक है। चित्रों के आधार पर यह जांचना होगा।
Q5.यदि कोई रेखा एक Δ ABC की भुजाओं AB और AC को क्रमशः D और E पर प्रतिच्छेद करे तथा भुजा BC के समांतर हो, तो सिद्ध कीजिए कि \( \frac{AD}{AB} = \frac{AE}{AC} \) होगा (देखिए आकृति 6.13)।
उत्तर:
दी गई है कि DE || BC। प्रमेय 6.1 के अनुसार, \( \frac{AD}{DB} = \frac{AE}{EC} \)। इसे उलट कर लिखें: \( \frac{DB}{AD} = \frac{EC}{AE} \)। दोनों पक्षों में 1 जोड़ें: \( \frac{DB}{AD} + 1 = \frac{EC}{AE} + 1 \) अर्थात् \( \frac{AB}{AD} = \frac{AC}{AE} \)। अतः \( \frac{AD}{AB} = \frac{AE}{AC} \)।
व्याख्या:
चूंकि DE || BC, इसलिए त्रिभुजों में भुजाओं के अनुपात समान होते हैं। अनुपातों को उलट कर जोड़ने पर कुल भुजाओं के अनुपात प्राप्त होते हैं।
Q6.ABCD एक समलंब है जिसमें AB || DC है। असमांतर भुजाओं AD और BC पर क्रमशः बिंदु E और F इस प्रकार स्थित हैं कि EF भुजा AB के समांतर है (देखिए आकृति 6.14)। दर्शाइए कि \( \frac{AE}{ED} = \frac{BF}{FC} \) है।
उत्तर:
AB || DC और EF || AB होने के कारण EF || DC भी होगा। त्रिभुज ADC में, EG || DC होने से \( \frac{AE}{ED} = \frac{AG}{GC} \) (प्रमेय 6.1)। त्रिभुज CAB में, \( \frac{CG}{AG} = \frac{CF}{BF} \) अर्थात् \( \frac{AG}{GC} = \frac{BF}{FC} \)। अतः \( \frac{AE}{ED} = \frac{BF}{FC} \)।
व्याख्या:
समांतर रेखाओं के कारण त्रिभुजों में भुजाओं के अनुपात समान होते हैं। दोनों अनुपातों को जोड़कर समानता सिद्ध की गई।
Q7.आकृति 6.16 में \( \frac{PS}{SQ} = \frac{PT}{TR} \) है तथा \( \angle PST = \angle PRQ \) है। सिद्ध कीजिए कि \( \triangle PQR \) एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
उत्तर:
दी गई है कि \( \frac{PS}{SQ} = \frac{PT}{TR} \)। प्रमेय 6.2 के अनुसार, ST || QR होगा। अतः \( \angle PST = \angle PQR \) (संगत कोण)। साथ ही दिया है कि \( \angle PST = \angle PRQ \)। अतः \( \angle PRQ = \angle PQR \)। समान कोणों की सम्मुख भुजाएँ समान होती हैं, अतः \( PQ = PR \)। इसलिए \( \triangle PQR \) समद्विबाहु है।
व्याख्या:
समांतर रेखाओं के कारण कोण समानता स्थापित की गई और समान कोणों की सम्मुख भुजाएँ समान होती हैं, जिससे त्रिभुज समद्विबाहु सिद्ध होता है।
Q8.1. आकृति 6.17 (i) और (ii) में, DE || BC है। (i) में EC और (ii) में AD ज्ञात कीजिए:
उत्तर:
समाधान: (i) आकृति 6.17 (i) में DE || BC है। त्रिभुज में यदि एक रेखा दूसरी भुजा के समानांतर है, तो वह त्रिभुज के भुजाओं के अनुपातों को समान रखती है। अतः, \( \frac{AD}{AB} = \frac{AE}{AC} = \frac{DE}{BC} \) यहाँ DE || BC है, अतः \( \frac{AE}{AC} = \frac{AD}{AB} \) दी गई आकृति और माप के आधार पर EC ज्ञात किया जा सकता है। (ii) आकृति 6.17 (ii) में भी DE || BC है। इसी प्रकार, AD ज्ञात किया जा सकता है। (सटीक माप और संख्यात्मक मान आकृति के आधार पर हल किए जाते हैं।)
व्याख्या:
DE || BC होने के कारण त्रिभुज के भुजाओं के अनुपात समान होते हैं। अनुपात का उपयोग कर EC और AD ज्ञात किए जाते हैं।
Ganit के सभी 14 अध्याय
Mathematics · Class 10