Chapter 6
Chapter 6 — अध्ययन नोट्स
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जगदीशचंद्र माथुर
व्याख्याजगदीशचंद्र माथुर
इस खंड में लेखक जगदीशचंद्र माथुर का विस्तृत परिचय दिया गया है। उनका जन्म 1917 में उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर में हुआ था। उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। वे इंडियन सिविल सर्विस में चयनित हुए और बिहार राज्य के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक तथा सूचना और प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव जैसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्यरत रहे। इसके साथ ही वे साहित्य-सृजन में भी सक्रिय रहे। प्रयाग में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने लेखन शुरू किया था। उनके नाटक और एकांकी उस समय की चर्चित पत्रिकाओं जैसे चॉंद और रूपाभ में प्रकाशित होते रहे। हिंदी नाटक और रंगमंच के विकास में उनका योगदान महत्वपूर्ण माना जाता है। उन्होंने ऐतिहासिक नाटकों के साथ-साथ सामाजिक समस्याओं पर आधारित एकांकी-नाटक भी लिखे। उनकी प्रमुख कृतियों में 'भोर का तारा', 'कोणार्क', 'ओ मेरे सपने', 'शारदीया', 'पहला राजा', 'दस तस्वीरें', 'जिन्होंने जीना जाना' शामिल हैं। उनका सर्वाधिक चर्चित नाटक 'कोणार्क' है। वे 1978 में निधन हो गए। इस परिचय से स्पष्ट होता है कि जगदीशचंद्र माथुर न केवल प्रशासनिक क्षेत्र में बल्कि साहित्यिक क्षेत्र में भी एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व थे। उनकी रचनाएँ सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर गहरी पकड़ रखती हैं।
- जगदीशचंद्र माथुर का जन्म 1917 में शाहजहाँपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ।
- उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की।
- इंडियन सिविल सर्विस में चयनित होकर बिहार के शिक्षा सचिव, आकाशवाणी के महानिदेशक और सूचना मंत्रालय के संयुक्त सचिव रहे।
- प्रयाग में अध्ययन के दौरान लेखन शुरू किया और हिंदी नाटक-एकांकी में योगदान दिया।
- उनकी प्रमुख रचनाएँ: भोर का तारा, कोणार्क, ओ मेरे सपने, शारदीया, पहला राजा, दस तस्वीरें, जिन्होंने जीना जाना।
- सन् 1978 में उनका निधन हुआ।
- 📌 इंडियन सिविल सर्विस: भारत की प्रशासनिक सेवा जिसमें उच्च पदों पर कार्य किया जाता है।
- 📌 एकांकी: एक प्रकार का नाटक जिसमें एक ही अंक (दृश्य) होता है।
- 📌 रंगमंच: थिएटर या नाट्य मंच।
रीढ़ की हड्डी - परिचय एवं सामाजिक संदर्भ
अवधारणारीढ़ की हड्डी - परिचय एवं सामाजिक संदर्भ
‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी 1939 में लिखी गई थी। यह भारतीय समाज में परंपरागत विवाह व्यवस्था और स्त्रियों की शिक्षा को लेकर रूढ़िवादी सोच पर व्यंग्य करती है। उस समय स्त्रियों को शिक्षा और कार्यक्षेत्रों में समान अवसर नहीं मिलते थे। इस एकांकी के माध्यम से विवाह में कम पढ़ी-लिखी लड़कियों की मांग, विवाह में हो रहे लेन-देन जैसी सामाजिक कुरीतियों को उजागर किया गया है। मुख्य पात्र उमा एक पढ़ी-लिखी, सशक्त महिला का प्रतिनिधित्व करती है जो अपने अधिकारों और विचारों के प्रति जागरूक है। यह एकांकी सामाजिक रूढ़ियों और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाती है। इसमें पात्रों के संवादों के माध्यम से उस समय की सामाजिक मानसिकता, विवाह संबंधी प्रथाएँ, और स्त्री शिक्षा की स्थिति का चित्रण किया गया है। यह एकांकी न केवल मनोरंजन करती है, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों पर कटाक्ष करती है और जागरूकता फैलाने का प्रयास करती है।
- ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी 1939 में लिखी गई।
- यह परंपरागत विवाह व्यवस्था और स्त्री शिक्षा पर व्यंग्य करती है।
- समाज में स्त्रियों को समान अवसर नहीं मिलते थे।
- विवाह में कम पढ़ी-लिखी लड़कियों की मांग और लेन-देन जैसी कुरीतियाँ उजागर हुई हैं।
- मुख्य पात्र उमा एक पढ़ी-लिखी, सशक्त महिला है।
- एकांकी सामाजिक रूढ़ियों के खिलाफ जागरूकता फैलाती है।
- 📌 रूढ़िवादिता: पुराने और परंपरागत विचारों पर अडिग रहना।
- 📌 सशक्त महिला: जो आत्मनिर्भर और जागरूक हो।
- 📌 सामाजिक कुरीतियाँ: समाज में व्याप्त गलत प्रथाएँ।
पात्र परिचय
अवधारणापात्र परिचय
इस खंड में ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी के मुख्य पात्रों का परिचय दिया गया है। पात्रों के नाम और उनके संबंध निम्नलिखित हैं: - उमा: मुख्य लड़की पात्र, पढ़ी-लिखी और सशक्त महिला। - रामस्वरूप (बाबू): उमा के पिता, जो दिखावे में आधुनिक लेकिन विचारों में रूढ़िवा
अभ्यास प्रश्न — Chapter 6
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. एकांकी ‘रीढ़ की हड्डी’ का शीर्षक किसका प्रतीक है? (क) शरीर के एक आवश्यक अंग का (ख) व्यक्ति की ऊँचाई के आधार का (ग) आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का (घ) शारीरिक शक्ति और परिश्रम का
उत्तर:
इस एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है। इसलिए सही उत्तर है (ग)। रीढ़ की हड्डी का अर्थ यहाँ व्यक्ति के आत्मबल, नैतिक दृढ़ता और साहस से है, जो सामाजिक दबावों के सामने टिके रहने की क्षमता को दर्शाता है।
व्याख्या:
एकांकी में रीढ़ की हड्डी का प्रतीकात्मक अर्थ है व्यक्ति का आत्म-सम्मान और नैतिक दृढ़ता। यह शारीरिक अंग के रूप में नहीं, बल्कि व्यक्ति के चरित्र और साहस के रूप में लिया गया है। इसलिए विकल्प (ग) उपयुक्त है।
Q2.2. ‘रीढ़ की हड्डी’ एकांकी में किस पर व्यंग्य किया गया है? (क) पात्रों की निर्धनता और लाचारी पर (ख) पात्रों की भाषा और हास्य पर (ग) विवाह और अशिक्षा पर (घ) समाज की अनुचित मान्यताओं पर
उत्तर:
इस एकांकी में समाज की अनुचित मान्यताओं पर व्यंग्य किया गया है। इसलिए सही उत्तर है (घ)। एकांकी में सामाजिक रूढ़ियों, कुप्रथाओं और अनुचित सोच पर कटाक्ष किया गया है।
व्याख्या:
एकांकी का मुख्य उद्देश्य समाज की अनुचित मान्यताओं और रूढ़िवादिता पर व्यंग्य करना है। पात्रों के व्यवहार और संवादों के माध्यम से यह बात स्पष्ट होती है। इसलिए विकल्प (घ) उपयुक्त है।
Q3.3. “धर जाकर जरा यह पता लगाइएगा कि आपके लाडले बेटे के रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं” यह वाक्य शंकर की किस छवि को उजागर करता है? (क) नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता (ख) अनुभव और विवेक की कमी (ग) चारित्रिक दृढ़ता और शारीरिक दुर्बलता (घ) उदासीनता और एकाकीपन
उत्तर:
यह वाक्य शंकर की नैतिक साहस की कमी और चारित्रिक दुर्बलता को उजागर करता है। इसलिए सही उत्तर है (क)। शंकर अपने बेटे के साहस और नैतिकता पर सवाल उठाता है, जो उसकी कमजोरी को दर्शाता है।
व्याख्या:
उमा द्वारा कही गई यह टिप्पणी शंकर के चरित्र की कमजोरी और नैतिक साहस की कमी को दर्शाती है। वह अपने बेटे के साहस और दृढ़ता की परीक्षा लेने की बात कहती है, जिससे शंकर की छवि स्पष्ट होती है। इसलिए विकल्प (क) उपयुक्त है।
Q4.4. “जी हाँ, मैं कॉलेज में पढ़ी हूँ। मैंने बी.ए. पास किया है।” उमा की दृष्टि में शिक्षा प्राप्त करने का सही अर्थ है? (क) बड़ी-बड़ी डिग्री प्राप्त करना (ख) कॉलेज में पढ़ना और नौकरी पाना (ग) माता-पिता और पति को प्रसन्न रखना (घ) आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना
उत्तर:
उमा की दृष्टि में शिक्षा का सही अर्थ आत्मबल और स्वतंत्र विचार रखना है। इसलिए सही उत्तर है (घ)। वह शिक्षा को केवल डिग्री या नौकरी तक सीमित नहीं मानती, बल्कि इसे आत्मबल और स्वतंत्रता का स्रोत मानती है।
व्याख्या:
उमा का संवाद यह दर्शाता है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री लेना या नौकरी पाना नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति को आत्मनिर्भर और स्वतंत्र विचारशील बनाती है। इसलिए विकल्प (घ) उपयुक्त है।
Q5.5. गोपालप्रसाद और रामस्वरूप में क्या-क्या समानताएँ हैं? (क) दोनों प्रगतिशील हैं और रूढ़ियों को नकारते हैं। (ख) दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं। (ग) दोनों शिक्षा और रूढ़ियों के समर्थक हैं। (घ) दोनों संगीत और स्वादिष्ट भोजन के प्रेमी हैं।
उत्तर:
गोपालप्रसाद और रामस्वरूप दोनों दिखावे और परंपरा के शिकार हैं। इसलिए सही उत्तर है (ख)। दोनों पात्र सामाजिक रूढ़ियों और दिखावे में फंसे हुए हैं।
व्याख्या:
एकांकी में दोनों पात्रों के व्यवहार से पता चलता है कि वे प्रगतिशील नहीं बल्कि परंपराओं और दिखावे के बंधन में हैं। इसलिए विकल्प (ख) उपयुक्त है।
Q6.6. इस एकांकी की संवाद शैली मुख्यत: कैसी है? (क) औपचारिक और शुष्क (ख) स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण (ग) काव्यात्मक और प्रश्नात्मक (घ) भावुक और संक्षिप्त
उत्तर:
इस एकांकी की संवाद शैली स्वाभाविक और व्यंग्यपूर्ण है। इसलिए सही उत्तर है (ख)। संवादों में हास्य और व्यंग्य की झलक मिलती है जो पात्रों के विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है।
व्याख्या:
एकांकी के संवाद सहज, प्राकृतिक और व्यंग्यपूर्ण हैं, जो पात्रों के मनोभावों और सामाजिक स्थितियों को दर्शाते हैं। इसलिए विकल्प (ख) उपयुक्त है।
Q7.1. बाबू रामस्वरूप समाज में आधुनिक व्यवहार का दिखावा करते हैं, जबकि उनके विचार रूढ़िवादी हैं। इस अंतर्द्वंद्व के उदाहरण एकांकी में से खोजकर लिखिए। (संकेत– उमा के साथ उनका व्यवहार, विवाह के लिए दिखावे करना किंतु इन प्रयासों को छिपाने की चेष्टा करना आदि।)
उत्तर:
बाबू रामस्वरूप का व्यवहार और विचारों में विरोधाभास स्पष्ट है। वे समाज में आधुनिक और प्रगतिशील दिखने की कोशिश करते हैं, जैसे उमा को शिक्षा देने की बात करना, लेकिन उनके विचार रूढ़िवादी हैं। उदाहरण के लिए, वे विवाह के लिए दिखावे करते हैं, परन्तु असल में परंपराओं का पालन करते हैं और अपने बेटे की नैतिकता पर सवाल उठाते हैं। उमा के साथ उनका व्यवहार भी इस अंतर्द्वंद्व को दर्शाता है, जहाँ वे उसे दबाव में रखते हैं लेकिन दिखावे के लिए सहनशील बने रहते हैं।
व्याख्या:
यह प्रश्न पात्रों के मनोविज्ञान और सामाजिक व्यवहार की समझ मांगता है। रामस्वरूप का दिखावा और असल विचारों का विरोधाभास उनके संवादों और क्रियाओं से स्पष्ट होता है। इस प्रकार के उदाहरण एकांकी में कई स्थानों पर मिलते हैं।
Q8.2. ‘रीढ़ की हड्डी’ का संदर्भ दो अलग-अलग पात्रों के लिए भिन्न-भिन्न अर्थों में आया है, उनकी पहचान कीजिए और लिखिए।
उत्तर:
एकांकी में 'रीढ़ की हड्डी' का संदर्भ दो पात्रों के लिए अलग-अलग है। उमा के लिए यह आत्मबल, साहस और नैतिक दृढ़ता का प्रतीक है, जो वह अपने अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए दिखाती है। वहीं शंकर के लिए यह उसकी कमजोरी और नैतिक साहस की कमी को दर्शाता है। इस प्रकार, रीढ़ की हड्डी का अर्थ पात्रों के दृष्टिकोण और चरित्र के अनुसार भिन्न-भिन्न है।
व्याख्या:
यह प्रश्न पात्रों की सोच और चरित्र की गहराई को समझने के लिए है। रीढ़ की हड्डी का प्रतीकात्मक अर्थ दोनों पात्रों के लिए अलग है, जो एकांकी के मुख्य विचार को स्पष्ट करता है।