Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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स्वामी आनंद (1887–1976)
व्याख्यास्वामी आनंद (1887–1976)
स्वामी आनंद का जन्म सन् 1887 में गुजरात के कठियावाड़ जिले के किमड़ी गाँव में हुआ था। उनका मूल नाम हिम्मतलाल था। दस वर्ष की आयु में कुछ साधुओं के साथ हिमालय की यात्रा के दौरान उनका नामकरण स्वामी आनंद के रूप में हुआ। वे स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए और महाराष्ट्र से 'तरुण हिंद' अखबार निकाला। बाल गंगाधर तिलक के 'केसरी' अखबार से जुड़ने के बाद 1917 में गांधीजी के संपर्क में आए। गांधीजी के निर्देशन में 'नवजीवन' और 'यंग इंडिया' के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी संभाली। स्वामी आनंद ने गांधीजी और उनके सहयोगियों महादेव भाई देसाई तथा प्यारेलाल जी को निकट से जाना। उनका जीवन स्वतंत्रता आंदोलन के साथ-साथ साहित्यिक और सामाजिक कार्यों से भी जुड़ा था। वे गांधीजी के विचारों के प्रचारक और समर्थक थे। उनकी लेखनी में गांधीजी के सहयोगी महादेव भाई देसाई के व्यक्तित्व और कार्यों का चित्रण मिलता है।
- स्वामी आनंद का जन्म 1887 में गुजरात के कठियावाड़ जिले के किमड़ी गाँव में हुआ।
- मूल नाम हिम्मतलाल था, बाद में साधुओं के साथ हिमालय यात्रा पर जाकर स्वामी आनंद नाम मिला।
- स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े और विभिन्न अखबारों में कार्य किया।
- 1917 में गांधीजी के संपर्क में आए और उनके निर्देशन में 'नवजीवन' और 'यंग इंडिया' के प्रचार कार्य संभाला।
- गांधीजी के निकट सहयोगी महादेव भाई देसाई और प्यारेलाल जी को जाना।
- स्वामी आनंद ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई।
- 📌 स्वामी आनंद: स्वतंत्रता संग्राम के एक प्रमुख संन्यासी और गांधीजी के सहयोगी।
- 📌 तरुण हिंद: महाराष्ट्र का एक स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा अखबार।
- 📌 नवजीवन: गांधीजी का एक साप्ताहिक प्रकाशन।
शुक्रतारे के समान
व्याख्याशुक्रतारे के समान
यह अनुभाग महादेव भाई देसाई के व्यक्तित्व और उनके गांधीजी के प्रति समर्पण का वर्णन करता है। महादेव भाई को गांधीजी ने अपने उत्तराधिकारी के रूप में माना था। वे गांधीजी के अत्यंत निकट सहयोगी थे और उनके कार्यों को सुचारू रूप से संचालित करते थे। महादेव भाई का व्यक्तित्व सरल, विनम्र और समर्पित था। वे गांधीजी के लिए पुत्र समान थे और उनकी सेवा में अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। महादेव भाई ने गांधीजी के पत्र-व्यवहार, व्याख्यान, और मुलाकातों का ध्यानपूर्वक लेखन किया। उनकी लिखावट इतनी सुंदर और स्पष्ट थी कि ब्रिटिश अधिकारी भी उनके पत्रों को देखकर आश्चर्यचकित रह जाते थे। महादेव भाई की कार्यशैली और समर्पण ने उन्हें गांधीजी के सबसे विश्वसनीय सहयोगी बना दिया।
- महादेव भाई देसाई गांधीजी के निकटतम सहयोगी और सचिव थे।
- गांधीजी ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी माना।
- वे सरल, विनम्र और समर्पित व्यक्ति थे।
- महादेव भाई ने गांधीजी के पत्र-व्यवहार और व्याख्यानों का सुंदर और स्पष्ट लेखन किया।
- उनकी लिखावट ब्रिटिश अधिकारियों के लिए भी प्रशंसनीय थी।
- महादेव भाई ने गांधीजी के कार्यों को सुचारू रूप से संचालित किया।
- 📌 महादेव भाई देसाई: गांधीजी के निजी सचिव और निकट सहयोगी।
- 📌 सत्य के प्रयोग: गांधीजी की आत्मकथा जिसका अंग्रेजी अनुवाद महादेव ने किया।
महादेव भाई का कार्य और गांधीजी के साथ संबंध
व्याख्यामहादेव भाई का कार्य और गांधीजी के साथ संबंध
महादेव भाई देसाई का कार्य गांधीजी के स्वतंत्रता संग्राम के अभियानों में अत्यंत महत्वपूर्ण था। वे गांधीजी के पत्र-व्यवहार, व्याख्यान, और विभिन्न गतिविधियों का लेखन और संपादन करते थे। गांधीजी के साथ उनकी निकटता इतनी गहरी थी कि गांधीजी उन्हें पुत्र से भ
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.वैज्ञानिक शब्द का मूल शब्द और प्रत्यय क्या है ?
उत्तर:
ज्ञान, इक
Q2.रामन् को भारत रत्न से किस वर्ष सम्मानित किया गया था ?
उत्तर:
1954
Q3.चंद्रशेखर किस समास का समस्त पद है ?
उत्तर:
बहुव्रीहि समास
Q4.नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक कौन थे ?
उत्तर:
चंद्रशेखर वेंकट रामन्
Q5.प्रतिभावान छात्र किसकी ओर आकर्षित होते थे ?
उत्तर:
सरकारी नौकरी की ओर
Q6.रामन् की खोज किस क्षेत्र में एक क्रांति के सामान थी ?
उत्तर:
भौतिकी के
Q7.पुरस्कार का संधि विच्छेद क्या है ?
उत्तर:
पुर: + कार
Q8.रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट किस शहर में स्थित है ?
उत्तर:
बैंगलोर में