Chapter 5
Chapter 5 — अध्ययन नोट्स
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खनिज क्या है?
परिभाषाखनिज क्या है?
खनिज प्राकृतिक रूप से पृथ्वी की सतह के नीचे पाए जाने वाले समरूप तत्व होते हैं जिनकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है। ये तत्व कठोर या नरम हो सकते हैं, जैसे हीरा कठोर है और चूना पत्थर नरम। खनिजों की विविधता उनके निर्माण की भौतिक और रासायनिक परिस्थितियों के कारण होती है। पृथ्वी की भू-पर्पटी विभिन्न खनिजों के योग से बनी होती है, और ये खनिज धातु और अधातु दोनों प्रकार के हो सकते हैं। खनिजों का अध्ययन भूगोलविद और भू-वैज्ञानिक अलग-अलग दृष्टिकोण से करते हैं। भूगोलविद खनिजों के वितरण और आर्थिक उपयोग में रुचि रखते हैं, जबकि भू-वैज्ञानिक खनिजों के निर्माण, संरचना और आयु का अध्ययन करते हैं। खनिजों का वर्गीकरण उनके भौतिक और रासायनिक गुणों के आधार पर किया जाता है। खनिज प्रायः अयस्कों में पाए जाते हैं, जो खनिजों का आर्थिक रूप से उपयोगी संचयन होता है। खनिजों का खनन तभी आर्थिक होता है जब अयस्क में खनिजों की मात्रा पर्याप्त हो। खनिजों के निर्माण के मुख्य स्रोत आग्नेय, अवसादी, कायांतरित चट्टानें, जलोढ़ निक्षेप, और महासागरीय जल हैं। **Table on page 16 (13×16)** | | | | 2 | | 1 M | | | | | | | | | | | | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | --- | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | 2 | | M | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | 4 | | 3 M | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | 4 | | T | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | 1 | | | | | | | 5 | | | | | | 5 T | | | 6 | 0 | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | | 7 | y | | | | | | | | |
- खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले समरूप तत्व होते हैं।
- खनिजों की विविधता उनके निर्माण की भौतिक और रासायनिक परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
- खनिजों का वर्गीकरण उनके गुणों के आधार पर किया जाता है।
- खनिज प्रायः अयस्कों में पाए जाते हैं, जिनका खनन आर्थिक होता है।
- खनिजों का अध्ययन भूगोलविद और भू-वैज्ञानिक अलग-अलग दृष्टिकोण से करते हैं।
- खनिजों के निर्माण के स्रोतों में आग्नेय, अवसादी, कायांतरित चट्टानें, जलोढ़ निक्षेप और महासागरीय जल शामिल हैं।
- 📌 खनिज: प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले समरूप तत्व जिनकी निश्चित आंतरिक संरचना होती है।
- 📌 अयस्क: खनिजों का आर्थिक रूप से उपयोगी संचयन।
- 📌 आग्नेय चट्टानें: पृथ्वी के अंदर से निकले लावा या मैग्मा के ठंडे होकर बनने वाली चट्टानें।
खनिजों का वर्गीकरण
अवधारणाखनिजों का वर्गीकरण
खनिजों को उनके भौतिक, रासायनिक गुणों और आर्थिक उपयोग के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है। सामान्यत: खनिजों को धात्विक (लौह और अलौह) और अधात्विक खनिजों में बांटा जाता है। लौह खनिजों में मुख्यतः लौह अयस्क आते हैं, जो इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक हैं। अलौह खनिजों में ताँबा, बॉक्साइट, सीसा, और सोना शामिल हैं। इसके अतिरिक्त अभ्रक, चूना पत्थर जैसे चट्टानी खनिज भी महत्वपूर्ण हैं। खनिजों का निर्माण मुख्यतः चार प्रकार की चट्टानों में होता है: आग्नेय, अवसादी, कायांतरित और जलोढ़। आग्नेय चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों में पाए जाते हैं। अवसादी चट्टानों में खनिज परतों के रूप में जमा होते हैं। कायांतरित चट्टानों में खनिजों का निर्माण ऊष्मा और दबाव के प्रभाव से होता है। जलोढ़ निक्षेपों में प्लेसर निक्षेप के रूप में सोना, चाँदी आदि मिलते हैं। महासागरीय जल में भी खनिज पाए जाते हैं, लेकिन उनकी आर्थिक उपयोगिता कम होती है।
- खनिजों को धात्विक और अधात्विक में वर्गीकृत किया जाता है।
- लौह खनिजों में मुख्य रूप से लौह अयस्क शामिल है।
- अलौह खनिजों में ताँबा, बॉक्साइट, सोना आदि आते हैं।
- खनिजों का निर्माण आग्नेय, अवसादी, कायांतरित और जलोढ़ चट्टानों में होता है।
- प्लेसर निक्षेप जलोढ़ निक्षेपों में पाए जाते हैं।
- महासागरीय जल में खनिज होते हैं पर उनकी आर्थिक उपयोगिता कम होती है।
- 📌 लौह खनिज: ऐसे खनिज जिनमें लोहा प्रमुख तत्व होता है।
- 📌 अलौह खनिज: धातु खनिज जो लौह नहीं होते।
- 📌 प्लेसर निक्षेप: जलोढ़ निक्षेपों में पाए जाने वाले खनिज जो जल द्वारा घर्षित नहीं होते।
खनिजों की उपलब्धता
व्याख्याखनिजों की उपलब्धता
खनिज सामान्यत: अयस्कों में पाए जाते हैं, जहाँ खनिजों का संचयन आर्थिक रूप से उपयोगी होता है। खनिजों के निर्माण के विभिन्न स्रोत होते हैं: (क) आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, जोड़ों, भ्रंशों और विदरों में पाए जाते हैं। जैसे जस्ता, ताँबा,
अभ्यास प्रश्न — Chapter 5
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.आधुनिक आवर्त सारणी में बाएँ-से-दाएँ जाने पर तत्वों के धात्विक अभिलक्षण कैसे परिवर्तित होते हैं?
उत्तर:
धात्विक अभिलक्षण घटता है
व्याख्या:
[{"id": "c6b0117b-37aa-4065-95c4-98a0cf444517", "type": "html", "value": " आवर्त के अनुदिश धात्विक अभिलक्षण घटता जाता है। "}]
Q2.आवर्त सारणी के आवर्त में बाएँ-से-दाएँ जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति कैसे परिवर्तित होगी?
उत्तर:
बढ़ता है
व्याख्या:
[{"id": "bd91cac4-ffdb-4e09-9a69-ef4bd3cf5860", "type": "html", "value": " आवर्त सारणी के आवर्त में बाएँ-से-दाएँ जाने पर इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने की प्रवृत्ति बढ़ती जाती है। "}]
Q3.आवर्त सारणी के एक ही स्तंभ में बोरॉन के समान सभी तत्वों में क्या गुणधर्म हैं?
उत्तर:
3 संयोजक इलेक्ट्रॉन हों
व्याख्या:
[{"id": "f538245a-74f8-4cb8-93e4-5c37fccf575d", "type": "html", "value": " आवर्त सारणी के एक ही स्तंभ में बोरॉन के समान सभी तत्वों में 3 संयोजक इलेक्ट्रॉन होते हैं। "}]
Q4.आवर्त में प्रथम तत्व के परमाणुओं में संयोजक इलेक्ट्रॉनों की संख्या _________ हैं।
उत्तर:
1
व्याख्या:
[{"id": "a7804bb1-c266-4763-9080-7be71032084e", "type": "html", "value": " आवर्त में प्रथम तत्व के परमाणुओं में संयोजक इलेक्ट्रॉनों की संख्या 1 है। "}]
Q5.आवर्त में अंतिम तत्व के परमाणुओं में संयोजक इलेक्ट्रॉनों की प्रायिक संख्या ___________ हैं।
उत्तर:
8
व्याख्या:
[{"id": "a062750b-edb9-4b6b-8e6b-a8b6ef64663a", "type": "html", "value": " आवर्त में अंतिम तत्व के परमाणुओं में संयोजक इलेक्ट्रॉनों की प्रायिक संख्या 8 है। "}]
Q6.मानव नेत्र के निकट और दूर के बिंदु क्रमशः _______ होते हैं।
उत्तर:
25 cm और अनंत
व्याख्या:
[{"id": "bbf3b3d8-aa44-4a5d-ab44-5c5af1443ccc", "type": "html", "value": " सामान्य नेत्र के लिए निकट बिंदु 25 cm और दूर बिंदु अनंत होता है। "}]
Q7.दीर्घदृष्टि निम्नलिखित में से किस कारण से उत्पन्न होती है?
उत्तर:
लेंस की फोकस दूरी बहुत लंबी हो जाती है
व्याख्या:
[{"id": "7cf38d57-0b01-4540-b2dd-867d0ef527fa", "type": "html", "value": " दीर्घदृष्टि या हाइपरमेट्रोपिया के दो कारण निम्नलिखित हैं: 1. लेंस की फोकस दूरी बहुत लंबी हो जाती है 2. नेत्रगोलक बहुत छोटा हो जाता है "}]
Q8.एक व्यक्ति 4 m से अधिक दूरी पर रखी वस्तुओं को देखने में असमर्थ है। किस शक्ति के लेंस का उपयोग करके दोष का संसोधन किया जा सकता है?
उत्तर:
-0.25 D
व्याख्या:
[{"id": "64fd8c56-6f39-464d-9a1f-cc333814a57a", "type": "html", "value": " व्यक्ति दूर की वस्तु को देखने में असमर्थ हैं। इसका अर्थ है कि उसे निकट दृष्टि दोष है। निकट दृष्टि दोष के संसोधन हेतु अवतल लेंस की आवश्यकता होगी। अवतल लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक होती है। इसलिये शक्ति = P = -1/f = -1/4 = -0.25 D "}]
Samkalin Bharat के सभी 7 अध्याय
Social Science · Class 10