NCERTCh 5Free

Chapter 5

🎓 Class 9📖 Ganga📖 12 notes🧠 15 Q&A⏱️ ~18 min
Chapter 4Chapter 5 of 11Chapter 6

Chapter 5Study Notes

NCERT-aligned · 12 notes · 3 shown free

मोहन राकेश

Explanation

मोहन राकेश

मोहन राकेश हिंदी साहित्य के एक बहुमुखी और प्रतिष्ठित रचनाकार थे जिनका जन्म सन् 1925 में अमृतसर, पंजाब में हुआ था। उन्होंने हिंदी साहित्य के विभिन्न विधाओं जैसे कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी लेखन, यात्रा-वृत्तांत आदि में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी प्रमुख रचनाओं में 'आषाढ़ का एक दिन', 'लहरों के राजहंस', 'आधे-अधूरे', 'अंधेरे बंद कमरे', 'अंतराल', 'न आने वाला कल', 'क्वार्टर तथा अन्य कहानियाँ', 'नए बादल', 'वारिस तथा अन्य कहानियाँ', 'मोहन राकेश की डायरी', 'आखिरी चट्टान तक' आदि शामिल हैं। मोहन राकेश की रचनाओं में भावनाओं की गहराई और आधुनिक जीवन की जटिलताओं का सूक्ष्म चित्रण मिलता है। उन्होंने हिंदी रंगमंच को नई दिशा दी और अपने नाटकों के माध्यम से मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त वे कुछ समय तक हिंदी पत्रिका 'सारिका' के संपादक भी रहे। उनका निधन सन् 1972 में मात्र 48 वर्ष की आयु में हो गया, परंतु उनकी साहित्यिक विरासत आज भी हिंदी साहित्य में अमूल्य है। उनकी रचनाएँ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों की गहन समझ भी प्रदान करती हैं।

  • मोहन राकेश का जन्म 1925 में अमृतसर में हुआ।
  • वे कहानी, उपन्यास, नाटक, डायरी लेखन, यात्रा-वृत्तांत आदि विधाओं के लेखक थे।
  • 'आषाढ़ का एक दिन' नाटक के लिए उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
  • उन्होंने हिंदी रंगमंच को नई दिशा और पहचान दी।
  • उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाएँ और आधुनिक जीवन की जटिलताएँ स्पष्ट हैं।
  • सन् 1972 में उनका निधन हो गया।
  • 📌 नाटक: रंगमंचीय साहित्य की वह विधा जिसमें संवाद और अभिनय के माध्यम से कहानी प्रस्तुत की जाती है।
  • 📌 यात्रा-वृत्तांत: किसी यात्रा के अनुभवों और दृश्यों का वर्णन।
  • 📌 संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार: भारत सरकार द्वारा दिया जाने वाला प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार।

आखिरी चट्टान तक

Explanation

आखिरी चट्टान तक

‘आखिरी चट्टान तक’ मोहन राकेश का एक यात्रा-वृत्तांत है जिसमें उन्होंने दक्षिण भारत के तटीय शहर कन्याकुमारी की अपनी यात्रा का सजीव और भावपूर्ण वर्णन किया है। यह यात्रा-वृत्तांत केवल स्थल-चित्रण नहीं है, बल्कि इसमें लेखक की भावनात्मक अनुभूतियाँ, प्रकृति के सौंदर्य का बारीक चित्रण, और आत्मानुभूति का समन्वय भी है। लेखक ने कन्याकुमारी के समुद्र तट, चट्टानों, लहरों, रेत के रंगों और सूर्यास्त-सूर्योदय के मनोहारी दृश्यों का विस्तार से वर्णन किया है। उन्होंने समुद्र की विशालता और उसकी शक्ति को महसूस करते हुए अपने अस्तित्व का बोध किया। यात्रा के दौरान समुद्र की लहरों से संघर्ष, अँधेरे में रास्ता खोजने की चिंता, और अंततः सुरक्षित लौटने की अनुभूति को भी उन्होंने साझा किया है। इस यात्रा-वृत्तांत में स्थानीय लोगों का जीवन, उनकी संस्कृति, शिक्षा की स्थिति, और धार्मिक परंपराओं का भी उल्लेख है। लेखक ने विवेकानंद चट्टान का महत्व बताया, जहाँ स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी। यात्रा के दौरान लेखक की मानसिक दृढ़ता, प्रकृति के साथ संवाद, और जीवन-दर्शन की झलक मिलती है। भाषा प्रवाहपूर्ण, चित्रात्मक और सहज है, जो पाठक को लेखक के साथ यात्रा पर ले जाती है। यह रचना प्रकृति की भव्यता और मानव मन की गहन अनुभूतियों को एक साथ उजागर करती है।

  • कन्याकुमारी की प्राकृतिक सुंदरता का सजीव चित्रण।
  • समुद्र, चट्टानें, लहरें और रेत के रंगों का विस्तार से वर्णन।
  • लेखक की आत्मानुभूति और जीवन-दर्शन की झलक।
  • स्थानीय लोगों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का उल्लेख।
  • विवेकानंद चट्टान का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व।
  • यात्रा के दौरान आए संघर्ष और रोमांच का वर्णन।
  • 📌 यात्रा-वृत्तांत: यात्रा के अनुभवों और दृश्यों का वर्णन।
  • 📌 विवेकानंद चट्टान: कन्याकुमारी में स्थित वह चट्टान जहाँ स्वामी विवेकानंद ने समाधि लगाई थी।
  • 📌 सैंड हिल: बालू का टीला।

यात्रा का वर्णन और अनुभव

Explanation

यात्रा का वर्णन और अनुभव

लेखक ने कन्याकुमारी के समुद्री तट पर स्थित ‘आखिरी चट्टान’ से अपनी यात्रा आरंभ की। उन्होंने वहाँ से तीन समुद्रों—अरब सागर, हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी—के मिलन स्थल को देखा। चट्टान की स्याही रंगत, लहरों की आवाज़, और सूर्यास्त के रंगों का वर्णन अत्यं

Practice QuestionsChapter 5

Includes NCERT exercise questions with answers

Q1.1. लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य कहाँ से देखा? (क) विवेकानंद चट्टान से (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से (ग) पच्चीमी धितिज से (घ) सैंड हिल से
A.क) विवेकानंद चट्टान से
B.ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से
C.ग) पच्चीमी धितिज से
D.घ) सैंड हिल से

Answer:

लेखक ने सूर्यास्त का मनोहारी दृश्य 'अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से' देखा। इसलिए सही उत्तर है (ख) अरब सागर की ओर के ऊँचे टीले से।

Explanation:

पाठ में वर्णित है कि लेखक ने सूर्यास्त का दृश्य उस ऊँचे टीले से देखा जो अरब सागर की ओर था, न कि विवेकानंद चट्टान या सैंड हिल से।

EasyNCERT
Q2.2. “मैं कुछ देर भूला रहा कि मैं मैं ही हूँ।” यह कथन लेखक की किस मनःस्थिति को दर्शाता है? (क) मौन हो जाना (ख) विस्मित हो जाना (ग) भ्रमित हो जाना (घ) आशांकित होना
A.क) मौन हो जाना
B.ख) विस्मित हो जाना
C.ग) भ्रमित हो जाना
D.घ) आशांकित होना

Answer:

यह कथन लेखक की विस्मय और आत्ममग्नता की मनःस्थिति को दर्शाता है, अतः सही उत्तर है (ख) विस्मित हो जाना।

Explanation:

लेखक अपने अनुभव में इतना डूब गया कि वह अपने अस्तित्व को भूल गया, जो विस्मय की स्थिति को दर्शाता है।

MediumNCERT
Q3.3. “मैंने, सिर्फ मैंने उस चोटी को पहली बार सर किया हो।” इस कथन में कौन-सा भाव व्यक्त होता है? (क) करुणा (ख) विनम्रता (ग) आत्मीयता (घ) संतुष्टि
A.क) करुणा
B.ख) विनम्रता
C.ग) आत्मीयता
D.घ) संतुष्टि

Answer:

इस कथन में लेखक की संतुष्टि और गर्व का भाव व्यक्त होता है, अतः सही उत्तर है (घ) संतुष्टि।

Explanation:

लेखक को यह अनुभव होने पर गर्व और संतोष होता है कि वह पहली बार उस चोटी को छू रहा है।

MediumNCERT
Q4.4. “शक्ति का विस्तार, विस्तार की शक्ति” वाक्य में वर्णन है— (क) बलखाती लहरों का (ख) सागर की व्यापकता का (ग) सूर्यास्त के दृश्य का (घ) पच्चीमी क्षितिज का
A.क) बलखाती लहरों का
B.ख) सागर की व्यापकता का
C.ग) सूर्यास्त के दृश्य का
D.घ) पच्चीमी क्षितिज का

Answer:

यह वाक्य 'बलखाती लहरों का' वर्णन करता है, अतः सही उत्तर है (क) बलखाती लहरों का।

Explanation:

पाठ में यह वाक्य लहरों की शक्ति और विस्तार को दर्शाने के लिए प्रयुक्त हुआ है।

MediumNCERT
Q5.5. लेखक की कन्याकुमारी की यात्रा का वर्णन पढ़कर कहा जा सकता है कि— (क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है। (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है। (ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है। (घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।
A.क) यह कन्याकुमारी के मौसम को प्रमुखता से वर्णित करता है।
B.ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।
C.ग) यह केवल यात्रा के रोमांच पर केंद्रित है।
D.घ) इसमें कन्याकुमारी का काल्पनिक वर्णन मिलता है।

Answer:

लेखक की यात्रा-वृत्तांत में यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ा गया है, अतः सही उत्तर है (ख) यह यात्रा को जीवंत अनुभूतियों से जोड़ता है।

Explanation:

पाठ में यात्रा के दौरान लेखक के अनुभव, भावनाएँ और प्रकृति का सजीव चित्रण मिलता है, जो इसे जीवंत बनाता है।

MediumNCERT
Q6.1. यात्रियों का समूह सूर्यास्त का दृश्य देखने के लिए सैंड हिल की ओर बढ़ता जा रहा था लेकिन लेखक सैंड हिल पर पहुँचकर कुछ देर रुकने के बाद दूसरे टीले की ओर बढ़ने लगा। उसके ऐसा करने के पीछे मूल कारण क्या था?

Answer:

लेखक ने सैंड हिल पर रुकने के बाद महसूस किया कि वहाँ से सूर्यास्त का दृश्य उतना मनोहारी नहीं दिख रहा था जितना कि दूसरे ऊँचे टीले से दिखता। इसलिए वह दूसरे टीले की ओर बढ़ा ताकि वह अधिक सुंदर और व्यापक दृश्य का अनुभव कर सके।

Explanation:

लेखक की दृष्टि और अनुभव के अनुसार, वह बेहतर दृश्य की खोज में था, इसलिए उसने सैंड हिल छोड़कर दूसरे टीले की ओर जाना उचित समझा।

MediumNCERT
Q7.2. लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों के विषय में क्या-क्या बताया?

Answer:

लेखक ने कन्याकुमारी के स्थानीय लोगों को सरल, मिलनसार और अपनी संस्कृति तथा परंपराओं के प्रति सजग बताया है। वे अपने हस्तशिल्प और धार्मिक रीति-रिवाजों में निपुण हैं। लेखक ने स्थानीय युवकों और युवतियों के व्यवहार तथा उनकी जीवनशैली का भी उल्लेख किया है।

Explanation:

पाठ में स्थानीय लोगों के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं का वर्णन है, जो उनकी जीवनशैली और परंपराओं को उजागर करता है।

MediumNCERT
Q8.3. “अपने प्रयत्न की सार्थकता से संतुष्ट होकर मैं टीले पर बैठ गया” इस पंक्ति में ‘प्रयत्न की सार्थकता’ से क्या अभिप्राय है?

Answer:

‘प्रयत्न की सार्थकता’ का अर्थ है कि लेखक ने जो प्रयास किया वह सफल और उपयोगी साबित हुआ। वह अपने प्रयासों से संतुष्ट है क्योंकि उसने वह अनुभव प्राप्त किया जिसकी उसने आशा की थी।

Explanation:

यह पंक्ति लेखक की आत्मसंतुष्टि और अपने प्रयासों के फल को समझने का भाव दर्शाती है।

MediumNCERT