Chapter 4
Chapter 4 — अध्ययन नोट्स
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तबला एवं पखावज वाद्यों का परिचय
व्याख्यातबला एवं पखावज वाद्यों का परिचय
उत्तर भारतीय संगीत में तबला एवं पखावज वाद्य अत्यंत लोकप्रिय और महत्वपूर्ण अवनद्ध वाद्य हैं। ये दोनों वाद्य भारतीय शास्त्रीय संगीत में ताल और लय की संरचना के लिए आवश्यक हैं। तबला दो ड्रमों का युग्म है, जिसमें दाहिना ड्रम जिसे 'तबला' या 'दायाँ' कहा जाता है, और बायाँ ड्रम जिसे 'डगा' या 'बायाँ' कहा जाता है। पखावज एक द्विमुखी अवनद्ध वाद्य है जिसका स्वरूप मृदंग से विकसित हुआ है। तबला शब्द अरबी भाषा के 'तब्ल' शब्द से आया है, जिसका अर्थ 'सपाट सतह' होता है। तबला वाद्य अठारहवीं शताब्दी के आसपास शास्त्रीय संगीत में लोकप्रिय हुआ। पखावज का स्वरूप तबले से अधिक प्राचीन माना जाता है और इसका उपयोग युद्ध तथा धार्मिक अनुष्ठानों में होता था। इन वाद्यों की उत्पत्ति और विकास के अध्ययन से भारतीय संगीत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का पता चलता है।
- तबला और पखावज उत्तर भारतीय संगीत के प्रमुख अवनद्ध वाद्य हैं।
- तबला दो ड्रमों का युग्म है: दाहिना (तबला) और बायाँ (डगा)।
- तबला शब्द अरबी भाषा के 'तब्ल' से आया है, जिसका अर्थ 'सपाट सतह' है।
- पखावज का स्वरूप तबले से अधिक प्राचीन माना जाता है।
- तबला अठारहवीं शताब्दी के आसपास शास्त्रीय संगीत में लोकप्रिय हुआ।
- पखावज का उपयोग प्राचीन काल में युद्ध और धार्मिक अनुष्ठानों में होता था।
- 📌 अवनद्ध वाद्य: ऐसे वाद्य जिनमें ध्वनि उत्पन्न करने के लिए हवा का प्रयोग नहीं होता।
- 📌 तबला: दो ड्रमों का युग्म वाद्य, दाहिना ड्रम 'तबला' और बायाँ ड्रम 'डगा'।
- 📌 पखावज: द्विमुखी अवनद्ध वाद्य, मृदंग से विकसित।
तबला वाद्य का आविष्कार
व्याख्यातबला वाद्य का आविष्कार
तबला वाद्य के आविष्कार को लेकर विभिन्न मत प्रचलित हैं। एक प्राचीन मत था कि पखावज को बीच से काटकर तबला बनाया गया, लेकिन यह तर्क अस्वीकार्य है क्योंकि पखावज के दोनों भाग नीचे से खुले होते हैं जबकि तबले के दोनों भाग नीचे से बंद होते हैं। कुछ विद्वानों के अनुसार, प्राचीन भारत में दो भिन्न ध्वनि वाले नगाड़े 'साम्ब' बजाए जाते थे, जिन्हें नर और मादा कहा जाता था, संभव है कि तबले की जोड़ी की उत्पत्ति यहीं से हुई हो। एक अन्य मत के अनुसार, 13वीं शताब्दी के प्रसिद्ध कवि और संगीतज्ञ हजरत अमीर खुसरो को तबला का आविष्कारक माना जाता है, परन्तु उनके किसी ग्रंथ में इसका उल्लेख नहीं मिलता। मुगल बादशाह मुहम्मद शाह रंगीले के दरबार में खयाल गायन शैली के प्रचार के साथ तबला वाद्य का प्रचलन बढ़ा। शोधों से पता चलता है कि तबला सदृश्य वाद्य दिल्ली पर मुस्लिम शासन से पहले भी प्रचलित थे। महाराष्ट्र की भाजा गुफा में दूसरी शताब्दी ई.पू. की एक स्त्री की मूर्ति है जो तबला-डगा सदृश्य वाद्य बजा रही है। इस प्रकार तबला का विकास कई कालखंडों में हुआ और यह भारतीय संगीत का अभिन्न अंग बन गया।
- पखावज को बीच से काटकर तबला बनाने का मत अस्वीकार्य है।
- प्राचीन भारत में दो भिन्न ध्वनि वाले नगाड़े 'साम्ब' बजाए जाते थे।
- हजरत अमीर खुसरो को तबला का आविष्कारक माना जाता है, पर उनके ग्रंथों में उल्लेख नहीं।
- मुगल काल में तबला का प्रचलन खयाल गायन के साथ बढ़ा।
- शोधों से पता चलता है कि तबला सदृश्य वाद्य दिल्ली पर मुस्लिम शासन से पहले भी प्रचलित थे।
- महाराष्ट्र की भाजा गुफा में तबला सदृश्य वाद्य बजाते हुए स्त्री की मूर्ति मिली है।
- 📌 साम्ब: प्राचीन भारतीय दो भिन्न ध्वनि वाले नगाड़े।
- 📌 खयाल गायन: उत्तर भारतीय शास्त्रीय संगीत की प्रमुख गायन शैली।
- 📌 मुगल काल: भारतीय इतिहास का वह काल जब मुगल शासक भारत पर शासन करते थे।
पखावज वाद्य का आविष्कार
व्याख्यापखावज वाद्य का आविष्कार
पखावज, जिसे मृदंग का एक प्रमुख रूप माना जाता है, भारतीय संगीत का एक महत्वपूर्ण द्विमुखी अवनद्ध वाद्य है। भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में सर्वप्रथम मृदंग का वर्णन त्रिपुष्कर वाद्य के रूप में मिलता है, जिसमें तीन भाग होते थे: आंकिक, ऊर्ध्वक और आलिंग्य। आंक
अभ्यास प्रश्न — Chapter 4
NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित
Q1.1. तबला वाद्य किस शताब्दी में लोकप्रिय हुआ? (क) पंद्रहवीं शताब्दी (ख) सोलहवीं शताब्दी (ग) सत्रहवीं शताब्दी (घ) अठारहवीं शताब्दी
उत्तर:
तबला वाद्य सोलहवीं शताब्दी में लोकप्रिय हुआ। अतः सही उत्तर है (ख) सोलहवीं शताब्दी।
व्याख्या:
इतिहास के अनुसार तबला वाद्य का विकास और लोकप्रियता मुख्यतः सोलहवीं शताब्दी में हुई।
Q2.2. प्रसिद्ध गायक सदारंग और अदारंग के भाई का नाम क्या था? (क) अमीर खुसरो (ख) भरत (ग) खुसरो खाँ (घ) विलायत हुसैन
उत्तर:
सदारंग और अदारंग के भाई का नाम खुसरो खाँ था। अतः सही उत्तर है (ग) खुसरो खाँ।
व्याख्या:
सदारंग और अदारंग प्रसिद्ध संगीतकार थे, और उनका भाई खुसरो खाँ था।
Q3.3. भारतीय संगीत वाद्य पुस्तक के लेखक कौन हैं? (क) भरतमुनि (ख) आचार्य बृहस्पति (ग) लालमणि मिश्र (घ) प्रेमलता शर्मा
उत्तर:
भारतीय संगीत वाद्य पुस्तक के लेखक लालमणि मिश्र हैं। अतः सही उत्तर है (ग) लालमणि मिश्र।
व्याख्या:
भारतीय संगीत वाद्य विषयक पुस्तक का लेखक लालमणि मिश्र है।
Q4.4. भरतमुनि द्वारा रचित ग्रंथ कौन-सा है? (क) संगीत रत्नाकर (ख) बृहद्देशी (ग) नाट्यशास्त्र (घ) दत्तिलम
उत्तर:
भरतमुनि द्वारा रचित ग्रंथ नाट्यशास्त्र है। अतः सही उत्तर है (ग) नाट्यशास्त्र।
व्याख्या:
भरतमुनि ने नाट्यशास्त्र नामक ग्रंथ की रचना की जो नाट्यकला से संबंधित है।
Q5.5. पखावज को प्राचीन काल में किस नाम से जाना जाता था? (क) आलिंग (ख) आंकिक (ग) ऊर्ध्वक (घ) एकमुखी
उत्तर:
पखावज को प्राचीन काल में आंकिक नाम से जाना जाता था। अतः सही उत्तर है (ख) आंकिक।
व्याख्या:
इतिहास में पखावज को आंकिक के नाम से भी जाना जाता था।
Q6.6. भरतकाल में वाद्यों के खोल किससे बनाए जाते थे? (क) लकड़ी (ख) मिट्टी (ग) काँसा (घ) ताँबा
उत्तर:
भरतकाल में वाद्यों के खोल लकड़ी से बनाए जाते थे। अतः सही उत्तर है (क) लकड़ी।
व्याख्या:
भरतकालीन संगीत वाद्यों के खोल मुख्यतः लकड़ी से बनाए जाते थे।
Q7.7. पखावज के बायें मुख पर किसका लेप लगाया जाता है? (क) लौह चूर्ण (ख) स्याही (ग) गीला आटा (घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर:
पखावज के बायें मुख पर गीला आटा का लेप लगाया जाता है। अतः सही उत्तर है (ग) गीला आटा।
व्याख्या:
पखावज के बायें मुख पर गीला आटा लगाकर उसकी ध्वनि को नियंत्रित किया जाता है।
Q8.8. मृदंग वाद्य किस श्रेणी के अंतर्गत आता है? (क) तत् (ख) घन (ग) सुषिर (घ) अवनद्ध
उत्तर:
मृदंग वाद्य अवनद्ध वाद्यों की श्रेणी में आता है। अतः सही उत्तर है (घ) अवनद्ध।
व्याख्या:
मृदंग एक अवनद्ध वाद्य है क्योंकि इसकी ध्वनि खोल से निकलती है।
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Sangeet · Class 11