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Chapter 4

🎓 Class 9📖 Sprash📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 10Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

धीरंजन मालवे

व्याख्या

धीरंजन मालवे

धीरंजन मालवे का जन्म बिहार के नालंदा जिले के डुँवरावाँ गाँव में 9 मार्च 1952 को हुआ। उन्होंने एम.एससी. (सांख्यिकी), एम.बी.ए. और एल.एल.बी. की डिग्रियाँ प्राप्त की हैं। वे आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़े हुए हैं और वैज्ञानिक जानकारी को आम जनता तक पहुँचाने के कार्य में सक्रिय हैं। मालवे ने रेडियो विज्ञान पत्रिका 'ज्ञान-विज्ञान' का संपादन और प्रसारण भी किया। उन्होंने कई भारतीय वैज्ञानिकों की संक्षिप्त जीवनियाँ लिखी हैं, जो उनकी पुस्तक 'विश्व-विख्यात भारतीय वैज्ञानिक' में संकलित हैं। उनकी भाषा सरल, स्पष्ट और वैज्ञानिक शब्दावली से युक्त है, जिसमें आवश्यकतानुसार अन्य भाषाओं के शब्दों का भी प्रयोग होता है। इस पाठ में धीरंजन मालवे के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया गया है, जो पाठ के लेखक हैं। **Table on page 11 (23×3)** | नील वर्णीय | - | नीले रंग का | | --- | --- | --- | | असंख्य | - | अनगिनत, जिसकी संख्या बताना संभव न हो | | आभा | - | चमक | | जिज्ञासा | - | जानने की इच्छा | | विश्वविख्यात | - | संसार में प्रसिद्ध | | भौतिकी | - | वह विज्ञान जिसमें तत्वों के गुण आदि का विवेचन किया गया हो, फ्रिजिक्स | | अतिशयोक्ति | - | किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना | | हासिल | - | प्राप्त | | शोधकार्य | - | खोज, अनुसंधान कार्य | | प्रतिभावान | - | जिसमें विलक्षण-बौद्धिक शक्ति हो | | वित्त विभाग | - | किसी राज्य के आय-व्यय से संबंधित विभाग | | रुझान | - | झुकाव, किसी और प्रवृत्त होना | | उपकरण | - | साधन, औजार | | समृद्ध | - | उन्नतशील | | भ्रांति | - | संदेह, अयथार्थ ज्ञान | | सृजित | - | रचा हुआ | | समक्ष | - | सामने | | अध्यापन | - | पढ़ाना | | परिणति | - | परिणाम | | ठोस रवे | - | बिल्लौर, मणिभ | | फोटॉन | - | प्रकाश का अंश | | एकवर्णीय | - | एक रंग का | | ऊर्जा | - | शक्ति, बल | **Table on page 12 (15×3)** | प्रायोगिक | - | प्रयोग संबंधित | | --- | --- | --- | | तीव्रधारा | - | तेज धारा | | इंफ्रा रेड स्पेक्ट्रोस्कोपी- | - | अवरक्त स्पेक्ट्रम विज्ञान | | आणविक | - | अणु का | | परमाणविक | - | परमाणु का | | संरचना | - | बनावट | | संश्लेषण | - | मिलान करना (सिंथेसिस) | | कृत्रिम | - | बनाया हुआ, बनावटी | | अक्षुण्ण | - | अखंडित | | कट्टर | - | दृढ़ | | परिहास | - | हँसी-मजाक | | आहादित | - | आनंदित | | आलोकित | - | प्रकाशित | | प्रतिमूर्ति | - | अनुकृति, चित्र, प्रतिमा | | नोबेल पुरस्कार | - | यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का सर्वोच्च पुरस्कार है जो साहित्य, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, अर्थशास्त्र तथा शांति के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य के लिए दिया जाता है। नोबेल पुरस्कार के जन्मदाता अल्फ्रेड नोबेल हैं, जिनका जन्म सन् 1833 में स्वीडन स्टॉकहोम नामक स्थान में हुआ था। अल्फ्रेड नोबेल ने सन् 1866 में विध्वंसकारी डायनामाइट का आविष्कार किया था। इस पुरस्कार को सर्वप्रथम सन् 1901 में दिया गया। |

  • धीरंजन मालवे का जन्म 9 मार्च 1952 को बिहार के नालंदा जिले के डुँवरावाँ गाँव में हुआ।
  • उन्होंने एम.एससी. (सांख्यिकी), एम.बी.ए., और एल.एल.बी. की उपाधियाँ प्राप्त की हैं।
  • आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़े हुए हैं और वैज्ञानिक जानकारी का प्रसार करते हैं।
  • रेडियो विज्ञान पत्रिका 'ज्ञान-विज्ञान' के संपादक रहे हैं।
  • भारतीय वैज्ञानिकों की संक्षिप्त जीवनियाँ लिखी हैं।
  • भाषा सरल, स्पष्ट और वैज्ञानिक शब्दावली से युक्त है।
  • 📌 एम.एससी. (सांख्यिकी) - सांख्यिकी विज्ञान में स्नातकोत्तर डिग्री।
  • 📌 आकाशवाणी - भारत सरकार का रेडियो प्रसारण संगठन।
  • 📌 दूरदर्शन - भारत सरकार का टेलीविजन प्रसारण संगठन।

वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन्

व्याख्या

वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन्

यह अनुभाग नोबेल पुरस्कार विजेता प्रथम भारतीय वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रामन् के जीवन और उनके वैज्ञानिक योगदान का विस्तृत परिचय प्रस्तुत करता है। रामन् का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। उनके पिता गणित और भौतिकी के शिक्षक थे, जिन्होंने रामन् को बचपन से ही गणित और भौतिकी की मजबूत नींव दी। रामन् बचपन से ही विज्ञान के रहस्यों को समझने के लिए उत्सुक थे। उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और मात्र अठारह वर्ष की आयु में भारत सरकार के वित्त विभाग में सहायक जनरल एकाउंटेंट के पद पर नियुक्त हुए। रामन् की वैज्ञानिक जिज्ञासा ने उन्हें समुद्र के नीले रंग के रहस्य की खोज की ओर प्रेरित किया। उनकी इस खोज ने 'रामन् प्रभाव' के रूप में प्रसिद्धि पाई, जो प्रकाश की प्रकृति और पदार्थों के आणविक संरचना के अध्ययन में क्रांतिकारी साबित हुई। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर का पद स्वीकार किया और शोध कार्यों में संलग्न रहे। रामन् को 1929 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारतीय वैज्ञानिकों के लिए एक गौरवशाली उपलब्धि थी। उन्होंने विज्ञान के प्रचार-प्रसार के लिए कई संस्थाएँ स्थापित कीं, जैसे कि रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट। उनका जीवन संघर्षमय था, लेकिन उनकी वैज्ञानिक चेतना और राष्ट्रीय भावना ने उन्हें महान बनाया।

  • चंद्रशेखर वेंकट रामन् का जन्म 7 नवंबर 1888 को तिरुचिरापल्ली में हुआ।
  • उनके पिता गणित और भौतिकी के शिक्षक थे, जिन्होंने उन्हें बचपन से शिक्षा दी।
  • रामन् ने मात्र 18 वर्ष की आयु में भारत सरकार में नौकरी शुरू की।
  • उन्होंने समुद्र के नीले रंग के रहस्य की खोज की, जिसे रामन् प्रभाव कहा जाता है।
  • सरकारी नौकरी छोड़कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने।
  • 1929 में नोबेल पुरस्कार विजेता बने, भारत के प्रथम नोबेल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक।
  • रामन् रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की।
  • 📌 रामन् प्रभाव - प्रकाश की किरणों के वर्ण में तरल या ठोस पदार्थों से गुजरने पर होने वाला परिवर्तन।
  • 📌 नोबेल पुरस्कार - विज्ञान, साहित्य और शांति के क्षेत्र में दिया जाने वाला विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार।
  • 📌 कलकत्ता विश्वविद्यालय - भारत का एक प्रमुख शैक्षणिक संस्थान।

रामन् की वैज्ञानिक जिज्ञासा और शोधकार्य

व्याख्या

रामन् की वैज्ञानिक जिज्ञासा और शोधकार्य

रामन् की वैज्ञानिक जिज्ञासा बचपन से ही तीव्र थी। वे केवल प्रकृति प्रेमी ही नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक भी थे। समुद्र की नीली आभा ने उन्हें यह प्रश्न करने पर मजबूर किया कि समुद्र का रंग नीला क्यों होता है? इस प्रश्न के उत्तर की खोज में उन्होंने अनेक प्रय

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.रामन् भावुक प्रकृति प्रेमी के अलावा और क्या थे?

उत्तर:

रामन् भावुक प्रकृति प्रेमी के अलावा प्रतिभावान वैज्ञानिक और शोधकर्ता भी थे।

व्याख्या:

पाठ में बताया गया है कि रामन् न केवल प्रकृति प्रेमी थे, बल्कि उनकी वैज्ञानिक चेतना और प्रतिभा भी थी।

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Q2.समुद्र को देखकर रामन् के मन में कौन-सी दो जिज्ञासाएँ उठीं?

उत्तर:

रामन् के मन में यह जिज्ञासा उठी कि समुद्र की लहरें क्यों उठती हैं और उनकी गति का कारण क्या है।

व्याख्या:

पाठ में समुद्र की लहरों को देखकर रामन् की वैज्ञानिक जिज्ञासा का वर्णन है, जो उनकी खोजों की प्रेरणा बनी।

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Q3.रामन् के पिता ने उनमें किन विषयों की सशक्त नींव डाली?

उत्तर:

रामन् के पिता ने उनमें गणित और विज्ञान की सशक्त नींव डाली।

व्याख्या:

पाठ में उल्लेख है कि रामन् के पिता ने उनके ज्ञान की मजबूत आधारशिला रखी, जो उनके वैज्ञानिक विकास में सहायक रही।

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Q4.वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के अध्ययन के द्वारा रामन् क्या करना चाहते थे?

उत्तर:

रामन् वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के अध्ययन से ध्वनि की प्रकृति और उसके भौतिक गुणों को समझना चाहते थे।

व्याख्या:

पाठ में बताया गया है कि रामन् ने ध्वनि तरंगों के अध्ययन से वैज्ञानिक तथ्यों को जानने का प्रयास किया।

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Q5.सरकारी नौकरी छोड़ने के पीछे रामन् की क्या भावना थी?

उत्तर:

रामन् सरकारी नौकरी छोड़कर स्वतंत्र शोध करना चाहते थे क्योंकि वे सरकारी नियमों में बंधे बिना अपनी खोजों पर ध्यान केंद्रित करना चाहते थे।

व्याख्या:

पाठ में रामन् की स्वतंत्रता और शोध के प्रति लगाव का वर्णन है, जो नौकरी छोड़ने का कारण था।

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Q6.‘रामन् प्रभाव’ की खोज के पीछे कौन-सा सवाल हिलोरें ले रहा था?

उत्तर:

रामन् प्रभाव की खोज के पीछे यह सवाल था कि प्रकाश की तरंगें जब किसी पदार्थ से टकराती हैं तो उसमें क्या परिवर्तन होता है।

व्याख्या:

पाठ में बताया गया है कि रामन् ने प्रकाश के व्यवहार को समझने के लिए इस सवाल का अध्ययन किया।

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Q7.प्रकाश तरंगों के बारे में आइंस्टाइन ने क्या बताया?

उत्तर:

आइंस्टाइन ने बताया कि प्रकाश तरंगों के साथ कणों का व्यवहार भी करता है, जिसे फोटॉन कहा जाता है।

व्याख्या:

पाठ में आइंस्टाइन के प्रकाश के कण सिद्धांत का उल्लेख है, जो रामन् के शोध से संबंधित है।

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Q8.रामन् की खोज ने किन अध्ययनों को सहज बनाया?

उत्तर:

रामन् की खोज ने पदार्थों की संरचना और प्रकाश के प्रभाव के अध्ययन को सहज और प्रभावी बनाया।

व्याख्या:

पाठ में बताया गया है कि रामन् प्रभाव के कारण भौतिकी और रसायन विज्ञान में नए शोध संभव हुए।

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