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Chapter 4

🎓 Class 10📖 Samkalin Bharat📖 7 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~11 मिनट
जल संसाधनअध्याय 4 / 7Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

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कृषि

व्याख्या

कृषि

भारत कृषि के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण देश है जहाँ लगभग दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है। कृषि हमारे लिए खाद्यान्न उत्पन्न करने का मुख्य स्रोत है, जो भोजन, वस्त्र और आवास जैसी आवश्यक वस्तुओं के लिए कच्चा माल प्रदान करती है। इसके अतिरिक्त, चाय, कॉफी, मसाले जैसे उत्पादों का निर्यात भी भारत की अर्थव्यवस्था में योगदान देता है। भारत में कृषि का इतिहास प्राचीन है और यह हजारों वर्षों से सामाजिक, सांस्कृतिक और भौतिक परिवर्तनों के साथ विकसित होती रही है। कृषि न केवल जीविका का साधन है, बल्कि यह देश की आर्थिक रीढ़ भी है। कृषि से जुड़े उद्योगों को भी कच्चा माल मिलता है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। इस प्रकार, कृषि का सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत व्यापक है।

  • भारत की लगभग दो-तिहाई जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है।
  • कृषि खाद्यान्न के साथ-साथ उद्योगों के लिए कच्चा माल भी प्रदान करती है।
  • चाय, कॉफी, मसाले जैसे कृषि उत्पादों का निर्यात होता है।
  • कृषि भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।
  • कृषि का इतिहास हजारों वर्षों पुराना है।
  • 📌 कृषि: भूमि की उपजाऊ क्षमता का उपयोग कर फसल उगाने की प्रक्रिया।
  • 📌 खाद्यान्न: भोजन के लिए उगाई जाने वाली फसलें जैसे चावल, गेहूँ।
  • 📌 निर्यात: किसी वस्तु को देश के बाहर बेचना।

कृषि के प्रकार

व्याख्या

कृषि के प्रकार

भारत में कृषि के विभिन्न प्रकार प्रचलित हैं, जो भौगोलिक, जलवायु, मिट्टी, जल स्रोत और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं। कृषि के मुख्य प्रकार हैं: प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि, गहन जीविका कृषि, और वाणिज्यिक कृषि। प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि में किसान छोटे-छोटे खेतों में पारंपरिक औजारों से खेती करते हैं, जो मानसून और प्राकृतिक मिट्टी की उर्वरता पर निर्भर होती है। इसे कर्तन-दहन प्रणाली (slash and burn) भी कहा जाता है, जहाँ वनस्पति को काटकर जलाया जाता है और भूमि पर फसल उगाई जाती है। जब भूमि की उर्वरता कम हो जाती है, तो किसान दूसरे क्षेत्र में चले जाते हैं। इस प्रकार की कृषि भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों जैसे असम, मेघालय, नागालैंड में 'झूम' के नाम से जानी जाती है। गहन जीविका कृषि उन क्षेत्रों में होती है जहाँ जनसंख्या अधिक होती है और किसान सीमित भूमि से अधिक उत्पादन के लिए रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और सिंचाई का उपयोग करते हैं। भूमि के छोटे-छोटे टुकड़े होने के कारण उत्पादन बढ़ाने के प्रयास होते हैं। वाणिज्यिक कृषि में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग होता है, जैसे उच्च पैदावार वाले बीज, रासायनिक उर्वरक, कीटनाशक और सिंचाई। इसमें उत्पादन मुख्यतः बाजार के लिए होता है। रोपण कृषि भी वाणिज्यिक कृषि का एक प्रकार है, जिसमें एकल फसल बड़े क्षेत्र में उगाई जाती है, जैसे चाय, कॉफी, रबड़, केला। यह कृषि पूंजी और श्रम-सघन होती है और इसके लिए परिवहन, संचार और बाजार की सुविधाएँ आवश्यक होती हैं।

  • प्रारंभिक जीविका निर्वाह कृषि में पारंपरिक औजारों का उपयोग होता है।
  • कर्तन-दहन प्रणाली में वनस्पति काटकर जलाकर खेती की जाती है।
  • गहन जीविका कृषि में रासायनिक उर्वरक और सिंचाई का प्रयोग होता है।
  • वाणिज्यिक कृषि में उत्पादन बाजार के लिए होता है।
  • रोपण कृषि एकल फसल की खेती है, जैसे चाय और कॉफी।
  • 📌 कर्तन-दहन प्रणाली: वनस्पति काटकर जलाकर खेती करने की विधि।
  • 📌 रोपण कृषि: एकल फसल की खेती जो पूंजी और श्रम-सघन होती है।
  • 📌 वाणिज्यिक कृषि: बाजार के लिए उत्पादन करने वाली कृषि।

शस्य प्रारूप

व्याख्या

शस्य प्रारूप

भारत में कृषि के तीन मुख्य शस्य ऋतुएँ हैं: रबी, खरीफ और जायद। रबी फसलें शीत ऋतु में अक्टूबर से दिसंबर के बीच बोई जाती हैं और अप्रैल से जून के बीच काटी जाती हैं। मुख्य रबी फसलों में गेहूँ, जौ, मटर, चना और सरसों शामिल हैं। ये फसलें मुख्यतः उत्तर भारत

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. बहुवैकल्पिक प्रश्न (i) निम्नलिखित में से कौन-सा उस कृषि प्रणाली को दर्शाता है जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है? (क) स्थानांतरी कृषि (ख) रोपण कृषि (ग) बागवानी (घ) गहन कृषि (ii) इनमें से कौन-सी रबी फसल है? (क) चावल (ख) मोटे अनाज (ग) चना (घ) कपास (iii) इनमें से कौन-सी एक फलीदार फसल है? (क) दाल (ख) मोटे अनाज (ग) ज्वार तिल (घ) तिल
A.(i) (क) स्थानांतरी कृषि, (ख) रोपण कृषि, (ग) बागवानी, (घ) गहन कृषि
B.(ii) (क) चावल, (ख) मोटे अनाज, (ग) चना, (घ) कपास
C.(iii) (क) दाल, (ख) मोटे अनाज, (ग) ज्वार तिल, (घ) तिल

उत्तर:

उत्तर: (i) (क) स्थानांतरी कृषि — यह कृषि प्रणाली है जिसमें एक ही फसल लंबे-चौड़े क्षेत्र में उगाई जाती है। (ii) (ग) चना — चना रबी फसल है जो ठंडे मौसम में उगाई जाती है। (iii) (क) दाल — दाल फलीदार फसल होती है।

व्याख्या:

स्पष्टीकरण: (i) स्थानांतरी कृषि में एक ही फसल बड़े क्षेत्र में उगाई जाती है, जैसे गेहूँ, धान। (ii) रबी फसलें ठंडे मौसम में बोई जाती हैं, जैसे चना, गेहूँ। (iii) फलीदार फसलें वे होती हैं जिनके फलियां होती हैं, जैसे दाल।

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Q2.2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 30 शब्दों में दीजिए। (i) एक पेय फसल का नाम बताएँ तथा उसको उगाने के लिए अनुकूल भौगोलिक परिस्थितियों का विवरण दें। (ii) भारत की एक खाद्य फसल का नाम बताएँ और जहाँ यह पैदा की जाती है उन क्षेत्रों का विवरण दें। (iii) सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधार कार्यक्रमों की सूची बनाएँ।

उत्तर:

उत्तर: (i) चाय एक प्रमुख पेय फसल है। इसे उगाने के लिए ठंडा और नम मौसम, अच्छी वर्षा (150-250 सेमी), और ऊंचाई (600-2000 मीटर) अनुकूल होती है। भारत में असम, पश्चिम बंगाल, और नॉर्थ-ईस्ट के पहाड़ी क्षेत्र चाय उत्पादन के लिए उपयुक्त हैं। (ii) गेहूँ भारत की प्रमुख खाद्य फसल है। यह मुख्यतः उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, और राजस्थान के कुछ भागों में उगाई जाती है। गेहूँ ठंडे और शुष्क मौसम में अच्छी उपज देती है। (iii) सरकार द्वारा किसानों के हित में किए गए संस्थागत सुधारों में भूमि सुधार, सिंचाई सुविधाओं का विकास, फसल बीमा योजना, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की घोषणा, कृषि ऋण की सुविधा, और सहकारी समितियों का गठन शामिल हैं।

व्याख्या:

स्पष्टीकरण: (i) चाय की खेती के लिए जलवायु और ऊंचाई महत्वपूर्ण हैं। (ii) गेहूँ ठंडे मौसम में उगाई जाती है और मुख्य रूप से उत्तर भारत में होती है। (iii) संस्थागत सुधार किसानों को आर्थिक और तकनीकी सहायता प्रदान करते हैं जिससे कृषि उत्पादन बढ़ता है।

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Q3.3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लगभग 120 शब्दों में दीजिए। (i) कृषि उत्पादन में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा किए गए उपाय सुझाइए। (ii) चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियों का वर्णन करें।

उत्तर:

उत्तर: (i) कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने कई उपाय किए हैं जैसे: - हरित क्रांति के तहत उच्च उपज देने वाली बीजों का प्रचार। - सिंचाई सुविधाओं का विस्तार। - उर्वरकों और कीटनाशकों का उचित उपयोग। - कृषि यंत्रों का विकास और वितरण। - किसानों को कृषि ऋण और बीमा की सुविधा। - बाजार तक पहुँच बढ़ाने के लिए सहकारी समितियों का गठन। - प्रशिक्षण और कृषि शिक्षा का प्रावधान। (ii) चावल की खेती के लिए उपयुक्त भौगोलिक परिस्थितियाँ हैं: - गर्म और नम जलवायु। - वार्षिक वर्षा 150 से 200 सेमी। - जल निकासी की सुविधा वाली मिट्टी। - तापमान 20 से 38 डिग्री सेल्सियस। - नदियों के किनारे या सिंचाई की सुविधा वाले क्षेत्र।

व्याख्या:

स्पष्टीकरण: (i) सरकार के उपायों से कृषि उत्पादन में सुधार हुआ है और किसानों को आर्थिक सहायता मिली है। (ii) चावल की खेती के लिए जलवायु, वर्षा, तापमान और मिट्टी की विशेष आवश्यकताएँ होती हैं।

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Q4.परियोजना कार्य 1. किसानों की साक्षरता विषय पर एक सामूहिक वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन करें। 2. भारत के मानचित्र में गेहूँ उत्पादन क्षेत्र दर्शाइए।

उत्तर:

उत्तर: 1. इस परियोजना कार्य में छात्रों को किसानों की साक्षरता के महत्व, उसकी वर्तमान स्थिति, और सुधार के उपायों पर चर्चा करनी चाहिए। वाद-विवाद के माध्यम से विभिन्न दृष्टिकोण सामने आएंगे। 2. भारत के मानचित्र में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान के कुछ भागों को गेहूँ उत्पादन क्षेत्र के रूप में चिन्हित करें।

व्याख्या:

स्पष्टीकरण: परियोजना कार्य छात्रों को विषय की गहन समझ और व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करता है। मानचित्र पर क्षेत्र चिन्हित करने से भौगोलिक ज्ञान बढ़ता है।

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Q5.क्रियाकलाप ऊपर-नीचे और दायें-बायें चलते हुए वर्ग पहेली को सुलझाएँ और छिपे उत्तर दूँढ़ें। **नोट :** पहेली के उत्तर अंग्रेजी के शब्दों में हैं। (i) भारत की दो खाद्य फसलें। (ii) यह भारत की ग्रीष्म फसल ऋतु है। (iii) अरहर, मूँग, चना, उड़द जैसी दालों से... मिलता है। (iv) यह एक मोटा अनाज है। (v) भारत की दो महत्वपूर्ण पेय फसल हैं... (vi) काली मिट्टी पर उगाई जाने वाली चार रेशेदार फसलों में से एक।

उत्तर:

उत्तर: (i) चावल, गेहूँ (ii) खरीफ (iii) प्रोटीन (iv) बाजरा (v) चाय, कॉफ़ी (vi) कपास

व्याख्या:

स्पष्टीकरण: (i) चावल और गेहूँ भारत की मुख्य खाद्य फसलें हैं। (ii) खरीफ फसल ग्रीष्म ऋतु में बोई जाती है। (iii) दालों से प्रोटीन प्राप्त होता है। (iv) बाजरा एक मोटा अनाज है। (v) चाय और कॉफ़ी भारत की प्रमुख पेय फसलें हैं। (vi) कपास काली मिट्टी में उगाई जाने वाली रेशेदार फसल है।

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Q6.कृषि क्यों मानव जीवन का आधार मानी जाती है? इसके दो प्रमुख कारण बताइए।

उत्तर:

कृषि मानव जीवन का आधार है क्योंकि यह भोजन, वस्त्र और आवास जैसी आवश्यक वस्तुओं का मुख्य स्रोत है। इसके अलावा, यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और अधिकांश जनसंख्या को रोजगार प्रदान करती है।

व्याख्या:

कृषि मानव जीवन के लिए आवश्यक वस्तुओं जैसे भोजन, वस्त्र और आवास उपलब्ध कराती है। यह रोजगार का प्रमुख स्रोत है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में। उदाहरण के लिए, भारत की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है।

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Q7.भारत में कृषि के कौन-कौन से प्रमुख प्रकार पाए जाते हैं? उनमें से दो का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

उत्तर:

भारत में कृषि के प्रमुख प्रकार हैं मानसून आधारित कृषि, सिंचित कृषि, पर्वतीय कृषि, बागवानी और पशुपालन आधारित कृषि। मानसून आधारित कृषि वर्षा पर निर्भर होती है, जबकि सिंचित कृषि में नहर और ट्यूबवेल जैसे सिंचाई स्रोतों का उपयोग होता है।

व्याख्या:

भारत में कृषि के प्रकार जलवायु, मिट्टी और जल स्रोत पर निर्भर करते हैं। मानसून आधारित कृषि वर्षा पर निर्भर होती है, जैसे अधिकांश भागों में। सिंचित कृषि में नहर, ट्यूबवेल आदि से सिंचाई होती है जिससे उत्पादन बढ़ता है। उदाहरण के लिए, पंजाब में सिंचित कृषि प्रचलित है।

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Q8.चित्र 4.3 में दिखाए गए उत्तर-पूर्वी भारत में बाँस की कृषि के बारे में बताइए।

उत्तर:

उत्तर-पूर्वी भारत में बाँस की कृषि प्रमुख है, जहाँ पर्वतीय और आद्रभूमि होती है। यहाँ की जलवायु और मिट्टी बाँस के लिए उपयुक्त हैं। बाँस का उपयोग निर्माण और हस्तशिल्प में होता है।

व्याख्या:

चित्र 4.3 में उत्तर-पूर्वी भारत के पर्वतीय इलाके में बाँस की खेती दिखाई गई है। यह क्षेत्र आद्रभूमि और पहाड़ी होने के कारण बाँस की खेती के लिए उपयुक्त है। बाँस से स्थानीय लोगों को आर्थिक लाभ होता है।

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