NCERTCh 4निःशुल्क

Chapter 4

🎓 Class 9📖 Ganga📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 12Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय : यतींद्र मिश्र और लता मंगेशकर

व्याख्या

परिचय : यतींद्र मिश्र और लता मंगेशकर

इस अध्याय की शुरुआत यतींद्र मिश्र के परिचय से होती है, जो एक प्रसिद्ध कवि, लेखक और संपादक हैं। उनका जन्म 1977 में अयोध्या में हुआ और उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. किया। वे कविता, संगीत और समाज-संस्कृति के विभिन्न क्षेत्रों में रुचि रखते हैं। इसके बाद अध्याय में भारत रत्न से सम्मानित महान गायिका लता मंगेशकर का परिचय दिया गया है। लता मंगेशकर का जन्म इंदौर, मध्यप्रदेश में हुआ था। उन्होंने मात्र पाँच वर्ष की आयु में अपने पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और जीवनभर संगीत के प्रति समर्पित रहीं। इस खंड में दोनों व्यक्तित्वों का परिचय इस प्रकार प्रस्तुत है कि पाठक को उनके जीवन और कार्यों के प्रति उत्सुकता उत्पन्न हो।

  • यतींद्र मिश्र एक प्रसिद्ध कवि और लेखक हैं।
  • लता मंगेशकर भारत रत्न से सम्मानित महान गायिका हैं।
  • लता जी ने पाँच वर्ष की उम्र में संगीत की शिक्षा शुरू की।
  • दोनों व्यक्तित्व संगीत और साहित्य के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
  • 📌 भारत रत्न: भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • 📌 काव्य-संग्रह: कविताओं का संग्रह।
  • 📌 शास्त्रीय संगीत: भारतीय परंपरागत संगीत।

लता मंगेशकर से साक्षात्कार: प्रारंभिक जीवन और पिताजी के संस्कार

व्याख्या

लता मंगेशकर से साक्षात्कार: प्रारंभिक जीवन और पिताजी के संस्कार

इस खंड में यतींद्र मिश्र और लता मंगेशकर के बीच संवाद प्रस्तुत है जिसमें लता जी अपने बचपन, परिवार और विशेषकर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के संस्कारों के बारे में बताती हैं। उन्होंने बताया कि पिताजी का अनुशासन सख्त था, परंतु उसमें स्नेह भी था। वे बिना डांट-डपट के अपनी गंभीर दृष्टि से बच्चों को समझा देते थे। पिताजी संगीत और नाटकों में गहरी रुचि रखते थे और उनके नाटकों में लंबी रागदारी वाली गायन परंपरा थी। उन्होंने मराठी रंगमंच में कर्नाटक और पंजाब के संगीत को भी शामिल किया। घर में संगीत की सभा होती थी जहाँ शास्त्रीय संगीत का अभ्यास होता था। इस खंड में लता जी के पिताजी से मिली शिक्षा और संस्कारों का महत्व स्पष्ट होता है, जो उनके जीवन के संघर्षों में सहारा बने।

  • पिताजी का अनुशासन सख्त लेकिन स्नेहपूर्ण था।
  • पिताजी के नाटकों में लंबी रागदारी वाले गायन की परंपरा थी।
  • मराठी रंगमंच में कर्नाटक और पंजाब के संगीत को शामिल किया गया।
  • घर में नियमित संगीत की सभाएँ होती थीं।
  • पिताजी से स्वाभिमान और सही बातों पर खड़े रहने की शिक्षा मिली।
  • 📌 रागदारी: राग के अनुसार गायन की शैली।
  • 📌 स्वाभिमान: आत्मसम्मान।
  • 📌 मराठी रंगमंच: महाराष्ट्र की रंगमंच परंपरा।

बचपन के अनुभव और फिल्मों में अभिनय

व्याख्या

बचपन के अनुभव और फिल्मों में अभिनय

इस भाग में लता मंगेशकर अपने बचपन के खेलों और फिल्मों के प्रति अपनी रुचि के बारे में बताती हैं। वे बताती हैं कि बचपन में वे और उनके भाई-बहन फिल्में देखकर उनकी नकल करते थे, खासकर धार्मिक फिल्मों की। उन्होंने प्रभात फिल्म कंपनी की 'संत तुकाराम' फिल्म की

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.1. लता जी ने अपने पिताजी से क्या-क्या सीखा? (क) अनुशासन और नियम के साथ जीना (ख) भय और संशय के साथ जीना (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना (घ) चतुराई और संयम के साथ जीना 2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय किस जीवन-मूल्य का घोतक है? (क) संघर्ष (ख) निराशा (ग) भौतिकता (घ) कर्तव्यनिष्ठा 3. “बिल्कुल ठेठ गाँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है...” ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की कौन-सी परंपरा उजागर होती है? (क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव (ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी (ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका 4. “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” — इस कहावत का प्रतीकात्मक अर्थ क्या है? (क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है। (ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है। (ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है। (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।
A.1. (क) अनुशासन और नियम के साथ जीना (ख) भय और संशय के साथ जीना (ग) स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना (घ) चतुराई और संयम के साथ जीना
B.2. (क) संघर्ष (ख) निराशा (ग) भौतिकता (घ) कर्तव्यनिष्ठा
C.3. (क) संगीत पर आधुनिकता का प्रभाव (ख) लोकगीतों की लोकप्रियता में कमी (ग) धार्मिक कार्यक्रमों में संगीत का महत्व (घ) संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका
D.4. (क) नाव गाँव में नहीं रहती, नदी में बहती है। (ख) इस नश्वर संसार में सब कुछ नष्ट हो जाता है। (ग) फिल्मों में गीत गाने से बहुत प्रसिद्धि मिलती है। (घ) जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं।

उत्तर:

1. लता जी ने अपने पिताजी से अनुशासन और नियम के साथ जीना, स्वाभिमान और सच्चाई के साथ जीना सीखा। इसलिए (क) और (ग) सही उत्तर हैं। 2. पिताजी की मृत्यु के बाद परिवार सँभालने का लता जी का निर्णय कर्तव्यनिष्ठा का प्रतीक है, इसलिए सही उत्तर (घ) है। 3. ‘मंगलागौर’ के वर्णन से भारतीय समाज की संगीत की महत्वपूर्ण सामाजिक भूमिका उजागर होती है, इसलिए सही उत्तर (घ) है। 4. कहावत “गाव गेला वाहुन, नाव गेला राहुन” का प्रतीकात्मक अर्थ है कि जीवन अस्थायी है, पर कर्म अमर रहते हैं, इसलिए सही उत्तर (घ) है।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न के विकल्पों को समझकर सही उत्तर चुना गया है। लता जी के पिता से सीखे गए जीवन मूल्यों में अनुशासन, नियम, स्वाभिमान और सच्चाई प्रमुख हैं। परिवार सँभालने का निर्णय कर्तव्यनिष्ठा दर्शाता है। मंगलागौर उत्सव में संगीत की सामाजिक भूमिका स्पष्ट होती है। कहावत जीवन की नश्वरता और कर्म की अमरता को दर्शाती है।

EasyNCERT
Q2.5. कोर्स में साथ गाने वाली लड़कियों के साथ लता जी के संबंध कैसे थे? (क) औपचारिक (ख) कामकाजी (ग) आत्मीय (घ) प्रतिस्पर्धात्मक 6. लता मंगेशकर के अनुसार बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? (क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं। (ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है। (ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं। (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है। 7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की जो छवि बनती है, वह मुख्यत: कैसी है? (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की (ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध (ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति (घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली
A.5. (क) औपचारिक (ख) कामकाजी (ग) आत्मीय (घ) प्रतिस्पर्धात्मक
B.6. (क) संगीत द्वारा दीपक जलाए जा सकते हैं। (ख) मेघराग गाने से वर्षा होने लगती है। (ग) सुर में वाद्य बजाने से तार टूट जाते हैं। (घ) संगीत में अपरिमित शक्ति होती है।
C.7. (क) सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की (ख) प्रसिद्धि, परिवार को समर्पित और आत्ममुग्ध (ग) कठोर सिद्धांतवादी और व्यावहारिक व्यक्ति (घ) आधुनिकता विरोधी रूढ़िवादी विचारों वाली

उत्तर:

5. लता जी के साथ गाने वाली लड़कियों के साथ संबंध आत्मीय थे, इसलिए सही उत्तर (ग) है। 6. बाबा हरिदास और तानसेन की कथाओं से यह निष्कर्ष निकलता है कि संगीत में अपरिमित शक्ति होती है, इसलिए सही उत्तर (घ) है। 7. पूरे साक्षात्कार में लता मंगेशकर की छवि मुख्यत: सादगी, समर्पण और आत्मसम्मान की है, इसलिए सही उत्तर (क) है।

व्याख्या:

लता जी के सहयोगियों के साथ संबंध आत्मीय थे, जो उनके सौहार्दपूर्ण व्यवहार को दर्शाता है। बाबा हरिदास और तानसेन की कथाएँ संगीत की शक्ति को दर्शाती हैं। साक्षात्कार में लता जी की छवि सरल, समर्पित और आत्मसम्मान से भरी हुई प्रस्तुत होती है।

EasyNCERT
Q3.1. “पिताजी उस समय पूछते थे, ‘समझ गए न?’... इसके बाद वे कहते थे कि ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो।’” यह प्रसंग पारिवारिक अनुशासन और स्नेह के संतुलन का प्रतीक है। कैसे? (संकेत— यहाँ अनुशासन में डर है या सम्मान?) 2. लता मंगेशकर पर अपने पिताजी पं. दीनानाथ मंगेशकर के व्यक्तित्व का क्या प्रभाव पड़ा? उनके कौन-कौन से कार्यों और व्यवहार में उनके पिता का प्रभाव दिखाई देता है? 3. “मैंने अपने पिताजी का नाम, थोड़ा ही सही मगर, आगे बढ़ाया।” ‘नाम आगे बढ़ाने’ का लता जी के लिए क्या अर्थ है? क्या यह सिर्फ प्रसिद्धि पाना है या इससे कोई महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व भी जुड़ा हुआ है? 4. किसी भी कार्य को पूरा करने में सहयोगियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। साक्षात्कार के आधार पर बताइए कि लता जी के अपने सहयोगियों के साथ संबंध कैसे थे?

उत्तर:

1. यह प्रसंग अनुशासन और स्नेह के बीच संतुलन को दर्शाता है क्योंकि पिताजी बच्चों से समझदारी से बात करते हैं, उन्हें डराकर नहीं बल्कि सम्मान देकर अनुशासन सिखाते हैं। ‘समझ गए न?’ पूछकर वे बच्चों की समझ की पुष्टि करते हैं और ‘अच्छा अब जाओ, बाहर जाकर खेलो’ कहकर स्नेह और स्वतंत्रता भी देते हैं। 2. लता मंगेशकर पर उनके पिता का गहरा प्रभाव था। उनके पिता की अनुशासनप्रियता, संगीत के प्रति समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और सादगी उनके कार्यों और व्यवहार में स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने लता को संगीत की गहराई और जीवन के मूल्यों का पाठ पढ़ाया। 3. ‘नाम आगे बढ़ाना’ का अर्थ केवल प्रसिद्धि पाना नहीं है, बल्कि अपने परिवार और पिता के आदर्शों, मूल्यों और कर्तव्यों को निभाना भी है। लता जी के लिए यह एक महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व था कि वे अपने पिता के नाम को गरिमा और सम्मान के साथ आगे बढ़ाएं। 4. साक्षात्कार के अनुसार, लता जी के सहयोगियों के साथ संबंध आत्मीय और सौहार्दपूर्ण थे। वे सहयोगियों के साथ मिलकर काम करती थीं और उनके साथ अच्छे संबंध बनाए रखती थीं, जो कार्य की सफलता में सहायक थे।

व्याख्या:

प्रत्येक प्रश्न का उत्तर पाठ के आधार पर दिया गया है। अनुशासन और स्नेह का संतुलन, पिता के प्रभाव, नाम आगे बढ़ाने के अर्थ और सहयोगियों के साथ संबंधों की व्याख्या पाठ के सन्दर्भ में की गई है।

MediumNCERT
Q4.साक्षात्कार से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के कौन-कौन से गुण या विशेषताएँ उभरकर सामने आती हैं? चुनकर लिखिए— 1. “मुझे अपने गाने और रेकॉर्डिंग के अलावा किसी दूसरी चीज की सुध नहीं रहती थी।” 2. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” 3. “आप जैसे लोग अगर यह मानते हैं कि मैं अमर हूँ, तो यह मुझे मिलने वाले उस प्यार जैसा ही है।” 4. “मेरा गाना अमर है, पर शरीर तो अमर नहीं।”

उत्तर:

1. इस पंक्ति से लता मंगेशकर की एकाग्रता, समर्पण और साधना के गुण प्रकट होते हैं। 2. यह पंक्ति उनके आत्मविश्वास, स्पष्टवादिता और दृढ़ता को दर्शाती है। 3. इस पंक्ति में उनकी विनम्रता, कृतज्ञता और दार्शनिकता झलकती है। 4. यह पंक्ति अमरता और मानवता के प्रति उनकी समझ और दार्शनिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।

व्याख्या:

प्रत्येक उद्धरण से लता मंगेशकर के व्यक्तित्व के विभिन्न गुणों की पहचान की गई है, जो उनके जीवन और कार्यशैली को समझने में मदद करते हैं।

MediumNCERT
Q5.1. लता मंगेशकर ने संगीत के विषय में क्या कहा? 2. लता मंगेशकर ने संगीत की क्या विशेषताएँ बताई हैं? 3. लता मंगेशकर ने संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए क्या कहा? 4. उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कंसर्ट में हुई घटना से संगीत के बारे में क्या पता चलता है? अब नीचे दिए गए उत्तरों से अधिक से अधिक प्रश्न बनाइए (कम से कम दो)— 1. उत्तर : ‘मंगलागौर’ जैसे लोक पर्वों में स्त्रियों के बीच गीत, नृत्य और सौहार्द का भाव झलकता था। 2. उत्तर : लता जी का मानना था कि तकनीकी प्रगति के बावजूद पुराने संगीतकारों की सादगी और गहराई अद्वितीय थी।

उत्तर:

1. लता मंगेशकर ने कहा कि संगीत में असीम शक्ति और अप्रत्याशित रचने की क्षमता होती है। 2. उन्होंने संगीत की विशेषताओं के रूप में इसकी गहराई, सादगी और सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व को बताया है। 3. संगीत की क्षमता का आकलन करते हुए उन्होंने कहा कि संगीत में ऐसी शक्ति होती है जो अप्रत्याशित और असीमित है। 4. उस्ताद अली अकबर खाँ और पंडित रविशंकर के कंसर्ट की घटना से पता चलता है कि संगीत में गहरा प्रभाव और सामंजस्य होता है जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देता है। प्रश्न निर्माण के लिए— - ‘मंगलागौर’ पर्व में स्त्रियों के बीच कौन-कौन से भाव झलकते हैं? - लता जी के अनुसार पुराने संगीतकारों की कौन-सी विशेषताएँ अद्वितीय हैं? - संगीत की असीम शक्ति का उदाहरण क्या है? - तकनीकी प्रगति के बावजूद संगीत की सादगी क्यों महत्वपूर्ण है?

व्याख्या:

प्रश्नों के उत्तर पाठ के आधार पर दिए गए हैं। साथ ही दिए गए उत्तरों से नए प्रश्न बनाने के सुझाव भी दिए गए हैं, जो पाठ की समझ को बढ़ाते हैं।

MediumNCERT
Q6.1. “अगर कोई बात तुम्हें सही लगती है, तो उसे करो और किसी के आगे झुकने की जरूरत नहीं है।” क्या आप किसी ऐसी स्थिति से गुजरे हैं जब आपको किसी सही बात पर अकेले खड़ा होना पड़ा हो? कब और क्यों? 2. “बाबा ने जैसा सिखाया था, उस पर हम सभी भाई-बहनों ने चलने का प्रयास किया।” आपके परिवार में भी कोई ऐसी सीख या नियम अवश्य होंगे जिनका पालन आप किसी के याद दिलाए बिना स्वत: करते होंगे, उनके विषय में बताइए। 3. “पहले दिन गुड़ि बाँधने के बाद नौ दिन तक उत्सव मनाया जाता है।” आप भी अपने घर में किसी पारंपरिक पर्व को विशेष तरीके से मनाते होंगे। उसका वर्णन कीजिए। 4. “बिल्कुल ठेठ गाँवई अंदाज में यह मंगलागौर का उत्सव मनाया जाता है, मगर आहिस्ता-आहिस्ता वह भी अब खत्म हो रहा है।” पाठ में आपने पढ़ा कि लता मंगेशकर के बचपन से अब तक उत्सवों से जुड़ी अनेक परंपराएँ बदल रही हैं। कौन-कौन सी परंपराएँ बदल गई हैं? अपने घर-परिवार में बातचीत करके पता लगाइए कि विभिन्न त्योहारों को मनाने के तरीकों में कौन-कौन से बदलाव आ रहे हैं?

उत्तर:

1. इस प्रश्न का उत्तर व्यक्तिगत अनुभव पर निर्भर करता है। उदाहरण स्वरूप, किसी ने सही बात पर अकेले खड़ा होकर अपने सिद्धांतों का पालन किया होगा, जैसे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना। 2. परिवार में ऐसी सीखें जैसे ईमानदारी, समय का पालन, एक-दूसरे का सम्मान करना आदि, जो बिना याद दिलाए स्वाभाविक रूप से पालन की जाती हैं। 3. पारंपरिक पर्व जैसे दीपावली, होली, या मंगलागौर को विशेष रीति-रिवाजों, गीतों, नृत्यों और भोजन के साथ मनाया जाता है। उदाहरण स्वरूप, घर में पूजा, सजावट और पारिवारिक मिलन होता है। 4. परंपराओं में बदलाव जैसे कि त्योहारों का आधुनिक रूप लेना, पारंपरिक गीतों और नृत्यों का कम होना, उत्सवों का कम समय तक चलना, और तकनीकी उपकरणों का उपयोग बढ़ना शामिल हैं। परिवार में इन बदलावों पर चर्चा कर सकते हैं।

व्याख्या:

प्रश्न व्यक्तिगत अनुभव और पाठ में वर्णित सामाजिक परिवर्तनों पर आधारित हैं। उत्तर में अनुभव साझा करना और सामाजिक बदलावों की जानकारी देना अपेक्षित है।

MediumNCERT
Q7.1. ‘ऐसी भी बातें होती हैं’ एक साक्षात्कार है। साक्षात्कार में एक व्यक्ति प्रश्न पूछता है और दूसरा व्यक्ति उन प्रश्नों के उत्तर देता है। साक्षात्कार विधा के कुछ मुख्य बिंदु आगे दिए गए हैं। इस साक्षात्कार में से इन मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करने वाली पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए। 2. “मैं कोशिश करूँगी कि जो कुछ भी मैंने संगीत में रहते हुए जाना है, उसे आपको बता सकूँ।” इस कथन से साक्षात्कार की शैली के विषय में क्या पता चलता है — क्या यह औपचारिक संवाद है या आत्मीय बातचीत? अपने विचार तर्क सहित लिखिए।

उत्तर:

1. साक्षात्कार के मुख्य बिंदु हैं: - साक्षात्कार लेने वाले और लिए जाने वाले का नाम - प्रश्नोत्तर - भावनात्मक वातावरण - आमंत्रण, स्वागत और परिचय - उत्तर देने की शैली का संकेत - विचार और उदाहरण - संस्मरण - समापन इन बिंदुओं को पाठ में संबंधित पंक्तियों से चिन्हित किया जा सकता है। 2. इस कथन से पता चलता है कि साक्षात्कार आत्मीय बातचीत की शैली में है, क्योंकि इसमें संवाद सहज, व्यक्तिगत और भावनात्मक है, न कि केवल औपचारिक प्रश्नोत्तर। यह दर्शाता है कि उत्तर देने वाली व्यक्ति अपने अनुभव और ज्ञान को साझा करने के लिए उत्सुक है।

व्याख्या:

प्रश्न साक्षात्कार की विधा और शैली को समझने के लिए हैं। उत्तर में विधा के मुख्य तत्वों की पहचान और शैली की व्याख्या की गई है।

MediumNCERT
Q8.हिंदी भाषा की उत्पत्ति किन भाषाओं से हुई है?
A.A) संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश
B.B) फारसी, अरबी, तुर्की
C.C) अंग्रेज़ी, फ्रेंच, जर्मन
D.D) तमिल, तेलुगु, कन्नड़

उत्तर:

संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश

व्याख्या:

हिंदी भाषा का विकास संस्कृत से प्राकृत, फिर अपभ्रंश के माध्यम से हुआ है। ये तीन भाषाएँ हिंदी की जड़ें हैं। फारसी, अरबी और तुर्की शब्दों का समावेश बाद में मुगल काल में हुआ।

Easy