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Chapter 4

🎓 Class 11📖 Bhugol Main Prayogatmak Karya📖 9 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~14 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 6Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 9 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

मानचित्र प्रक्षेप

व्याख्या

मानचित्र प्रक्षेप

मानचित्र प्रक्षेप का अर्थ है पृथ्वी की गोलाकार सतह पर स्थित अक्षांश एवं देशांतर रेखाओं के जाल को समतल पृष्ठ पर स्थानांतरित करना। पृथ्वी का वास्तविक आकार गोलाकार है, जिसे हम ग्लोब के रूप में देखते हैं। ग्लोब पृथ्वी का त्रिविमीय मॉडल है, जो महाद्वीपों एवं महासागरों के सही आकार, दिशा और दूरी को सही रूप में दर्शाता है। ग्लोब पर अक्षांश रेखाएँ क्षैतिज और देशांतर रेखाएँ ऊर्ध्वाधर होती हैं। इस जाल को रेखाजाल या प्रैडिक्यूल कहते हैं। मानचित्र प्रक्षेप का कार्य इसी रेखाजाल को समतल सतह पर स्थानांतरित करना है। हालांकि ग्लोब सबसे सटीक प्रतिरूप है, लेकिन इसकी सीमाएँ भी हैं जैसे कि यह महँगा होता है, आसानी से कहीं भी ले जाना संभव नहीं होता, और विस्तृत जानकारी दिखाना कठिन होता है। इसलिए, पृथ्वी की गोल सतह को समतल कागज पर प्रदर्शित करने के लिए प्रक्षेपण की आवश्यकता होती है। जब ग्लोब की गोल सतह को समतल सतह पर स्थानांतरित किया जाता है, तो अक्षांश और देशांतर रेखाएँ सीधी या वक्र रेखाओं के रूप में दिखाई देती हैं। इस प्रक्रिया में क्षेत्रफल, आकार, दिशा या दूरी में विकृति हो सकती है। इसलिए विभिन्न प्रकार के मानचित्र प्रक्षेप विकसित किए गए हैं, जो विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार पृथ्वी के किसी क्षेत्र को समतल सतह पर सही रूप में दर्शाने का प्रयास करते हैं।

  • मानचित्र प्रक्षेप का अर्थ है अक्षांश-देशांतर जाल को समतल पृष्ठ पर स्थानांतरित करना।
  • ग्लोब पृथ्वी का त्रिविमीय मॉडल है जो सही आकार, दिशा और दूरी दिखाता है।
  • ग्लोब महँगा और असुविधाजनक होता है, इसलिए समतल मानचित्र आवश्यक होते हैं।
  • गोल सतह को समतल सतह पर स्थानांतरित करने में विकृति होती है।
  • मानचित्र प्रक्षेप के विभिन्न प्रकार विभिन्न आवश्यकताओं के अनुसार विकसित किए गए हैं।
  • 📌 मानचित्र प्रक्षेप: पृथ्वी के अक्षांश और देशांतर के जाल को समतल सतह पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया।
  • 📌 ग्लोब: पृथ्वी का त्रिविमीय गोलाकार मॉडल।
  • 📌 रेखाजाल (प्रैडिक्यूल): ग्लोब पर अक्षांश और देशांतर की रेखाओं का जाल।

मानचित्र प्रक्षेप की आवश्यकता

व्याख्या

मानचित्र प्रक्षेप की आवश्यकता

मानचित्र प्रक्षेप की आवश्यकता इसलिए होती है क्योंकि पृथ्वी का आकार गोलाकार है और इसे समतल सतह पर सही रूप में प्रदर्शित करना आवश्यक होता है। ग्लोब पर छोटे-छोटे स्थानों के विस्तृत विवरण देखना कठिन होता है और दो प्राकृतिक प्रदेशों की तुलना करना भी आसान नहीं होता। इसलिए, समतल पृष्ठ पर बड़ी मापनी के मानचित्र बनाना आवश्यक होता है। समस्या यह है कि अक्षांश और देशांतर की रेखाओं को समतल सतह पर बिना विकृति के स्थानांतरित करना संभव नहीं है क्योंकि पृथ्वी की सतह अविकासनीय होती है। यदि हम समतल पृष्ठ को ग्लोब पर चिपकाएँ, तो यह सतह के अनुरूप नहीं बैठता। ग्लोब के केंद्र से प्रकाश डालने पर प्रक्षेपित छायांकन स्पर्श बिंदु या रेखा से दूर विकृत हो जाता है। स्पर्श बिंदु से दूर विकृति बढ़ती है। इसलिए, ग्लोब की सतह के गुणों को सही रूप में समतल सतह पर स्थानांतरित करना लगभग असंभव है। इसलिए, मानचित्र प्रक्षेप में विकृति को न्यूनतम करने के लिए विभिन्न विधियाँ अपनाई जाती हैं, जिनके आधार पर विभिन्न प्रकार के प्रक्षेप बनाए जाते हैं। मानचित्र प्रक्षेप अक्षांश और देशांतर के जाल को समतल सतह पर स्थानांतरित करने की विभिन्न विधियों का अध्ययन है।

  • ग्लोब पर छोटे स्थानों के विस्तृत विवरण देखना कठिन होता है।
  • दो प्राकृतिक प्रदेशों की तुलना ग्लोब पर आसान नहीं होती।
  • पृथ्वी की सतह अविकासनीय है, इसलिए समतल सतह पर स्थानांतरण में विकृति होती है।
  • प्रक्षेपण में विकृति को न्यूनतम करने के लिए विभिन्न विधियाँ विकसित की गई हैं।
  • मानचित्र प्रक्षेप अक्षांश और देशांतर के जाल को समतल सतह पर स्थानांतरित करने की प्रक्रिया है।
  • 📌 अविकासनीय सतह: ऐसी सतह जिसे बिना सिकोड़े या तोड़े समतल नहीं किया जा सकता।
  • 📌 प्रक्षेपण विकृति: मानचित्र में क्षेत्रफल, आकार, दिशा या दूरी में होने वाली त्रुटि।

मानचित्र प्रक्षेप के तत्त्व

व्याख्या

मानचित्र प्रक्षेप के तत्त्व

मानचित्र प्रक्षेप के मुख्य तत्त्वों में पृथ्वी का छोटा रूप, अक्षांश के समांतर, देशांतर के याम्योत्तर, ग्लोब के गुण, और रेखाजाल शामिल हैं। 1. पृथ्वी का छोटा रूप: पृथ्वी के मॉडल को छोटी मापनी की सहायता से समतल सतह पर दर्शाया जाता है। यह मॉडल गोलाभ होन

अभ्यास प्रश्नChapter 4

NCERT अभ्यास प्रश्न और उत्तर सहित

Q1.यह गोलाकार सतह को समतल सतह पर स्थानांतरित करने की एक पद्द्ति है - सही उत्तर चुनें।
A.मानचित्र प्रक्षेप
B.लघु वृत्त
C.भौगोलिक प्रक्षेप
D.वृहत वृत्त

उत्तर:

मानचित्र प्रक्षेप

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Q2.विकIसनीय पृष्ठ क्या होता है
A.वह पृष्ठ जिसे समतल किया जा सकता है , जिस पर अक्षांशों एवं देशान्तों के जाल को दिखाया जाता है
B.ऐसा पृष्ठ जिसे बिना सिकोड़े अथवा तोड़े मोड़े चपटा नहीं किया जा सकता है।
C.पृष्ठ जो सिर्फ देशांतर रेखाओं को प्रदर्शित कर सकता है I
D.वह पृष्ठजिसे समतल किया जा सकता है , किन्तु जिस पर अक्षांशों एवंदेशान्तों के जाल को नहीं दिखाया जा सकता है।

उत्तर:

वह पृष्ठ जिसे समतल किया जा सकता है , जिस पर अक्षांशों एवं देशान्तों के जाल को दिखाया जाता है

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Q3.- समक्षेत्र प्रक्षेप को अन्य किस नाम से जाना जाता है।
A.नोमोलोग्राफिय प्रक्षेप
B.होमोलोग्राफिय प्रक्षेप
C.मोनोग्राफीय प्रक्षेप
D.सोनोग्राफीय प्रक्षेप

उत्तर:

होमोलोग्राफिय प्रक्षेप

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Q4.वह प्रक्षेप जिसमे धरातल के किसी क्षेत्र की यथार्थ आकृति बनाये रखी जाती है इसे _____________________कहते हैं
A.मानचित्र प्रक्षेप
B.त्रिविम प्रक्षेप
C.शुद्ध क्षेत्रफल प्रक्षेप
D.यथाकृतिक प्रक्षेप

उत्तर:

यथाकृतिक प्रक्षेप

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Q5.वह प्रक्षेप जिसमे केंद्र सेसभी बिंदुओं की दिशाओं को सही -सही दर्शाया जाता है।
A.यथाकृतिक प्रक्षेप
B.दिंगशिय प्रक्षेप
C.त्रिविम प्रक्षेप
D.शुद्ध क्षेत्रफल प्रक्षेप

उत्तर:

दिंगशिय प्रक्षेप

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Q6.सही विकल्प का चुनाव करें। यह मर्केटर प्रक्षेप पर खींची गयी सीधी रेखा है जो एक स्थिर दिक्मान वाले दो बिंदुओं कोजोड़ती है
A.दीर्घ रेखा
B.रंब रेखा
C.लघु रेखा
D.विषुवत रेखा

उत्तर:

रंब रेखा

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Q7.प्रकाश को ग्लोब के केंद्र में रख कर जिस प्रक्षेप को बनाया जाता है - इसका निम्न विकल्पोंमें से सही का चयन करें.
A.त्रिविम प्रक्षेप
B.नोमोनिक प्रक्षेप
C.लंबकोणीय प्रक्षेप
D.यथाकृतिक प्रक्षेप

उत्तर:

नोमोनिक प्रक्षेप

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Q8.अभिलम्ब प्रक्षेप अन्य किस नाम से प्रचलित है।
A.तिर्यक प्रक्षेप
B.यथाकृतिक प्रक्षेप
C.विषुवतीय प्रक्षेप
D.ध्रुवीय प्रक्षेप

उत्तर:

विषुवतीय प्रक्षेप

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