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Chapter 4

🎓 Class 9📖 Bharat Aur Samkalin Vishwa-I📖 10 नोट्स🧠 15 प्रश्न-उत्तर⏱️ ~15 मिनट
Chapter 3अध्याय 4 / 5Chapter 5

Chapter 4अध्ययन नोट्स

NCERT-संरेखित · 10 नोट्स · 3 निःशुल्क दिखाए गए

परिचय

व्याख्या

परिचय

इस अध्याय में हम उपनिवेशवाद के दौर में वन्य समाजों और जंगलों की स्थिति का अध्ययन करेंगे। भारत, बर्मा (अब म्यांमार) और इंडोनेशिया के उदाहरणों के माध्यम से यह समझाया गया है कि किस प्रकार औपनिवेशिक शक्तियों ने जंगलों और वन्य समाजों के साथ व्यवहार किया। उपनिवेशवाद के दौरान जंगलों का दोहन वाणिज्यिक हितों के लिए किया गया, जिससे वन्य समाजों के पारंपरिक अधिकारों में भारी कटौती हुई। इस अध्याय में हम यह जानेंगे कि कैसे औपनिवेशिक शासन ने जंगलों का प्रबंधन किया, वन अधिनियम बनाए, और वन्य समाजों के जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ा। साथ ही, हम झूम या स्थानांतरित खेती जैसी पारंपरिक कृषि पद्धतियों और वन्य समाजों के प्रतिरोधों पर भी चर्चा करेंगे।

  • उपनिवेशवाद के दौर में जंगलों और वन्य समाजों की स्थिति में परिवर्तन आया।
  • भारत, बर्मा और इंडोनेशिया के उदाहरणों से समझा जाएगा।
  • औपनिवेशिक सरकारों ने वाणिज्यिक हितों के लिए जंगलों का दोहन किया।
  • वन्य समाजों के पारंपरिक अधिकारों में कटौती हुई।
  • झूम खेती और वन्य समाजों के प्रतिरोधों का अध्ययन।
  • 📌 उपनिवेशवाद: किसी देश द्वारा दूसरे देश या क्षेत्र पर राजनीतिक और आर्थिक नियंत्रण।
  • 📌 वन्य समाज: जंगलों में रहने वाले आदिवासी और स्थानीय समुदाय।

जंगलों का महत्व

व्याख्या

जंगलों का महत्व

जंगल मानव जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। वे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं और स्थानीय समुदायों की आजीविका का मुख्य स्रोत होते हैं। जंगलों से लकड़ी, ईंधन, चारा, औषधियाँ, फल, कंद-मूल, शहद आदि प्राप्त होते हैं। वन्य समाज जंगलों पर निर्भर रहते हैं और उनकी पारंपरिक जीवनशैली जंगलों के संसाधनों पर आधारित होती है। जंगलों का संरक्षण न केवल पर्यावरण के लिए आवश्यक है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। जंगलों के बिना जीवन की कल्पना करना कठिन है क्योंकि वे जलवायु नियंत्रण, जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए आवश्यक हैं।

  • जंगल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं।
  • स्थानीय समुदायों की आजीविका का मुख्य स्रोत हैं।
  • लकड़ी, ईंधन, चारा, औषधियाँ, फल, कंद-मूल, शहद आदि जंगलों से प्राप्त होते हैं।
  • वन्य समाज जंगलों पर निर्भर रहते हैं।
  • जंगल जलवायु नियंत्रण और जल संरक्षण में मदद करते हैं।
  • 📌 पर्यावरणीय संतुलन: प्राकृतिक संसाधनों और जीवों के बीच संतुलित संबंध।
  • 📌 आजीविका: जीवन यापन के साधन।

औपनिवेशिक शासन और जंगलों का दोहन

व्याख्या

औपनिवेशिक शासन और जंगलों का दोहन

औपनिवेशिक शासन के दौरान जंगलों का दोहन तेज़ी से बढ़ा। ब्रिटिश सरकार ने रेलवे, जहाज निर्माण, खदानों और वाणिज्यिक खेती के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता महसूस की। इसके लिए जंगलों को बड़े पैमाने पर काटा गया और वाणिज्यिक उपयोग के लिए तैयार किया गय

अभ्यास प्रश्नChapter 4

15 विस्तृत उत्तर सहित अभ्यास प्रश्न

Q1.जंगलों का मानव जीवन में क्या महत्व है? दो कारण बताइए।

उत्तर:

जंगल मानव जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि वे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हैं और स्थानीय समुदायों की आजीविका का मुख्य स्रोत होते हैं। उदाहरण के लिए, जंगलों से लकड़ी, औषधियाँ और फल प्राप्त होते हैं।

व्याख्या:

जंगल पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं और जलवायु नियंत्रण, जल संरक्षण व जैव विविधता के लिए आवश्यक हैं। साथ ही, वे स्थानीय वन्य समाजों के लिए आजीविका के स्रोत हैं, जैसे लकड़ी, ईंधन, औषधियाँ आदि।

Easy
Q2.चित्र 1 में छत्तीसगढ़ के साल वन का दृश्य दिया गया है। इस चित्र में दिखाए गए वन के किस प्रकार के संसाधनों का स्थानीय वन्य समाज उपयोग करता है? चित्र का वर्णन: चित्र में घने पेड़ और वनस्पतियाँ हैं, जो स्थानीय वन्य समाज की आजीविका का स्रोत हैं।
A.A) लकड़ी, औषधियाँ, फल
B.B) केवल लकड़ी
C.C) केवल औषधियाँ
D.D) केवल फल

उत्तर:

लकड़ी, औषधियाँ, फल

व्याख्या:

स्थानीय वन्य समाज जंगलों से लकड़ी, औषधियाँ, फल, कंद-मूल आदि प्राप्त करता है जो उनकी आजीविका का आधार हैं। चित्र में घने पेड़ और वनस्पतियाँ यह दर्शाती हैं।

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Q3.औपनिवेशिक शासन के दौरान जंगलों का दोहन क्यों बढ़ा? निम्नलिखित में से सही कारण चुनिए।
A.A) रेलवे, जहाज निर्माण और वाणिज्यिक खेती के लिए लकड़ी की बढ़ती मांग
B.B) स्थानीय लोगों की लकड़ी की जरूरतों में वृद्धि
C.C) जंगलों का संरक्षण और पुनःरोपण
D.D) औद्योगिक क्रांति का अंत

उत्तर:

रेलवे, जहाज निर्माण और वाणिज्यिक खेती के लिए लकड़ी की बढ़ती मांग

व्याख्या:

ब्रिटिश सरकार ने रेलवे, जहाज निर्माण, खदानों और वाणिज्यिक खेती के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी की आवश्यकता महसूस की, जिसके कारण जंगलों का दोहन तेज़ी से बढ़ा।

Easy
Q4.चित्र 4 में बॉस के बेड़े कासालॉग नदी में बहते हुए दिखाए गए हैं। औपनिवेशिक दौर में इस प्रकार की नदी परिवहन का जंगलों के दोहन में क्या महत्व था? चित्र का वर्णन: चित्र में नदी में लकड़ी के बड़े-बड़े बेड़े बहते हुए दिख रहे हैं।
A.A) लकड़ी को नदी के माध्यम से बड़े बाजारों तक पहुँचाना आसान था
B.B) नदी में लकड़ी का संरक्षण किया जाता था
C.C) नदी का उपयोग केवल मत्स्य पालन के लिए होता था
D.D) नदी में लकड़ी जलाने के लिए इस्तेमाल होती थी

उत्तर:

लकड़ी को नदी के माध्यम से बड़े बाजारों तक पहुँचाना आसान था

व्याख्या:

औपनिवेशिक दौर में बड़ी मात्रा में लकड़ी को बाजारों तक पहुँचाने के लिए नदियों का उपयोग किया जाता था। चित्र में कासालॉग नदी में लकड़ी के बेड़े बहते हुए दिख रहे हैं, जो इस प्रक्रिया को दर्शाता है।

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Q5.औपनिवेशिक दौर में जंगलों में भारी-भरकम लकड़ी उठाने के लिए किस जानवर का उपयोग किया जाता था? निम्नलिखित में से सही विकल्प चुनिए।
A.A) हाथी
B.B) घोड़ा
C.C) ऊँट
D.D) बैल

उत्तर:

हाथी

व्याख्या:

औपनिवेशिक दौर में भारी लकड़ी को उठाने और जंगलों व लकड़ी के गोदामों में ले जाने के लिए हाथियों का उपयोग किया जाता था।

Easy
Q6.चित्र 5 में रंगून के एक लकड़ी गोदाम में लकड़ी के शहतीर सहेजता हुआ हाथी दिखाया गया है। इस चित्र से औपनिवेशिक जंगल प्रबंधन की कौन-सी विशेषता समझी जा सकती है?
A.A) जंगलों के दोहन में आधुनिक तकनीकों के साथ जानवरों का उपयोग
B.B) जंगलों का संरक्षण और पुनःरोपण
C.C) स्थानीय वन्य समाजों को जंगलों में स्वतंत्रता देना
D.D) जंगलों में केवल हाथियों का प्राकृतिक जीवन

उत्तर:

जंगलों के दोहन में आधुनिक तकनीकों के साथ जानवरों का उपयोग

व्याख्या:

चित्र में दिखाए गए हाथी का उपयोग भारी लकड़ी उठाने के लिए किया जाता था, जो औपनिवेशिक जंगल प्रबंधन में तकनीकी और जानवरों के सहयोग को दर्शाता है।

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Q7.वैज्ञानिक वानिकी का क्या अर्थ है और इसका उद्देश्य क्या था? एक उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर:

वैज्ञानिक वानिकी जंगलों के योजनाबद्ध प्रबंधन की एक पद्धति है। इसका उद्देश्य जंगलों को काटने और पुनः लगाकर स्थायी संसाधन उपलब्ध कराना था। उदाहरण के लिए, देहरादून में इम्पीरियल फॉरेस्ट स्कूल की स्थापना की गई।

व्याख्या:

वैज्ञानिक वानिकी में जंगलों के प्रकार, वृद्धि दर, कटाई और पुनःरोपण की योजना बनाई जाती थी ताकि वाणिज्यिक उपयोग के लिए जंगलों का सतत प्रबंधन हो सके।

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Q8.चित्र 11 में 'दि इम्पीरियल फ़ॉरेस्ट स्कूल देहरादून' दिखाया गया है। इस स्कूल की स्थापना का मुख्य उद्देश्य क्या था? चित्र का वर्णन: चित्र में एक बड़ी इमारत और वन अधिकारियों के प्रशिक्षण का दृश्य है।
A.A) वन अधिकारियों को वैज्ञानिक वानिकी का प्रशिक्षण देना
B.B) स्थानीय वन्य समाजों को खेती सिखाना
C.C) जंगलों को पर्यटन स्थल बनाना
D.D) औपनिवेशिक सेना का प्रशिक्षण केंद्र

उत्तर:

वन अधिकारियों को वैज्ञानिक वानिकी का प्रशिक्षण देना

व्याख्या:

इम्पीरियल फॉरेस्ट स्कूल देहरादून में वन अधिकारियों को जंगलों के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित किया जाता था।

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